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पीके मिश्रा प्रधानमंत्री मोदी के नए प्रधान सचिव बने, पीके सिन्हा प्रमुख सलाहकार बनाए गए

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नृपेंद्र मिश्रा के पद छोड़ने के बाद पीके मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रमुख सचिव बनाया गया है। वहीं, पीके सिन्हा को प्रमुख सलाहकार बनाया गया है। बता दें, पीके मिश्रा पूर्व कैबिनेट सचिव रह चुके हैं।

गैरतलब है कि पीएम मोदी ने अपने ट्विट में लिखा कि 2019 के चुनाव नतीजे आने के बाद श्री नृपेंद्र मिश्रा जी ने खुद को प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद से सेवामुक्त किए जाने का अनुरोध किया था। तब मैंने उनसे वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने का आग्रह किया था।

पीएम ने अपने ट्विट में आगे लिखा था कि 2014 में जब मैंने प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभाला, तब मेरे लिए दिल्ली भी नई थी और नृपेंद्र मिश्रा जी भी नए थे। लेकिन दिल्ली की शासन-व्यवस्था से वे भली-भांति परिचित थे। उस परिस्थिति में उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में अपनी बहुमूल्य सेवाएं दीं। उस समय उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से मेरी मदद की, बल्कि 5 साल देश को आगे ले जाने में, जनता का विश्वास जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक साथी के रूप में 5 साल तक हमेशा उन्होंने साथ दिया।

आपको बता दें कि मिश्रा 2006 से 2009 के बीच ट्राई (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) के अध्यक्ष रह चुके हैं और 2009 में ही रिटायर हुए। ट्राई के पूर्व अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा 1967 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर के हैं। मिश्रा उत्तर प्रदेश से हैं और राजनीति शास्त्र एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर हैं। मिश्रा की अध्यक्षता में ट्राई ने अगस्त 2007 में सिफारिश की थी कि स्पेक्ट्रम की नीलामी की जानी चाहिए। मिश्रा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले की सुनवाई में दिल्ली की एक अदालत में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पेश हो चुके हैं।

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संयुक्त राष्ट्र ने ठुकराई पाक की अपील, कश्मीर पर मध्यस्थता से किया इनकार

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नई दिल्ली। भारत ने जबसे जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे में संशोधन किया है तबसे पाकिस्तान पूरी दुनिया के आगे गिड़गिड़ा रहा है। लेकिन उसे हर जगह से सिर्फ ठोकरें ही मिली है। अब पाक को संयुक्त राष्ट्र में भी मुंह की खानी पड़ी है। बुधवार को यूएन ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता को लेकर पाक को साफ-साफ जवाब दे दिया कि यह मुद्दा दोनों देशों की आपसी बातचीत के जरिए ही सुलझाया जाए और उसकी मध्स्तथता की अपील खारिज कर दी।

यूएन के सेक्रेटरी जनरल के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, ‘मध्यस्थता पर हमारी स्थिति पूर्ववत ही है, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। महासचिव ने दोनों देशों की सरकार से संपर्क किया है। जी-7 की बैठक में भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस पर चर्चा की और पाकिस्तान के विदेश मंत्री से इस पर बात हुई है।’

इसके साथ ही यूएन का कहना है कि दोनों देशों के कश्मीर मसले का हल शांतिपूर्ण तरीके से और आपसी बातचीत के जरिए निकालना चाहिए। बता दें, ऐसा कर यूएन भारत के रूख का ही समर्थन किया है क्योंकि भारत कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष के मध्यस्थता करने का विरोध करता है।

ये भी पढ़ें: अभिषेक मनु सिंघवी का मोदी सरकार पर तंज, कहा- मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है। भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय के सचिव ने कहा कि हमारे कदम से पाकिस्तान को अहसास हो गया है कि उसके आतंकी मसूबे अब कामयाब नहीं होंगे। भारत ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा भड़काने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया।http://www.satyodaya.com

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अभिषेक मनु सिंघवी का मोदी सरकार पर तंज, कहा- मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू

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लखनऊ। देश की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। कई सेक्टर्स दबाव में हैं ऐसे में विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावार है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान पर निशाना साधा है जिसमें उन्होंने ऑटोमोबाइल जगत में आई मंदी का कारण नौजवानों का ओला-उबर और मेट्रों को प्राथमिकता देना बताया था। इसके साथ ही सिंघवी ने पीएम मोदी की देश को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर भी सवाल खड़े किए।

उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘जो कुछ भी अच्छा हुआ है, वह हमारे द्वारा किया गया है। जो कुछ भी बुरा हुआ है, वह दूसरों द्वारा किया गया है। फिर लोगों ने आपको क्यों चुना है?’

