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पाकिस्तान का दोगलापन फिर हुआ उजागर, आतंकी हाफिज सईद को बताया धर्मगुरु

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भारतीय मीडिया के हाथ लगा अहम सबूत

नई दिल्ली । पाकिस्तान का दहशतगर्दों से प्रेम लगाव कोई नई बात नहीं है । सारी विश्व बिरादरी पाकिस्तान की इस फितरत से वाकिफ है और समय-समय वह पाकिस्तान को आतंकियों पर लगाम लगाने की पुरजोर नसीहत भी देती रही है । इसके बावजूद खुद पाकिस्तान भी अपनी हरकतों से इस बात का सबूत देता रहता है कि वह आतंकवादियों को खुला संरक्षण दे रहा है । अब एक बार फिर पाकिस्तान ने भारत के सबसे बड़े दुश्मन और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की तारीफ में कसीदे गढ़कर इस बात को साबित कर दिया है कि पाकिस्तान को आतंकवादियों से कितनी मोहब्बत है । इस बार भारतीय मीडिया के हाथ एक ऐसा पत्र लगा है, जिससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान न सिर्फ आतंकवादियों की पनाहगार है बल्कि उसकी जमीन पर आतंकियों का बोलबाला भी है । यह वो पत्र है जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) नसीर जंजुआ ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक आमिर हमजा को लिखा है । इस पत्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकी आमिर हमजा के लिए पाकिस्तान के एनएसए आदरसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं । इस पत्र ने आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान के दोगलेपन की पोल पूरी दुनिया के सामने खोल दी है ।

पाकिस्तानी NSA के पत्र की प्रमुख बातें

पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नसीर जंजुआ ने लश्कर प्रमुख आमिर हमजा को लिखे पत्र में उसका शुक्रिया अदा किया है । नसीर जंजुआ लिखते हैं, ‘सम्मानीय आमिर हमजा साहब, मैं उम्मीद करता हूं कि आप सही सलामत होंगे । आपने रद्दुल फसाद से संबंधित जो कागजात भिजवाए थे, मैं उसके लिए आपका शुक्रगुजार हूं । आपने बलूचिस्तान में चल रहे मेरे काम की सही पहचान की । यह आपकी दुआओं के असर से है । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर मेरे द्वारा किए जा रहे कामों की आपने प्रशंसा की है, जिसके लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूं । मैं खुदा से दुआ करूंगा कि वह मुझे और ताकत और हिम्मत बख्शे, जिससे मैं नेशनल एक्शन प्लान को असल रूप में लागू कर सकूं और देश की सेवा में पूरी ईमानदारी के साथ अपना योगदान दूं । मैं आपका बेहद शुक्रगुजार रहूंगा, यदि आप मेरे लिए दुआ करें और मुझे इसी प्रकार मार्गदर्शन देते रहें ।’

वहीं दूसरी तरफ हाफिज सईद के संगठन जमात-उद दावा के नेता आमिर हमजा ने अपनी किताब से जुड़े कई ऐसे खुलासे किए हैं जो पाकिस्तान के हुक्मरानों का आतंकी हाफिज सईद के प्रति समर्थन दर्शाते हैं । जमात-उद दावा पर लिखी गई इस किताब के जरिए आमिर हमजा ने बताया है कि संगठन के काम के लिए नवाज शरीफ और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नसीर जांजुआ ने भी हाफिज के काम की तारीफ की है । लाहौर के एक होटल में ‘जेयूडी रोल अगेंस्ट टेररिज्म’ नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए आमिर हमजा ने कहा कि हमारे नेता हाफिज सईद पाकिस्तान के इकलौते धार्मिक गुरू हैं, जिन्होंने देश के अंदर और बाहर आतंकवाद की आलोचना की है ।

अमेरिकी मीडिया ने आईएसआई को बताया तालिबान समर्थक

इससे पहले अमेरिकी मीडिया ने दावा किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) सीमावर्ती क्षेत्र में तालिबान को अब भी चोरी-छिपे सहयोग करती है । ‘वाशिंगटन टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में पाकिस्तानी सीमाक्षेत्र में उन विशिष्ट मोहल्लों और आसपास के इलाकों का जिक्र है, जिन्हें तालिबान आतंकवादी पनाहगाह की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं । रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अफगानिस्तान से आतंकवादी बेधड़क पाकिस्तानी सेना के गढ़, क्वेटा में आते जाते हैं, जहां वे सेना और इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के अधिकारियों से मिलते हैं ।http://www.satyodaya.com

