Connect with us

देश

92 के हुए आडवाणीः सत्ता सुख भोग रहे शिष्य, अलग-थलग पड़े पितामह

Published

on

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के पितामह और भारतीय राजनीति को नई धारा में मोड़ने वाले लालकृष्ण आडवाणी आज अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं। आडवाणी का जन्म अविभाजित भारत के सिंध प्रांत में 8 नवंबर 1927 को हुआ था। आज के पाकिस्तान के कराची में ही आडवाणी की प्रारंभिक शिक्षा पूरी हुई। सिंध के एक काॅलेज में उन्होंने गे्रजुएट की डिग्री ली। लालकृष्ण आडवाणी 14 साल की उम्र में ही संघ से जुड़ गए थे। 1947 में विभाजन के समय आडवाणी का परिवार मुंबई आ गया। यहां आडवाणी ने कानून की शिक्षा हासिल की।

राष्टीय भावनाओं से भरे आडवाणी ने 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित जनसंघ से जुड़े। 1977 के बाद कुछ दिनों जनता पार्टी में रहे। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर 1980 में आडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना की। इस तरह करीब चार दशक पूर्व अपने हाथों से आडवाणी ने भाजपा रूपी जो बीज बोया था, आज वह विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है, लेकिन आडवाणी इस वटवृक्ष की छांव से दूर हो गए हैं।

यह भी पढ़ें-सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी से भी वापस ली जाएगी एसपीजी सुरक्षा

जब देश के राजनीतिक क्षितिज पर कांग्रेस सूर्य चमक रहा था तब आडवाणी एक ध्रुव तारे की चमक लेेकर भारतीय राजनीति में उभरे, लेकिन आज जब उन्हीं की बनाई हुई पार्टी सत्ता के शिखर है पर है तो आडवाणी का हाल अमावस की रात जैसा है, जहां सिर्फ निराशा और अंधकार है। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए आम चुनावों में भाजपा के खाते में मात्र 2 सीटें आईं थीं। ऐसे विपरीत हालात में वह आडवाणी ने भारतीय राजनीति को नई धारा दी। आडवाणी ने भारतीय इतिहास में पहली बार किसी पार्टी के रूप में अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे को समर्थन दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि 1989 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के 85 सांसद लोकसभा पहुंचे।
लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की जोड़ी ने भारतीय मतदाताओं को भाजपा के रूप में कांग्रेस का विकल्प दिया। जिससे सही मायने में भारतीय राजनीति में लोकतंत्र की स्थापना हुई और कांग्रेस को एक मजबूत विपक्षी पार्टी मिली।

इसी बीच भारतीय राजनीति में नरेन्द्र मोदी का पदार्पण हुआ। 1984 की करारी हार के बाद संघ ने नरेन्द्र मोदी को भाजपा में भेजा गया। आडवाणी ने मोदी को गुजरात में पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद आडवाणी की ही इच्छा पर नरेन्द्र मोदी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। धीरे-धीरे नरेन्द्र मोदी अपने काम के चलते आडवाणी के सबसे खास होते गए। मोदी-आडवाणी का यह खास रिश्ता 2014 के आम चुनाव तक बना रहा।
1989 की सफलता से उत्साहित आडवाणी ने खुलकर हिन्दुत्व का समर्थन किया। आडवाणी ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए 1990 में ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली। इस रथयात्रा में नरेन्द्र मोदी ने आडवाणी के दाहिने हाथ के रूप में काम किया। राजनीतिक उठा-पटक के बीच आडवाणी और नरेन्द्र मोदी के बीच गुरू-शिष्य का रिश्ता कायम रहा। कहा जाता है कि 2002 में गोधरा कांड के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से काफी नाराज थे। लेकिन वह आडवाणी ही थे जिन्होंने वाजपेयी को मनाया और नरेन्द्र मोदी की कुर्सी बचाई।

