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चुनावी दंगलः अमित शाह ने कहा, नेहरू की गलती का परिणाम है पीओके और धारा 370

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नई दिल्ली। निश्चित रूप से जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का फैसला ऐतिहासिक है। गलत तरह से थोपा गया यह कानून ही था जो जम्मू कश्मीर आज तक खुद को भारत से अलग समझता रहा। लेकिन पीएम मोदी ने दूसरी बार सत्ता में आते ही जम्मू कश्मीर को धारा 370 और 35ए से मुक्त करते हुए राज्य के पुर्नगठन का ऐलान किया। मोदी सरकार अपने इस ऐतिहासिक काम को जमकर भुना भी रही है। महाराष्ट और हरियाणा विधानसभा चुनावों का ऐलान हो चुका है। भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष व गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई से चुनावी अभियान का आगाज किया। अमित शाह ने चुनावी कार्यक्रम का शुभांरभ धारा 370 और 35ए से किया और पाकिस्तान के बहाने कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। गृहमंत्री ने कहा कि धारा 370 देश को एक सूत्र में बांधने में बाधक था।

भाजपा ने दूसरी बार सत्ता में आते ही सबसे पहले इस बाधा को समाप्त किया। भाजपा और जनसंघ ने इसके अस्तित्व में आने के समय ही विरोध किया था। आजादी के 70 वर्षों से यह जम्मू कश्मीर और भारत के जुड़ाव में सबसे बड़ी बाधा रही। कांग्रेस और गांधी परिवार को निशाने पर लेते हुए अमित शाह ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू की गलती के कारण ही आज पीओके बना और आज भी मौजूद है। अमित शाह ने कहा कि अगर 1947 में जवाहरलाल नेहरू ने युद्धविराम का ऐलान न किया होता तो पीओके भारत का होता। कहा कि संस्कृति की रक्षा के लिए देश के किसी भी भाग को विशेष धारा या अनुच्छेद की जरूरत नहीं है। गुजरात, महाराष्ट और केरल को अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए तो कभी धारा 370 की जरूरत नहीं पड़ी।

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कहा कि धारा 370 के कारण ही जम्मू कश्मीर आतंकवाद की चपेट में आ गया। धारा 370 की वजह से ही घाटी में कश्मीरी पंडितों की सरेआम संहार हुआ और उन्हें भागने के लिए मजबूर कर दिया गया। धारा 370 के कारण ही जम्मू कश्मीर में 40 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। लेकिन कांग्रेस पूछती है कि धारा 370 हटाने की क्या जरूरत थी। कांग्रेस का युवराज कहता है कि इसकी क्या जरूरत है। गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा के लिए धारा 370 राजनीतिक मुद्दा नहीं है। भाजपा की तीन पीढ़ियों ने कुर्बानी दी है।
अमित शाह ने कहा कि जिन रियासतों की भारत में विलय की जिम्मेदारी सरदार बल्लभ भाई पटेल के पास थी, उन सभी को भारत में मिला लिया गया लेकिन एकमात्र जम्मू कश्मीर, जिसकी जिम्मेदारी नेहरू पर थी, उसका 70 साल तक भारत में पूर्ण विलय नहीं हो पाया।http://www.satyodaya.com

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सुशांत केस: जांच के लिए मुंबई पहुंचे पटना SP को BMC ने किया जबरन क्वारनटीन 

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पटना पुलिस को नहीं मिली सुशांत की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में महाराष्ट्र और बिहार पुलिस के बीच मतभेद बढ़ता नजर आ रहा है। जो अब खुलकर सामने आता दिखाई  दे रहा है। वहीं बिहार पुलिस लगातार महाराष्ट्र पुलिस पर आरोप लगा रही है कि सुशांत सिंह मामले में महाराष्ट्र पुलिस मदद नहीं कर रही है।

सुशांत सिंह केस मामले में जांच के लिए मुंबई पहुंचे पटना के एसपी सिटी विनय तिवारी को बीएमसी ने  क्वारनटीन कर दिया है। एसपी सिटी विनय तिवारी रविवार रात को पटना  से मुंबई पहुंचे थे। वहीं बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने ट्वीट करके कहा कि रविवार आईपीएस विनय तिवारी ऑफिशियल ड्यूटी पर पटना से मुंबई पहुंचे। लेकिन रविवार रात 11 बजे BMC अधिकारियों ने जबरन उन्हें क्वारनटीन कर दिया। उन्हें अनुरोध के बावजूद IPS Mess में आवास उपलब्ध नहीं कराया गया। वो गोरेगांव के एक गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे।

मुंबई पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान विनय तिवारी ने कहा कि हमारी टीम मुंबई में अच्छा काम कर रही है। पिछले एक हफ्तों से बयान दर्ज किए जा रहे हैं। बयानों के विश्लेषण के बाद ही नतीजे पर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि अभी तक हमें सुशांत की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। वहीं सुशांत सिंह सुसाइड मामले में मुंबई के पुलिस कमिश्नर ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की।

