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लोकसभा चुनाव 2019: बीजेपी को पूर्वोत्तर के इस राज्य ने दिया झटका, एसकेएम ने तोड़ा गठबंधन

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लोकसभा चुनाव

फाइल फोटो

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टियां जहां गठबंधन कर रही हैं, वहीं कुछ ऐसी भी पार्टियां है जो गठबंधन को तोड़ रही हैं। जी हां लोकसभा चुनाव 2019 की डेट भी आ चुकी है। जिसके बाद चुनावी मैदान में गठबंधन की कवायद तेज हो गई है। ऐसे में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से अपना गठबंधन खत्म कर लिया है। एसकेएम ने सिक्किम की सभी विधानसभा सीटों और लोकसभा की एकमात्र सीट पर चुनावी मैदान में उतरने का मन बना लिया है। एसकेएम के प्रवक्ता सोनम भूटिया ने बताया, ‘‘एसकेएम  सिक्किम में सभी 32 विधानसभा सीटों और एकमात्र लोकसभा सीट पर अपने उम्मीदवारों को उतारेगी।

एसकेएम के प्रवक्ता सोनम भूटिया ने ये भी बताया कि दक्षिण सिक्किम के जोरेथांग में पार्टी की संबंधित समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक की अध्यक्षता एसकेएम के अध्यक्ष प्रेम सिंह तमांग ने की थी। आपको बता दें कि पूर्वोत्तर का राज्य सिक्किम क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सिर्फ एक प्रदेश गोवा से बड़ा है। यहां लोकसभा की एक सीट है। यह सीट इतनी महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यह पूरे राज्य का कार्यभार संभालेगी।

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सिक्किम लोकसभा क्षेत्र की सीट सामान्य वर्ग के लिए है, यानी कि अनारक्षित है। यहां राज्यसभा के लिए भी एक सीट है। सिक्किम में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र मात्र एक है। यहां राज्यसभा के लिए भी एक सीट है। लेकिन विधानसभा की 32 सीटें हैं। जानकारी के मुताबिक सिक्किम में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा(एसकेएम), सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) सहित कुछ अन्य छोटे स्थानीय राजनीतिक दल हैं। इसके साथ ही यहां बीजेपी, कांग्रेस, तृणमूल जैसे राष्ट्रीय दल भी काफी एक्टिव हैं। सिक्किम में कुल 3,70,731 मतदाता हैं जिनमें 1,79,650 महिलाएं शामिल हैं।http://www.satyodaya.com

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हिमाचल प्रदेश: 500 फीट गहरी खाई में गिरी बस, 20 की मौत, कई घायल….

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फाइल फोटो

देशभर में बस हादसे कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन कहीं न कहीं से बस हादसों की खबरें आती रहती हैं। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से एक भीषण हादसे की खबर आई है। जी हां हिमाचल के बंजार से 1 किलोमीटर आगे भियोठ मोड़ के पास एक निजी बस के खाई में गिरने से 20 लोगों की मौत हो गई। जबकि कई सारे लोग घायल भी हैं।

500 फीट गहरी खाई में गिरी बस से 20 लोगों की मौत और कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। इसी तरह कुल्लू से गाड़ागुशैणी की तरफ जा रही बस यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी।

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इस बस में लगभग 40 से 50 लोग शामिल थे। जबकि 20 लोग की मौत और कई लोग घायल हो गए हैं। खाई में गिरे घायलों को निकलने के लिए पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जिससे उन्हें खाई से निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उनका इलाज चला रहा है।  

जानकारी के मुताबिक इस हादसे में घायल हुए लोगों में 12 महिलाएं, 6 लड़कियां, 7 बच्चों और 10 युवकों का रेस्क्यू किया गया है। वहीं लोगों के अनुसार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हैं।http://www.satyodaya.com

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वाराणसी से नई दिल्ली चलेगी बुलेट ट्रेन, 2 घंटे 40 मिनट में तैय करेगी सफर…