आडवाणी ने अपनी किताब ’माई कंट्री माई लाइफ’ में लिखा है, गोधरा कांड के बाद अप्रैल 2002 में भाजपा की राष्टीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए गोवा जाते वक्ता जिन दो बड़े मुद्दों पर मेरी और वाजपेयी की एक राय नहीं थी, उनमें पहला था, अयोध्या का मुद्दा और दूसरा गुजरात दंगों पर मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का इस्तीफा। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की इच्छा के बावजूद आडवाणी की वजह से नरेन्द्र मोदी का मुख्यमंत्री पद उस दिन बच गया था।
भाजपा के वरिष्ठ नेता के मुताबिक तब अटल जी ने कहा था, कम से कम इस्तीफा ऑफर तो करते। इस पर आडवाणी ने कहा कि अगर नरेन्द्र भाई के इस्तीफा देने से गुजरात के हालात सुधरते हैं तो मैं उन्हें इस्तीफा देने के लिए कह दूंगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे हालात सुधरेंगें और मुझे इस बात पर भी यकीन नहीं हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी भी उनके इस्तीफे को मंजूर कर लेगी। आखिरकार वाजपेयी को आडवाणी की बात माननी पड़ी।

यह भी पढ़ें-वायु प्रदुषण से बचना है तो मार्निंग वॉक बंद कर दें…

2009 के आम चुनावों तक मोदी और आडवाणी के बीच सब ठीक चल रहा था। लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव आते-आते मोदी-आडवाणी के बीच ऐसी खटास बढ़ी कि फिर कभी दोनों के दिल नहीं मिले। आडवाणी चाहते तो 1995 में प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को सत्ता का शीर्ष पद सौंपकर अपना कद और भी बड़ा कर लिया। यह वह दौर था जब संघ और भाजपा में आडवाणी की तूती बोलती थी।

वह चाहते तो सहज ही प्रधानमंत्री बन सकते थे लेकिन उन्होंने कहा, इस समय भाजपा में वाजपेयी से बड़ा कोई नेता नहीं है। वाजपेयी के साथ करीब 5 दशक तक आडवाणी दो नंबर बने रहे। 2009 के आम चुनाव तक राजनीति और जीवन के ढलान पर आ चुके आडवाणी अब अपने लिए भी कुछ चाहते थे। सारे भाजपाई मिलकर आडवाणी को देश का प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे। एक चुनावी सभा में तब नरेन्द्र मोदी ने खुद कहा था, मेरी तरह भाजपा के हर कार्यकर्ता का सपना है कि लालकृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री बनें। हालांकि तब भाजपा को जीत नसीब नहीं हुई।

कहां से बढ़ी खटास

2014 के चुनाव नजदी थे, 2013 में गोवा में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में पीएम उम्मीदवार का ऐलान होना था। इस समय तक भाजपा में नरेन्द्र मोदी की छवि एक मजबूत नेता की बन चुकी थी। अधिसंख्य भाजपा नेता मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित करने के पक्ष थे, लेकिन पार्टी के पितामह आडवाणी रोड़ा बने हुए थे। राजनाथ सिंह तब पार्टी अध्यक्ष थे। आडवाणी पार्टी की कार्यकारिणी में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे। आडवाणी को मनाने की कोशिशें बेकार हुईं और नरेन्द्र मोदी की उम्मीदवारी के ऐलान नहीं हो पाया। बस यहीं से गुरू-शिष्य की के रिश्ते में खटास आ गयी।

आडवाणी की नाराजगी के बावजूद पार्टी ने 2014 के चुनाव में नरेन्द्र मोदी को अपना पीएम उम्मीदवार बनाया और ऐतिहासिक कामयाबी भी मिली। यह शायद पहला मौका था जब आडवाणी के मुताबिक कुछ भी नहीं हो रहा था। आडवाणी अपने शिष्य की कामयाबी के किसी जश्न में भी शामिल नहीं हुए। लालकृष्ण आडवाणी जनता के मूड और समर्थन को न तो समझ पाए थे और न ही स्वीकार कर पा रहे थे। उस समय आडवाणी यदि बड़प्पन दिखाते तो शायद रायसीना हिल्स तक पहुंचकर का उनका सपना पूरा हो जाता।

