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जोड़ा फाटक हादसा : जब रावण जलते ही रेलवे ट्रैक पर बिछ गईं थीं लाशें

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लखनऊ। आज पूरा भारत बुराई पर अच्छाई का संदेश देने वाला दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। जगह-जगह रावण के बड़े-बड़े पुतलों का दहन करने की तैयारी हो चुकी है। दशहरा के मेलों में भारी भीड़ उमड़ती है। खासकर शहर में होने वाले आयोजनों में लोगों की तादात काफी ज्यादा होती है जबकि मेला में स्थान काफी कम होता है। ऐसे में मेला कमेटियों के साथ ही पुलिस व प्रशासन का भी यह जिम्मेदारी होती है कि मेला में सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों से पहले से ही समीक्षा कर ली जाए, ताकि खुशियों में ग्रहण न लगे।
पिछले वर्ष का पंजाब के अमृतसर में एक दशहरा मेला में ऐसा ही एक हादसा हुआ, जहां रावण के पुतले में आग लगते ही पूरे देश की खुशियों में आग लग गयी। दरअसल वर्ष 2018 में अमृतसर के जोड़ा फाटक नामक स्थान पर मेला लगा हुआ था। शाम के समय हजारों लोग मेला देखने पहंुचे थे। मेले का आयोजन रेलवे फाटक के करीब था, लोगों की भीड़ ने रेलवे लाइन को भी अपनी जद में ले लिया। रावण के पुतले में आग लगायी गयी। रेलवे लाइन पर खड़े लोग रावण दहन का आनंद ले रहे थे। इसी बीच टैक पर आई टेन ने लोगों को पल भर में मौत की नींद सुला दिया। मेले में आतिशबाजी और शोर के बीच लोग टेन की आवाज नहीं सुन सके।

पठानकोट से चलकर आ रही डीएमयू टेन ने टैक पर खड.े सभी लोगों को रौंद डाला और वहां लाशों का ढेर लग गया। इस घटना के बाद पूरे देश की खुशियां गम में तब्दील हो गईं। इस हादसे में 60 लोगों की मौत हो गयी थी। इस हादसे को एक वर्ष बीत चुका है लेकिन बदला कुछ नहीं। पीडि.त परिवार्रों को आज भी न तो न्याय मिला और न ही कोई सरकारी राहत। दशहरा के दिन अपनों को खोने वाले परिवारों ने मंगलवार को जोड़ा फाटक तक कैंडिल मार्च निकाला और मृतकों को श्रद्धांजलि दी। पीड़ितों ने कहा कि एक साल बाद भी न तो हमें कोई मुआवजा मिला न तो न हर सरकारी नौकरी।

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कई पीड़ित परिवारों के घर में खाने को रोटी तक नहीं है। सरकार ने अपना एक भी वादा नहीं निभाया। पीडि.त परिवारों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की।
इस दौरान अकाली दल नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कैंडल मार्च में हिस्सा लिया। मजीठिया का कहना है कि पंजाब सरकार ने झूठे वादे किए और आरोपियों के खिलाफ कर्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर सरकार कार्रवाई करे और वादे के मुताबिक पीड़ित परिवारों को नौकरी दे।

बता दें कि जिस वक्त यह हादसा हुआ था उस समय पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी भी वहां मौजूद थीं। वह कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। हादसे के बाद सिद्धू ने भी पीड़ितों की मदद का ऐलान किया था, लेकिन पीडि.तों तक आज भी कोई राहत नहीं पहुंची है। दशहरा खुशियों का पर्व है, लेकिन थोड़ी सी चूक जीवन भर की खुशियों को स्वाहा कर सकती हैै। मेला कमेटियों व प्रशासन को लोेगों की सुरक्षा का उचित प्रबंध करना चाहिए। साथ ही लोगों को खुद अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है।http://www.satyodaya.com

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तीस हजारी कोर्ट मामले में HC ने आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक….

