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सामाजिक समस्याओं को लेकर लोगों में जागरुकता लाए मीडिया: नायडू

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नईदिल्ली: उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने मीडिया से राष्ट्रहित में स्वतंत्र, निष्पक्ष और संतुलित खबर देने तथा सामाजिक समस्याओं को लेकर लोगों में जागरुकता लाने के लिए अभियान चलाने का अनुरोध किया है। नायडु ने यहाँ राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर आयाेजित समारोह को सम्बोधित करते हुये कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान पत्रकारिता मिशन था और उस दौरान उसने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने कहा “मिशन अब कमीशन हो गया है।”

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उन्होंने कहा कि पत्रकारिता राष्ट्रीय हितों, देश की एकता एवं अखंडता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर स्वतंत्र और जिम्मेदारी पूर्ण ढंग से की जानी चाहिये। समाचार को समाचार के रूप में पेश किया जाना चाहिये, उसकी व्याख्या नहीं की जानी चाहिये। लोकतंत्र में प्रेस को अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन समाचार देने के बाद ही उसकी व्याख्या की जानी चाहिये, पहले नहीं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारिता जिम्मेदारी से की जानी चाहिये और समाचार को लेकर जो सूचना हो उसकी पुष्टि कर ली जानी चाहिये। इससे सूचना का महत्व बढ़ जाता है। उन्होंने कहा “आज ऐसी स्थिति हो गयी है कि किसी घटना के संबंध में एक अखबार को पढ़ने से उसकी सही तस्वीर नहीं बनती है। विभिन्न अखबार एक ही खबर को अलग-अलग ढंग से पेश करते हैं।”http://www.satyodaya.com

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डाॅ. कफील खान का निलंबन वापस लेने के लिए सीएम योगी को पत्र लिखेगा आईएमए

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लखनऊ। गोरखपुर मेडिकल काॅलेज के चर्चित आक्सीजन कांड में दोषी ठहराए गए डाॅ. कफील खान को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का साथ मिला है। शनिवार को डाॅ. कफील खान ने दिल्ली में आईएमए के महासचिव व अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। मीटिंग के बाद आईएमए ने कहा कि बीआरडी मेडिकल काॅलेज के आक्सीजन कांड की जांच रिपोर्ट में डॉक्टर कफील खान को क्लीन चिट दी जा चुकी है। इसके बावजूद उनका निलम्बन समाप्त न किया जाना गलत है।

आईएमए ने कहा कि हाई कोर्ट से क्लीन चिट के बाद भी डाॅ. कफील का निलम्बन समाप्त न करना योगी सरकार की मुख्य आरोपियों को बचाने की कोशिश है। आईएमए ने इस बात पर भी असंतोष जताया कि डॉ. कफील खान पर पुनः नये आरोप लगाकर नई जांच शुरू कर दी है। यह जांच 31 अक्टूबर 2019 को खत्म होनी थी। लेकिन अभी तक जांच जारी है। पदाधिकारियों ने कहा कि आईएमए जल्द ही योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर जांच जल्द से जल्द समाप्त कर डॉक्टर कफील खान के निलंबन को वापस लेने की मांग करेगा।

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डॉक्टर कफील खान ने अपनी लिखी पुस्तक ’मनिपाल मैन्यूअल ऑफ क्लिनिकल पीडियाट्रिक’ आईएमए के अधिकारियों को प्रस्तुत की जिसकी सबने सराहना की। बता दें कि 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल काॅलेज में अचानक कुछ ही घण्टों के अंदर करीब 60 बच्चों की मौत हो गयी थी। घटना की जांच में पाया गया कि बच्चों की मौत आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध न होने के चलते हुई। प्रारंभिक जांच में इस कांड में डाॅ. कफील की गंभीर लापरवाही सामने आई थी।http://www.satyodaya.com

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डीडीसीए अध्यक्ष पद से रजत शर्मा ने दिया इस्तीफा

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नई दिल्ली: दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रजत शर्मा ने शनिवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया। लेकिन इस्तीफे के साथ यह भी जता दिया कि इस संस्था के साथ काम करना बिल्कुल आसान नहीं है।

पेशे से पत्रकार शर्मा ने इस्तीफा देने के बाद ट्वीट कर कहा, “प्रिय सदस्यों, जबसे आपने मुझे डीडीसीए का अध्यक्ष चुना है, मैं समय-समय पर आपको अपने काम के बारे में जानकारी देता रहा हूँ। मैंने डीडीसीए को बेहतर बनाने के लिए पेशेवर और पारदर्शी जो कदम उठाये उसके बारे में आपको बताया है। आपसे किए गए वादों के पूरा होने की जानकारी दी।”

