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Maharashtra Election 2019: सांगली में शाह के निशाने पर रही कांग्रेस और एनसीपी

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नई दिल्ली। हरियाणा विधानसभा चुनाव के साथ महाराष्ट्र में भी चुनाव का बिगुल बज चुका है। 21 अक्टूबर नजदीक आते ही राजनीतिक पार्टियों का सियासी परा चढ़ने लगा है। बीजेपी और कांग्रेस के साथ ही अन्य दलों के शीर्ष नेता लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इसी के चलते गुरुवार को बीजेपी सरकार के गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के सांगली में रैली की। यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के बहाने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत को दो देश से मुक्ति मिल गई है। राहुल को आड़े हाथ लेते हुए शाह ने कहा राहुल कहते थें कि कश्मीर में खून की नदियां बहेंगी, लेकिन अब पूरा कश्मीर शांत है।

एक जवान मारे तो बदले में 10 दुश्मन मारेंगे

सांगली में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पीएम ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर भारत को अखंड किया है। शाह ने कहा, जब मोदी जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म करने का फैसला किया। तो कांग्रेस और एनसीपी ने इसका कड़ा विरोध किया। जब पूरा देश कश्मीर का एकीकरण चाहता था। तब कांग्रेस-एनसीपी ने विरोध किया। कश्मीर में खून की नदियां बहेंगी लेकिन 5 अगस्त से 5 अक्टूबर एक महीना हो गया, एक भी गोली नहीं चलानी पड़ी। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की है। अगर एक भी भारतीय जवान शहीद हुआ तो उसके बदले में 10 दुश्मन मारे जाएंगे।

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गृह मंत्री अमित शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यहां की जमीन पशु मेले के लिए जानी जाती है। उन्होंने नाना पाटिल को भी प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथ लिया। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले का कांग्रेस और एनसीपी ने विरोध किया था, लेकिन इस मुद्दे पर आज पूरी दुनिया भारत के साथ है। पाकिस्तान अकेला पड़ गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनावी शंखनाद हो चुका है। एक तरह भाजपा और शिवसेना देवेंद्र फणनवीस के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं और दूसरी ओर कांग्रेस और एनसीपी जैसी परिवारवादी पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। शाह कहा कि अभी-अभी लोकसभा का चुनाव हुआ है। जिसमें महाराष्ट्र की महान जनता ने मोदी जी की झोली में कमल ही कमल भर दिए। इसके कारण मोदीजी प्रधानमंत्री बने और 300 से ज्यादा सीटों के साथ भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। http://www.satyodaya.com

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तीस हजारी कोर्ट मामले में HC ने आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक….

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तीस हजारी

फाइल फोटो

नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट मामले में दिल्ली पुलिस को राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी पुलिसवालों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सभी बार काउंसिल को नोटिस जारी किया है। अब मामले की सुनवाई 23 दिसंबर को की जाएगी।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच के सामने सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कहा कि ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी पूरी होने से पहले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए।

कोर्ट के इस आदेश के बाद वकीलों पर ये दबाव रहेगा कि वो हड़ताल को खत्म करें। वकील पिछले 2 हफ्ते से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे थे, लेकिन आज कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि जुडिशल इंक्वॉयरी पूरी हुए बिना पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। 3 नवंबर को कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ भी कोई सख्त कार्रवाई न करने का आदेश पहले ही कर दिया था। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई ना करने की याचिका दाखिल की थी।

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वहीं पुलिस का कहना था कि जिस तरह से वकीलों की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है, उसी तरह से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई जाए।

बता दें वकीलों ने इसका विरोध किया है। वकीलों का कहना था कि पुलिस की ये याचिका उन पुलिसवालों को जमानत दिलाने के लिए है, जिन्होंने वकीलों पर गोली चलाई और जिनकी गिरफ्तारी की मांग वकील लगातार कर रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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INX MEDIA CASE में HC ने खारिज की पी चिदंबरम की जमानत याचिका…..

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पी चिदंबरम

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर आज दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया है। पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। तब से चिदंबरम तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में  हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत की मांग करते हुए कहा गया था कि आईएनएक्स मीडिया मामले के सभी दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास हैं, इसलिए उनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। जिसके बाद ईडी ने 8 नवंबर को चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था और कोर्ट में दलील दी थी कि वह जमानत मिलने के बाद गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

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ईडी का प्रतिनिधित्व कर रही सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पूर्व वित्तमंत्री पर चल रहा धन शोधन मामला काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह एक आर्थिक अपराध है जो काफी अलग है।

74 वर्षीय चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरेस्ट किया था।वह फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में ईडी की कस्टडी में हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उन पर साल 2007 में आईएनएक्स मीडिया ग्रुप के लिए आने वाले 305 करोड़ के विदेशी फंड के लिए फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से गलत तरीके से अनुमतियां लेने का भी आरोप लगाया गया था। बता दें उस समय पी चिदंबरम ही वित्तमंत्री थे। बाद में ईडी ने भी 2017 में उनके खिलाफ एक केस दर्ज कराया था, जिसके बाद उन्हें इस साल 16 अक्टूबर को ईडी ने अरेस्ट कर पूछताछ की थी।http://www.satyodaya.com

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अपने आखिरी वर्किंग डे पर बोले रंजन गोगोई, मौन में ही है जजों की आजादी

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लखनऊ। अयोध्या विवाद जैसे पेचीदा मामले का ऐतिहासिक फैसला और सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का आज (15 नवंबर) आखिरी वार्किंग डे था। 17 नवंबर को गोगोई रिटायर हो जाएंगे। उनकी जगह न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े लेंगे। परंपरा के मुताबिक सीजेआई रंजन गोगोई अपने अंतिम वर्किंग डे पर भावी सीजेआई बोबड़े के साथ कोर्ट रूम में बैठे। गोगोई ने महज 3 मिनट में 10 मुकदमों में नोटिस जारी किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश खन्ना ने रंजन गोगोई का धन्यवाद दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया।

अपने आखिरी वर्किंग डे पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने न्यायपालिका और सहकर्मियों के लिए संदेश नोट भी जारी किया। कुछ वर्षों पूर्व मीडिया के सामने आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार जजों में शामिल रहे गोगोई ने कहा, जजों को मौन रहकर ही अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करना चाहिए। सीजेआई ने इस दौरान प्रेस के व्यवहार की भी प्रशंसा की। गोगोई ने अपने जारी नोट में कहा, वकीलों को बोलने की आजादी है और सही भी है। लेकिन बेंच के जजों को अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग मौन रहकर करना चाहिए। जजों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए मौन रहना चाहिए। गोगोई ने स्पष्ट किया, मौन रहने का मतलब यह नहीं कि जजों को चुप रहना चाहिए। बल्कि न्यायाधीशों को अपने दायित्वों के निर्वाह के लिए बोलना चाहिए। बेवजह की बातों से बचना चाहिए।

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गोगोई ने पे्रस से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। सीजेआई गोगोई ने कहा कि मीडिया के दबाव के समय न्यायपालिका की साख को ठेस पहुंचने वाली झूठी खबरों के खिलाफ सही रुख अपनाया। रंजन गोगोई ने हाथ जोड़कर सभी सार्थियों, वकीलों, कर्मचारियों का शुक्रिया किया। कोर्ट रूम में मौजूद सभी को हाथ जोड.कर अलविदा कहा। http://www.satyodaya.com

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