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कहीं आप भी तो नहीं मोबाइल एडिक्ट? केजीएमयू में रोज पहुंच रहे 5 से 10 मरीज

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लखनऊ। लोगों की जरूरत के लिए अस्तित्व में आया मोबाइल कब लोगों की मजबूरी बन गया, पता ही नहीं चला। हर किसी के हाथ में मोबाइल है, ज्यादातर एंडायड। देश में मोबाइल यूजर्स की संख्या 104 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इस छोटे से मोबाइल में पूरी दुनिया समायी हुई है और मोबाइल की इसी आभासी दुनिया में आज का युवा खुद को कहीं खोता जा रहा है। तमाम सोशल साइट्स पर घण्टों समय कब बीत जाता है, पता हीं नही चलता। मोबाइल कंपनियां भी लोगों की इस खुमारी का भरपूर लाभ उठा रही हैं। हालत यह है कि अब ऐप लोगों को याद दिला रहे हैं कि उन्हें कब खाना है, कब सोना है यहां तक कि कब पानी पीना है। यानी मोबाइल अब सुविधा से ज्यादा मजबूरी बन गया है। मोबाइल से यह यारी लोगों को अब मुसीबत का सबब भी बन रही है। मोबाइल पर दिन-रात चिपके रहने वाले मोबाइल एडिक्शन के शिकार हो रहे हैं। ऐसे लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इंटरनेट और सोशल साइट के तिलिस्म ने लोगों को मोबाइल एडिक्ट बना दिया है। यह ऐसा नशा है जो व्यक्ति को अपनी आस-पास की दुनिया से अलग ही नहीं करता बल्कि उसकी मनोदशा भी बिगाड़ रहा है। हर समय सिर झुकाकर मोबाइल में ही खोए रहने वाले लोगों को मोबाइल एडिक्ट की श्रेणी में रखा जा रहा है। इसके शिकार युवा और बुजुर्ग ही नहीं बल्कि 2 से 14 साल की आयु वर्ग के बच्चे व किशोर भी हैैं।

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मोबाइल का यह नशा देश के युवाओं को तेजी से जकड. रहा है। जिसके चलते राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में ऐसे मरीजों के इलाज के लिए अलग से क्लीनिक चलाया जा रहा है तो वहीं पंजाब के अमृतसर में मोबाइल डी-एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर शुरू हो चुका है।

केजीएमयू साइकियाट्री डिपार्टमेंट के डाॅ. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से हमारे यहां भी ऐसे मामले आ रहे हैं। जिसके चलते इसी वर्ष फरवरी में ऐसे रोगियों के लिए behavioural treatment centre (व्यवहार उपचार केन्द्र) की शुरूआत की गयी। डाक्टर त्रिपाठी ने बताया कि इस क्लीनिक में प्रतिदिन 5 से 10 मरीज आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या 18 से 25 की उम्र के बीच वालों की होती है। उन्होंने बताया कि इसे मोबाइल एडिक्शन नहीं बल्कि टेक्निकल एडिक्शन कहना ज्यादा बेहतर है। क्योंकि मोबाइल के अलावा भी बहुत से युवा और बच्चे कम्प्यूटर पर तरह तरह के गेम खेलते रहते हैं, आईपाॅड पर घण्टों व्यस्त रहते हैं और लगातार टीवी देखते रहते हैं। ऐसे बच्चों या युवाओं की बेहतर काउंसिलिंग और इलाज की जरूरत होती है। डाॅ. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि हमारे यहां कई ऐसे केस भी आते हैं कि महिलाएं सोशल साइट्स में ज्यादा समय बिताती हैं। इससे उनके पारवारिक जीवन पर असर पड. रहा है। मोबाइल अथवा कम्प्यूटर पर अधिक समय बिताने के परिणाम स्वरूप बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, नकारात्मक विचार, ध्यान का भटकाव, अनिंद्रा और आंखों की समस्याएं सामने आ रही हैं। जिनकी इलाज केजीएमयू के साइकियाटी विभाग में किया जा रहा है।

