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आधारभूत ढांचा निर्माण के चलते 26 मई को इस रूट पर ठप रहेगा रेल यातायात

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लखनऊ। रेलवे के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए उत्तर रेलवे का अम्बाला मंडल, सहारनपुर-अम्बाला रेल सेक्शन पर बरारा और केसरी स्टेशनों के बीच पुल संख्या 283 के एक स्पेन के गर्डर बदलने के लिए दिनांक 26 मई को सुबह 08.10 बजे से रात्रि 11.05 बजे तक सभी तरह का रेल यातायात बंद रहेगा। जिसके परिणामस्वरूप निम्नलिखित रेलगाड़ियां निम्नानुसार प्रभावित रहेंगी। जानकारी के अनुसार 25 मई को चलने वाली 14610 श्रीमाता वैष्णों देवी कटड़ा-ऋषिकेश हेमकुंट एक्सप्रेस रद्द रहेगी। इसी तरह 26 मई को चलने वाली 14609 ऋषिकेश – श्रीमाता वैष्णों देवी कटड़ा हेमकंट एक्सप्रेस, 26 मई को चलने वाली 64502 अम्बाला-सहारनपुर एमईएमयू, 12063 हरिद्वार-ऊना लिंक एक्सप्रेस, 27 मई को चलने वाली 12064 ऊना-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेस, 25 मई को चलने वाली 14617 सहरसा-अमृतसर जनसेवा एक्सप्रेस, 23 मई को चलने वाली 14618 अमृतसर-सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस, 24 मई को चलने वाली 15903 डिबू्रगढ़-चंडीगढ एक्सप्रेस, 26 मई को चलने वाली 15904 चंडीगढ-डिबू्रगढ़ एक्सप्रेस, 25 मई को चलने वाली 12357 कोलकत्ता-अमृतसर दुर्गियाना एक्सप्रेस, 27 मई को चलने वाली 12358 अमृतसर-कोलकत्ता दुर्गियाना एक्सप्रेस, 25 मई को चलने वाली 15211 दरभंगा-अमृतसर जननायक एक्सप्रेस, 27 मई को चलने वाली 15212 अमृतसर-दरभंगा जन नायक एक्सप्रेस, 26 मई को चलने वाली 14522 अम्बाला-दिल्ली एक्सप्रेस, 14521 दिल्ली-अम्बाला एक्सप्रेस, 12460 अमृतसर-नई दिल्ली सुपर फास्ट एक्सप्रेस, 14681 नई दिल्ली-जलंधर सिटी एक्सप्रेस आदि रेलगाडि.यां रद्द रहेंगी। वहीं अन्य कुछ रेलगाडि.यां आंशिक रूप रद्द रहेंगी।

आंशिक रूप से निरस्त रेलगाड़ियां

26 मई को चलने वाली 64513 सहारनपुर-नंगलडैम पैसेंजर सहारनपुर-अम्बाला के बीच, 54541 मेरठ सिटी-अम्बाला पैसेंजर सहारनपुर-अम्बाला के बीच, 4540/ 54539 अम्बाला-हजरत निजामुद्दीन-अम्बाला पैसेंजर अम्बाला-सहारनपुर-अम्बाला के बीच, 14712/14711 श्रीगंगानगर-हरिद्वार-श्रीगंगानगर इंटरसिटी एक्सप्रेस अम्बाला-हरिद्वार-अम्बाला के बीच, 12054ध्12053 अमृतसर-हरिद्वार-अमृतसर जनशताब्दी एक्सप्रेस अम्बाला-हरिद्वार-अम्बाला के बीच, 64561 दिल्ली-अम्बाला पैसेंजर सहारनपुर-अम्बाला के बीच, 24887 हरिद्वार-बाडमेर एक्सप्रेस हरिद्वार-अम्बाला के बीच, 24888 बाडमेर-हरिद्वार एक्सप्रेस अम्बाला-हरिद्वार के बीच, 12231 लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस सहारनपुर-चंडीगढ़ के बीच, 12232 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस चंड़ीगढ-सहारनपुर के बीच आंशिक रूप से निरस्त रहेगी।

