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नोटा की तरफ बढ़ता जनता का रुझान, इस बार भी न बिगाड़ दे चुनाव परिणाम…

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आपको अगर किसी राजनीतिक पार्टी का कोई उम्मीदवार पसंद ना हो और आप उनमें से किसी को भी अपना वोट नहीं देना चाहते हैं तो फिर आप क्या करेंगे? निर्वाचन आयोग (ईसी) ने ऐसी व्यवस्था की है कि वोटिंग प्रणाली में एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाए ताकि यह दर्ज हो सके कि कितने फीसदी लोगों ने किसी को भी वोट देना उचित नहीं समझा है। नोटा का मतलब नान ऑफ द एव ब यानी इनमें से कोई नहीं है। अब चुनाव में आपके पास एक और विकल्प होता है कि आप ‘इनमें से कोई नहीं’ का बटन दबा सकते हैं। यह विकल्प है नोटा।  इसे दबाने का मतलब यह है कि आपको चुनाव लड़ रहे कैंडिडेट में से कोई भी प्रत्यासी पसंद नहीं है।

 नोटा का चुनावों में सर्वप्रथम प्रयोग 2013 के विधानसभा चुनावों में हुआ था। ऐसे में आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर हमें नोटा के बारे में रुझान देखने को मिल रहा है। हाल 2018 में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में नोटा का प्रभाव देखने को मिला। जिसने चुनाव के नतीजे ही बदल कर रख दिए थे। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को बहुमत न मिलने के पीछे नोटा को मुख्य वजह माना जा रहा था। कम से कम 14 सीटें ऐसी हैं जहां नोटा यानी ‘नन ऑफ द अबव’ दोनों दलों के लिए विलेन साबित हुआ है। 230 सीटों में से 14 सीटों पर हार का अंतर नोटा में पड़े वोट से भी कम था। इससे पहले कर्नाटक चुनावों में भी नोटा ने 8 सीटों पर भाजपा की जीत को हार में तब्दील कर दिया था। चुनाव आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश में बहुमत का समीकरण नोटा के चलते बिगड़ा था।

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वहीं मध्य प्रदेश में नोटा के पक्ष में मतदान 1.4 प्रतिशत (542295 मत) हुआ और मत प्राप्त करने के मामले में नोटा छठे स्थान पर रहा और 6 राजनीतिक दलों से आगे रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में नोटा चौथे स्थान पर रहा था और नोटा को 1.9 प्रतिशत मत मिले थे, जो कि (643144 मत) थे। इस आधार पर देखा जाए तो मध्य प्रदेश में पिछली बार की तुलना में नोटा का मत प्रतिशत कम हुआ है।

वहीं इस बार लोकसभा चुनाव में भी नोटा का असर देखने को मिलेगा। लोकसभा चुनाव अपने अंतिम चरण पर है सभी राजनीतिक पार्टियां पूर्वांचल में चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं। वहीं पूर्वांचल के बलिया बैरिया विधानसभा क्षेत्र में कुछ लोगों से बात करने पर पता चला कि वहां भी काफी संख्या में लोग स्थानीय स्तर पर काम ना होने से गुस्साएं लोगों ने नोटा दबाने का फैसला किया है।

विनीत सिंह

सत्योदय से बात-चीत में लोगों ने अपनी राय रखी जिसमें बैरिया से सभासद विनीत सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दर्जनों योजनाएं संचालित जरुर की गई। लेकिन उसकी धरातल स्थल पर कोई पड़ताल नहीं की गई। केवल कोगजों में विकास करने से लोगों का कोई भला नहीं होने वाला और इसलिए वह किसी प्रत्यासी को अपना वोट नहीं देंगे और नोटा दबाएंगे।

दुर्गविजय सिंह

वहीं कर्ण छपरा निवासी दुर्गविजय सिंह का कहना है किसी भी दल के प्रत्यासी जब जनता के बीच आते हैं तो तमाम घोषणाएं व वादे करते हैं। चुनाव जीतने के बाद उनका नजरिया बदत जाता है और क्षेत्र के विकास के दावे तार-तार होकर रह जाते हैं। क्षेत्र में स्थित एनएच 31 सालों से ध्वस्त है और इसे देखने वाला कोई नहीं है।

गोलू सिंह

पांडेपुर निवासी छात्र नेता गोलू सिंह का कहना है कि हमारे यहां सबसे बड़ा मुद्दा आग और कटान है लेकिन इससे राहत का ठोस उपाय नहीं किया गया।

सुमित कुमार

क्षेत्र के कस्बा निवासी सुमित कुमार का कहना है कि हम किस विकास को माने अस्पताल है तो डॉक्टर नहीं, एक्सरे प्लेट है तो मशीन खराब, स्कूल में बच्चे है तो टिचर नहीं, ऐसे में किसी भी दल के प्रत्यासी को चुनना ही बेमानी होगी और नोटा दबाकर इसका विरोध करेंगे।
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उज्जैन जिला प्रशासन ने रणनीति बनाकर विकास दुबे का कराया आत्म समर्पण!

