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जानें- कैसे अर्श से फर्श पर आकर धराशाई हो गईं जेट एयरवेज के उड़ने की सभी उम्मीदें, यहां है पूरी कहानी

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नई दिल्ली। कभी देश की सबसे बड़ी निजी विमान सेवा कंपनी का रुतबा हासिल करने वाली जेट एयरवेज की हालत आज ऐसी हो गयी है कि उसकी उड़ने की सभी उम्मीदें टूट चुकी हैं और वह आसमान से जमीन पर आ पहुंची है। आर्थिक रूप से धराशाई हुई भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी विमानन कंपनी के पास एक अदद हवाई सेवा जारी रखने के लिए ईंधन तक के पैसे नहीं बचे हैं, कर्मचारियों को तीन महीने से सैलरी नहीं मिली है। बुधवार रात जेट एयरवेज के किसी विमान ने अंतिम बार उडान भरी। दरअसल 25 साल पुरानी एयरलाइन कंपनी पर 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है और बैंकों ने 400 करोड़ रुपये का इमर्जेंसी फंड देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद जेट एयरवेज के प्रबंधकों ने जेट की सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया है। अपनी बेहतर सेवाओं के चलते जेट एयरवेज भारत सहित दुनिया के सभी यात्रियों में खासा लोकप्रिय थी। हजारों लोग प्रतिदिन अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए जेट एयरवेज पर निर्भर थे। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के मामले में जेट एयरवेज कभी देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस थी। दिसंबर 2018 तक जेट के पास बोइंग 777 और एयरबस ए330, सिंगल बी737 और टर्बोप्रॉप एटीआर के साथ कुल 124 विमान थे। कंपनी हर दिन करीब 600 उड.ानें भर रही थी। लेकिन 18 अप्रैल 2019 को कंपनी ने केवल पांच विमानों के साथ परिचालन किया और बुधवार रात जेट की आखिरी उड.ान अमृतसर से मुंबई के लिए थी।
इसके पहले आर्थिक संकट के चलते जेट एयरवेज पहले ही अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन को 18 अप्रैल तक स्थगित करने की घोषणा कर चुकी थी। कंपनी की यह हालत बैंकों का कर्ज न चुका पाने के कारण हुई है।

कैसे हुई शुरुआत

जेट एयरवेज की स्थापना 1992 में एयर टैक्सी के रूप में हुई थी। मई 1993 में दो विमानों बोइंग 737 और बोइंग 300 के साथ कंपनी ने कामर्शियल उड़ाने प्रारंभ की। 2004 में जेट एयरवेज ने चेन्नई से कोलंबों हवाई सेवा की शुरूआत कर अंतरराष्टीय सेवा का आगाज किया। जनवरी 2007 में जेट एयरवेज ने एयर सहारा को खरीद लिया। जिसके बाद जेट एयरवेज ने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं की शुरूआत की। लेकिन इस खरीद के बाद से ही जेट एयरवेज की मुश्किलें भी शुरू हो गईं। कंपनी इस कर्ज भारी-भरकम कर्ज को चुका नहीं पाई। रही सही कसर 2008 की आर्थिक मंदी ने पूरी कर दी। अक्टूबर 2008 में जेट एयरवेज ने कुछ कर्मचारियों की छंटनी की लेकिन नागरिक उडृडयन मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा।

यह भी पढ़ें-जेट एयरवेज का हाल, कंपनी कंगाल, संस्थापक मालामाल

वर्ष 2012 में जेट एयरवेज घरेलू हिस्सेदारी में इंडिगो से पिछड. गयी। संकट से जूझ रही जेट एयरवेज में एतिहाद एयरलाइंस ने 24 प्रतिशत शेयर खरीदा। जबकि कंपनी का 51 प्रतिशत जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के पास ही रहा। 2018 में जेट एयरवेज को भारी तिमाही नुकसान उठाना पड.ा। दिसंबर 2018 में जेट ने सभी विदेशी सेवाएं स्थगित कर दी। इसके बाद 25 मार्च 2019 में जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने कंपनी में अपने सभी पदों से इस्तीफा सौंप दिया।

कुछ समय पहले तक जेट एयरवेज देश के 52 तथा 21 विदेशी गंतव्यों के लिए हवाई सेवाएं दे रहा था। जेट एयरवेज का मुख्यालय भी मंुबई में ही है। इसके परिचालन का मुख्य केन्द्र मुंबई का छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा है। इसके अतिरिक्त बंगलौर के केम्पेगोव्डा अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, चेन्नई अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, दिल्ली के इंदिरा गाँधी अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, कोलकाता के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन तथा पुणे विमान पत्तन से सभी उड़ानों का परिचालन करता है।

