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अयोध्या पर सुप्रीम फैसले के बाद जानिए किसने क्या कहा…..

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लखनऊ। देश के सबसे विवादित और प्रतीक्षित मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सदियों से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर फैसला आने पूर्व देश भर में अलर्ट जारी किया गया है। अयोध्या सहित पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे देश ने स्वागत किया है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक फैसले पर किसने-क्या कहा-
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा, यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इसे सभी लोगों को सहज रूप में स्वीकार करना चाहिए। इससे सामाजिक ताना-बाना भी मजबूत होगा।
फैसले के तुरंत बाद भाजपा नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने कोेर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए ट्वीट किया, माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस दिव्य फैसले का स्वागत। माननीय अशोक सिंघल जी को स्मरण करते हुए उनको शत-शत् नमन। वह सब, जिन्होंने इस कार्य के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी उन्हें श्रद्धांजलि एवं आडवाणी जी का अभिनंदन जिनके नेतृत्व में हम सब लोगों ने इस महान कार्य के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया था।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का फैसले का सभी के द्वारा स्वागत किया जाना चाहिए। यह हमारे समाजिक सौहार्द्र के लिए फायदेमंद होगा। इस मुद्दे पर अब आगे कोई विवाद नहीं होना चाहिए, लोगों से मेरी यही अपील है।
केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का हम सभी को सम्मान करना चाहिए और शांति कायम रखना चाहिए।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजारीवाल ने कहा, सभी पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने एकमत होकर अपना निर्णय दिया है। हम सब इस फैसले का स्वागत करते हैं। कई दशकों के विवाद पर आज शीर्ष अदालत ने फैसला दिया है। वर्षों पुराना विवाद आज खत्म हो गया। मेरी सभी लोगों से अपील है कि शांति एवं सौहार्द बनाए रखें।
फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। आखिरकार लंबे समय से लंबित पड़े मामले का अंत हुआ।

यह भी पढ़ें-अयोध्या के डीएम-एसपी ने हनुमान गढ़ी में पढ़ी हनुमान चालीसा

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने अयोध्या फैसले पर कहा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हम सभी को सम्मान करना चाहिए, आदर करना चाहिए। इस फैसले से किसी की हार नहीं हुई। श्री चौहान ने कहा कि हमारे देश ने सदैव दुनिया को शंाति का संदेश दिया है। मैं देश के सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि आपस में एकता, प्रेम, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखें।http://www.satyodaya.com

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प्रमोद तिवारी ने कहा- जागिए मोदी जी! देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति विकराल है…

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कहा, महामारी को रोकने के लिए अपनी कार्ययोजना बताए मोदी सरकार

लखनऊ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर चिंता जताई है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले में हम सोवियत रूस को पीछे कर छोड़कर दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। कांग्रेस नेता ने कोरोना के आंकड़े पेश करते हुए कहा, केन्द्र जागे, मोदी जी! जागिये, और जनता की मदद कीजिये। सोमवार को जारी अपने एक बयान में प्रमोद तिवारी ने कहा, आज देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या करीब 7 लाख हो चुकी है। सोवियत रूस में कोरोना से मरने वालों की संख्या लगभग 10 हजार है, जबकि भारत में अब तक करीब 20 हजार लोग इस महामारी से जान गंवा चुके हैं।

सोवियत रूस में सक्रिय मामलों की संख्या लगभग 2 लाख 20 हजार हैं, वहीं भारत में लगभग 2 लाख 53 हजार एक्टिव केस हैं। सोवियत रूस में सीरियस संक्रमितों की संख्या 2300 है, वहीं भारत में लगभग 9,000 लोग गंभीर रूप से कोरोना की चपेट में हैं। श्री तिवारी ने कहा कि यह हालत तब हैं, जब रूस में लगभग 2 करोड़ 50 लाख लोगों की टेस्टिंग हुई है जबकि भारत में मात्र 97 लाख लोगों की टेस्टिंग हुई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि हमने 2 करोड़ 50 लाख लोगों की टेस्टिंग की होती तो शायद यह संख्या कई गुना अधिक होती।

इन सवालों के मांगे जवाब

श्री तिवारी ने कहा है कि मुझे ताज्जुब है कि कोरोना की इतनी विकराल स्थिति बन जाने के बाद भी केन्द्र सरकार कोई ‘रोडमैप’ नहीं बता रही है। केन्द्र सरकार आखिर क्या करने जा रही है? कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने का वह उपदेश तो दे रही है लेकिन वह स्वयं क्या कर रही है? वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि अब वह वह जाग जाएं। कोरोना पाॅजिटिव मरीजों की संख्या 7 लाख पर पहुंच जाना खतरनाक संदेश है।