अधूरा रह गया सपना

इस बेरूखी के लिए नरेन्द्र मोदी भी शायद अपने गुरू को दिल से नहीं माफ कर पाए। 2017 में भाजपा चाहती तो अपने पितामह को राष्ट्रपति बनाकर उनके राजनीतिक सफर और संघर्ष को नया आयाम दे सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 2 सीटों से 303 सांसदों तक पहुंच चुकी भाजपा में आज आडवाणी अलग-थलग पड़ गए हैं। अपने जीवन की संध्या में पहुंच चुके आडवाणी को भाजपा ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है।

अपने बोये हुए बीज को एक विशाल वृक्ष के रूप में देखकर आडवाणी शायद उतने प्रसन्न नहीं होंगे, जितने निराश इस बात से होंगे कि उनकी ही क्षत्रछाया में राजनीति का ककहरा सीखने वाले नेता आज उनकी सलाह लेना भी मुनासिब नहीं समझते। भाजपा के लौहपुरुष की यह निराशा गाह-बगाहे झलक भी जाती है। http://www.satyodaya.com

देश

मुकेश अंबानी ने अपने कर्मचारियों को महामारी के खिलाफ बताया ‘अग्रणी योद्धा’

Published

on

कहा, हमारे लाखों कर्मचारियों ने पेश की प्रतिबद्धता की मिसाल

लखनऊ। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैनल मुकेश अंबानी ने अपने महामारी के बीच ड्यूटी में जुटे अपने कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया है। देश के सबसे अमीर उद्योगपति अंबानी ने आरआईएल के कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान देश की जीवनरेखा संभालने वाला ‘अग्रणी योद्धा’ बताया है। मुकेश अंबानी ने कहा कि इस मुश्किल समय में भी हमारे लाखों कर्मवारी दूरसंचार से लेकर खुदरा स्टोर और पेट्रोल पंपों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो। इस तरह कोविड-19 संकट से निटपने के प्रयास में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) अपनी ओर से महत्वपूर्ण योगदान कर रही है। श्री अंबानी ने अपने संदेश में कहा, मुश्किल के समय में हालात का सामना करते हुए असाधारण प्रतिबद्धता दिखाने लिए मैं अपने कर्मचारियों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।


टंबानी ने कर्मचारियों के विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए ‘माई वॉयस’ प्लेटफॉर्म के शुभारंभ की भी घोषणा की है। अंबानी ने अपने संदेश में लिखा, इन सभी प्रयासों का समर्थन करना, रिलायंस से इंजीनियरिंग, निर्माण, कॉर्पोरेट सेवाओं, मानव संसाधन, वित्त, वाणिज्यिक और सुरक्षा सेवाओं तक कई कार्य हैं। समूह के कर्मचारी इन कठिन परिस्थितियों के माध्यम से रिलायंस को उत्पादक बनाए रखने में एक भूमिका निभा रहे हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमारे प्रत्येक सहकर्मी को ‘अग्रणी योद्धा’ के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए।

कोरोना हराए बिना आराम नहीं करना है

मुकेश अंबानी ने कहा कि कंपनी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है, लेकिन तब तक आराम नहीं किया जा सकता है, जब तक भारत कोरोना वायरस आपदा पर पूरी तरह से विजय प्राप्त नहीं कर लेता है। उन्होंने कहा, ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट अकेले चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमारे हाथों में आर्थिक और मानवीय संकट को भी संबोधित किया जाना चाहिए। रिलायंस परिवार में आप में से प्रत्येक के पास भारत को सुरक्षित, स्वस्थ और मजबूत बनाने की शक्ति है।

लाॅकडाउन के बीच जारी हैं सेवाएं

बता दें कि देश में कोरोना वायरस महामारी के चलते जारी 21 दिनों के बंद के दौरान 130 करोड़ देशवासियों में ज्यादातर अपने घरों में हैं। रिलायंस टेलीकॉम की शाखा जियो लगातार 40 करोड़ लोगों को वायस कॉलिंग और इंटरनेट सेवाएं मुहैया करा रही है। रिलायंस रिटेल लाखों लोगों को खाद्य और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति कर रही है ।

यह भी पढ़ें-कोरोना हाॅटस्पाॅट क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लोगों का होगा परीक्षण