अमृतसर में मोबाइल डी-एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर का संचालन कर रहे न्यूरोसाइकेट्रिक डॉ. जेपीएस भाटिया ने दावा किया कि यह देश का पहला मोबाइल डी-एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर है। इससे पहले बेंगलूरु में इंटरनेट एडिक्शन सेंटर खुले हैैं लेकिन देश के किसी भी राज्य में कभी मोबाइल डी-एडिक्शन सेंटर नहीं खुला। यहां दो से 50 साल तक के मोबाइल एडिक्ट लोगों का उपचार किया जा रहा है। अभी तक उनके पास 25 केस आ चुके हैं। जिनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों की दुनिया मोबाइल तक ही सीमित हो जाती है। और अगर उन्हें मोबाइल अथवा सोशल साइट्स से दूर कर दिया जाता है तो वह आक्रामक हो जाते हैं। यहां तक कि अपनी जान भी दे देते हैं।

उन्होंने कहा कि मोबाइल एडिक्शन का शिकार अधिकतर बच्चे स्कूल गोइंग हैं। वह लगातार मोबाइल से जूझते दिखाई देते हैैं। इस कारण बच्चों और युवाओं में शारीरिक समस्याएं बढ़ रही हैैं। डायबिटीज का खतरा, अनिद्रा, कब्ज, मोटापा, हाइपरटेंशन, आंखों में जलन, अस्थमा आदि आम है। जब सोशल मीडिया एप कई घंटे बंद रहे या ठीक से काम न करे तो उसे तकनीक की भाषा में एप का डाउन हो जाना कहते हैं। इस साल भारत में कई मौकों पर ऐसा देखने को मिला है कि ऐसा हुआ है। इस बारे में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अनुराग तिवारी ने बताया कि आज कल लोग खासकर युवा वर्ग मोबाइल का आदी हो चुका है। इंरटरनेट अथवा सोशल साइट्स से कुछ घण्टों की दूरी भी असहज और बचैन कर देती है।

माता पिता क्या करें-

बच्चों को मोबाइल फोन न दें। अगर मजबूरी में कुछ समय के मोबाइल देना भी पड़े तो ऐसे गेम डिलीट कर दें जिससे बच्चों के व्यवहार में आक्रामकता आती है। स्क्रीन की ब्राइटनेस 100 से 15 कर दें। बच्चों को ज्यादा इनडोर और आउडटोर खेल खेलाएं। उन्हें उनके मनपसंद खिलौने लाकर दें। बच्चों से बातें करें और उन्हें समय दें।http://www.satyodaya.com

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डां. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर होगा कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर डां. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखे जाने की घोषणा की साथ ही पोर्ट के 33000 पेंशनधारकों और 3500 कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 5001 करोड़ की राशि देने का भी ऐलान किया।

जहाजरानी मंत्री मनसुख मांडवीय ने देश के सबसे पुराने कोलकाता बंदरगाह के दशकों बाद वर्ष 2019-20 के दौरान मुनाफा अर्जित करने की घोषणा की। यह बंदरगाह विभिन्न कारणों से पिछले दो दशकों से अधिक समय से घाटे में चल रहा था। पीएम मोदी ने बंदरगाह की 150वें वर्षगांठ पर यहां आयोजित समारोह में जीवन बीमा निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी को बंदरगाह के पेंशनधारकों और मौजूदा कर्मचारियों के सामाजिक कल्याण के लिए गारंटी के तौर पर 5001 करोड़ का चेक सौंपा।