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आतंकवाद पर शाह का पहला प्रहार, तीन कश्मीरी अलगाववादी नेता गिरफ्तार

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अलगाववादी नेता

फाइल फोटो

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता मसर्रत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को आतंकवाद के टेरर फंडिग मामले में अरेस्ट कर लिया है। गिरफ्तार करने के बाद एनआईए ने इन्हें दिल्ली के स्पेशल कोर्ट में किया है। जहां कोर्ट ने आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में अलगाववादी मसर्रत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को 10 दिन के लिए एनआईए की कस्टडी में भेजा है।

आपको बता दें लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद पीएम मोदी के साथ 58 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की थी। ऐसे में अमित शाह के गृह मंत्री पद संभालने के बाद यह कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ यह पहली कार्रवाई है। ऐसा लगता है कि जल्द ही कश्मीर के हालत सुधरने वाले हैं। हाफिज सईद संलिप्त रहा है। यह मामला 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के सरगना और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद से जुड़ा हुआ है।

सुनवाई के दौरान तीनों को किया गया अरेस्ट

एक वकील ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने स्पेशल जज राकेश स्याल की अदालत में बंद कमरे में चल रही सुनवाई के दौरान तीनों लोगों को गिरफ्तार किया है और 15 दिनों तक उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की है।

आरोपियों के वकील एमएस खान ने पीटीआई को बताया कि आसिया और शाह अलग-अलग मामलों में पहले से ही हिरासत में हैं, जबकि आलम को ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू-कश्मीर से लाया गया था।

इन लोगों पर 2018 में दायर हुई थी चार्जशीट

एनआईए ने 2018 में सईद, एक अन्य आतंकवादी सरगना सैयद सलाउद्दीन और 10 कश्मीरी अलगाववादियों के खिलाफ घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर धन मुहैया कराने और अलगाववादी गतिविधियों के मामले में चार्जशीट दायर की थी।

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वहीं उन्होंने कहा आरोपियों के खिलाफ जिन अपराधों के तहत चार्जशीट दायर की गई है उनमें आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धाराएं शामिल हैं।

वहीं एनआईए के मुताबिक, यह मामला 30 मई 2017 को दर्ज हुआ था और पहली गिरफ्तारी पिछले साल 24 जुलाई को हुई थी। इन पर हिज्बुल मुदाहिदीन, दुख्तरन-ए-मिल्लत और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के साथ मिलकर आतंक के लिए फंडिंग करने का आरोप है। दुख्तरन-ए-मिल्लत पर गैरकानूनी गतिविधि (प्रतिबंध) ऐक्ट के तहत बैन लगा है। शब्बीर शाह सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत धड़े का सदस्य था। पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक और कुछ अन्य अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा भी हटा ली थी।

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आपको बता दें आसिया आंद्राबी पर घाटी में फेमस आतंकी हाफिज सईद के इशारे पर पत्थरबाजी करवाने का आरोप है। हालांकि एनआईए ने पिछले साल दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में आंद्राबी या गिलानी का नाम नहीं लिया था। जबकि जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद आंद्राबी को पिछले साल दिल्ली लाया गया था। वहीं शब्बीर शाह और आसिया आंद्राबी अभी तक तिहाड़ जेल में बंद थे।http://www.satyodaya.com

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तिहाड़ जेल में बरती जा रही गंभीर लापरवाही, कैदियों के किचन में रखा मिला मौत का सामान

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नई दिल्ली। भारत में जेलों की क्या हालत है, यह छिपी हुई बात नहीं है। मीडिया में जब-कब जेलों के भीतर की तस्वीरें और की व्यवस्था की खबरें आती रहती हैं। देश की अधिकांश जेलों की बैरकें इंसान तो क्या जानवरों के रहने के लिए भी मुफीद नहीं हैं। न पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था, न ही गर्मी में पंखे और न ही सर्दी के मौसम में ठण्ड से बचने के पर्याप्त संसाधन। इन सब के अलावा कैदियों को परोसा जाने वाला खाना भी दोयम दर्जे का। कहने को तो जेल मैनुअल में बड़े-बड़े दावे और वादे किए गए हैं लेकिन यह सब सुप्रीम कोर्ट को भ्रमित करने और मानवाधिकार संगठनों से बचने का जरिया भर है, बल्कि कागजों में जेल मैनुअल के नाम पर लंबी चौड़ी लिस्ट बनाकर सरकारी धन ऐंठा जाता है।
बीते सोमवार को एक दैनिक समाचार पत्र में ऐसी ही एक और खबर प्रकाशित हुई जिसने भारतीय जेलों के दावों की पोल खोलकर रख दी। इस खबर ने दिल्ली स्थित देश ही नहीं दक्षिण एशिया के सबसे बड़े कारावास तिहाड़ जेल की पोल खोलकर रख दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यहां कैदियों को दिया जाने वाला भोजन भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों पर खरा नहीं उतरा है। यहां भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाला अधिकतर सामान घटिया किस्म का है।

