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अफसर जो पिछले 20 सालों से दे रहा था CBI को चकमा, जानिए कैसे हुआ अरेस्ट

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सरकार को करोड़ों का चूना

फाइल फोटो

नई दिल्ली। भगोड़े नीरव मोदी और विजय माल्या की तरह ही एक और व्यक्ति है जो सरकार को करोड़ों का चूना लगाकर फरार हो गया था। सीमा शुल्क विभाग के उस अफसर को सीबीआई पिछले 20 सालों से खोज रही है। जो अब मेडिकल कालेज के एमबीबीएस के छात्रों को पढ़ा रहा था। इतना ही नहीं उसने फर्जीवाड़े की हद तब पार कर दी, जब वह फर्जी डिग्री लेकर भविष्य में डॉक्टर बनने वाले छात्रों की लाइफ के साथ खेलने लगा।

भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की दलदल में फंसा यह आरोपी पूर्व सीमाशुल्क मूल्यांकक रह चुका है।वह उत्तर प्रदेश के एक निजी मेडिकल कॉलेज में फर्जी डिग्री पर इंटरनल मेडिसिन प्रोफेसर की नौकरी करते पकड़ा गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

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बता दें अभिनव सिंह नाम बदलकर राजीव गुप्ता के रूप में अकबरपुर, मथुरा के के. डी. मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में काम कर रहा था। अस्पताल के एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहा, वह एमबीबीएस छात्रों को इंटरनल मेडिसिन विषय पढ़ा रहा था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभिनव सिंह की गिरफ्तारी ने छात्रों को दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो भविष्य के डॉक्टर होंगे। मुंबई में सीमाशुल्क मूल्याकंक रहा अभिनव सिंह कथित रूप से फर्जी डीईपीबी (ड्यूटी एंटाइटेलमेंट पास बुक) पावती पत्र की पुष्टि करके सीमा शुल्क विभाग को 4 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में 29 सितंबर, 1999 को सीबीआई द्वारा नामजद किए जाने के बाद फरार हो गया था।

अधिकारियों के मुताबिक उस पर 5 लाख रूपये की रिश्वत और मारुति ज़ेन कार लेने का भी आरोप है। ऐसे में अभिनव को सीबीआई द्वारा मुंबई ले जाया गया है, जहां अब उससे अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही है। सूत्रों ने मने तो, झांसी निवासी अभिनव ने पूछताछकर्ताओं को बताया कि वह पिछले 2-3  सालों से के डी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत था। इतना ही नहीं वह इससे पहले फरीदाबाद और अन्य कई शहरों में मेडिकल कॉलेजों पढ़ाने का काम कर चुका है।http://www.satyodaya.com

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टाइम की 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में मुंकेश अंबानी के साथ दो भारतीय महिलाओं ने भी बनाई जगह

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नई दिल्ली। टाइम मैगजीन ने 2019 के शीर्ष 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची बुधवार को जारी कर दी है। सूची में शीर्ष नेता, कलाकार, दिग्गज और आइकन शामिल हैं। टाइम मैगजीन की सूची में तीन भारतीयों ने भी जगह बनायी है। इनमें रिलायंस इडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, भारत में एलजीबीटीयू (लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर) समुदाय के हक के लिए लड़ने वाली वकील अरुंधति काटजू और मेनका गुरुस्वामी शामिल हैं। इस सूची में भारतीय-अमेरिकी कॉमेडियन और टीवी होस्ट हसन मिनहाज, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पोप फ्रांसिस, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, गोल्फ खिलाड़ी टाइगर वुड्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को स्थान मिला है।

टाइम 100 के लिए मुकेश अंबानी का प्रोफाइल महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने लिखा है। महिंद्रा ने कहा कि अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी भारतीय उद्योग जगत में एक दूरदर्शी उद्योगपति के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन मुकेश अंबानी का नजरिया उनके पिता की तुलना में अधिक महत्वाकांक्षी है।

