Connect with us

देश

‘ढाई किलो का हाथ’ अब भाजपा के साथ, सनी देओल हो सकते हैं विनोद खन्ना के उत्तराधिकारी  

Published

on

हीमैन पापा और ड्रीमगर्ल मम्मी के बाद अब पुत्र का ढाई किलो का हाथ भी भाजपा के साथ जुड़ गया है। जी हां, बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल ने आज सीतारामन और पियूष गोयल की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस मौके पर सनी देओल ने कहा कि ‘पापा अटल जी के साथ जुड़े थे, मैं मोदी जी के साथ जुड़ा हूं। बातें नहीं बल्कि काम कर के दिखाऊंगा।

बता दें कि सनी देओल का पंजाब के गुरदासपुर सीट से चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। इस सीट से कांग्रेस ने सुनील जाखड़ को उम्मीदवार बनाया है। जाखड़ ने उपचुनाव में जीत दर्ज की थी।

हालांकि कुछ समय पहले खबर आई थी कि धर्मेंद्र को सनी देओल का राजनीति में आना पसंद नहीं है इसीलिए सनी देओल ने साफ़ कर दिया था कि अभी उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं। लेकिन इसके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उनसे पुणे में मुलाकात की। इस बैठक की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं। इसे मिट शाह की सनी देओल से मुलाकात का नतीजा ही माना जा रहे जिससे राजनीति में अभी न आने की बात कहने वाले सनी देओल मंगलवार को भाजपा से जुड़ गए।

2017 में विनोद खन्ना के निधन के बाद ये सीट कांग्रेस के पाले में आ गई । 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हो गया। जिसके बाद उपचुनाव में जाखड़ ने जीत दर्ज की थी। विनोद खन्ना इस सीट से 2014 से पहले तीन बार सांसद चुने गए। सनी देओल के पिता धर्मेंद्र और सौतेली मां हेमा मालिनी का राजनीति से पुराना नाता रहा है। धर्मेंद्र बीजेपी के टिकट पर 2004 में राजस्थान की बीकानेर सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और उन्हें यहां जीत भी मिली थी। वहीं उनकी सौतेली मां हेमा मालिनी अभी मथुरा से बीजेपी सांसद हैं।

पंजाब में बीजेपी अकाली दल (एसएडी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है। सूबे में लोकसभा की 13 सीटें हैं। अकाली दल 10 और बीजेपी तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पंजाब में 19 मई को वोट डाले जाएंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अकाली दल ने चार, बीजेपी ने दो, कांग्रेस ने तीन और आम आदमी पार्टी ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। http://www.satyodaya.com

देश

धरना खत्म कर बाबा विश्वनाथ के दर पर पहुंचीं प्रियंका गांधी

Published

on

फाइल फोटो

लखनऊ । सोनभद्र खूनी संघर्ष में मारे गए आदिवासियों के परिजनों से मुलाकात कर प्रियंका गांधी ने अपना धरना खत्म किया । उसके बाद वो चुनार किले से निकल कर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दर पर पहुंचीं। प्रियंका गांधी ने पुजारी शीतला प्रसाद, मोहित योगेश्वर और दीपक के आचार्यत्व में विधि-विधान से भैरव अष्टक पूजन किया। इसके बाद प्रियंका गांधी वाराणसी एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गईं।

आप को बता दें कि प्रियंका गांधी शुक्रवार को वाराणसी पहुंचीं थीं। बीएचयू के ट्रामा सेंटर में सोनभद्र हत्याकांड में घायल हुए लोगों का हाल जानने। उसके बाद वो सोनभद्र के उभ्भा गांव में खूनी संघर्ष में मारे गए आदिवासियों के परिजनों से मुलाकात करने जा रहीं थी।

शुक्रवार को दिन में 11.55 बजे मिर्जापुर की रायनपुर पुलिस चौकी के सामने प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया गया। जहां पर प्रियंका गांधी धरने पर बैठ गईं। जिसके बाद एसडीएम के गाड़ी से चुनार गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रियंका सहित कांग्रेस के 10 नेताओं पर शांतिभंग की आशंका में कार्रवाई की गई। प्रियंका गांधी पीड़ितों के परिवार से मिलने की जिद पर धरने पर बैठ गईं थीं।

यह भी पढ़ें: पुलिस के हत्थे चढ़ा बुलट चोरों का गैंग, 20 लाख की बाइक उड़ाने का बना रहे थे प्लान

धरने के 26 घंटे बाद प्रियंका गांधी से जब हत्याकांड में मृत लोगों के परिवार वालों से मिलाया गया तब जा कर प्रियंका गांधी ने अपना धरना समाप्त किया। http://www.satyodaya.com

Continue Reading

देश

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री व गांधी परिवार की विश्वासपात्र शीला दीक्षित का निधन

