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पीएम मोदी की नई सरकार में हुए ये 4 बड़े बदलाव, अमित शाह बने गृह मंत्री, जानिए किसे कौन-सा मिला मंत्रालय…

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लोकतंत्र

फाइल फोटो

लोकतंत्र के महापर्व में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद 30 मई को पीएम मोदी ने दोबारा से पीएम पद की शपथ ग्रहण की हैं। इसके उनके 58 नेताओं ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ग्रहण की है। जिनमे  24 कैबिनेट मंत्री, 9 स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्यमंत्री बने हैं। ऐसे में आज शपथ ग्रहण करने के बाद पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल के साथ बैठक की है जिसमें उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के मंत्रालयों का बटवारा कर दिया है।

जी हां इस नए मंत्रालय में अमित शाह को गृह मंत्री,राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्री, एस जयशंकर को विदेश मंत्री और निर्मला सीतारामन को वित्त मंत्री का कार्यभार सौंपा गया है।

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वहीं नितिन गडकरी को परिवहन, नरेंद्र तोमर को कृषि और पंचायती राज मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है।इसके अलावा सदानंद गौड़ा को रसायन एवं उर्वरक, पीयूष गोयल को फिर से रेल मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम, रविशंकर प्रसाद को कानून, स्मृति ईरानी को कपड़ा मंत्रालय के महिला एवं बाल विकास, हर्षवर्धन को स्वास्थ्य, रमेश पोखरियाल निशंक को मानव संसाधन विकास, मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय मिला है।

इतना ही नहीं इस दौरान रामविलास पासवान को खाद्यमंत्री, प्रकाश जावडेकर को सूचना-प्रसारण मंत्री, महेंद्र नाथ को कौशल विकास, डॉ हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्री, अर्जुन मुंडा आदिवासी मंत्री, धर्मेन्द्र प्रधान पेट्रोलियम मंत्री, प्रहलाद जोशी संसदीय संसदीय कार्य मंत्री, रविशंकर प्रसाद कानून मंत्री, किरेन रिजीजू खेल मंत्री, हरदीप सिंहपुरी,हाउसिंग मंत्री ।

मंत्रियों का नाम                             
किस मंत्रालय का दिया गया जिम्मा
1. नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) प्रधानमंत्री के पद के साथ कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय. इसके अलाव वो सभी मंत्रालय जो किसी भी मंत्री को अलॉट न हुए हो
2. राजनाथ सिंह (कैबिनेट मंत्री) रक्षा मंत्रालय
3. अमित शाह (कैबिनेट मंत्री) गृह मंत्रालय
4. नितिन गडकरी (कैबिनेट मंत्री) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
5. सदानंद गौड़ा (कैबिनेट मंत्री) रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
6. निर्मला सीतारमण (कैबिनेट मंत्री) वित्त एवं कॉरपोरेट मामले का मंत्रालय
7. राम विलासपासवा (कैबिनेट मंत्री) उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
8. नरेंद्र सिंह तोमर (कैबिनेट मंत्री) कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय
9. रविशंकर प्रसाद (कैबिनेट मंत्री) कानून एवं न्याय, संचार और इलेक्ट्रानिक एवं सूचना मंत्रालय
10. हरसिमरत कौर बादल 
(कैबिनेट मंत्री)

