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महाराष्ट्रः शिवसेना का चुनावी वादा, सत्ता में आए तो किसानों का कर्ज माफ…

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 को लेकर राजनीतिक पार्टियों की जोर आजमाइस शुरू हो गयी है। विधानसभा चुनाव में पार्टियां वोटरों को लुभाने के लिए लोकलुभावन घोषणा-पत्र जारी कर रही हैं। हरियाणा में कांग्रेस का घोषण-पत्र जारी होने के बाद शनिवार को महाराष्ट्र में शिवसेना ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपना घोषणा-पत्र जारी कर दिया है। पहले भाजपा और शिवसेना मिलकर घोषणा-पत्र जारी करना चाह रहे थे, लेकिन कुछ विषयों पर सहमति न होने के कारण दोनों पार्टियां अलग-अलग घोषणा पत्र जारी करेंगी। बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियों के बीच आरे कॉलोनी मामले और नाणार रिफाइनरी को लेकर आपसी सहमति नहीं बन पायी थी। वहीं शिवसेना कुछ जनता को लुभावने वादे करना चाह रही थी। इसके बाद शनिवार को शिवसेना ने अकेले ही अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है।

शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे, उनके बेटे और वर्ली विधानसभा सीट से उम्मीदवार आदित्य ठाकरे, पार्टी की उपनेता प्रियंका चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से घोषणापत्र जारी किया। इसमें किसानों की कर्जमाफी, 10 रुपये में भोजन, आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की शिक्षा के लिए कॉलेज, हर जिले में एक महिला बचत घर, कामकाजी महिलाओं के लिए सरकारी हॉस्टल के अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने. घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली दरों में 30 प्रतिशत की कटौती समेत कई मुद्दों पर बड़े वादे किए गए हैं।

बता दें कि शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी अपना घोषणा पत्र जारी किया था। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी महाराष्ट्र में 24 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में किसानों की कर्जमाफी और महाराष्ट्र में दिल्ली का मॉडल लागू करने की बात कही है।

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10 रुपए में भरपेट खाना, एक रुपये में स्वास्थ्य जांच

घोषणापत्र जारी करने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में गरीबों को 10 रुपये में भरपेट खाना, एक रुपये में प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा देना है। पार्टी ने पूरे महाराष्ट्र में 1,000 फूड चेन स्थापित करने का वादा किया है, जहां 10 रुपये में पूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य जांच के लिए राज्यभर में एक रुपया क्लिनिक खोले जाने की बात कही गयी है, जिसके अंतर्गत एक रुपये में 200 प्रकार की बीमारियों की जांच की जाएगी।http://www.satyodaya.com

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तीस हजारी कोर्ट मामले में HC ने आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक….

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तीस हजारी

फाइल फोटो

नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट मामले में दिल्ली पुलिस को राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी पुलिसवालों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सभी बार काउंसिल को नोटिस जारी किया है। अब मामले की सुनवाई 23 दिसंबर को की जाएगी।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच के सामने सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कहा कि ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी पूरी होने से पहले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए।

कोर्ट के इस आदेश के बाद वकीलों पर ये दबाव रहेगा कि वो हड़ताल को खत्म करें। वकील पिछले 2 हफ्ते से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे थे, लेकिन आज कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि जुडिशल इंक्वॉयरी पूरी हुए बिना पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। 3 नवंबर को कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ भी कोई सख्त कार्रवाई न करने का आदेश पहले ही कर दिया था। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई ना करने की याचिका दाखिल की थी।

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वहीं पुलिस का कहना था कि जिस तरह से वकीलों की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है, उसी तरह से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई जाए।

बता दें वकीलों ने इसका विरोध किया है। वकीलों का कहना था कि पुलिस की ये याचिका उन पुलिसवालों को जमानत दिलाने के लिए है, जिन्होंने वकीलों पर गोली चलाई और जिनकी गिरफ्तारी की मांग वकील लगातार कर रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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INX MEDIA CASE में HC ने खारिज की पी चिदंबरम की जमानत याचिका…..

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पी चिदंबरम

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर आज दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया है। पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। तब से चिदंबरम तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में  हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत की मांग करते हुए कहा गया था कि आईएनएक्स मीडिया मामले के सभी दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास हैं, इसलिए उनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। जिसके बाद ईडी ने 8 नवंबर को चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था और कोर्ट में दलील दी थी कि वह जमानत मिलने के बाद गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

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ईडी का प्रतिनिधित्व कर रही सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पूर्व वित्तमंत्री पर चल रहा धन शोधन मामला काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह एक आर्थिक अपराध है जो काफी अलग है।

74 वर्षीय चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरेस्ट किया था।वह फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में ईडी की कस्टडी में हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उन पर साल 2007 में आईएनएक्स मीडिया ग्रुप के लिए आने वाले 305 करोड़ के विदेशी फंड के लिए फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से गलत तरीके से अनुमतियां लेने का भी आरोप लगाया गया था। बता दें उस समय पी चिदंबरम ही वित्तमंत्री थे। बाद में ईडी ने भी 2017 में उनके खिलाफ एक केस दर्ज कराया था, जिसके बाद उन्हें इस साल 16 अक्टूबर को ईडी ने अरेस्ट कर पूछताछ की थी।http://www.satyodaya.com

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अपने आखिरी वर्किंग डे पर बोले रंजन गोगोई, मौन में ही है जजों की आजादी

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लखनऊ। अयोध्या विवाद जैसे पेचीदा मामले का ऐतिहासिक फैसला और सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का आज (15 नवंबर) आखिरी वार्किंग डे था। 17 नवंबर को गोगोई रिटायर हो जाएंगे। उनकी जगह न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े लेंगे। परंपरा के मुताबिक सीजेआई रंजन गोगोई अपने अंतिम वर्किंग डे पर भावी सीजेआई बोबड़े के साथ कोर्ट रूम में बैठे। गोगोई ने महज 3 मिनट में 10 मुकदमों में नोटिस जारी किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश खन्ना ने रंजन गोगोई का धन्यवाद दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया।

अपने आखिरी वर्किंग डे पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने न्यायपालिका और सहकर्मियों के लिए संदेश नोट भी जारी किया। कुछ वर्षों पूर्व मीडिया के सामने आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार जजों में शामिल रहे गोगोई ने कहा, जजों को मौन रहकर ही अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करना चाहिए। सीजेआई ने इस दौरान प्रेस के व्यवहार की भी प्रशंसा की। गोगोई ने अपने जारी नोट में कहा, वकीलों को बोलने की आजादी है और सही भी है। लेकिन बेंच के जजों को अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग मौन रहकर करना चाहिए। जजों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए मौन रहना चाहिए। गोगोई ने स्पष्ट किया, मौन रहने का मतलब यह नहीं कि जजों को चुप रहना चाहिए। बल्कि न्यायाधीशों को अपने दायित्वों के निर्वाह के लिए बोलना चाहिए। बेवजह की बातों से बचना चाहिए।

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गोगोई ने पे्रस से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। सीजेआई गोगोई ने कहा कि मीडिया के दबाव के समय न्यायपालिका की साख को ठेस पहुंचने वाली झूठी खबरों के खिलाफ सही रुख अपनाया। रंजन गोगोई ने हाथ जोड़कर सभी सार्थियों, वकीलों, कर्मचारियों का शुक्रिया किया। कोर्ट रूम में मौजूद सभी को हाथ जोड.कर अलविदा कहा। http://www.satyodaya.com

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