कोरोना के मामले में केन्द्र ने बरती लापरवाही

श्री तिवारी ने कहा कि नवम्बर, 2019 में चीन के वुहान में कोरोना संक्रमण की बात सामने आ चुकी थी। लेकिन भारत सरकार ने जनवरी, 2020 में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाया, ऐसा क्यों? कहा कि 21 दिन का लाॅकडाउन लगाने के पहले विरोधी दलों के नेताओं से विचार-विमर्श क्यों नहीं किया गया? 21 दिन का लाॅकडाउन लगाने के पूर्व मजदूरों, छात्रों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं आदि को सुरक्षित अपने घर आने के लिए 7 दिन का समय क्यों नहीं दिया गया?

न्याय योजना के प्रस्ताव पर चुप क्यों है सरकार?

कांग्रेस नेता ने कहा कि एक अध्ययन से पता चला है कि ज्यादातर कोरोना संक्रमित लोग या तो कोरोना योद्धा हैं, सरकारी कर्मचारी हैं या फिर रोज कमाकर खाने वाले गरीब और साधारण तबके के लोग। रोजी-रोटी के लिए जोखिम उठाने वाले गरीब तबके के लोगों व किसानों को न्याय योजना के तहत अगले 6 महीने तक सरकार हर महीने 7500 रुपए दे। ताकि इन लोगों को घरों से कम निकलना पड़े और कोरोना का संक्रमण भी कम फैले। सरकार इस पर क्यों नहीं ध्यान दे रही है? इसके लिये कोई कार्यक्रम क्यों नहीं चला रही है? श्री तिवारी ने कहा है कि गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, आगरा (उत्तर प्रदेश) साहित देश के उन्हीं 7 राज्यों में कोरोना संक्रमण का प्रभाव अधिक है जहांॅ ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ कार्यक्रम हुआ था।

देश में कोरोना टेस्टिंग बढ़ाई जाए

श्री तिवारी ने कहा कि मेरा अनुरोध है कि जनता को आत्म निर्भर बनाने के नाम पर उसे ‘राम भरोसे’ न छोंड़ा जाए। केन्द्र सरकार भी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये सार्थक पहल करे। क्योंकि एक दिन में उत्तर प्रदेश में लगभग 1000 और देश में लगभग 25,000 संक्रमितों के मामले सामने आना गम्भीर चिन्ता का विषय है। श्री तिवारी ने कहा है कि बरसात के मौसम में गांव, देहात में सर्दी, जुखाम, खांसी और ज्वर होना आम बात है। कहीं प्रत्येक व्यक्ति इसे कोरोना न समझे, इसलिये टेस्टिंग बढ़ाई जाय। अभी जो टेस्टिंग हो रही है, वह देश की आबादी के हिसाब से 1 प्रतिशत से भी कम है।

यूपी में अपराधी बेलगाम, भाषण नहीं कार्रवाई की जरूरत

कांग्रेस नेता ने कहा कि कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की शहादत को नमन करते हुए कहा, अब साफ हो गया है कि यूपी में अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। यदि बदमाश 20- 25 सशस्त्र सिपाहियों के दस्ते पर हमला कर सकते है, तो आम जनता में उनका खौफ किस कदर होगा। श्री तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार जवाब दे कि 60 अपराधों के आरोपी विकास दुबे को अभी तक पुलिस गिरफ्तार करके जेल क्यों नहीं भेज पाई? श्री तिवारी ने कहा कि जिस तरह प्रयागराज में सामूहिक हत्या हुई। गाजियाबाद में सामूहिक हत्या हुई। प्रदेश में जिस तरह सामूहिक बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं, उससे स्पष्ट है कि सिर्फ भाषण की नहीं बल्कि प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री गलवान घाटी तक क्यों नहीं गए?