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय

11. एस. जयशंकर (कैबिनेट मंत्री) विदेश मंत्रालय
12. रमेश पोखरियाल निशंक 
(कैबिनेट मंत्री)
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
13. थावर चंद गहलोत (कैबिनेट मंत्री) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय
14. अर्जुन मुंडा 
(कैबिनेट मंत्री)
आदिवासी मामलों का मंत्रालय
15. स्मृति ईरानी 
(कैबिनेट मंत्री)
महिला एवं बाल विकास और कपड़ा मंत्रालय
16. हर्षवर्ध(कैबिनेट मंत्री) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रोद्योगिकी, भूविज्ञान मंत्रालय
17. प्रकाश जावड़ेकर (कैबिनेट मंत्री) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
18. पीयूष गोयल (कैबिनेट मंत्री) रेलवे और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
19. धर्मेंद्र प्रधान 
(कैबिनेट मंत्री)
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्रालय
20. मुख्तार अब्बास नकवी 
(कैबिनेट मंत्री)
अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय
21. प्रह्लाद जोशी (कैबिनेट मंत्री)
संसदीय मामले, कोयला और खान मंत्रालय
22. महेंद्र नाथ पांडेय (कैबिनेट मंत्री) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
23. अरविंद सावंत (कैबिनेट मंत्री) भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय
24. गिरिराज सिंह (कैबिनेट मंत्री) पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय
25. गजेंद्र सिंह शेखावत (कैबिनेट मंत्री) जल शक्ति मंत्रालय
26. संतोष गंगवार 
(राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
27. राव इंद्रजीत सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन और नियोजन मंत्रालय
28. श्रीपद नाईक
(राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)
आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), रक्षा मंत्रालय (राज्य मंत्री)
29. जितेंद्र सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) पूर्वोत्तर विकास (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन, परमाणु उर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय (राज्य मंत्री)
30. किरण रिजिजू
(राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)
युवा मामले एवं खेल (स्वतंत्र प्रभार), अल्पसंख्यक मामले (राज्य मंत्री)
31. प्रह्लाद सिंह पटेल (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) संस्कृति और पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार)
32. आरके सिंह
(राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)
बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता (राज्य मंत्री)
33. हरदीप सिंह पुरी (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) शहरी विकास और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (राज्य मंत्री)
34. मनसुख मंडाविया (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) जहाजरानी (स्वतंत्र प्रभार), रसायन एवं उर्वरक (राज्य मंत्री)
35. फग्गन सिंह कुलस्ते (राज्य मंत्री) इस्पात राज्य मंत्री
36. अश्विनी चौबे 
(राज्य मंत्री)
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री
37. जनरल (रि.) वीके सिंह 
(राज्य मंत्री)
सड़क, परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री
38. कृष्ण पाल गुज्जर (राज्य मंत्री) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री
39. दानवे रावसाहेब दादाराव
(राज्य मंत्री)
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री
40. जी. किशन रेड्डी (राज्य मंत्री) गृह राज्य मंत्री
41. पुरुषोत्तम रुपाला (राज्य मंत्री) कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री
42. रामदास अठावले (राज्य मंत्री) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री
43. साध्वी निरंजन ज्योति (राज्य मंत्री) ग्रामीण विकास राज्य मंत्री
44. बाबुल सुप्रियो (राज्य मंत्री) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री
45. संजीव कुमार बलियान (राज्य मंत्री) पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन राज्य मंत्री
46. धोत्रे संजय शमराव (राज्य मंत्री)

मानव संसाधन विकास, संचार और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री
47. अनुराग सिंह ठाकुर (राज्य मंत्री) वित्त और कॉरपोरेट मामले राज्य मंत्री
48. सुरेश अंगादि
(राज्य मंत्री)
रेल राज्य मंत्री
49. नित्यानंद राय 
(राज्य मंत्री)
गृह राज्य मंत्री
50. वी मुरलीधरन
(राज्य मंत्री)
विदेश, संसदीय कार्य राज्य मंत्री
51. रेणुका सिंह 
(राज्य मंत्री)
आदिवासी मामलों की राज्य मंत्री
52. सोम प्रकाश
(राज्य मंत्री)
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री
53. रामेश्वर तेली
(राज्य मंत्री)
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री
54. प्रताप चंद्र सारंगी (राज्य मंत्री) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन राज्य मंत्री
55. कैलाश चौधरी
(राज्य मंत्री)
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री
56. देबाश्री चौधरी
(राज्य मंत्री)
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री
57. अर्जुन राम मेघवाल (राज्य मंत्री) संसदीय कार्य, भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री
58. रतन लाल कटारिया (राज्य मंत्री) जलशक्ति और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री