यह भी पढ़ें-ड्यूटी पर मुस्तैदी छोड़ लूडो में दिलचस्पी दिखा रहे पुलिसकर्मी, कहां से सुधरे शहर का यातायात

25 मई को चलने वाली 15011 लखनऊ-चंड़ीगढ एक्सप्रेस सहारनपुर-चंडीगढ़ के बीच, 26 मई को चलने वाली 15012 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस चंडीगढ़-सहारनपुर के बीच, 26 मई को 54542 अम्बाला-मेरठ सिटी पैसेंजर अम्बाला-सहारनपुर के बीच आंशिक रूप से निरस्त रहेगी। 26 मई को चलने वाली 14645 दिल्ली जं0-जम्मूतवी शालीमार एक्सप्रेस सांय 04॰10 बजे के स्थान पर सांय 05.40 बजे प्रस्थान करेगी।http://www.satyodaya.com

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विपक्ष अभी से भर रहा हुंकार, आसानी से नहीं स्वीकारेगा अपनी हार, पुलिस प्रशासन का होगा कड़ा इम्तिहान

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23 मई को कानून व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस प्रशासन को बरतनी होगी अतिरिक्त सतर्कता और सख्ती

लखनऊ। लम्बी चुनावी प्रक्रिया के बाद अब परिणाम की बारी है। 23 मई यानी गुरुवार को इस राज से पर्दा उठ जाएगा कि अगले पांच साल तक देश की सत्ता पर किसका राज होगा। कल की शाम कितने ही उम्मीदवारों के लिए नया सवेरा लेकर आएगी तो बहुतों को निराशा के अंधकार में डुबो देगी। लेकिन जय मिले या पराजय, जनता जनार्दन का फैसला मानते हुए इसे सहर्ष स्वीकार करने में ही लोकतंत्र की जीत है और देश की भलाई भी।


‘चौकीदार’ बना विपक्ष, स्ट्रांगरूम की रखवाली दूरबीन से

#VVPAT एग्जिट पोल में एनडीए को फिर से पूर्ण बहुमत मिलने की भविष्यवाणी के बाद से ही भाजपा में खुशी की लहर है तो विपक्ष की नींद उड़ी हुई है। विपक्ष अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोडने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में संभव है कि 23 मई को जैसे-जैसे जीत-हार का राज खुलता जाएगा वैसे-वैसे हारने वाली पार्टी और समर्थकों में आक्रोश भी बढ.ेगा। ऐसी स्थिति में पुलिस प्रशासन को कानून व्यवस्था से निपटना किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा। हार के आक्रोश को काबू में रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता और सख्ती की आवश्यकता होगी।

यह भी पढ़ें-उत्तर प्रदेश में एग्जिट पोल के नतीजों ने चौंकाया

विपक्ष की तरफ से जैसी बयानबाजी हो रही है उससे लगता नहीं कि वह अपनी हार को आसानी से पचा पाएगा। चुनाव के पहले से ही विपक्ष के नेता 50 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों के मिलान की मांग कर रहे हैं। उन्हें ईवीएम पर भरोसा नहीं हैं। देश भर में कई स्थानों से ईवीएम बदले जाने के आरोप लग रहे हैं। मतगणना के आखिरी घण्टों तक विपक्ष अपनी कवायद में जुटा रहा। उसने बुधवार को चुनाव आयोग के समक्ष एक और मांग रखी कि वीपीपीएटी पर्चियों का मिलान मतों की गिनती से पहले कराई जाए न कि मतगणना के अंत में। हालांकि आयोग ने विपक्ष की इस मांग को भी ठुकरा दिया। ईवीएम तो छोडि.ए अब संवैधानिक संस्थाओं पर भी विपक्ष को भरोसा नहीं रहा। #EVMमनमुताबिक फैसले न जाने पर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के निशाने पर हैं। परोक्ष रूप से विपक्ष के नेता अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को भड.का रहे हैं। रक्षा मंत्री भी अंदेशा जता चुकी हैं कि पश्चिम बंगाल में अगर चुनाव परिणाम तृणमूल के खिलाफ के आते हैं तो वहां अराजकता हावी हो सकती है। वैसे भी चुनाव के हर चरण में बंगाल अशांत ही रहा है। भारी संख्या में केन्द्रीय अर्ध सैनिक बलों की तैनाती के बावजूद हिंसा नहीं थमी। हालत यह है कि वहां भाजपा नेता और प्रत्याशी भय के साये में हैं। उत्तर प्रदेश में चुनाव परिणामों के बाद सपा, बसपा और भाजपा समर्थकों में टकराव से इनकार नहीं किया जाएगा।#ElectionCommission