रिलायंस लाइफ साइंसेज कोविड-19 के परीक्षण की क्षमता बढ़ा रही है और मुंबई में सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल ने कोरोना वायरस के इलाज के सिर्फ 10 दिनों में 100 बेड तैयार किए हैं। इसके अलावा कंपनी कि रिफाइनरी से लगातार ईंधन और अन्य पेट्रोलियम वस्तुओं का उत्पादन जारी है और पेट्रोकेमिकल प्लांट ऐसे उत्पादों का मंथन करते रहते हैं, जिनमें दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद शामिल हैं।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

देश

कोरोना के कर्मवीरों के लिए CM नीतीश ने अपने आवास पर जलाए कैंडल

Published

on

लखनऊ। बिहार के राज्यपाल फागू चौहान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस को समाप्त करने के लिए एकजुटता और दृढ़संकल्प जताने के लिए रविवार की रात को दीप जलाए। राज्यपाल फागू चौहान ने राजभवन में रविवार रात 9 बजे नौ मिनट तक दीप जलाकर कोरोना-संकट को समाप्त करने के लिए जारी संघर्ष की सफलता के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

यह भी पढ़ें-धर्मगुरुओं ने की अपील- शब-ए-बरात पर कब्रिस्तान न जाएं…घरों में ही करें इबादत

प्रधानमंत्री के प्रकाश अभियान का समर्थन किया
सुशील मोदी ने कहा,‘‘ बिहार के लोगों ने रात नौ बजे दीए या कैंडल जला कर जिस उत्साह से प्रधानमंत्री के प्रकाश अभियान का समर्थन किया, उसके लिए वे सभी वर्ग का कोटि-कोटि अभिनंदन करते है। ’’ बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबडी देवी और उनके बडे पुत्र तेजप्रताप यादव जलता हुआ। लालटेन ले कर खड़े हुए। यह उनकी पार्टी का चिह्न भी है।

उन्होंने कहा,‘‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अपील के आलोक में कोरोना-संकट के अंधकार से निबटने के लिए रोशनी जलाकर सभी लोगों ने जिस राष्ट्रीय-सामाजिक एकता और दृढ़संकल्प को अभिव्यक्त किया है, उससे यह एहसास मजबूत हुआ है कि भारत किसी भी प्रकार की चुनौती से निबटने में तत्पर और सक्षम है.’’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सरकारी आवास एक अणे मार्ग में दीप जला कर कोरोना संक्रमण के विरूद्ध अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

इससे हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत हुई है
उन्होंने कहा,‘‘ इससे हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत हुई है. हमें पूरा विश्वास है कि सम्पूर्ण देशवासियों की एकजुटता से हम सब जल्द ही कोरोना संक्रमण से मुक्ति पाने में सफल होंगे.’’ बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व उनकी पत्नी ने भी एकजुटता प्रकट करने के लिए दीप जलाया। http://www.satyodaya.com

Continue Reading

देश

राजस्थान: फतेहपुर में दीपक जलाने के दौरान दो समुदायों के बीच हुई पत्थरबाजी, एक गिरफ्तार

Published

on

नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर रविवार रात को पूरे भारत में दीपक जलाए गए। साथ ही लोगों ने ताली, थाली, शंख और पटाखे दगाये। इस दौरान राजस्थान के झुंझुनू जिले में दीये जलाते समय दो समुदाय आमने-सामने हो गए और जमकर पत्थरबाजी हुई।

यह भी पढ़ें: लॉकडाउन: हरभजन सिंह आए आगे, जालंधर के 5 हजार परिवारों को बाटेंगे राशन


झुंझुनू जिले के फतेहपुर इलाके में पीएम मोदी की अपील के बाद एक पक्ष दीये जला रहा था तभी दूसरे पक्ष ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। वहीं सूचना मिलते ही मौके पर तीन थानों की पुलिस पहुंची। जिसके बाद एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Category

Weather Forecast

April 7, 2020, 12:52 am
Clear
Clear
24°C
real feel: 24°C
current pressure: 1010 mb
humidity: 50%
wind speed: 0 m/s NW
wind gusts: 2 m/s
UV-Index: 0
sunrise: 5:20 am
sunset: 5:57 pm
 

Recent Posts

Trending