माना जा रहा है कि उन्होंने इस मामले से जुड़ी जानकारी सीएम के साथ शेयर की है। साथ ही बिहार पुलिस की मुंबई मौजूदगी और सोशल मीडिया पर अफवाह को लेकर जानकारी भी दी।वहीं पटना एसपी विनय तिवारी के मुंबई पहुंचने के बाद राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने ट्वीट करके कहा कि इस मामले में मुंबई पुलिस ने पहले ही जांच शुरू कर दी थी। भले ही बिहार पुलिस ने पटना में केस दर्ज किया हो।

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बता दें कि एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में आए दिन नई कहानी सामने आ रही है।  बिहार और मुंबई पुलिस के बीच जांच को लेकर मतभेद बना हुआ है। इस मामले में सीबीआई जांच की भी लगातार मांग उठ रही है।http://www.satyodaya.com

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बेकाबू कोरोना: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोविड पॉजिटिव, खुद ट्वीट कर दी जानकारी

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लखनऊ। देश में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना के मामले रोजाना नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं। जिसकी चपेट में अब नेता, अभिनेता और मंत्री भी आने लगे है। बीते दिनों यूपी सरकार की प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी वरुण का कोरोना संक्रमण से निधन की खबर आने के बाद आज रविवार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।जिसके बाद उन्हें डॉक्टर्स की सलाह पर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया है

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जिसे अमित शाह ने खुद ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है। अमित शाह ने ट्विटर पर लिखा है, कि ”कोरोना के शुरूआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूं। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग गत कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आयें हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएं।आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएं।

अमित शाह कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद शाम 4.24 मिनट पर मेदांता अस्पताल में भर्ती किए गए। उन्हें मेदांता के 14वें फ्लोर पर रूम नंबर 4710 में रखा गया है। डॉक्टर सुशीला कटारिया की निगरानी में उनका इलाज चलेगा। http://www.satyodaya.com

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महबूबा मुफ्ती की नज़रबंद बढ़ने पर बोली प्रियंका- यह आलोकतंत्रिक और असंवैधानिक है

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उन्हें रिहा करना चाहिए, सरकार कर रही तानाशाही

लखनऊ। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने महबूबा मुफ्ती की रिहाई को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। जम्मू कश्मीर प्रशासन ने पीएसए के तहत निरुद्ध पीडीपी अध्यक्ष और भाजपा की सहयोगी रहीं महबूबा मुफ्ती की हिरासत शुक्रवार को तीन महीने के लिए बढ़ा दी। साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर केंद्र ने उन्हें जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंद रखा है।

इस मामले को लेकर प्रियंका ने रविवार को ट्वीट किया उन्होनें लिखा, “हिंदुस्तान के संविधान और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले नेताओं के साथ केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा रवैया तानाशाही का प्रतीक है.”

प्रियंका ने आगे लिखा, “बीजेपी सरकार लोकतंत्र की सबसे मजबूत शैली ‘बातचीत’ से नजरें चुराने के लिए नेताओं की नजरबंदी को अपना हथियार बना रही है। मुफ्ती को नजरबंद रखना आलोकतंत्रिक और असंवैधानिक है। उन्हें रिहा करना चाहिए.”

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा, “लोकतंत्र को उस समय ज्यादा नुकसान पहुंचता है। जब भारत सरकार गैरकानूनी तरीके से सियासी दलों के नेताओं को हिरासत में लेती है। ये बेहद सही समय है जब महबूबा मुफ्ती को छोड़ा जाए।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर प्रशासन ने जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत निरुद्ध पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की हिरासत शुक्रवार को तीन महीने के लिए बढ़ा दी। बकि पिछली गठबंधन सरकार के एक अन्य सहयोगी सज्जाद गनी लोन को रिहा कर दिया। पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के पहले मुफ्ती समेत सैकड़ों लोगों को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री की हिरासत के मौजूदा आदेश की अवधि इस साल पांच अगस्त को खत्म हो रही थी। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, मुफ्ती अपने आधिकारिक आवास फेयरव्यू बंगले में अगले तीन महीने और हिरासत में ही रहेंगी। इस बंगले को उप जेल घोषित किया गया है।

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आदेश में कहा गया है, कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने हिरासत की अवधि आगे विस्तारित करने की सिफारिश की है, और इस पर गौर करने के बाद इसे जरूरी समझा गया। फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला समेत मुख्यधारा के अधिकतर नेताओं को हिरासत से रिहा किया जा चुका है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन को प्रशासन ने रिहा कर दिया। http://www.satyodaya.com

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August 3, 2020, 4:43 pm
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