यह भी पढ़ें-भिनगा व श्रावस्ती विधानसभा में 28 व 31 राउंड में होगी मतगणना

बिहार में तो एक नेता ने यहां तक धमकी दे दी है कि मतगणना में अगर कोई धांधली हुई तो खून की नदियां बहेंगी। उनकी इस धमकी के प्रतिउत्तर में जदयू ने नेता ने कहा कि हमने भी चूडि.यां नहीं पहन रखी हैं। #Namo_Again
उपरोक्त बयानों और आरोपों से स्पष्ट है कि 23 मई को पुलिस व प्रशासन के लिए जीत का उन्माद और हार का आक्रोश दोनों को ही संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगा।
फिलहाल प्रशासन ने मतगणना के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता तैयारियां की हैं। मतगणना के दिन हर चैराहे पर पुलिस मुस्तैद रहेगी। आबकारी दुकानें बंद रहेंगी। साथ ही चुनाव आयोग ने किसी भी तरह के विजय जुलूस अथवा विरोध प्रदर्शन पर पाबंदी लगा दी है।चौराहे पर पुलिस मुस्तैद रहेगी। आबकारी दुकानें बंद रहेंगी। साथ ही चुनाव आयोग ने किसी भी तरह के विजय जुलूस अथवा विरोध प्रदर्शन पर पाबंदी लगा दी है।

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उत्तर प्रदेश में एग्जिट पोल के नतीजों ने चौंकाया

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क्या वास्तव में काम कर गया नरेंद्र मोदी का जादू

लखनऊ। पिछले साल जब सूबे में लोकसभा की तीन सीटों के लिए उपचुनाव संपन्न हुए तो परिणामो ने न केवल भाजपा बल्कि विपक्षी दलो को भी चैंकाया। कारण भी स्पष्ट था कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा का विजयी रथ इस कदर दौड़ रहा था कि हर राज्य में विरोधियो का सफाया हो रहा था। ऐसे में विपक्ष को तलाश थी एक ऐसे समीकरण की जो भाजपा को चुनौती देने के लिए पर्याप्त हो। फिलहाल तमाम अटकलों के बीच गोरखपुर, फूलपुर और कैराना की लड़ाई के लिए जब उपचुनाव का विगुल बजा तो सूबे में नए समीकरण का उदय हुआ। एक लम्बे अरसे के बाद सपा और बसपा एक साथ भाजपा को चुनौती देते नजर आई। परिणाम सबके सामने है और बस इसी सियासी घटनाक्रम के बाद लोकसभा चुनाव के लिए नए समीकरणों की नीव पड़ी।

भाजपा के सामने सपा बसपा गठबंधन

आखिरकार तमाम अटकलों के बीच लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा का गठजोड़ हो गया और इस गठजोड़ में आरएलडी भी भाजपा से दो दो हाथ करने के लिए सियासी समर में कूद पड़ी। निश्चित रूप से यह भाजपा के लिए किसी बहुत बड़ी चुनौती से कम नहीं था। फिलहाल उसे एक बात की तसल्ली अब भी थी कि नरेंद्र मोदी को लोग आज भी प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते है। फिलहाल अभी सियासी गलियारों में और भी नए समीकरणों का उदय होना बाकी था।

