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J&k: पैसे के लिए ट्रक ड्राइवर बना जैश का खूंखार आतंकवादी

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फाइल फोटो

नई दिल्ली। पैसे के लिए आदमी क्या नहीं कर सकता है। समय-समय पर ऐसी खबरें आती रहती हैं कि पैसे के लालच में इंसान अपनी जिंदगी बर्बाद कर बैठकता है। सोमवार को सेना ने ऐसे आतंकी को पकड़ा है जो पहले कभी सेना का खबरी हुआ करता था। उस दौरान वह ट्रक ड्राइवर था। लेकिन ज्यादा पैसों के लालच में वह ट्रक ड्राइवर से आतंकवाद की राह पर चल निकला। जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला खूंखार आतंकवादी आशिक अहमद नेंगरू पहले ट्रक ड्राइवर था। वह सेना का खबरी भी था। लेकिन इसी बीच वह आतंकियों के संपर्क में आ गया। अधिक पैंसों के लालच में वह आतंकियों का मददगार बन गया।

अपने आकाओं से अच्छा-खासा पैसा पाकर उसने कुछ ट्रक खरीद लिए और हथियारों की तस्करी शुरू कर दी। साथ ही उसने आतंकवादियों को लाने ले जाने में आतंकी संगठनों की भी मदद की। आखिर में वह जैश-ए-मोहम्मद जॉइन कर लिया और पीओके चला गया। इंटेलिजेंस डोजियर बताता है कि नेंगरू का भाई मोहम्मद अब्बास भी जैश का ही आतंकवादी था जो कुछ साल पहले एक पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।

हालांकि पैसे की लालच ने नेंगरू को अलगाववादियों का शुभचिंतक बना दिया है। डोजियर के अनुसार, नेंगरू बाद में हिजबुल मुजाहिदीन के एक नेता के संपर्क में आया, जिसने बाद उसे घाटी में पत्थरबाजों के गढ़ पुलवामा में पत्थरबाजी की घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी। नेंगरू प्रत्येक भारत-विरोधी गतिविधि के लिए दो हजार रुपये लेता था। ऐसे कामों में आकर्षित होते हुए नेंगरू ने हिजबुल मुजाहिदीन को छोड़ दिया और घाटी में आईएसआई का प्रमुख नुमाइंदा बन गया।

हाल ही में पंजाब में एक ड्रोन के गिरने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नए पोस्टर बॉय नेंगरू द्वारा घाटी में भेजे गए 40 से ज्यादा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चला रखा है। जेईएम भारत विरोधी अभियानों को गति देने के लिए परेशान है। वह भारत में हमले करने के लिए नये-नये तरीके अपना रहा है। पर उसे सफलता हाथ नही लग रही है और हमारी भारतीय सेना इसका मुंहतोड़ जवाब दें रही है।

आशिक अहमद नेंगरू प्रशिक्षित आतंकवादियों को जम्मू एवं कश्मीर के रास्ते भारत में घुसपैठ कराता है। जिसमें आतंकवादियों में कुछ फिदायीन हमलावर भी हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की देख-रेख में नेंगरू ने पिछले महीने हथियार गिराने के सनसनीखेज मामले की साजिश रची, जिसके तहत सीमा पार से घातक हथियारों की तस्करी कर भारत लाने के लिए ड्रोन्स इस्तेमाल किए गए।

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खुफिया एजेंसियों द्वारा नेंगरू पर बनाए गए डोजियर के अनुसार, कभी भारतीय सेना का मुखबिर रहे नेंगरू ने मुठभेड़ों में मारे गए कई खूंखार आतंकवादियों के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं दी थी। एक चालक के तौर पर पुलवामा के काकापोरा क्षेत्र (श्रीनगर से 12 किलोमीटर दूर) में रहने वाले नेंगरू ने अलगाववादी नेताओं और भारत-विरोधी लोगों के बीच मजबूत नेटवर्क स्थापित किया था। इस नेटवर्क के कारण नेंगरू को श्रीनगर में और उसके आस-पास आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों की अंदरूनी जानकारी रहती थी।

