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मनमोहन सिंह की मोदी सरकार को सलाह, मंदी से बचने के लिए उठाएं ये 5 कदम

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नई दिल्ली। देश इस वक्त आर्थिक सुस्ती का शिकार है। अर्थव्यवस्था के कई सेक्टर्स दबाव में हैं। लोगों की क्रय शक्ति घट गई है। उद्योगों में उत्पादन घट गया है, जिससे रोजगार भी प्रभावित हुआ है। ऐसे माहौल में पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मंदी से निपटने के लिए मोदी सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। एक हिंदी दैनिक समाचार-पत्र को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि जीएसटी को तर्कसंगत बनाए और ग्रामीण खपत को बढ़ाने व कृषि को दुरूस्त करने के लिए कर्ज की कमी को दूर हो। इसके साथ ही कपड़ा और ऑटो सेक्टर्स को दुरूस्त किया जाए।

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि देश इस वक्त स्ट्रक्चरल और साइक्लिक दोनों ही तरीके की आर्थिक सुस्ती का शिकार है। उनका कहना है कि सरकार का पहला कदम तो इस बात स्वीकार करना होना चाहिए कि हम संकट का सामना कर रहे हैं। सरकार को विशेषज्ञों और सभी स्टेकहोल्डर्स की बात खुले दिमाग से सुननी चाहिए। सेक्टरवार घोषणाएं करने की बजाए अब सरकार पूरे आर्थिक ढांचे को एक साथ आगे बढ़ाने पर काम करे। उन्होंने सरकार को आर्थिक हालात को सुधारने के लिए ये पांच बड़े कदम उठाने की सलाह दी है।

  • जीएसटी को तर्कसंगत बनाना होगा फिर चाहे हमे इसके लिए कुछ समय टैक्स कलेक्शन में नुकसान  उठाना पड़े।
  • ग्रामीण खपत बढ़ाने और कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए नए तरीके खोजने होंगे। कांग्रेस के घोषणा-पत्र में ठोस विकल्प हैं, जिसमें कृषि बाजारों को फ्री करके लोगों के पास पैसा लौट सकता है।
  •  पूंजी निर्माण के लिए कर्ज की कमी दूर करनी होगी। सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक नहीं, बल्कि एनबीएफसी भी ठगे जाते हैं।
  • कपड़ा, ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और रियायती आवास जैसे प्रमुख नौकरी देने वाले क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना होगा। इसके लिए आसान कर्ज देना होगा। खासकर एमएसएमई को।
  • हमें अमेरिका-चीन में चल रहे ट्रेडवॉर के चलते खुल रहे नए निर्यात बाजारों काे पहचाना होगा। याद रखना चाहिए कि साइक्लिक और स्ट्रक्चरल दोनों समस्याओं का समाधान जरूरी है। तभी हम 3-4 साल में उच्च विकास दर को वापस पा सकते हैं।
  • सरकार को नौकरियां देने वाले सेक्टर्स को मजबूत करना चाहिए। साथ ही, उनका मानना है कि देश आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रहा है, ये स्ट्रक्चरल और साइक्लिक दोनों है।

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डॉ. सिंह ने कहा कि कि भारत बहुत चिंताजनक आर्थिक मंदी में है। पिछली तिमाही की 5 फीसदी जीडीपी विकास दर 6 वर्षों में सबसे कम है। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ भी 15 साल के निचले स्तर पर है। अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख सेक्टर्स प्रभावित हुए हैं। साढ़े तीन लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं। रियल एस्टेट सेक्टर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है, जिससे ईंट, स्टील व इलेक्ट्रिकल्स जैसे संबद्ध उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं। कोयला, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में गिरावट के बाद कोर सेक्टर की गति धीमा हो गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था फसल की कम कीमतों से परेशान है। 2017-18 में बेरोजगारी 45 साल के उच्च स्तर पर रही।http://www.satyodaya.com

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इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पास कराने के लिए अनुचित रास्ता अपनाने का आरोप

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संसद में पारित कराने से पहले इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 पर हो गहन चर्चा: शैलेन्द्र दुबे

लखनऊ। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 को लेकर सरकार पर जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया है। इसके साथ फेडरेशन ने केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा 3 जुलाई को सभी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ बुलाई गई वीडियो कान्फ्रेसिंग बैठक का भी विरोध किया है। शुक्रवार को केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री के साथ देश भर के ऊर्जा मंत्रियों की मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 प्रमुख मुद्दा होगा। इस वर्चुअल मीटिंग में वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और नई वितरण योजना पर भी निर्णय लिया जाएगा।