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सोशल मीडिया पर दावा, बुधवार की देर रात उज्जैन के डीएम-एसएसपी पहुंचे थे मंदिर

लखनऊ। तो क्या विकास दुबे की का आत्म समर्पण एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है? उज्जैन के महाकाल मंदिर से कानपुर के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी के साथ ही इस पर सवाल भी उठने लगे हैं। चर्चा है कि बीती रात उज्जैन के जिलाधिकारी आशीष सिंह व पुलिस कप्तान मनोज कुमार अचानक उज्जैन के महामाल मंदिर के दौरे पर पहुंचे थे। चर्चा है कि अधिकारियों के बीच एक बंद कमरे में चर्चा हुई। जिसमें विकास दुबे के सरेंडर करने की पटकथा लिखी गयी।

वहीं दूसरी तरफ विकास दुबे कनेक्शन में लखनऊ में दो वकीलों को भी हिरासत में लिया गया है। चर्चा है कि दोनों वकील विकास दुबे को सरेंडर कराने के लिए अपनी निजी गाड़ी से उज्जैन पहुंचे थे। दोनों वकीलों को लखनऊ लाया जा रहा है। जहां पूछताछ की जाएगी। सपा नेता जूही सिंह ने भी विकास दुबे की नाटकीय पर सवाल उठाए हैं।

यह भी पढ़ें-फरीदाबाद से गिरफ्तार विकास दुबे का साथी प्रभात व बऊआ एनकाउंटर में ढेर

बता दें पिछले छह दिनों से विकास दुबे की तलाश में खाक छान रही यूपी पुलिस और एसटीएफ की टीमों हर कदम पर नाकाम रहीं। 2 जुलाई के बाद शुरुआत के दो दिनों तक विकास दुबे कानपुर के शिवली में ही छिपा रहा। इसके बाद वह हरियाणा पहुंच गया। फरीदाबाद पुलिस विकास तक पहुंचती, उससे पहले ही दुर्दांत अपराधी चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत गुरुवार सुबह उज्जैन के महामाल मंदिर से विकास दुबे को दबोच लिया गया।http://www.satyodaya.com

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नई मुसीबतः फरीदाबाद से गिरफ्तार विकास दुबे का एक साथी कोरोना पाॅजिटिव

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लखनऊ। बीती रात हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार विकास दुबे के तीन साथियों में से एक कोरोना पाॅजिटिव निकला है। अपराधियों को रिमांड पर लेकर लखनऊ लाने की तैयारी में जुटी यूपी पुलिस के लिए यह झटका है। अब पुलिसकर्मियों के भी कोरोना की चपेट में आने का भर बन गया है। बुधवार को ही तीनों बदमाशों को कोर्ट में पेश किया गया है।

यह भी पढ़ें-महिला PCS की आत्महत्या मामले में भाजपा नेता सहित पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज

बता दें कि मंगलवार की देर रात फरीदाबाद के एक होटल में छापेमारी के दौरान हरियाणा पुलिस ने विकास दुबे के तीन साथियों को गिरफ्तार किया था। इनके नाम प्रभात, श्रवण और अंकुर हैं। इन बदमाशों की मेडिकल जांच में श्रवण कोरोना पाॅजिटिव पाया गया है।http://www.satyodaya.com

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डॉ भीमराव अम्बेडकर के मुंबई स्थित मकान पर तोड़फोड़, गमले व CCTV क्षतिग्रस्त

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नई दिल्ली: भारत के संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के दादर स्थित घर- राजगृह में अज्ञात लोगों ने तोड़फोड़ की है। पुलिस ने इस घटना के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एक अधिकारी ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी।  अधिकारी ने बताया कि दो लोगों ने घर में लगीं शीशे की खिड़कियों पर पत्थर मारे। इसके अलावा घर में  लगे सीसीटीवी कैमरा और गमलों को तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि यह घटना मंगलवार रात की है। सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि संविधान निर्माता के घर पर एक व्यक्ति तोड़-फोड़ कर रहा था। घटना को अंजाम देने के बाद वह यहां से फरार हो गया। माटुंगा पुलिस ने इस संबंध में एक एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

यह भी पढ़ें: विकास दुबे के साथियों पर कसा पुलिस का शिकंजा, एक मुठभेड़ में ढेर, छह गिरफ्तार

घटना के समय घर पर नहीं थे प्रकाश आंबेडकर

दादर के हिंदू कॉलोनी में स्थित दो मंजिला हेरिटेज बंगले में आंबेडकर संग्रहालय है। जहां बाबा साहेब की किताबें, चित्र, राख और बर्तन कलाकृतियों के बीच रखी हुईं हैं। राजगृह में वर्तमान में बाबा साहेब की बहू और उनके पोते वंचित बहुजन अघाडी नेता प्रकाश आंबेडकर, आनंदराव और भीमराव रहते हैं। घटना के समय प्रकाश आंबेडकर अकोला में थे। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा है। कि वह शांत रहें और घर के बाहर जमा न हों। ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस ने बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को राजगृह पर हुए हमले को लेकर उचित कार्रवाई करने को कहा।  महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पहले ही यह आश्वासन दिया है। कि इस घटना में जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। देशमुख ने कहा, कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।http://satyodaya.com

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