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पीएम मोदी ने कहा कोलकाता पोर्ट सिर्फ जहाजों के आने-जाने का स्थान नहीं है, ये एक पूरे इतिहास को अपने आप में समेटे हुए है। इस पोर्ट ने भारत को विदेशी राज से स्वराज पाते देखा है। सत्याग्रह से लेकर स्वच्छाग्रह तक इस पोर्ट ने देश को बदलते हुए देखा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पोर्ट के आधुनिकीकरण एवं आने वाले वर्षों में मांगों के अनुरूप मशीनों को तैयार करने के लिए 600 करोड़ की परियोजनाओं का भी एलान किया। इस वर्ष हल्दिया में मल्टीमॉडल टर्मिनल और फरक्का में नेविगेशनल लॉक को तैयार करने का प्रयास है।

उन्होंने इस बात पर गहरा अफसोस जताया कि पश्चिम बंगाल के किसान केंद्र प्रायोजित दो योजनाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल को छोड़कर देश के आठ करोड़ किसानों को पीएम किसान समान निधि के जरिये सीधा फायदा पहुंचाते हुए उनके खाते में राशि पहुंचाने का काम किया गया है जिस पर कुल 43000 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं।http://www.satyodaya.com

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कैंसर रोगियों की सुविधा के लिए मुंबई में बनेगा जम्मू कश्मीर भवन

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नई दिल्ली। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर ने मुंबई में जम्मू कश्मीर भवन बनाने का फैसला लिया है। यह फैसला वहां के लोगों के लिए मुुबई में इलाज के दौरान ठहराने के लिए लिया गया है। मुंबई में भवन का निर्माण हो जाने से जम्मू कश्मीर के लोग वहां कैंसर के इलाज के दौरान रूक सकेंगे।

जम्मू कश्मीर के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि जम्मू कश्मीर भवन के लिए प्रस्ताव को पिछले सप्ताह जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल जी सी मुर्मू ने मंजूरी दी है और नवी मुम्बई के खारघर में उसके लिए आधी एकड़ जमीन खरीदने के लिए पांच करोड़ रूपये की राशि जारी की गयी। अधिकारी के अनुसार जब मुर्मू को मुम्बई में ठहरने के लिए जगह ढूंढने वालों, विशेष रूप से वहां टाटा मेमोरियल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले इस केंद्र शासित प्रदेश के कैंसर रोगियों की परेशानियों के बारे में बताया गया, तब उन्होंने इसकी मंजूरी दी।

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उन्होंने कहा कि रोजाना करीब 30-40 कैंसर मरीज मुंबई जा रहे हैं और उन्हें ठहरने के लिए उपयुक्त जगह ढूढने में ढेरों परेशानियां पेश आती हैं। मुंबई में इस भवन की स्थापना के लिए 1992 में प्रस्ताव सामने रखा गया था। लेकिन उस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। अधिकारी ने बताया कि यह भवन अक्सर मुंबई जाने वाले इस केंद्रशासित प्रदेश के व्यापारियों को भी ठहरने की सुविधा उपलब्ध करायेगा । उसमें स्थानीय आयुक्त और पर्यटन विभाग के कार्यालय भी होंगे।http://www.satyodaya.com

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कच्चे तेल की कीमतों में हुई बृद्धि को लेकर घबराने की जरूरत नहीं: धर्मेंद्र प्रधान

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नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव के लेकर कच्चे तेल की कीमतों में बृद्धि हो गई हैं। जिसके बाद केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने एक बयान में कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में हुई बृद्धि को लेकर किसी को घबराने की जरूरत नही है। सरकार ने प्रतीक्षा करो और नजर रखो का रुख अपनाया है। फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नही है।

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उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक कारणों से फारस की खाड़ी वाले इलाके में तनाव है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, वैश्विक बाजार में कच्चा तेल की कोई कमी नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में कुछ तेजी आई है, लेकिन पिछले दो दिनों में इसका दाम घटा भी है। बता दें कि पिछले सप्ताह अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले शुक्रवार को चार फीसदी की तेजी आई थी। ब्रेंट क्रूड 71 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था। वहीं दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है। इससे पहले कच्चे तेल की कीमतों में सितंबर में वृद्धि दर्ज की गई थी।http://www.satyodaya.com

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