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सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर मामले में हस्तक्षेप से किया इनकार, याचिकाकर्ता को दी नसीहत

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर मामले में सरकार के किसी निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। राज्य की स्थिति को संवदेनशील बताते हुए शीर्ष अदालत ने धारा 144 हटाने के लिए दाखिल याचिका पर भी सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला संवेदनशील इसलिए सरकार को समय मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो हफ्ते बाद मामले की सुनवाई करेंगे।
बता दें कि धारा 370 खत्म करने के बाद सरकार ने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा के लिहाज से कई कदम उठाए हैं। राज्य में धारा 144 लागू है, फोन व इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से ठप हैं, और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं। केंद्र सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला सहित कई नेताओं और अलगाववागी नेताओं को भी नजर बंद किया है।
मंगलवार को याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि ये कब तक चलेगा। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जैसी ही स्थिति सामान्य होगी, व्यवस्था भी सामान्य हो जाएगी। सरकार कोशिश कर रही है कि जनता को कम से कम असुविधा हो।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आप स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम रोज समीक्षा कर रहे हैं। सुधार आ रहा है । उम्मीद है कि कुछ दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे। सुनवाई के दौरान एजी ने कहा कि पिछले साल जुलाई में 40 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि इस बार किसी की भी मौत नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने बेहद गलत ढंग से याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को नहीं पता कि कश्मीर क्या हो रहा है। सरकार पर विश्वास करना होगा। यह मामला बेहद संवेदनशील है। वहां किसी की जान नहीं जानी चाहिए।

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सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए याचिकाकर्ता की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं को बहाल किया जाना चाहिए। कम से कम अस्पतालों में संचार सेवा को बहाल किया जाना चाहिए। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि स्थिति संवेदनशील है। हम मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने पर काम कर रहे हैं। बता दें कि सोमवार को बकरीद के मौके पर लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने कई उपाए किए। लोगों के घरों तक सामान पहंुचाने के लिए मोबाइल वैन का इंतजाम किया गया, नमाज अदा करने के लिए पूरी छूट दी गयी। छुट्टी के दिन भी बैंकों को खोला गया। लोगों ने बाजारों में जाकर खरीददारी भी की। बकरीद से पहले कई जगह स्कूल और काॅलेज भी खुले। http://www.satyodaya.com

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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे नहीं जायेंगे अयोध्या, ये है बड़ी वजह

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लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसले का शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्वागत किया था। जिसके बाद उन्होंने 24 नवंबर को अयोध्या जाने व रामलला के दर्शन करने का ऐलान किया था। वहीं अब महाराष्ट्र में सरकार बनने में हो रही देरी से ये यात्रा रद्द कर दी है।

बता दें कि उद्धव ठाकरे ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कहा था कि वह 24 नवंबर को अयोध्या जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा था कि एक लंबे विवाद की समाप्ति हुई। भारत के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। हर किसी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए। आज के दिन मैं बाल ठाकरे और अशोक सिंघल को याद कर रहा हूं। हम पहले भी अयोध्या गए थे, वहां पर पूजा भी की थी और 24 नवंबर को मैं अयोध्या जरूर जाऊंगा।

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इसी कड़ी में उद्धव ठाकरे ने कहा कि हर कोई सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश है। आज का दिन हिंदुस्तान के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने इसी दिन के लिए रथयात्रा निकाली थी, मैं उनसे जरूर मिलूंगा और उनका आशीर्वाद लूंगा। बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे अपने नेताओं के साथ अयोध्या गए थे। इन दिनों भाजपा और शिव सेना के बीच घमासान मचा है। जहां एक तरफ दोनों पार्टियों ने महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव एक साथ लड़ा था। वहीं अब सरकार बनाने को लेकर दोनों पार्टियों के बीच तनातनी जारी है।  http://www.satyodaya.com

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जस्टिस बोबडे को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलाई 47वें CJI की शपथ…