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मोदी सरकार ने अब दूसरी बुलेट ट्रेन का रूट चुन लिया है। ये रूट है दिल्ली से प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी। आने वाले दिनों में अगर सब कुछ ठीक रहा तो वाराणसी से दिल्ली की दूरी महज ढाई घंटे से कुछ ज्‍यादा समय में पूरी हो जाएगी। दरअसल, बुलेट ट्रेन के लिए दूसरा कॉरिडोर लखनऊ से होकर गुजरेगा। इसके लिए नई दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन के रूट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट अमेरिकी कंपनी मोट मैकडॉनल्ड ने तैयार कर सरकार को सौंप दी है। कहा जा रहा है कि अगले महीने पेश होने वाले बजट में इस रेल लाइन के निर्माण के लिए फंड स्वीकृत किए जा सकते हैं। अगर बजट में इस कॉरिडोर को स्वीकृति मिलती है तो आगामी पांच से सात सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के लोग बुलेट ट्रेन का सफ़र करते नजर आ सकते हैं। बता दें कि वाराणसी से दिल्ली की दूरी 782 किलोमीटर है। वर्तमान में वाराणसी से दिल्ली पहुंचने में कम से कम 12-14 घंटे लगते हैं। कहा जा रहा है कि आगे चलकर इस रूट को पटना और फिर कोलकाता तक बढ़ाया जाएगा।

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दिल्ली से वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर अलीगढ़, कानपुर, लखनऊ और सुलतानपुर से होते हुए वाराणसी तक जाएगी। इस कॉरिडोर के निर्माण में 84 हजार करोड़ रुपए की लागत अनुमानित है। हजारों करोड़ रुपए की लागत वाले प्रस्‍तावित बुलेट ट्रेन कॉरीडोर से भारत के सबसे व्‍यस्‍ततम रेल मार्ग में से एक से यात्रा करने वाले लोगों को राहत मिल सकती है। बता दें कि देश की पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलेगी। इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा हो चुका है। नवंबर में इसके ट्रैक पर काम शुरू हो जाएगा। इस ट्रैक का निर्माण जापान की कंपनी कर रही है। उम्मीद है कि वर्ष 2021 तक देश की पहली बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू हो जाएगा।http://www.satyodaya.com

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कभी ताकतवर आईपीएस रहे संजीव भट्ट कैसे बन गए उम्रकैदी, जानिए नौकरशाह से मुजरिम बनने की पूरी कहानी….

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लखनऊ। 30 साल पुराने एक मामले में गुजरात काडर के बर्खास्त आईपीएस संजीव भट्ट को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस आईपीएस को यह सजा हिरासत में मौत से जुड़े एक मामले में सुनाई गयी है। करीब आठ महीने से वो जेल में बंद हैं। उन्हें नार्कोटिक्स के मामले में पैसा उगाही के आरोप में बीते सितम्बर में गिरफ्तार किया गया था। आईआईटी मुंबई से पोस्ट ग्रेजुएट संजीव भट्ट वर्ष 1988 में भारतीय पुलिस सेवा में आए और उन्हें गुजरात काडर मिला। वो राज्य के कई जिलों, पुलिस आयुक्त के कार्यालय और अन्य पुलिस इकाइयों में काम चुके हैं।
दरअसल, 1990 में गुजरात के जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हो गयी थी। भट्ट उस समय जामनगर के एएसपी थे। इस दौरान 133 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिनमें 25 लोग घायल हुए थे और आठ लोगों को अस्पताल में भर्ती #SanjivBhattकराया गया था। न्यायिक हिरासत में रहने के बाद एक आरोपी प्रभुदास माधवजी वैश्नानी की मौत हो गई। भट्ट और उनके सहयोगियों पर पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगा था। इस मामले में संजीव भट्ट व अन्य पुलिसवालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन गुजरात सरकार ने मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी।#custodial इसके बाद दिसंबर 1999 से सितंबर 2002 तक वे राज्य खुफिया ब्यूरो में खुफिया उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे। गुजरात के आंतरिक सुरक्षा से जुड़े सभी मामले उनके अधीन थे। इनमें सीमा सुरक्षा और तटीय सुरक्षा के अलावा अति वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा भी शामिल थी। इस दायरे में मुख्यमंत्री की सुरक्षा भी आती थी।