उन्होंने कहा, “यहाँ काम करना आसान नहीं था लेकिन आपके विश्वास ने मुझे ताक़त दी। आज मैंने डीडीसीए का अध्यक्ष पद छोड़ने का फ़ैसला किया है और अपना इस्तीफ़ा शीर्ष परिषद को भेज दिया है। आपने जो प्यार और सम्मान मुझे दिया है उसके लिए आपका आभार।” वरिष्ठ पत्रकार शर्मा जुलाई 2018 में डीडीसीए के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।

शर्मा ने अपने इस्तीफे में कहा,“ मैंने अपने कार्यकाल के दौरान कई परेशानियों और विरोधों का सामना किया लेकिन फिर भी अपना कर्तव्य निभाने का पूरा प्रयास किया। लेकिन मैं केवल एक लक्ष्य के साथ काम करता रहा कि सदस्यों से किये सभी वादों काे पूरा किया जाए और खेल का विकास हमेशा से मेरे लिये सर्वाेपरि रहा।

शर्मा ने साथ ही कहा कि डीडीसीए में काम करने में काफी दबावों और विरोधों का सामना करना पड़ता है और हर कोई आपको पीछे खिंचने की कोशिश में लगा रहता है। उन्होंने कहा,“ यह क्रिकेट संस्था दबाव और विरोधों से भरी हुई है तथा लोगों का निजी स्वार्थ क्रिकेट के हितों के खिलाफ है। मेरे लिये डीडीसीए में अपने सिद्धांतों पारदर्शिता, ईमानदारी और सच्चाई के साथ काम करना संभव नहीं है, जिससे समझौता करना मेरे लिये संभव नहीं है।”

गौरतलब है कि डीडीसीए में जाने माने पत्रकार की बतौर अध्यक्ष नियुक्ति का कई पूर्व क्रिकेटरों ने विरोध किया था, वहीं उनके काम करने के तरीके पर भी पिछले काफी अर्से से सवाल उठ रहे थे जिसमें क्रिकेट संस्था को अपने नोएडा स्थित समाचार चैनल से ही संचालित करने जैसे आरोप शर्मा पर लगे थे।
हाल ही में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में दिल्ली की टीम का खराब प्रदर्शन और जम्मू कश्मीर जैसी कम अनुभवी टीम से मिली निराशाजनक हार के बाद भी डीडीसीए को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी।http://www.satyodaya.com

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मोदी सरकार नियमों में करेगी फेरबदल, अब सभी को एक ही दिन मिलेगी सैलरी

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मोदी सरकार

फाइल फोटो

नई दिल्ली। मोदी सरकार आए दिन नए-नए नियम लागू करती है। वह कई सारे नियमों में फेरबदल भी कर चुकी है। ऐसे में अब आने वाले दिनों में जॉब करने वाले लोगों को सैलरी मिलने वाले सिस्टम को भी बदला जा सकता है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ‘वन नेशन, वन पे डे’ लागू करने के बारे में विचार कर रही है।

इसमें सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चाहते हैं कि इस तरह का कानून बनाकर जल्द से जल्द पास हो जाए। दरअसल, श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने ‘वन नेशन, वन पे डे’ सिस्टरम को लेकर जानकारी दी है।

संतोष गंगवार ने कहा, ” पूरे देश में एक समान व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके तहत हर सेक्टर में सभी वर्ग के कर्मचारियों और मजदूरों को एक दिन सैलरी मिले। ऐसा पीएम मोदी खुद चाहते हैं इस बाबत कानून जल्द से तैयार होकर संसद से पास हो जाए। ”

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 ‘वन नेशन, वन पे डे’ के लागू होने के बाद संगठित क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को एक ही दिन सैलरी मिलेगी। क्योंकि अभी तक वेतन मिलने का कोई भी सिस्टम टी नहीं था।

इतना ही नहीं उन्होंने कहा वर्तमान में कंपनियां या संस्था अपने कर्मचारियों को सुविधा के हिसाब से महीने के किसी भी दिन सैलरी दे देती हैं। अधिकतर कर्मचारियों को महीने की 30 या 31 तारीख के अलावा 7 और 15 तारीख को सैलरी मिलती है।वहीं सरकार यूनिफॉर्म मिनिमम वेज प्रोग्राम को लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। वहीं सरकार व्यावसायिक सुरक्षा, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडीशन कोड, कोड ऑन वेजेज को लागू करने की भी तैयारी चल रही है।http://www.satyodaya.com

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November 16, 2019, 5:32 pm
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