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राहुल गांधी के बाद पार्टी में हुई इस्तीफों की बरसात, अब तक 150 नेताओं ने छोड़ा अपना पद…

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फाइल फोटो

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस्तीफा देने की रट लगाए बैठे हुए हैं। ऐसे में कई नेता राहुल गांधी का समर्थन करते हुए अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कई सचिव, कई राज्य इकाईयों के पदाधिकारियों, युवा कांग्रेस और महिला कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफे की पेशकश की है।  

जानकारी के मुताबिक बता दें युवा कांग्रेस और महिला कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों ने गांधी के समर्थन में इस्तीफा देने को लेकर हस्ताक्षर मुहिम भी शुरू की है। इस्तीफे की पेशकश में पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं जिनमें ज्यादा से ज्यादा लोग जूनियर हैं।

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दिल्ली कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया भी उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने गांधी के समर्थन में इस्तीफा दिया है। लिलोठिया ने कहा, ”मैंने शुरू से ही राहुल गांधी के नेतृत्व में काम किया। मैं जानता हूं कि कांग्रेस पार्टी में उनकी क्या रोल है। मेरी और लाखों कांग्रेस कार्यकर्ताओं यही इच्छा है कि राहुल गांधी कांग्रेस का नेतृत्व करते रहें। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा मुझे राहुल गांधी पर विश्वास है, इसलिए यह कदम उठाया है। इसके बाद से कई नेताओं ने इस्तीफे दिए हैं। ऐसे में आने वाले समय में और भी कई नेता इस मुहीम से जुड़ेंगे।”

राहुल के समर्थन में 150 नेताओं ने दिया इस्तीफा

बता दें अब जिन नेताओं ने इस्तीफा दिया है उसमे से एक कांग्रेस महासचिव दीपक बाबरिया भी हैं। पदाधिकारियों की बात करें तो विरेंद्र राठौर, अनिल चौधरी, जितेन्द्र भगेल, राजेश धरमाणी, नीटा डिसूज़ा, सुमित्रा चौहान, संजय चौखर और वीरेंद्र वशिष्ट जैसे नाम हैं। कुल मिलाकर इस्तीफों की संख्या 150 पर पहुंच गई है। गोवा के काग्रेस अध्यक्ष गिरीश ने भी राहुल के समर्थन में इस्तीफ़ा की पेशकश की है।

जानकारी के मुताबिक इस्तीफों का ये दौर लगातार जारी रहेगा। इस्तीफे का मामला यहां तक पहुंच गया है कि युवा नेताओं ने राहुल गांधी के समर्थन मे इस्तीफ़े तो दिए, लेकिन उन्होंने सीनियर नेताओं को तीन दिन का समय दिया है। अगर सीनियर नेताओं ने तीन दिन के भीतर इस्तीफे नहीं दिए तो सभी युवा नेता उनके घर जाकर इस्तीफा मांगेंगे।

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वैसे, इन इस्तीफों को लेकर फिलहाल पार्टी की ओर से कोई ऑफिशियल पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले गुरुवार रात को पार्टी के विधि विभाग के प्रमुख विवेक तन्खा ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को अपने पद छोड़ देने चाहिए, ताकि राहुल गांधी अपनी नई टीम बना सकें।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद 25 मई को हुई पार्टी कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि कार्य समिति के सदस्यों ने उनकी पेशकश को खारिज करते हुए उन्हें बड़े बदलाव लाने की बात कही थी। इसके बाद से राहुल गांधी लगातार इस्तीफे की पेशकश पर अड़े हुए हैं। जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी पार्टी का नेतृत्व करें।http://www.satyodaya.com

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जैसलमेर के लाठी क्षेत्र में देखे गये दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध

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जैसलमेर। राजस्थान के सीमांत जैसलमेर वन्यजीव बहुल क्षेत्र लाठी में विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध देखे गये हैं। तेजी से गायब हो रहे गिद्धों की संकट ग्रस्त प्रजातियों को लाठी क्षेत्र के भादरिया गांव में देखा गया है। इससे वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। ये दो हजार से अधिक गिद्धों का समूह है। विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे सात प्रजातियों के ये गिद्ध झुंड में दिखे।