संजीव भट्ट नोडल अफसर भी थे, जो कई केंद्रीय एजेंसियों और सेना के साथ खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान भी करते थे। जब वर्ष 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे, उस समय भी संजीव भट्ट इसी पद पर थे।#custodial
संजीव भट्ट वैसे तो गुजरात दंगों के बाद ही चर्चा में आ गए थे। गुजरात दंगों के बाद संजीव भट्ट लगातार तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का मुखर विरोध कर रहे थे। उन्होंने गुजरात दंगों पर सीएम मोदी की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। लेकिन उनके बुरे दिन 2010 के बाद शुरू हुए। उन्होंने कहा था कि दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पर उन्हें भरोसा नहीं है। नरेंद्र मोदी के खिलाफ काफी मुखर रहने वाले संजीव भट्ट ने मार्च 2011 में कोर्ट में हलफनामा दायर कर तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी पर गंभीर आरोप लगाए थे।
अपने बयानों और कारनामों से लगातार सुर्खियां बटोर रहे भट्ट के खिलाफ लंबित मामलों में सुनवाई के लिए राज्य सरकार ने 2011 में हरी झण्डी दे दी। भट्ट ने यह दावा कर भारतीय राजनीति और मीडिया में हलचल मचा दी थी कि गोधरा कांड के बाद 27 फरवरी, 2002 की शाम मुख्यमंत्री के आवास पर हुई एक सुरक्षा बैठक में मोदी ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों से कहा था कि हिंदुओं को अपना गुस्सा उतारने का मौका दिया जाना चाहिए। मोदी सरकार का कहना है कि इस बात के सबूत नहीं हैं कि संजीव भट्ट इस बैठक में मौजूद थे।
बाद में संजीव भट्ट को बगैर अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सरकारी वाहन का दुरुपयोग करने के आरोप में 2011 में निलंबित किया गया। साल 2015 में आए एक कथित सेक्स वीडियो को लेकर संजीव भट्ट को पहले गुजरात सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया और फिर खिलाफ कर दिया। नोटिस में कहा गया कि वे अपनी पत्नी के अलावा किसी अन्य महिला के साथ रिश्ते पर सफाई दें। संजीव भट्ट को 19 अगस्त 2015 को पद से बर्खास्त कर दिया गया। भट्ट ने कथित सेक्स वीडियो में खुद के होने से इंकार किया था और कहा था कि वीडियो में मौजूद आदमी उनकी तरह दिखता है, पर वे स्वयं उसमें नहीं हैं।#rioting

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30 सितम्बर 2011 को संजीव भट्ट को उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। ये गिरफ्तारी उनके मातहत काम कर चुके एक कॉन्सटेबल केडी पंत की ओर से दर्ज पुलिस रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस रिपोर्ट में संजीव भट्ट पर आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने दबाव डालकर मोदी के खिलाफ हलफनामा दायर करवाया।
कभी ताकतवर पुलिस अधिकारी रहे संजीव भट्ट को 2018 में फिर से सामना करना पड़ा जब उन्हें 5 सितम्बर 2018 को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उस समय कहा गया कि 1998 पालनपुर ड्रग प्लांटिंग केस में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। उनके साथ सात अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि संजीव भट्ट जब बनासकांठा के डीसीपी थे, उस वक्त एक वकील को नार्कोटिक्स के झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगा। उस वक्त करीब 8 ऐसे नार्कोटिक्स मामले थे जिसमें विवाद हुआ था। इनमें कुछ आरोपी राजस्थान के हैं। राजस्थान के आरोपियों ने संजीव भट्ट पर झूठा केस दायर कर उनसे पैसे ऐंठने का आरोप लगाया था।
इन आरोपों और मुकदमों के साथ संजीव भट्ट के खिलाफ हिरासत में मौत का मामला भी चल रहा था। जिसमें गुरुवार को जामनगर कोर्ट ने आखिरकार इस आईपीएस को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने भट्ट को सजा सुनाते हुए एक अन्य आरोपी तथा तत्कालीन कांस्टेबल प्रवीण झाला को भी दोषी माना है और उसे भी उम्रकैद की सजा दी गई है।

इससे पहले भट्ट ने इस मामले में 12 जून 2019 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर 10 अतिरिक्त गवाहों के बयान लेने का आग्रह किया था। लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। भट्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि निचली अदालत ने 30 साल पुराने हिरासत में हुई मौत के मामले में पहले ही फैसले को 20 जून के लिए सुरक्षित रखा है। ऐसे में यह याचिका केवल मामले को और लटकाने के उद्देश्य से डाली गयी है।
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अजय रस्तोगी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुजरात सरकार व अभियोजन पक्ष की दलील को माना कि सभी गवाहों को पेश किया गया था, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रखा गया है। अब दोबारा मुकदमे पर सुनवाई करना और कुछ नहीं है, बल्कि देर करने की रणनीति है।http://www.satyodaya.com

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