प्रधानमंत्री के लेह (लद्दाख) दौरे पर कांग्रेस नेता ने कहा, मैं भी लेह जा चुका हूं। बहुत से भारतीय लेह जाते हैं। समुद्र तल से 3524 मीटर की ऊॅचाई पर लद्दाख में बसा हुआ यह सुन्दर शहर है। जहाॅं से पाकिस्तान की सीमा सबसे नजदीक है, गलवान घाटी और अलयावंचीग लगभग 200- 250 किमी दूर है। लेकिन यदि प्रधानमंत्री गलवान घाटी में अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के पास तक जाते तो सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों का मनोबल और साहस बढ़ जाता।

साथ ही चीन को कड़ा संदेश जाता। श्री तिवारी ने कहा कि समझ में नहीं आया कि यूएसए और यूके सहित दुनिया के कई देशों ने भारतीय सेना के 20 सैनिकों के शहीद होने पर चीन का नाम लेकर उसकी निंदा की। लेकिन प्रधानमंत्री के भाषण में चीन का जिक्र तक नहीं हुआ। ऐसा क्यों ? कहा कि मोदी द्वारा चीन का नाम न लेना भारतीय सेना के मनोबल को गिराने वाला है। यह शहीद हुए 20 सैनिकों की शहादत का अपमान है।http://www.satyodaya.com

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पीएम मोदी के तेवर व अजीत डोभाल की बातचीत के बाद पीछे हटी चीनी सेना

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नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव के बीच कुछ नरमी देखने को मिल रही है। चीनी सेना दो से तीन किलोमीटर पीछे हट गई है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ लगभग दो घंटे बातचीत के बाद हुआ है। बताया जा रहा है कि डोभाल के साथ बातचीत का ही नतीजा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास गलवन घाटी में आज चीनी सेना पीछे हटी है। सूत्रों का कहना है कि बातचीत सौहार्दपूर्ण और दूरदर्शी तरीके से हुई। एनएसए डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की बातचीत पूरी तरह से और स्थायी तौर पर शांति वापस लाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए एक साथ काम करने पर केंद्रित रही। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को फोन पर बातचीत हुई। उन दोनों ने बातचीत के दौरान भारत-चीन सीमाई इलाकों के वेस्टर्न सेक्टर में हाल के दिनों में हुए विवाद पर गहरी और खुलकर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने कहा दोनों पक्ष इस बात राजी हुए कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव मुक्त करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए। साथ ही, दोनों पक्षों को भारत चीन सीमाओं पर चरणबद्ध तरीके से तनाव को खत्म करना चाहिए। मंत्रालय की तरफ से आगे कहा गया कि भारत चीन सीमा पर द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत शांति और अमन की बहाली के लिए एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत जारी रहेगी।

यह भी पढ़ें:- लेह में मोदी : भारत का मस्तक है लद्दाख, यह भूमि भारतीयों के मान-सम्मान की प्रतीक

बता दें कि अजीत डोभाल लद्दाख पर पहले से ही सक्रिय हैं और चीन की हर हरकत पर उनकी नजर भी है। वहीं बताया जा रहा है कि पीएम मोदी का अचानक लद्दाख जाना यह भी डोलाभ का ही प्लान था। जानकारी के अनुसार चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के हवाले से जानकारी दी कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि भारत और चीन के बीच 30 जून को हुई तीसरी कमांडर स्तर पर वार्ता के बाद दोनों देश सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों को पीछे करने और उनकी संख्या कम करने के लिए प्रभावी कदम उठा रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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एमपी राज्यपाल का मेडिकल बुलेटिन: लालजी टंडन की हालत नाजुक मगर नियंत्रण

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लखनऊ। मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन की हालत गंभीर बनी हु्ई है। 11 जून को स्वास्थ्य खराब होने पर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उनकी हालत में किसी प्रकार का सुधार नही आया है। मंगलवार को मेदांता के डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत गंभीर है लेकिन स्थिर बनी हुई है। लालजी टंडन के फेफड़ों की स्थित में सुधार आया है। मधुमेह और संक्रमण नियंत्रण में है। लीवर किडनी भी पहले से बेहतर है। अभी लालजी टंडन को क्रिटिकल केयर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।

इसे भी पढ़ें- Lucknow: गलवान घाटी में तैनात सूबेदार के घर हुई लाखों की चोरी, जांच में जुटी पुलिस

यूरीन में दिक्क्त होने पर लालजी टंडन के परिवार वालों ने लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था। 13 जून को पेट में रक्तस्राव होने पर उनका ऑपरेशन करना पड़ा। इसके बाद से वह लगातार क्रिटिकल केयर वेंटिलेटर पर थे। बीच-बीच में कुछ देर के लिए वेंटिलेटर हटाया गया। 27 जून को उन्हें प्रेशर में ऑक्सीजन देने के लिए बाई-पैप मशीन पर रखा गया, लेकिन, उन्हें राहत नहीं मिली। http://www.satyodaya.com

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