उन्होंने एक और ट्वीट किया कि, ‘मोदीजी के ट्विटर फॉलोअर्स 50 मिलियन को पार कर गए हैं। अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन (डॉलर) को पार कर जाएगी, लेकिन कैसे? युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, क्या आप इसके लिए भी विपक्ष को जिम्मेदार ठहराएंगे। उबर, ओला ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है बंटाधार।’

ये भी पढ़ें: ब्रिटेन के आर्कबिशप ने जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए मांगी माफी, बोले- शर्मिंदा हूं

बता दें, वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा था कि ऑटो सेक्टर में आई मंदी का कारण युवाओं की सोच में बदलाव है। युवा अब खुद गाड़ियां ने खरीदकर ओला, उबर जैसे ऑनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। http://www.satyodaya.com

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ब्रिटेन के आर्कबिशप ने जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए मांगी माफी, बोले- शर्मिंदा हूं

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लखनऊ। जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन उसके जख्म हम भारतीयों के जहन में आज भी ताजा हैं। 13 अप्रैल 1919 को हजारों निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता का यह वो जघन्य कृत्य है जिसे वो चाह कर भी कभी भुला नहीं सकता। कुछ ऐसा ही एंग्लिकन चर्च के सबसे वरिष्ठ पादरी और केंटबरी के आर्चबिशप जस्टिन वेल्बी के साथ हुआ है। वह मंगलवार को जलियांवाला बाग स्मारक पहुंचे और दंडवत होकर 1919 के नरसंहार में मारे गए लोगों को नमन किया। उन्होंन कहा, ‘मैं यहां ब्रिटिश गोलियों का शिकरा हुए लोगों के सामने पश्चाताप करने आया हूं। यहां जो अपराध हुआ, उसके लिए मैं बेहद शर्मिंदा हूं और माफी मांगता हूं।

आर्कबिशप जस्टिन वेल्बी ने कहा, ‘आपको याद है कि उन्होंने क्या किया है और उनकी स्मृति जीवित रहेगी. मुझे शर्म आती है और यहां किए गए अपराध के लिए खेद है, एक धार्मिक नेता के रूप में मैं इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करता हूं।’

उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘मुझे आज अमृतसर में हुए भीषण जलियांवाला बाग नरसंहार के स्थल पर जाकर शोक, विनम्रता और गहरा शर्म का एहसास हुआ है. 1919 में यहां बड़ी संख्या में सिखों के साथ-साथ हिंदू, मुस्लिम और ईसाई भी मारे गए।’

1800 से अधिक लोग मारे गए थे

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में एक जनसभा रखी गई थी। डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी तथा रोलट एक्ट के विरोध में लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए यहां जमा हुए थे, इसमें औरतें, मर्द, बच्चे सब थे। वहां एकत्रित लोग इस बात से अंजान थे कि पूरे पंजाब समेत अमृतसर में मार्शल लॉ लग चूका है। सब कुछ बड़े शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था। इसी समय जरनल डायर (रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर) ने अपने 90 सैनिकों के साथ जलियांवाला बाग की घेराबंदी कर दी और अपने सैनिकों को फायर करने का आदेश दे दिया। पूरे दस मिनट तक गोलियां चलती रहीं। लोगों ने जान बचा कर भागने की कोशिश की मगर दरवाजे बंद हो चुके थे, जो रास्ता खुला था वह इतना तंग था कि लोग भागने में नाकाम रहे और अंग्रेज सिपाहियों की गोलियों का शिकार हो गए। 1650 राउंड फायर होने के बाद सभी सिपाहियों की गोलियां खत्म हो गयीं।

हवा में धूल और खून के छींटे थे, हरी घास खून से लाल हो गई थी, पूरा जलियांवाला बाग मासूमों की चीखों से गूंज उठा था। हर तरफ लाशें ही लाशें दिख रही थीं। कुछ गोली से मारे गए कईयों ने कुएं में छलांग लगा दी। बाग में लगी पट्टिका पर लिखा है कि 120 शव तो सिर्फ कुएं से ही मिले। आधिकारिक रूप से मरने वालों की संख्या 379 बताई गई जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार कम से कम 1300 लोग मारे गए। स्वामी श्रद्धानंद के अनुसार मरने वालों की संख्या 1500 से अधिक थी जबकि अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉक्टर स्मिथ के अनुसार मरने वालों की संख्या 1800 से अधिक थी। उस घटना को याद कर के आज भी हर भारतीय का खून खौल उठता है।

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September 11, 2019, 4:30 pm
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