कई महत्वपूर्ण रूटों पर बढ़ गया किराया

देश व दुनिया की हवाई यात्राओं में जेट एयरवेज की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जेट का परिचालन बंद होने से देश में कई रूटों पर हवाई किराया महंगा होने की आशंका है। विदेशी रूटों पर किराया बढ़ने की खबर आ चुकी है। लंदन का किराया 37 हजार रु. से बढ़कर 1.80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। उड्डयन मंत्रालय ने लोकप्रिय रूट्स पर बढ़ते हवाई किरायों पर अंकुश लगाने के लिए गुरुवार को एयरलाइंस और हवाई अड्डों की मीटिंग बुलाई है। एक सूत्र ने बताया कि सरकार एयरलाइंस से कैपेसिटी बढ़ाने को कह सकती है, लेकिन कंपनियों के लिए अभी जेट एयरवेज के स्लॉट की भरपाई करना मुमकिन नहीं है। माना जा रहा है कि जेट के पास देश भर में 400 डिपार्चर स्लॉट हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इनमें से दिल्ली और मुंबई के 80 स्लॉट्स हैं, जो देश के दो सबसे व्यस्त हवाई अड्डे हैं।

26 बैंकों का कर्ज

फिलहाल जेट एयरवेज पर कुल 26 बैंकों का करीब 8,500 करोड़ रुपये कर्ज है। इसमें कुछ प्राइवेट और विदेशी बैंक भी शामिल हैं। पब्लिक सेक्टर बैंक में केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहबाद बैंक, एसबीआई और पीएनबी शामिल हैं। वहीं, आईसीआईसीआई और यस बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों का भी जेट पर बकाया है। दरअसल, 2010 के संकट के बाद एयरलाइन का कर्ज संकट गहराने लगा। इस दौरान कंपनी को लगातार चार तिमाहियों में घाटा उठाना पड़ा। इसके बाद वह ईएमआई चुकाने में फेल होने लगी।

बर्बादी का राजनीतिक कनेक्शन

जेट एयरवेज के संकट के राजनीतिक कनेक्शन भी हैं। नरेश गोयल का यूपीए सरकार के शासन काल में हुआ था। लेकिन 2014 में केन्द्र में एनडीए सरकार आने के बाद जेट एयरवेज की समस्याएं शुरू हो गईं। सूत्रों के अनुसार भाजपा की सहयोगी शिवसेना के साथ जेट एयरवेज के मैनेजमेंट के संबंध अच्छे नहीं हैं। इसने भाजपा से कहा है कि जेट को सरकार की तरफ से कोई मदद न दी जाए।
वहीं जेट में मुंबई की एक सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे एनसीपी नेता के भी पैसे लगे हैं। सूत्रों के अनुसार एनआरआई नरेश गोयल के पास इतने पैसे हैं कि अकेले जेट को संकट से उबार सकते हैं। लेकिन ज्यादातर पैसा कालेधन में है। उनका दुबई और लंदन में होटल चेन है।
करीब 25000 लोगों को रोजगार देने वाली जेट एयरवेज के बंद होने से हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है। खबरों के अनुसार जेट का संकट बढ़ने के बाद 400 पायलट नौकरी छोड़ चुके हैं। अब जेट के पास 1,300 पायलट रह गए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में बंद होने वाली जेट एयरवेज दूसरी बड़ी हवाई सेवा कंपनी है। इसके पहले 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस भी बंद हो चुकी है। किंगफिशर के मालिक भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या भारतीय बैंकों को हजारों करोड. रुपए का चूना लगाकर विदेश में शरण लिए हुए हैं। जिनके भारत प्रत्यर्पण के लिए भारतीय जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं।http://www.satyodaya.com

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आरएसएस प्रमुख के काफिले की गाड़ी ने बाइक को मारी टक्कर, एक बच्चे की मौत

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जयपुर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के काफिले की गाड़ी से बड़ा हादसा हो गया है। जिसमें एक बच्चे की मौत और वहीं एक अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान के अललर में बुधवार आसएसएस प्रमुख के काफिले की गाड़ी ने हरसोली मुंडावर सड़क पर एक बाइक को टक्कर मार दी।