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वह अपनी हर पहल की शुरुआत अपने पिता के आशीर्वाद से करते हैं। उन्होंने कहा कि रिलायंस जियो मोबाइल डेटा नेटवर्क का दायरा श्किसी भी पैमाने पर आकर्षक है। भारत में 28 करोड़ से अधिक लोग पहले ही कम लागत वाले 4जी नेटवर्क के साथ जुड़ चुके हैं। बॉलिवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने काटजू और गुरुस्वामी के प्रोफाइल में लिखा कि दोनों महिलाओं ने भारत में एलजीबीटी समुदाय के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए लड़ी जा रही लड़ाई का नेतृत्व किया और समलैंगिक याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख वकीलों में से एक थीं।
टाइम की सूची में यूएस ओपन की विजेता नाओमी ओसाका, ऑस्कर विजेता रामी मालेक, बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ऑस्कर विजेता गायिक लेडी गागा और अबू धाबी के शहजादे भी शामिल हैं।http://www.satyodaya.com

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क्राइम-कांड

धनबाद: एक ही घर में रह रहे बेटा-बहु को नहीं हुआ मां की मौत का एहसास, दो दिनों तक सड़ती रही लाश…

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एक ही घर में अलग रहती थी बूढ़ी मां

धनबाद। हम बहुत व्यस्त हो गए हैं इतने व्यस्त की सभी चीजें फ़ास्ट हो गयी हैं।हमारा खाना-पीना, हमारा रहन-सहन सब बदल गया है।इतना ही नहीं हम आधुनिकता में इतने आगे निकल गए हैं कि हमारा परिवार भी कहीं न कहीं पीछे छुट गया है।ऐसा ही एक मामला दंबाद थाना क्षेत्र के बाबूडीह गांव का है।एक घर की अलग-अलग मंजिल में मां और बेटा-बहु और पति के देहांत के बाद युवक की बूढ़ी मां घर में अकेले रहती थीं।लोगों का कहना है कि बहु की मां से बनती नहीं थी।अचरज की बात है कि नीचे की मंजिल पर रह रही बूढ़ी मां की कब मौत हो गयी ये उनके बेटा-बहु को पता भी नही चला।

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जानकारी के अनुसार बाबूडीह बैंक ऑफ इंडिया के समीप इंदु देवी (70) घर के नीचे तल्ले में अकेले रहती थी। वहीं उनका बेटा सुजीत सिन्हा और बहू निक्की कुमारी छत वाले कमरे में रहते थे।वृद्धा खुद अपना सारा काम करती थी। मोहल्ले वालों का कहना है कि बेटा-बहू से मां के संबंध अच्छे नहीं थें।वृद्धा की दो शादीशुदा बेटियां भी हैं। बेटियों ने मां कई बार से साथ चलने का आग्रह किया लेकिन बेटे की बदनामी के डर से वो नहीं गयी।

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बेटे की इज्जत बचा रही मां को ये सोचा भी नहीं होगा कि आखिरी सांसे उसके लिए इतनी भारी हो जाएंगी।कमरे से बदबू आने पर ऊपर रह रहे बेटा-बहु को मां के मरने की सूचना मिली।जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टेम के लिए भेज दिया है।पुलिस का कहना है कि कम से कम दो दिन पहले वृद्ध महिला मौत हुई होगी।http://www.satyodaya.com

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जानें- कैसे अर्श से फर्श पर आकर धराशाई हो गईं जेट एयरवेज के उड़ने की सभी उम्मीदें, यहां है पूरी कहानी