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इतना ही नहीं तिहाड़ के किचन में बनने वाले भोजन में इस्तेमाल होने वाले अधिकतर डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ एक्सपायरी डेट के करीब थे। किचन में सरसों का तेल व अन्य तरल खाद्य पदार्थों के साथ फिनाइल और पेस्टीसाइड की बोतलें रखी हुई थीं। अगर जरा सी भी चूक हो जाए तो सैकड़ों कैदियों की जान पर बन आए। जेल के भीतर बरती जा रहीं इन लापरवाहियों का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में एफएसएसएआई की एक टीम ने तिहाड़ जेल का निरीक्षण किया।
अपने दौरे के दौरान खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की टीम ने जेल लंगर खाने और भोजन सामग्री के भंडारण कक्ष का भी निरीक्षण किया। इन जगहों पर टीम को गंभीर अनियमितताएं देखने को मिलीं जिनमें तत्काल सुधार लाने का आदेश दिया गया। टीम ने सरसों के तेल और पेस्टीसाइड की बोतलों को एक साथ रखे जाने को गंभीर लापरवाही करार दिया। कैदियों के लिए बनाई गयी दाल, रोटी और सब्जी भी मानकों पर खरी नहीं उतरी, जिसमें सुधार लाने का निर्देश दिया।
बता दें कि यहां के कैदी कई बार खाने को लेकर कोर्ट से शिकायत कर चुके हैं। कैदियों का कहना है कि उन्हें परोसी जाने वाली दाल इतनी पतली होती है कि उसके साथ चावल और रोटी खाना मुश्किल होता है। इस बारे में जेल प्रशासन ने कहा है कि यह सही है कि कुछ चीजें एक्सपायरी डेट के करीब थीं लेकिन वह अभी एक्सपायर नहीं हुईं थीं। कैदियों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। जेल प्रशासन ने कहा कि अन्य जो भी अनियमितताएं मिली हैं उन्हें सुधारने की दिशा में कदम उठा लिए गए हैं। कैदियों को खाने-पीने के लिए बेहतर चीजें ही दी जा रही हैं। http://www.satyodaya.com

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नीतीश के इफ्तार पार्टी पर गिरिराज ने कसा तंज, लोजपा जेडीयू से मिला जवाब…

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बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच दरार साफ-साफ सामने आने लगी है। अब इस सियासी तनातनी के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश की इफ्तार पार्टी पर तंज कसा है। ट्विटर पर गिरिराज ने इफ्तार पार्टी की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, एलजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी समेत कई नेता अलग-अलग इफ्तार पार्टियों में शिरकत करते नजर आ रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने इन तस्वीरों के साथ लिखा है-कितनी खूबसूरत तस्वीर होती जब इतनी ही चाहत से नवरात्रि पर फलाहार का आयोजन करते और सुंदर-सुंदर तस्वीरें आतीं? अपने कर्म-धर्म में हम पिछड़ क्यों जाते हैं और दिखावा में आगे रहते हैं?

वहीं गिरिराज के बयान पर जेडीयू ने पलटवार करते हुए पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने गिरिराज पर कार्रवाई की मांग की। एक बातचीत के दौरान संजय सिंह ने कहा कि गिरिराज के ट्वीट से साफ है कि ऐसे नेताओं पर बीजेपी का कोई नियंत्रण नहीं है। एलजेपी भी पूरे मामले में नीतीश के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने कहा कि नवरात्र हो या रमजान हम लोग सभी त्यौहार में जाते हैं।

यह भी पढ़ें –अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के सिर पर फोड़ा बेटे की हार का ठीकरा

बता दें कि बिहार में जेडीयू और बीजेपी के रिश्तों को लेकर कयासों का दौर जारी है। पटना में राजनीतिक दलों की इफ्तार पार्टियों ने इसको और हवा दे दी है। लोकसभा चुनाव में चारों खाने चित्त हुए महागठबंधन के नेता भी अब नीतीश कुमार में सियासी संजीवनी तलाशने लगे हैं और मौके का फायदा उठाना चाहते हैं।http://www.satyodaya.com

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June 4, 2019, 6:51 pm
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