Published

on

नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का शनिवार को अचानक निधन हो गया। वह काफी दिनों से बीमार थीं। 81 वर्षीय शीला दीक्षित का इलाज एस्काॅर्ट हास्पिटल से चल रहा था। वर्तमान समय में वह दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल रहीं थी और उन पर कांग्रेस बिखरे जनाधार को समेटने की जिम्मेदारी थी। निधन से एक दिन पहले शुक्रवार को भी वह कांग्रेस के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहीं थीं। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की विश्वासपात्र शीला दीक्षित साल 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। उनके नेतृत्व में लगातार तीन बार कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार बनाई। वह सबसे लंबे समय (15 साल) तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।#SheilaDixit

यह भी पढ़ें-सोनभद्र नरसंहार: पीड़ित परिवारों को 10 लाख रुपए देगी कांग्रेस, मुकदमा भी लड़ेगी

कांग्रेस की कद्दावर नेता रहीं शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। उन्होंने दिल्ली के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से पढ़ाई की और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से मास्टर्स ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की। शीला दीक्षित साल 1984 से 1989 तक उत्तर प्रदेश के कन्नौज से सांसद रहीं। शीला दीक्षित को दिल्ली का चेहरा बदलने का श्रेय दिया जाता है। उनके कार्यकाल में दिल्ली में कई ऐतिहासिक विकास कार्य हुए।#SheilaDixit

दिल्ली कांग्रेस में चरम पर गुटबाजी

कांग्रेस में इस समय गुटबाजी चरम पर है। दिल्ली इससे अछूता नहीं है। शीला दीक्षित कांग्रेस नेताओं को एकजुट करने में जुटी हुईं थी। जिसके चलते करीब एक हफ्ते पहले दिल्ली के प्रदेश प्रभारी पीसी चाको के साथ उनका विवाद भी हो गया था। जिसके बाद चाको ने कहा था, आपकी तबियत खराब है आपको आराम की जरूरत है। बीते मंगलवार को प्रदेश प्रभारी पीसी चाको ने तीनों कार्यकारी अध्यक्षों के अधिकार बढ़ाए तो अगले ही दिन बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने चाको समर्थक कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ और देवेंद्र यादव के पर कतर दिए थे। बीते शुक्रवार को भी इस संबंध में उन्होंने बैठक की थी जिसमें जमकर हंगामा भी हुआ था।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

देश

पुण्यतिथि विशेष : मैडलिन स्लेड जो बापू के आदर्शों पर चलकर बनीं “मीरा बेन”

Published

on

महात्मा गांधी की सहयोगी मीरा बेन का मूल नाम मैडलिन स्लेड था। इनका जन्म 22 नवंबर 1892 को इंग्लैंड में हुआ था। मीरा बेन नाम इन्हें भारत आने पर मिला था। मीरा बेन एक ब्रिटिश सैन्‍य अधिकारी की बेटी थीं। इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी जी के सिद्धांतों से प्रभावित होकर खादी का प्रचार किया था और निस्वार्थ उनके आदर्शों पर चलकर खादी अपनाना, पहनना और उसका प्रचार-प्रसार किया था।

विदेशी होकर उनका इस तरह निश्चित करना सराहनीय था। गांधीजी को मीरा बेन एक बहन, एक बेटी, एक मित्र से भी बढ़कर मानते थे, मीरा बेन ने उनका हर कदम पर साथ दिया और सहारा बनीं। मीरा बेन ने मानव विकास, गांधी जी के सिद्धांतों की उन्नति और स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। ऐसा करते देख गाँधी जी ने उन्हें मीरा बेन नाम दिया। यह नाम भगवान कृष्ण की भक्त मीरा बाई से मेल खाता था। गांधीजी के विचारों को मानने वाली मीरा बेन सादी धोती पहनती थीं, सूत कातती, गांव-गांव घूमतीं थी।

वह अंग्रेज़ थीं लेकिन हिंदुस्तान की आजादी के पक्ष में थीं। गांधी का अपनी इस विदेशी पुत्री पर विशेष अनुराग था। मैडलिन स्लैड जब साबरमती आश्रम में बापू से मिलीं तो उन्हें लगा कि जीवन की सार्थकता दूसरों के लिए जीने में ही है, तभी से वे गुजरात के साबरमती आश्रम में रहने लगीं।

बापू के निधन के बाद भी मीरा उनके विचार और कार्यों के प्रसार में जुटी रहीं, जिसके चलते उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। भारत के प्रति मीरा बेन का लगाव इतना था कि वह भारत को अपना देश और इंगलैंड को विदेश मानती थीं। मीरा बेन के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ‘इंडियन कोस्ट गार्ड’ ने नए गश्ती पोत का नाम उनके नाम पर रखा है। गांधी जी की हत्या के बाद आज के ही दिन 18 जनवरी 1959 को मीराबेन भारत छोड़कर विएना चली गयीं। 20 जुलाई 1982 को उनका निधन हो गया।

Continue Reading

Category

Weather Forecast

July 20, 2019, 11:16 pm
Partly cloudy
Partly cloudy
30°C
real feel: 35°C
current pressure: 1000 mb
humidity: 74%
wind speed: 1 m/s ENE
wind gusts: 1 m/s
UV-Index: 0
sunrise: 4:55 am
sunset: 6:31 pm
 

Recent Posts

Top Posts & Pages

Subscribe to Blog via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.

Join 9 other subscribers

Trending