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नई दिल्ली। कभी देश की सबसे बड़ी निजी विमान सेवा कंपनी का रुतबा हासिल करने वाली जेट एयरवेज की हालत आज ऐसी हो गयी है कि उसकी उड़ने की सभी उम्मीदें टूट चुकी हैं और वह आसमान से जमीन पर आ पहुंची है। आर्थिक रूप से धराशाई हुई भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी विमानन कंपनी के पास एक अदद हवाई सेवा जारी रखने के लिए ईंधन तक के पैसे नहीं बचे हैं, कर्मचारियों को तीन महीने से सैलरी नहीं मिली है। बुधवार रात जेट एयरवेज के किसी विमान ने अंतिम बार उडान भरी। दरअसल 25 साल पुरानी एयरलाइन कंपनी पर 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है और बैंकों ने 400 करोड़ रुपये का इमर्जेंसी फंड देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद जेट एयरवेज के प्रबंधकों ने जेट की सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया है। अपनी बेहतर सेवाओं के चलते जेट एयरवेज भारत सहित दुनिया के सभी यात्रियों में खासा लोकप्रिय थी। हजारों लोग प्रतिदिन अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए जेट एयरवेज पर निर्भर थे। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के मामले में जेट एयरवेज कभी देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस थी। दिसंबर 2018 तक जेट के पास बोइंग 777 और एयरबस ए330, सिंगल बी737 और टर्बोप्रॉप एटीआर के साथ कुल 124 विमान थे। कंपनी हर दिन करीब 600 उड.ानें भर रही थी। लेकिन 18 अप्रैल 2019 को कंपनी ने केवल पांच विमानों के साथ परिचालन किया और बुधवार रात जेट की आखिरी उड.ान अमृतसर से मुंबई के लिए थी।
इसके पहले आर्थिक संकट के चलते जेट एयरवेज पहले ही अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन को 18 अप्रैल तक स्थगित करने की घोषणा कर चुकी थी। कंपनी की यह हालत बैंकों का कर्ज न चुका पाने के कारण हुई है।

कैसे हुई शुरुआत

जेट एयरवेज की स्थापना 1992 में एयर टैक्सी के रूप में हुई थी। मई 1993 में दो विमानों बोइंग 737 और बोइंग 300 के साथ कंपनी ने कामर्शियल उड़ाने प्रारंभ की। 2004 में जेट एयरवेज ने चेन्नई से कोलंबों हवाई सेवा की शुरूआत कर अंतरराष्टीय सेवा का आगाज किया। जनवरी 2007 में जेट एयरवेज ने एयर सहारा को खरीद लिया। जिसके बाद जेट एयरवेज ने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं की शुरूआत की। लेकिन इस खरीद के बाद से ही जेट एयरवेज की मुश्किलें भी शुरू हो गईं। कंपनी इस कर्ज भारी-भरकम कर्ज को चुका नहीं पाई। रही सही कसर 2008 की आर्थिक मंदी ने पूरी कर दी। अक्टूबर 2008 में जेट एयरवेज ने कुछ कर्मचारियों की छंटनी की लेकिन नागरिक उडृडयन मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा।

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वर्ष 2012 में जेट एयरवेज घरेलू हिस्सेदारी में इंडिगो से पिछड. गयी। संकट से जूझ रही जेट एयरवेज में एतिहाद एयरलाइंस ने 24 प्रतिशत शेयर खरीदा। जबकि कंपनी का 51 प्रतिशत जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के पास ही रहा। 2018 में जेट एयरवेज को भारी तिमाही नुकसान उठाना पड.ा। दिसंबर 2018 में जेट ने सभी विदेशी सेवाएं स्थगित कर दी। इसके बाद 25 मार्च 2019 में जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने कंपनी में अपने सभी पदों से इस्तीफा सौंप दिया।

कुछ समय पहले तक जेट एयरवेज देश के 52 तथा 21 विदेशी गंतव्यों के लिए हवाई सेवाएं दे रहा था। जेट एयरवेज का मुख्यालय भी मंुबई में ही है। इसके परिचालन का मुख्य केन्द्र मुंबई का छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा है। इसके अतिरिक्त बंगलौर के केम्पेगोव्डा अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, चेन्नई अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, दिल्ली के इंदिरा गाँधी अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, कोलकाता के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन तथा पुणे विमान पत्तन से सभी उड़ानों का परिचालन करता है।