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तीस हजारी

फाइल फोटो

नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट मामले में दिल्ली पुलिस को राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी पुलिसवालों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सभी बार काउंसिल को नोटिस जारी किया है। अब मामले की सुनवाई 23 दिसंबर को की जाएगी।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच के सामने सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कहा कि ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी पूरी होने से पहले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए।

कोर्ट के इस आदेश के बाद वकीलों पर ये दबाव रहेगा कि वो हड़ताल को खत्म करें। वकील पिछले 2 हफ्ते से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे थे, लेकिन आज कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि जुडिशल इंक्वॉयरी पूरी हुए बिना पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। 3 नवंबर को कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ भी कोई सख्त कार्रवाई न करने का आदेश पहले ही कर दिया था। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई ना करने की याचिका दाखिल की थी।

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वहीं पुलिस का कहना था कि जिस तरह से वकीलों की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है, उसी तरह से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई जाए।

बता दें वकीलों ने इसका विरोध किया है। वकीलों का कहना था कि पुलिस की ये याचिका उन पुलिसवालों को जमानत दिलाने के लिए है, जिन्होंने वकीलों पर गोली चलाई और जिनकी गिरफ्तारी की मांग वकील लगातार कर रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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INX MEDIA CASE में HC ने खारिज की पी चिदंबरम की जमानत याचिका…..

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पी चिदंबरम

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर आज दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया है। पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। तब से चिदंबरम तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में  हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत की मांग करते हुए कहा गया था कि आईएनएक्स मीडिया मामले के सभी दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास हैं, इसलिए उनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। जिसके बाद ईडी ने 8 नवंबर को चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था और कोर्ट में दलील दी थी कि वह जमानत मिलने के बाद गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

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ईडी का प्रतिनिधित्व कर रही सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पूर्व वित्तमंत्री पर चल रहा धन शोधन मामला काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह एक आर्थिक अपराध है जो काफी अलग है।

74 वर्षीय चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरेस्ट किया था।वह फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में ईडी की कस्टडी में हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उन पर साल 2007 में आईएनएक्स मीडिया ग्रुप के लिए आने वाले 305 करोड़ के विदेशी फंड के लिए फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से गलत तरीके से अनुमतियां लेने का भी आरोप लगाया गया था। बता दें उस समय पी चिदंबरम ही वित्तमंत्री थे। बाद में ईडी ने भी 2017 में उनके खिलाफ एक केस दर्ज कराया था, जिसके बाद उन्हें इस साल 16 अक्टूबर को ईडी ने अरेस्ट कर पूछताछ की थी।http://www.satyodaya.com

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अपने आखिरी वर्किंग डे पर बोले रंजन गोगोई, मौन में ही है जजों की आजादी

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लखनऊ। अयोध्या विवाद जैसे पेचीदा मामले का ऐतिहासिक फैसला और सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का आज (15 नवंबर) आखिरी वार्किंग डे था। 17 नवंबर को गोगोई रिटायर हो जाएंगे। उनकी जगह न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े लेंगे। परंपरा के मुताबिक सीजेआई रंजन गोगोई अपने अंतिम वर्किंग डे पर भावी सीजेआई बोबड़े के साथ कोर्ट रूम में बैठे। गोगोई ने महज 3 मिनट में 10 मुकदमों में नोटिस जारी किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश खन्ना ने रंजन गोगोई का धन्यवाद दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया।

अपने आखिरी वर्किंग डे पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने न्यायपालिका और सहकर्मियों के लिए संदेश नोट भी जारी किया। कुछ वर्षों पूर्व मीडिया के सामने आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार जजों में शामिल रहे गोगोई ने कहा, जजों को मौन रहकर ही अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करना चाहिए। सीजेआई ने इस दौरान प्रेस के व्यवहार की भी प्रशंसा की। गोगोई ने अपने जारी नोट में कहा, वकीलों को बोलने की आजादी है और सही भी है। लेकिन बेंच के जजों को अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग मौन रहकर करना चाहिए। जजों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए मौन रहना चाहिए। गोगोई ने स्पष्ट किया, मौन रहने का मतलब यह नहीं कि जजों को चुप रहना चाहिए। बल्कि न्यायाधीशों को अपने दायित्वों के निर्वाह के लिए बोलना चाहिए। बेवजह की बातों से बचना चाहिए।

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गोगोई ने पे्रस से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। सीजेआई गोगोई ने कहा कि मीडिया के दबाव के समय न्यायपालिका की साख को ठेस पहुंचने वाली झूठी खबरों के खिलाफ सही रुख अपनाया। रंजन गोगोई ने हाथ जोड़कर सभी सार्थियों, वकीलों, कर्मचारियों का शुक्रिया किया। कोर्ट रूम में मौजूद सभी को हाथ जोड.कर अलविदा कहा। http://www.satyodaya.com

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