विलुप्त होने की कगार पर पहुंच इन गिद्धों की संख्या 90 से 95 प्रतिशत खत्म हो चुकी है। 2020 और सर्दी की शुरुआत दिनों में पर्यावरण जगत के लिए सुखद खबर है कि गिद्धों की संख्या बढ़ रही है। यहां की आबोहवा एवं अनुकूल रहवास स्थानीय गिद्धों के अलावा प्रवासी गिद्धों को भी रास आ रही है।

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क्षेत्र में लॉंग बिल्डवल्चर, किंग वल्चर, वाइट रंपड वल्चर, यूरेशियन ग्रिफन वल्चर, सिनेरियस वल्चर, हिमालयन ग्रिफन वल्चर और इजिप्शियन वल्चर का झुंड दिखाई दिया। लॉन्ग बिल्डवल्चर, किंग वल्चर, वाइट रंपड वल्चर आईयूसीएन की रेड लिस्ट में गंभीर खतरे की सूची में शामिल है। वहीं ग्रिफन वल्चर, हिमालयन वल्चर एवं सिनेरियस वल्चर, खतरे की सूची में है। इनकी संख्या लगातार घट रही है। बाकी गिद्ध की प्रजातियों भी कम ही दिखाई देती है।

अनुसंधान के अनुसार पेस्टिसाइड एवं डाइक्लोफैनिक के अधिक इस्तेमाल के चलते गिद्ध प्रजाति संकट में पहुंची है। फसलों में पेस्टीसाइड के अधिक प्रयोग से घरेलू जानवरों में पहुंचता है। वहीं मृत पशु खाने से गिद्धों में पहुंचता है। पेस्टिसाइड से शारीरिक अंग को नुकसान पहुंचता है। इससे इनकी प्रजनन क्षमता खत्म होने के कारण गिद्ध संकटग्रस्त पक्षियों की श्रेणी में पहुंच चुका है। वर्ष 1990 से ही देशभर में गिद्धों की संख्या गिरने लगी। गिद्धों पर यह संकट पशुओं को लगने वाले दर्द निवारक इंजेक्शन डाइक्लोफैनिक की देन थी। मरने के बाद भी पशुओं में इस दवा का असर रहता है। गिद्ध मृत पशुओं को खाते हैं। ऐसे में दवा से गिद्ध मरने लगे। इसे ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने पशुओं को दी जाने वाली डाइक्लोफैनिक की जगह मैलोक्सीकैम दवा का प्रयोग बढ़ाया है। यह गिद्धों को नुकसान नहीं पहुंचाती।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार वन विभाग की ओर से क्षेत्र के लाठी, धोलिया, खेतोलाई, ओढ़ाणिया, भादरिया सहित आसपास क्षेत्र में बढ़ रही दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों की संख्या के मद्देनजर उनकी सुरक्षा को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है। इसी के तहत गिद्ध बहुल क्षेत्रों में वन विभाग की ओर से गश्त बढ़ा दी गई है तथा सड़कों पर वाहनों की चपेट में आने और रेल पटरियों पर रेल की चपेट में आने से बचाने के लिए वन विभाग की ओर से यहां अपने कार्मिक तैनात कर प्रतिदिन गश्त करने के लिए पाबंद किया गया है।

पर्यावरण विशेषज्ञ अशोक तंवर ने कहा कि संकटग्रस्त गिद्धों का लाठी क्षेत्र में दिखना सुखद संकेत है। पारिस्थितिकी संतुलन के लिए गिद्ध होना जरूरी है। ये मृत पशुओं के मांस एवं अवशेष खाकर वातावरण को साफ रखते हैं। इसी वजह से गिद्ध को जंगल का प्राकृतिक सफाईकर्मी कहा जाता है। सिनेरियस वल्चर एवं हिमालयन वल्चर प्रवासी है, जो सर्दी में देशान्तर गमन कर भोजन के लिए पहुंचते हैं। ये हिमालय के उस पार मध्य एशिया, यूरोप, तिब्बत आदि शीत प्रदेश इलाकों से आते हैं।http://www.satyodaya.com

