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लोहिया संस्थान में गरीबों सवर्णो के लिए सीट बढ़ोतरी को मिली हरी झंडी…

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लखनऊ। सामान्य वर्ग के गरीबों का एमबीबीएस में दाखिले का रास्ता बिल्कुल साफ हो गया है। बता दें कि एमसीआइ ने लोहिया संस्थान सहित नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी है। वहीं नीट काउंसिलिंग में अभ्यर्थियों का कोटा तय करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने गरीबों को आरक्षण का लाभ देने के लिए चिकित्सा संस्थानों को 15 मई तक सीट बढ़ोतरी का आवेदन करने का निर्देश दिया था। वहीं राज्य के मेडिकल कॉलेजों ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) को सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। 21 जून को एमसीआइ ने लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान समेत नौ स्टेट मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ा दी है। लोहिया आयुर्विज्ञान की एमसीआइ सेल में सीट बढ़ोतरी का मेल भी आ गया है।

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275 सीटों का इजाफा : कुल 275 सीटें बढ़ाई गई हैं। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 150 से 180 सीटें हो गई हैं। वहीं बीआरडी गोरखपुर में 100 से बढ़कर 125, कन्नौज मेडिकल कॉलेज में 100 से बढ़कर 125, जीएसवीएम कानपुर में 190 से 250, अंबेडकर नगर मेडिकल कॉलेज में 100 से बढ़कर 125, झांसी मेडिकल कॉलेज में 100 से 125, प्रयागराज मेडिकल कॉलेज में 150 से 180, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज में 100 से 125, सैफई रिम्स में 150 से बढ़कर 180 सीटें हो गई हैं। शेष मेडिकल कॉलेजों में गरीब सवर्णो की सीटें बढ़ाने को लेकर 10 जुलाई को दिल्ली में मंथन होगा। इसमें उत्तर प्रदेश समेत सभी राज्यों के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक (डीजीएमई) को बुलाया गया है। राज्य में 22 सरकारी राज्य मेडिकल कॉलेज हैं। पहले इनमें 2,318 एमबीबीएस सीटें थीं।

नेशनल रैंक के अभ्यर्थियों के दाखिले शुरू

महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि नीट काउंसिलिंग के प्रथम चरण के दाखिले शुरू हो गए हैं। नेशनल रैंक के अभ्यर्थियों की कॉलेजों में रिपोर्टिग की तारीख दो जून से रखी गई है। वहीं, स्टेट रैकिंग के अभ्यर्थी छह से 12 जून तक मेडिकल कॉलेजों में रिपोर्टिग करेंगे। कॉलेजों में 15 फीसद सीटें नेशनल रैंक व 85 फीसद सीटें स्टेट रैंक से भरी जाएंगी। लोहिया संस्थान में ऑल इंडिया कोटे के एक छात्र ने बुधवार को रिपोर्टिग की।http://www.satyodaya.com

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मोदी सरकार ने हज यात्रियों को दिया तोहफा, अब मिलेगी ये सुविधा….

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हज यात्रा

फाइल फोटो

नई दिल्ली। हज यात्रा पर जाने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब हज यात्रा पर जाने के दौरान छोटी से छोटी जानकारी के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर मक्का-मदीना तक की सारी जानकारी अब आप आसानी से मोबाइल पा लेंगे।

आपको बता दें यह सब पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया की वजह से संभव हो पाया है। पीएम नरेन्द्र मोदी की ओर से शुरु की गईं ई-मसीहा, हज मोबाइल ऐप  और हज पोर्टल सर्विस। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का दावा है कि हज यात्रा को सौ प्रतिशत  डिजिटल से जोड़ने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है।

हज यात्रियों को मिल जाएगी अब मोबाइल पर ये जानकारी

जब आप घर से निकलते हैं तब से आपकी हज यात्रा शुरू हो जाती है। हज 2020 के लिए जैसे ही यात्री अपने घर से निकलेगा तो उसके मोबाइल पर सबसे पहले यह जानकारी आ जाएगी कि दिल्ली एयरपोर्ट से उसकी फ्लाइट कितने बजे कौन से टर्मिनल से है। इसके साथ ही ई-लगेज टैगिंग सुविधा मिलेगी। मक्का एयरपोर्ट पर उतरने के बाद कौन से नंबर की बस किस जगह मिलेगी। बिल्डिंग का नाम और कमरा नंबर क्या होगा। कब और कितने बजे हज की किस रस्म को पूरा करने के लिए कहा जाना है, यह जानकारी भी मोबाइल के जरिए आपको मिल जाएगी। इसके लिए मक्का में यात्रियों को मिलने वाली सिम को एक ऐप से जोड़ा जाएगा।

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मुम्बई हज हाउस में बना 100 टेलीफोन लाइन का केंद्र  

सभी हाईटेक सुविधाएं मक्का-मदीना में भी हज यात्रियों को मिलती रहें, इसके लिए सऊदी अरब की सरकार के साथ भी बातचीत की गई है। एक दिसंबर 2019 को मक्का में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, मुख्तार अब्बास नकवी ने सऊदी अरब के हज मंत्री डॉ। मुहम्मद सालेह बिन ताहेर बेन्तेन के साथ भारत-सऊदी अरब के बीच हज 2020 के सम्बन्ध में द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इसी तरह से भारत में भी रवाना होने से पहले हज यात्रियों को सुविधा लेने में किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए 100 टेलीफोन लाइन का एक सूचना केंद्र शुरु किया गया है। यह पहला मौका होगा जब हज हाउस में इस तरह की सुविधा दी गई है।