कहा जाता है कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की सियासी भूमि जहां विरोधियो के लिए प्रयोगशाला बन गयी तो वहीं भाजपा के लिए यह लड़ाई प्रतिष्ठा का सवाल बन गयी थी। क्योंकि यहां भी उसकी ही सरकार थी और दांव पर था योगी आदित्यनाथ का हिंदुत्ववादी चेहरा। अब तक भाजपा के लिए एक राहत भरी खबर यह थी कि जहां एक ओर अखिलेश यादव और मायावती का साथ उसकी राह मुश्किल कर रहा था तो वही कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीती में उतारकर अपनी चाल चल दी थी। और अगर राज्य में कांग्रेस मजबूत होती है तो गठबंधन के वोट कटना तय था। क्योकि मायावती का कोर वोटर दलित एक जमाने में कांग्रेस के ही साथ था, वहीं मुस्लिमों को भी राष्ट्रीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में कांग्रेस का ही समर्थक माना जाता है।

फिलहाल तमाम समीकरणों के साथ सूबे में भी सात चरणों में लोकसभा के चुनाव संपन्न हो चुके है और अब परिणाम आने में महज एक दिन का समय बाकी है। लेकिन परिणामो से पहले विभिन्न समाचार चैनलो के द्वारा किये गए एग्जिट पोल ने न केवल विपक्ष को परेशान कर दिया है वही भाजपा को भी चैंकाया है। जाहिर सी बात है कुछ एग्जिट पोल भाजपा को 60 से 68 सीटें मिलना का अनुमान है तो वही एक एग्जिट पोल में गठबंधन बेहतर करता दिखाई दे रहा है। हालांकि सभी एग्जिट पोल का विश्लेषण किया जाये तो भाजपा उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 45 से 50 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है।

अगर परिणाम एग्जिट पोल के अनुरूप आये तो…

फिलहाल एग्जिट पोल के नतीजे के अनुरूप अगर लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने आये तो निश्चित रूप से माना जायेगा की जनता ने विपक्ष द्वारा तैयार किये गए दलित, यादव और मुस्लिम समीकरण को नकार दिया है और अब उसे भाजपा को आगामी विधानसभा चुनावों मे हराने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।

क्या रहा भाजपा के लिए एक्स-फैक्टर

निश्चित रूप से जनता क्या, भाजपा ने भी नहीं सोचा होगा की उसे सूबे में इतना समर्थन मिल सकता है। फिलहाल अगर परिणाम एग्जिट पोल के अनुरूप आये तो यह केवल नरेंद्र मोदी की जीत मानी जाएगी। क्योकि पूरे चुनाव के दौरान जहाँ उन्होंने राष्ट्रवाद को बड़ा मुद्दा बनाये रखा तो वही जमीनी स्तर पर पहुंचाई गईं केंद्र सरकार की योजनाओं ने भी जीत की राह आसान की। वहीं विपक्ष के पास प्रधानमंत्री का चेहरा न होना भी भाजपा के लिए एक्स-फैक्टर रहा।

क्या सच हैं एग्जिट पोल के नतीजे?

एग्जिट पोल के नतीजे सामने आने के बाद विपक्षी दलों की बेचैनी तो बढ़ ही गयी है साथ ही यह भी चर्चा जोर पकड़ रही है की क्या एग्जिट पोल का अनुमान सही है ? अगर ऐसा है तो आखिर क्यों ? फिलहाल हमें यह नहीं भूलना चाहिए की 2014 में जहां लोगो को नरेंद्र मोदी से उम्मीदें थीं तो वही 2019 के चुनाव में उम्मीदों को भरोसे का साथ भी मिल गया था। दरअसल उज्ज्वला योजना हो, आवास योजना हो या फिर शौचालय योजना हो, इसने भाजपा के लिए ग्रामीण क्षेत्रो में जमीन तैयार की तो वही राष्ट्र सुरक्षा, जीएसटी जैसे कर सुधार कार्यक्रम ने शहरों में भाजपा को मजबूत किया। भले ही इस बार जनता पूरे चुनाव के दौरान खामोश रही हो पर कही न कही उसे प्रधानमंत्री के रूप में आज भी नरेंद्र मोदी पर ही भरोसा है।