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ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा, बैठक के एजेंडा में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर विचार विमर्श के लिए मात्र 35 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। जिससे पता चलता है कि केन्द्र सरकार इस बिल पर राज्यों की राय लेने की महज औपचारिकता निभा रही है। सरकार इस बिल को जल्दबाजी में आगामी मानसून सत्र में पारित कराना चाहती है।

हर राज्य को अपना पक्ष रखने का मिले मौका

श्री दुबे ने कहा, देश के 11 राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय विद्युत मंत्री को पत्र भेजकर कड़ा ऐतराज जताया है। इसके बावजूद सरकार इस बिल पर गहन विचार-विमर्श से बच रही है। शुक्रवार को होने वाली मीटिंग में हर राज्य को अपना पक्ष रखने के लिए कम से कम 30 मिनट का समय मिलना चाहिए। लेकिन महज 35 मिनट में सभी 30 राज्यों की बात सुन ली जाएगी।

बिल का विरोध करने के लिए राज्यों को भेजा मेल पत्र

ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा, बहुमत होने के चलते सरकार यह बिल संसद में पारित कराने की तैयारी कर चुकी है। लेकिन यह अनुचित और अलोकतांत्रिक है। फेडरेशन ने देश के सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों और ऊर्जा मंत्रियों को पत्र मेल कर अपील की है कि 3 जुलाई को होने वाली मीटिंग में वह इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर जल्दबाजी में लिए गए निर्णय का विरोध करे। फेडरेशन ने राज्यों से अपील की है कि वह मांग करें कि इस बिल पर गहन चर्चा के लिए इसे संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। ताकि सभी स्टेकहोल्डरों खासकर किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले।

इन मुद्दों पर बिल का हो रहा विरोध

बता दें कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 में मुनाफे वाले क्षेत्र के विद्युत् वितरण को फ्रेंचाइजी को देने, किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को बिजली टैरिफ में मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने जैसे कई प्रमुख मुद्दे शामिल किए गए हैं। देश के 11 राज्यों के मुख्यमंत्री, हजारों बिजली कर्मचारी और करोड़ों उपभोक्ता इन्हीं मुद्दों का विरोध कर रहे हैं। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना जल्दबाजी में बिल को लोकसभा में रखा गया तो देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसका राष्ट्रव्यापी विरोध करेंगे।http://www.satyodaya.com

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लद्दाख दौरा टला, सैन्य तैयारियों का लेने जाना था जायजा

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नई दिल्ली। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ का लद्दाख दौरा स्थगित हो गया है। वह शुक्रवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ लद्दाख जाने वाले थे। रक्षा मंत्री को लद्दाख में चीनी सेना के साथ सीमा पर गतिरोध के मद्देनजर भारत की सैन्य तैयारियों का जायजा लेना था। लेकिन अब उनके कार्यक्रम को रीशेड्यूल किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे की नई तारीख का जल्द ऐलान किया जाएगा।

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जानकारी के मुताबिक चीन के खिलाफ सरहद पर मोर्चा मजबूत करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत-चीन तनाव के ग्राउंड जीरो तक जाने वाले थे। राजनाथ सिंह का कल लेह पहुंचने का कार्यक्रम था। वह पूर्वी लद्दाख में चीन से बने तनाव की स्थिति पर सुरक्षा हालातों की समीक्षा करते। सूत्रों के मुताबिक दोनों देश में सहमति बनी है कि 72 घंटों तक दोनों पक्ष एक दूसरे पर निगरानी रखेंगे कि जिन बातों पर एक राय बन गई। उसे जमीन पर उतारा जा रहा या नहीं। भारत और चीन एलओसी पर स्थिति को शांतिपूर्ण बनाने के लिए प्रभावी उपाय करेंगे।http://www.satyodaya.com

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बाबरी विध्वंस केस: उमा भारती ने सीबीआई की विशेष अदालत में दर्ज कराया बयान

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लखनऊ। अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में आरोपी भाजपा की वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती गुरुवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश हुईं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने अदालत पहुंच कर अपना बयान दर्ज कराया। इस केस में उमा भारती का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में बयान दर्ज कराने वाली उमा भारती 19वीं अभियुक्त हैं। इस मामले में कुल 32 अभियुक्तों के बयान दर्ज होने हैं। इससे पहले 17 जून को भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने अपने बयान दर्ज कराए थे। उमा भारती के बाद पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के भी बयान दर्ज होने हैं।

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अयोध्या के चर्चित विवादित ढांचा विध्वंस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतम्भरा, साक्षी महाराज, राम विलास वेदांती और बृज भूषण शरण सिंह समेत 32 लोगों के बयान दर्ज होने हैं। इस मामले में कुल 49 लोग आरोपी बनाए गए थे जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है।http://www.satyodaya.com

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July 3, 2020, 12:51 am
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