ये भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र ने ठुकराई पाक की अपील, कश्मीर पर मध्यस्थता से किया इनकार

इस टक्कर में सरपंच चेतराम यादव गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके 6 साल के पोते सचिन की मौत हो गई। बताया जा रहा है यह हादसा उस वक्त हुआ जब उनका काफिला तिजारा के गहनकर से लौट रहा था। बता दें, चेतराराम यादव को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया है। http://www.satyodaya.com

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पीके मिश्रा प्रधानमंत्री मोदी के नए प्रधान सचिव बने, पीके सिन्हा प्रमुख सलाहकार बनाए गए

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नृपेंद्र मिश्रा के पद छोड़ने के बाद पीके मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रमुख सचिव बनाया गया है। वहीं, पीके सिन्हा को प्रमुख सलाहकार बनाया गया है। बता दें, पीके मिश्रा पूर्व कैबिनेट सचिव रह चुके हैं।

गैरतलब है कि पीएम मोदी ने अपने ट्विट में लिखा कि 2019 के चुनाव नतीजे आने के बाद श्री नृपेंद्र मिश्रा जी ने खुद को प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद से सेवामुक्त किए जाने का अनुरोध किया था। तब मैंने उनसे वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने का आग्रह किया था।

पीएम ने अपने ट्विट में आगे लिखा था कि 2014 में जब मैंने प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभाला, तब मेरे लिए दिल्ली भी नई थी और नृपेंद्र मिश्रा जी भी नए थे। लेकिन दिल्ली की शासन-व्यवस्था से वे भली-भांति परिचित थे। उस परिस्थिति में उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में अपनी बहुमूल्य सेवाएं दीं। उस समय उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से मेरी मदद की, बल्कि 5 साल देश को आगे ले जाने में, जनता का विश्वास जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक साथी के रूप में 5 साल तक हमेशा उन्होंने साथ दिया।

आपको बता दें कि मिश्रा 2006 से 2009 के बीच ट्राई (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) के अध्यक्ष रह चुके हैं और 2009 में ही रिटायर हुए। ट्राई के पूर्व अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा 1967 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर के हैं। मिश्रा उत्तर प्रदेश से हैं और राजनीति शास्त्र एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर हैं। मिश्रा की अध्यक्षता में ट्राई ने अगस्त 2007 में सिफारिश की थी कि स्पेक्ट्रम की नीलामी की जानी चाहिए। मिश्रा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले की सुनवाई में दिल्ली की एक अदालत में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पेश हो चुके हैं।

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संयुक्त राष्ट्र ने ठुकराई पाक की अपील, कश्मीर पर मध्यस्थता से किया इनकार

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नई दिल्ली। भारत ने जबसे जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे में संशोधन किया है तबसे पाकिस्तान पूरी दुनिया के आगे गिड़गिड़ा रहा है। लेकिन उसे हर जगह से सिर्फ ठोकरें ही मिली है। अब पाक को संयुक्त राष्ट्र में भी मुंह की खानी पड़ी है। बुधवार को यूएन ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता को लेकर पाक को साफ-साफ जवाब दे दिया कि यह मुद्दा दोनों देशों की आपसी बातचीत के जरिए ही सुलझाया जाए और उसकी मध्स्तथता की अपील खारिज कर दी।

यूएन के सेक्रेटरी जनरल के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, ‘मध्यस्थता पर हमारी स्थिति पूर्ववत ही है, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। महासचिव ने दोनों देशों की सरकार से संपर्क किया है। जी-7 की बैठक में भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस पर चर्चा की और पाकिस्तान के विदेश मंत्री से इस पर बात हुई है।’

इसके साथ ही यूएन का कहना है कि दोनों देशों के कश्मीर मसले का हल शांतिपूर्ण तरीके से और आपसी बातचीत के जरिए निकालना चाहिए। बता दें, ऐसा कर यूएन भारत के रूख का ही समर्थन किया है क्योंकि भारत कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष के मध्यस्थता करने का विरोध करता है।

ये भी पढ़ें: अभिषेक मनु सिंघवी का मोदी सरकार पर तंज, कहा- मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है। भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय के सचिव ने कहा कि हमारे कदम से पाकिस्तान को अहसास हो गया है कि उसके आतंकी मसूबे अब कामयाब नहीं होंगे। भारत ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा भड़काने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया।http://www.satyodaya.com

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