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जामिया के छात्रों पर हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ वाइस चांसलर दर्ज करवाएंगी FIR

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नई दिल्ली। पिछले महीने दिल्ली के जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में हुई पुलिस  हिंसा को लेकर छात्रों ने सोमवार को दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की। जिसको लेकर छात्रों ने कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर के कार्यालय का घेराव कर लिया। जिसके बाद वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि 15 दिसम्बर की घटना बहुत क्रूर थी।

पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया कल से शुरू कर दी जाएगी। आगे कहा कि दिल्ली पुलिस बिना प्रशासन की अनुमति के परिसर में आई और यहां के मासूम विद्यार्थियों की पिटाई की। इस घटना की छात्र पहले दिन से निंदा कर रहे हैं। छात्रों का हक है कि पुलिस के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

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हालांकि छात्र पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तिथि की मांग पर अड़े हैं। छात्रों का कहना ही कि वाइस चांसलर उन्हें एक निश्चित तिथि बताएं कि वह कब अदालत में जाएगी औए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। कुलपति ने कहा कि CAA और NRC के मुद्दे पर वह कुछ नहीं बोलेंगी।

बताते चलें कि 15 दिसम्बर को सीएए के विरोध में प्रदर्शन के बाद जामिया परिसर में घुसकर पुलिस ने लाइब्रेरी में तोड़फोड़ की थी और छात्रों की बेरहमी से पिटाई की थी। जिसके बाद जामिया प्रशासन ने 5 जनवरी तक छुट्टी की घोषणा कर दी थी, लेकिन इस बीच भी कैम्पस के बाहर छात्रों व स्थानीय लोगों का सीएए के खिलाफ प्रदर्शन चलता रहा। वहीं जामिया के खुलने के बाद 9 जनवरी से सेमेस्टर परीक्षा की घोषणा की गई, लेकिन पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आज छात्रों ने परीक्षा का बायकॉट कर दिया और कुलपति का घेराव किया। http://www.satyodaya.com

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मस्जिद के अंदर केरल के BJP सचिव पर हुआ हमला, भाजपा ने वाम संगठनों का बताया हाथ…

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भाजपा कार्यकर्ताओं

फाइल फोटो

कट्टाप्पना। केरल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले लगातार होते ही जा रहे हैं। ऐसे में इस बार भाजपा के राज्य सचिव एके नजीर की बेहरमी से पिटाई की खबर सामने आई है। नजीर पर आरोपियों ने तब हमला किया जब वह इडुक्की जिले के थूकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए। जिसके बाद उन्हें पास के एक अस्पताल भर्ती कराया गया,  जहां उनका इलाज चल रहा है।

एके नजीर पर चरमपंथी इस्लामी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने हमला किया था। बताया जा रहा है कि नजीर को थुकुप्पलम की जुमा की नमाज पढ़ने मस्जिद के अंदर गए हुए एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उनकी पिटाई शुरू कर दी गई। नजीर इससे पहले भारतीय जनता पार्टी की ‘जन जागृति’ रैली में शामिल हुए थे, जिसका मकसद लोगों को सीएए के बारे में जानकारी देना था और इसको लेकर देश भर के कई हिस्सों में इस तरह की रैली निकाली गई। रैली खत्म होने के बाद नजीर मस्जिद में आए थे।

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हमले के दौरान चरमपंथी संगठन के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी नेता नजीर को पीछे से लात मारी और फिर 15 मिनट तक उन पर फर्नीचर से हमला किया, जिसके बाद मस्जिद के इमाम ने हस्तक्षेप किया और उन्हें बचाया। एक पार्टी कार्यकर्ता ने दावा किया कि हमलावर एसडीपीआई कार्यकर्ताओं ने किया है जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं बख्शा जाएगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन फिलहाल हमलावरों की पहचान अभी नहीं हो सकी।

बता दें चरमपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जो केरल और भारत के अन्य कई हिस्सों में कई सांप्रदायिक हमलें करता है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), जो कि SDPI का जन्मदाता है, वो देश के कई हिस्सों में हुए सीएए  विरोधी हिंसक प्रदर्शन के पीछे था।http://www.satyodaya.com

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