डोजियर में खुलासा हुआ है कि आशिक अहमद नेंगरू का भाई मोहम्मद अब्बास जैश का आतंकवादी था और कुछ सालों पहले पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उसका एक अन्य भाई रियाज भी जैश में शामिल हो गया और पिछले साल सितंबर में तीन आतंकवादियों को जम्मू से श्रीनगर ले जाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।http://www.satyodaya.com

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एफएटीएफ ने पाकिस्तान को नहीं दी राहत, ग्रे लिस्ट में बरकरार

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लखनऊ। दुनिया की आंखों में धूल झोंक कर आतंकवाद को अपना राष्ट्रीय नीति बनाने वाले पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगने वाला है। पेरिस में चल रही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक में पाकिस्तान को कोई राहत नहीं मिली है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में बरकरार रखा है। अब उस पर काली सूची में जाने का खतरा मंडरा रहा है। 16 फरवरी से 21 फरवरी तक चलने वाली इस पूर्ण बैठक में पाकिस्तान की किस्मत पर फैसला होगा। जहां एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को 39 में से 12 मतों की जरूरत है तो वहीं काली सूची में जाने से बचने के लिए 3 देशों के समर्थन की जरूरत होगी। अभी तक पाकिस्तान के समर्थन में तुर्की और मलेशिया ने ही समर्थन दिया है। अब पाकिस्तान को बचाने का सारा दारोमदार चीन पर है। चीन के समर्थन पर ही पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होने से बच सकता है।

बैठक में एफएटीएफ ने पाकिस्तान से धन शोधन और आतंकवाद को आर्थिक मदद देने वाले दोषियों को कठघरे में लाने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की गयी है। खबरों के मुताबिक अंतरराष्टीय संस्था ने काली सूची में जाने से बचने के लिए पाकिस्तान को 27 सूत्रीय एक्शन प्लान सौंपा था। लेकिन पाकिस्तान ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया। पाकिस्तान लगातार अपनी काली करतूतों पर पर्दा डालने के लिए दुनिया को भरमा रहा है। दिखावे के लिए पाकिस्तान आतंकी संगठनों के आकाओं पर कार्रवाई करता है, जबकि हकीमत में पाकिस्तान आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है।

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बता दें कि एफएटीएफ एक अंतर राष्ट्रीय संस्था है। जो दुनिया भर में आतंकियों को वित्त पोषण और मदद पर नजर रखती है। संस्था ने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं। एफएटीएफ की ओर से पाकिस्तान को कई बार चेतावनी दी जा चुकी है। जून 2018 में संस्था ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाल दिया था। साथ ही काली सूची में जाने से बचने के लिए आतंकियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने को कहा था। लेकिन पाकिस्तान ने हाफिज सईद, मसूद अजहर और अल जवाहिरी जैसे आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। पाकिस्तान के एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट में जाने का मतलब है कि उस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लग जाएंगे। साथ ही संयुक्त राष्ट व अमेरिका आदि देशों से मिलने वाली आर्थिक मदद भी प्रभावित होगी। http://www.satyodaya.com

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सचिन के नाम जुड़ा एक और रिकॉर्ड, World Cup की जीत का वो पल बना यादगार

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बर्लिन: बल्लेबाज मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को खेल जगत के प्रतिष्ठित लॉरियस स्पोर्टिंग मोमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। भारत ने 2011 आईसीसी विश्व कप के फाइनल में श्रीलंका को हराकर खिताब अपने नाम किया था जिसके बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने सचिन को अपने कंधों पर उठाकर पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाया था। यह क्षण क्रिकेट प्रशंसकों के दिलों-दिमाग पर हमेशा के लिए दर्ज हो गए। इस क्षण को पिछले 20 वर्षों के दौरान सर्वश्रेष्ठ खेल क्षण माना गया जिसके लिए सचिन को सोमवार को जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित एक समारोह में लॉरियस स्पोर्टिंग मोमेंट पुरस्कार (2000-2020) से नवाजा गया। यह पल क्रिकेट प्रशंसकों के लिए अविस्मरणीय हो गए।

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लॉरेस अवॉर्ड क्या है?