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राम मंदिर

फाइल फोटो

नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला देने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीट का हिस्सा रहे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे सोमवार को भारत के 47वें चीफ जस्टिस (सीजेआई) के रूप में शपथ ली है। उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथ दिलाई। 63 वर्षीय जस्टिस बोबडे मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का स्थान लेंगे। सीजेआई के तौर पर जस्टिस बोबडे का कार्यकाल करीब 17 महीने का होगा और वह 23 अप्रैल, 2021 को सेवानिवृत्त होंगे। जानिए उनके अधिवक्ता से मुख्य न्यायाधीश बनने तक के सफर को।

आपको बता दें जस्टिस बोबडे का जन्म 24 अप्रैल 1956 को नागपुर में हुआ। उनके पिता फेमस वकील थे। उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से कला व कानून में स्नातक किया। 1978 में महाराष्ट्र बार काउंसिल में उन्होंने बतौर अधिवक्ता अपना पंजीकरण कराया।

राम मंदिर

हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में 21 साल तक अपनी सेवाएं देने वाले जस्टिस बोबडे ने मार्च, 2000 में बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में शपथ ली। 16 अक्टूबर 2012 को वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 12 अप्रैल 2013 को उनकी पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में हुई।

बोबडे ने सुनाए कई अहम फैसले

अयोध्या के अलावा जस्टिस बोबडे और भी कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला देने वाली पीठ का हिस्सा रह चुके हैं। अगस्त, 2017 में तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली 9  सदस्यीय संविधान पीठ का हिस्सा रहे जस्टिस बोबडे ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया था।

 बोबडे 2015 में उस तीन सदस्यीय पीठ में शामिल थे, जिसने स्पष्ट किया कि भारत के किसी भी नागरिक को आधार संख्या के अभाव में मूल सेवाओं और सरकारी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। आपको बता दें बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने बीसीसीआई का प्रशासन देखने के लिए पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय की अध्यक्षता में बनाई गई प्रशासकों की समिति को निर्देश दिया कि वे निर्वाचित सदस्यों के लिए कार्यभार छोड़ें ।

ये भी पढ़ें:बीकानेर: बस और ट्रक में हुई जोरदार भिड़ंत, 10 की मौत 20 से ज्यादा घायल…

जस्टिस बोबडे ने उस तीन सदस्यीय इन हाउस जांच समिति की अध्यक्षता की थी, जिसने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर एक महिलाकर्मी द्वारा लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच की। समिति ने चीफ जस्टिस गोगोई को क्लीन चिट दी थी। समिति में जस्टिस बोबडे के अलावा दो महिला जज जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इंदु मल्होत्रा भी शामिल हुई थीं।http://www.satyodaya.com

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बीकानेर: बस और ट्रक में हुई जोरदार भिड़ंत, 10 की मौत 20 से ज्यादा घायल…

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रोड एक्सीडेंट

फाइल फोटो

नई दिल्ली। देशभर ट्रैफिक नियमों के बाद भी सड़क हादसे कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। आये दिन लोगों की रोड एक्सीडेंट में मौतें होती रहती हैं। इसी तरह राजस्थान के बीकानेर में सोमवार सुबह एक बस और ट्रक की जोरदार भिड़ंत हो गई। इस भीषण हादसे में 10 लोगों की मौत हुई, 20 से ज्यादा घायल हैं।

जानकारी के मुताबिक यह हादसा श्रीडूंगरगढ़ इलाके में हुआ। टक्कर के दौरान बस का अगला हिस्सा ट्रक में घुस गया। दोनों वाहनों में आग लग गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत ट्यूबवेल से पानी लाकर आग बुझाई। हालांकि, इस दौरान कई यात्री बुरी तरह झुलस गए। जबकि जख्मी यात्रियों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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बता दें बस बीकानेर से बस सुबह 6.30 बजे जयपुर के लिए चली थी और एक घंटे बाद हादसे का शिकार हो गई। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में कोहरे के कारण यह हादसा होने की बात सामने आई है।

बीकानेर के लखासर इलाके में रविवार शाम को भी बाइक सवार को बचाने के दौरान तेज रफ्तार कार ने सड़क पर बैठे लोगों को कुचल दिया था। इसमें एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो बच्चियां, उनकी मां और नाना शामिल थे। जबकि हादसे में कार चालक समेत तीन लोग बुरी तरह से जख्मी हो गये थे।http://www.satyodaya.com

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November 18, 2019, 11:56 am
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