कई महत्वपूर्ण रूटों पर बढ़ गया किराया

देश व दुनिया की हवाई यात्राओं में जेट एयरवेज की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जेट का परिचालन बंद होने से देश में कई रूटों पर हवाई किराया महंगा होने की आशंका है। विदेशी रूटों पर किराया बढ़ने की खबर आ चुकी है। लंदन का किराया 37 हजार रु. से बढ़कर 1.80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। उड्डयन मंत्रालय ने लोकप्रिय रूट्स पर बढ़ते हवाई किरायों पर अंकुश लगाने के लिए गुरुवार को एयरलाइंस और हवाई अड्डों की मीटिंग बुलाई है। एक सूत्र ने बताया कि सरकार एयरलाइंस से कैपेसिटी बढ़ाने को कह सकती है, लेकिन कंपनियों के लिए अभी जेट एयरवेज के स्लॉट की भरपाई करना मुमकिन नहीं है। माना जा रहा है कि जेट के पास देश भर में 400 डिपार्चर स्लॉट हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इनमें से दिल्ली और मुंबई के 80 स्लॉट्स हैं, जो देश के दो सबसे व्यस्त हवाई अड्डे हैं।

26 बैंकों का कर्ज

फिलहाल जेट एयरवेज पर कुल 26 बैंकों का करीब 8,500 करोड़ रुपये कर्ज है। इसमें कुछ प्राइवेट और विदेशी बैंक भी शामिल हैं। पब्लिक सेक्टर बैंक में केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहबाद बैंक, एसबीआई और पीएनबी शामिल हैं। वहीं, आईसीआईसीआई और यस बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों का भी जेट पर बकाया है। दरअसल, 2010 के संकट के बाद एयरलाइन का कर्ज संकट गहराने लगा। इस दौरान कंपनी को लगातार चार तिमाहियों में घाटा उठाना पड़ा। इसके बाद वह ईएमआई चुकाने में फेल होने लगी।

बर्बादी का राजनीतिक कनेक्शन

जेट एयरवेज के संकट के राजनीतिक कनेक्शन भी हैं। नरेश गोयल का यूपीए सरकार के शासन काल में हुआ था। लेकिन 2014 में केन्द्र में एनडीए सरकार आने के बाद जेट एयरवेज की समस्याएं शुरू हो गईं। सूत्रों के अनुसार भाजपा की सहयोगी शिवसेना के साथ जेट एयरवेज के मैनेजमेंट के संबंध अच्छे नहीं हैं। इसने भाजपा से कहा है कि जेट को सरकार की तरफ से कोई मदद न दी जाए।
वहीं जेट में मुंबई की एक सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे एनसीपी नेता के भी पैसे लगे हैं। सूत्रों के अनुसार एनआरआई नरेश गोयल के पास इतने पैसे हैं कि अकेले जेट को संकट से उबार सकते हैं। लेकिन ज्यादातर पैसा कालेधन में है। उनका दुबई और लंदन में होटल चेन है।
करीब 25000 लोगों को रोजगार देने वाली जेट एयरवेज के बंद होने से हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है। खबरों के अनुसार जेट का संकट बढ़ने के बाद 400 पायलट नौकरी छोड़ चुके हैं। अब जेट के पास 1,300 पायलट रह गए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में बंद होने वाली जेट एयरवेज दूसरी बड़ी हवाई सेवा कंपनी है। इसके पहले 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस भी बंद हो चुकी है। किंगफिशर के मालिक भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या भारतीय बैंकों को हजारों करोड. रुपए का चूना लगाकर विदेश में शरण लिए हुए हैं। जिनके भारत प्रत्यर्पण के लिए भारतीय जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं।http://www.satyodaya.com

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