यह भी पढ़ें : VVPAT पर चुनाव आयोग की बैठक आज, विपक्षी दलों की शिकायतों पर हो सकता है कोई फैसला

विपक्षी साबित कर रहे एग्जिट पोल की सत्यता

एग्जिट पोल के नतीजों को लेकर भले ही लोग कयास लगा रहे हों पर जिस तरह से विपक्षी दलो की हलचल बढ़ी है वह एग्जिट पोल के नतीजों को सच मानने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा ईवीएम को लेकर हो रही बयानवाजी भाजपा की जीत की आशा को और मजबूती प्रदान कर रही है।

क्या होते है एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल को लेकर आज भी तमाम तरह की अटकलों का दौर जारी है। हो भी क्यों ना? दरअसल 2004 के लोकसभा चुनाव में अटल विहारी वाजपेई की अगुआई में एग्जिट पोल भाजपा की जीत तय मान रहे थे पर हुआ बिलकुल उम्मीद से उलट। इसके बाद दिल्ली और बिहार विधानसभा के चुनावों में भी एग्जिट पोल के तमाम अनुमान धरे रह गए। हालांकि ज्यादातर एग्जिट पोल का अनुमान सही ही साबित हुआ है। आपको बता दें एग्जिट पोल का गणित एक सैंपल के तहत लोगो की राय जानकार तय किया जाता है। इसमें राजनीतिक दलों, राजनीतिक चेहरे को लेकर उनकी पसंद और विभिन्न मुद्दों को वरीयता दी जाती है। यह प्रकिया चुनाव के दौरान ही संपन्न होती है। http://www.satyodaya.com

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VVPAT पर चुनाव आयोग की बैठक आज, विपक्षी दलों की शिकायतों पर हो सकता है कोई फैसला

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सांकेतिक चित्र

लखनऊ । 23 मई मतलब कल चुनाव प्रणाम आने वाले हैं और इससे ठीक पहले विपक्षी दलों ने ईवीएम को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिया है । विपक्षी के इन सवालों के बाद बुधवार को चुनाव आयोग की दिल्ली में एक बैठक शुरू हुई है । जिसमें इस मामले में कुछ फैसला हो सकता है । बैठक में विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम नतीजों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान किए जाने की मांग को लेकर कोई फैसला हो सकता है ।

बता दें कि मंगलवार को देश की करीब 22 विपक्षी पार्टियों के नेताओं में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई और तेलुगु देसम पार्टी के प्रमुख कॉस्टीट्यूशन क्लब में बैठक की । इसमें ईवीएम में गड़बड़ी के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा हुई ।

चुनाव आयोग से मुलाकात करके ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती शुरू होने से पहले औचक (रेंडम) तरीके से चुनी जाने वाली वीवीपैट मशीन की पर्चियों की गणना कराने की मांग की । चुनाव आयोग से मुलाकात कर सौंपे गए पत्र में विपक्षी नेताओं ने वीवीपैट पर्चियों की गिनती में गड़बड़ी पाए जाने की दशा में नए तरीके से पूरे निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव कराने या पूरे निर्वाचन क्षेत्र की वीवीपैट पर्चियों की गिनती कराने की मांग की । इसके अलावा ईवीएम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के मामले को भी प्रमुखता से रखा । चुनाव आयोग ने विपक्षी नेताओं की पूरी बात ध्यान से सुनी और नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया ।

यह भी पढ़ें :मतगणना कल: ईवीएम से लेकर स्ट्रांग रूम तक नजर रखेगी सपा-बसपा

विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम और वीवीपैट को लेकर चुनाव आयोग से की गई मुलाकात पर भाजपा ने निशाना साधा है । भाजपा के नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि शुरुआती दो-तीन चरणों तक विपक्ष चुप रहा लेकिन फिर ईवीएम को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिया । विपक्ष अपनी हार की ठीकरा फोड़ने के लिए बहाना ढूंढ रहा है । वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष अब बौखलाहत में ईवीएम पर सवाल उठा रहा है ।http://www.satyodaya.com

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May 22, 2019, 8:11 pm
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