यह खेलों की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स में से एक है। 1999 में लॉरेस स्पोर्ट फॉर गुड फाउंडेशन के डैमलर और रिचीमॉन्ट ने इसकी शुरुआत की थी। पहले अवॉर्ड 25 मई 2000 को दिए गए थे। इसमें 13 अलग-अलग कैटेगरी में अवॉर्ड दिए जाते हैं। अवॉर्ड में प्रमुख कैटेगरी लॉरेस वर्ल्ड स्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर, लॉरेस वर्ल्ड स्पोर्ट्सवूमन ऑफ द ईयर, लॉरेस वर्ल्ड टीम ऑफ द ईयर, लॉरेस वर्ल्ड कमबैक ऑफ द ईयर और लॉरेस वर्ल्ड ब्रेकथ्रू ऑफ द ईयर है। http://www.satyodaya.com

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सऊदी अरब: आत्मरक्षा के लिए बाॅस की हत्या करने वाली महिला का सरेआम सिर कलम

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महिला की हत्या पर इंडोनेशिया में उबाल, लोग सड़कों पर उतरे

नई दिल्ली। सऊदी अरब में बेहद सख्त सजा का प्रावधान हैं। क्योंकि वहां शरिया कानून लागू है। लेकिन किसी महिला की इज्जत लूटी जा रही हो। उसके साथ रेप किया जा रहा है। तो वह अपनी आत्मरक्षा के लिए अपना बचाव करेंगी। एक ऐसा ही मामला सऊदी अरब का हैं। इंडोनेशिया की एक महिला सऊदी अरब में काम कर रही थी। जहां उसके बाॅस ने उसके साथ रेप किया। जिसका उसने विरोध करते हुए अपने बचाव के लिए बाॅस पर हमला कर दिया। जिससे उसका बाॅस जख्मी हो गया। जिसके बाद उसकी मौत हो गई। लेकिन उसने यह सब अपनी आत्मरक्षा के लिए किया था पर सऊदी अरब का इतना सख्त कानून जिसमें उस महिला का सरेआम बीच सड़क पर गला काटकर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। जिसके बाद इंडोनेशिया के लोगों का सऊदी अरब के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है और वह सड़कों पर उतर आए हैं।

बता दें कि सऊदी अरब में महिलाओं से बलात्कार की बेहद सख्स सजा का प्रावधान है क्योंकि यहां शरिया कानून लागू है। बलात्कार के दोषी का गुप्तांग काट दिया जाता है और फिर पब्लिक के सामने सिर कलम दिया जाता है या फांसी पर लटका दिया जाता है। वहीं इंडोनेशिया में बलात्कार करने वाले का प्राइवेट पार्ट काटने के बाद उसे नामर्द बना दिया जाता है। इसके लिए अपराधी के शरीर में इंजेक्शन से महिलाओं के हार्मोन्स डाले जाते हैं।

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इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इस घटना पर सख्त एतराज जताया है, दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में तनाव आ गया है। इंडोनेशियाई दूतावास ने बताया कि न ही महिला के परिजनों को सूचित किया गया, न ही वहां के दूतावास को। इसके बाद इंडोनेशिया के कई इलाकों में सऊदी अरब के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने सऊदी अरब विदेश मंत्री अदल अल जुबैर को खरी खोटी सुनाई है। उन्होंने टेलीफोन कर जुबैर से पूछा कि फांसी से पहले उनके देश को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। पिछले तीन साल में इंडोनेशियाई मूल के चार लोगों को सऊदी अरब ने फांसी दी है। कभी भी इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई।http://www.satyodaya.com

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February 18, 2020, 9:24 pm
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