मक्का-मदीना में ई-मसीहा से अब होगा इलाज

पहले जब हज यात्री यात्रा पर जाते थे उससे पहले उन्हें हेल्थ कार्ड दिया जाता है,लेकिन मक्का-मदीना में हज यात्रियों को कोई परेशानी न हो इसके लिए ई-मसीहा नाम से भी ऑनलाइन सुविधा शुरु की गई है। इस योजना के तहत हज यात्रियों की सेहत से जुड़ी सभी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगी। किसी भी आपात स्थिति में फौरन किसी हज यात्री को मेडिकल सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी। वहीं दूसरी ओर जब भी हज यात्री को मेडिकल सुविधा की जरूरत होगी तो वह ऑनलाइन डिमांड कर सकता है।http://www.satyodaya.com

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सबरीमाला पर आज CJI बोबडे की अध्यक्षता में नौ जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई

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सबरीमाला

फाइल फोटो

नई दिल्ली। सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय संविधान पीठ कर रही है। 9 जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला विवाद पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस्‍लाम, पारसी, दाऊदी बोरा समुदाय से जुड़े ऐसे सभी मामलों को अगली तारीख पर एकसाथ सुना जाएगा। संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस एसए बोबडे कर रहे हैं।

पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस आर। भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल। नागेश्वर राव, जस्टिस एमएम शांतनागौदर, जस्टिस एसए नजीर, जस्टिस आर। सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और सूर्य कांत शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने संविधान पीठ के गठन संबंधी नोटिस छह जनवरी को ही जारी किया था। यह पीठ मामलों से संबंधित 60 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

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जानकारी के मुताबिक तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने इस विषय में 3:2 से फैसला सुनाया था। इसके बाद 9 सदस्यीय पीठ का गठन किया गया। दरअसल, 28 सितंबर 2018 के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिका पर गौर करते हुए मामले को एक वृहद पीठ को सौंपने का फैसला  लिया गया था। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दी थी।

जानिए क्या है सबरीमाला विवाद

आपको बता दें केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। खासकर 15 साल से ऊपर की लड़कियां और महिलाएं इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती थीं। यहां सिर्फ छोटी बच्चियां और बूढ़ी महिलाएं ही प्रवेश कर सकती थीं। इसके पीछे मान्यता थी कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे। ऐसे में युवा और किशोरी महिलाओं को मंदिर में जाने की इजाजत नहीं है। सबरीमाला मंदिर में हर साल नवम्बर से जनवरी तक, श्रद्धालु अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं, बाकि पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है। वहीं भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए मकर संक्रांति यानी खिचड़ी का दिन बेहद खास होता है। इस दिन यहां सबसे ज्यादा भक्त पहुंचते हैं।http://www.satyodaya.com

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CAA के खिलाफ सोनिया गांधी ने बुलाई बैठक, ममता-माया नहीं होंगी शामिल…

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सीएए

फाइल फोटो

लखनऊ। छात्रों के विरोध, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी को लेकर हो रहे प्रदर्शन की वजह से आज यानी सोमवार को विपक्षी दल बैठक करेगा। ऐसे में कांग्रेस के खिलाफ लंबे समय से हमलावार बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को फिर से झटका दे दिया है।

बता दें नई दिल्ली के न्योते पर सीएए संशोधन कानून के खिलाफ विपक्षी दलों की बैठक से मायावती और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने किनारा कर लिया है।

मायावती ने सोमवार सुबह ट्वीट इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में अपनी तथा अपनी पार्टी की राय स्पष्ट कर दी है। मायावती ने लिखा है कि वैसे भी बसपा तो शुरू से ही नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के साथ ही एनपीआर के विरोध में हैं। हमने तो अपना विरोध शीर्ष स्तर पर जता दिया है। मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार से एक बार फिर अपील है कि वह इस विभाजनकारी व असंवैधानिक कानून को वापस ले लें। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि इस कानून को लेकर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) व अन्य शिक्षण संस्थानों में भी छात्रों का राजनीतिकरण करना यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है।

मायावती ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर बुलाई गई बैठक के बारे में कहा कि इस मामले में कांग्रेस के नेतृत्व में आज विपक्ष की बुलाई गई बैठक में बसपा ने शामिल नहीं होने का फैसला किया है। बसपा अगर इस बैठक में शामिल होती है तो यह राजस्थान में पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने वाला होगा। यही वजह है कि बसपा इनकी इस बैठक में शामिल नहीं होगी। इसके साथ ही मायावती ने कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। मायावती ने कहा कि जैसा विदित है कि राजस्थान की कांग्रेसी सरकार को बसपा के बाहर से समर्थन देने के बाद भी वहां पर कांग्रेस से बसपा के साथ छल किया है। कांग्रेस ने राजस्थान में दूसरी बसपा के विधायकों को तोड़कर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है जो पूर्णरूप से विश्वासघाती था।

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गौरतलब है कि कांग्रेस ने सभी समान विचारधारा वाले दलों को नागरिकता संशोधन कानून पर एक संयुक्त रणनीति को औपचारिक बनाने के लिए बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। कांग्रेस, विपक्षी दलों के साथ संसद भवन में दोपहर दो बजे बैठक करेगी।

माया के बाद ममता ने क्यों बनाई दूरी?

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि उनके राज्य में कांग्रेस और वाम पार्टियां गंदी राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कहा है कि वह नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का विरोध अकेले दम पर करेंगी। पश्चिम बंगाल की विधानसभा में ही उन्होंने ऐलान कर दी थी कि वह विश्वविद्यालय परिसरों में हिंसा और नागरिकता कानून के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा 13 जनवरी को बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में भाग नहीं लेंगी।http://www.satyodaya.com

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January 13, 2020, 2:46 pm
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