कैबिनेट में हैं बीजेपी के 53 मंत्री

कैबिनेट में 53 मंत्री भाजपा के हैं और सहयोगी दलों के मंत्रियों की संख्या 4 है। इनमें जदयू और अपना दल शामिल नहीं हैं। 19 नए चेहरों को जगह मिली। उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 8 सांसदों को मंत्री बनाया गया। सुषमा स्वराज, मेनका गांधी, राज्यवर्धन राठौर, महेश शर्मा और सुरेश प्रभु को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।

इस नए कैबिनेट में 6 महिलाओं को शामिल किया गया हैं, हालांकि पिछले कैबिनेट में 9 महिलाओं को शामिल किया गया था। इस अरुणाचल पश्चिम सीट से दो बार के सांसद किरेन रिजिजू को खेलमंत्री का दिया है। वहीं गिरिराज सिंह को भी कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई, पिछली बार उन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का दर्जा मिला था।http://www.satyodaya.com

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डीएम ने दिए निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश…

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नगर निगम की दर पर हो मृत्यु पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था, कांजीहाउस निर्माण के लिए जिला पंचायत को भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश

लखनऊ। लखनऊ जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा है कि निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए कोई वाहन की व्यवस्था है यदि नहीं है तो वाहन खरीदने के लिए विभिन्न संस्थाओं सामाजिक संस्थाओं से मिलकर स्वयं सहायता के रूप में धनराशि की व्यवस्था की जाये। जिलाधिकारी ने ये बातें गुरूवार को कलेक्ट्रेट स्थिति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में एसपीसीए की समीक्षा बैठक में कही। बैठक की अध्यक्षता के दौरान डीएम ने बताया कि निराश्रित बेसहारा सड़क व गलियों के कुत्तों को जो कि दुर्घटना में घायल हो जाते हैं तथा उन्हें किसी प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। उन्हें चिकित्सा उपलब्ध कराने एवं भरण पोषण के एसपीसीए आश्रम स्थल पर रखा जाता है।

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उन्होंने बताया कि उनकी अध्यक्षता में सोसाइटी का संचालन किया जाता है। उपरोक्त संस्था को किसी भी प्रकार की आर्थिक अनुदान राज्य सरकार, केन्द्र सरकार से नहीं मिलती। एसपीसीए सोसाइटी फार प्रिवेन्शन क्रूयल्टी टू ऐनीमल्स के पशु चिकित्सालय न्यू हैदराबाद लखनऊ पर बने चिकित्सालय पर चिकित्सा एवं देखभाल की जाती है। नगरीय क्षेत्र में कुत्तों में बधियाकरण के सम्बन्ध में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यदि उन्हे स्थान एवं सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाये तो डाॅक्टरों के रोस्टर के अनुसार एक दिन में 10 का बधिायाकरण किया जा सकता है। वहीं डीएम ने मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को निर्देश दिया कि नगर निगम की दर पर मृत्यु पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें। कांजी हाउस की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की भूमि जिला पंचायत को उपलब्धा करा दी जाये जहां पर कांजी हाउस का निर्माण कराया जा सके और निराश्रित पशुओं को रखा जाये।http://www.satyodaya.com

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राजधानी में लगातार बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, सरोजनी नगर ब्लॉक में मिले सबसे ज्यादा 26 मरीज

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लखनऊ। राजधानी में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध टीबी रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के बाद 164 व्यक्तियों में इसकी पुष्टि की गई। जबकि सीएमओ ने 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। सीएमओ कार्यालय में गुरूवार को जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि 10 से 22 जून तक चिन्हित क्षेत्रों में सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान संचालित किया गया। इसके लिए 750 सदस्यों द्वारा 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

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उन्होंने बताया कि उक्त दिवस के दौरान पर्यवेक्षकों व टीम सदस्यों द्वारा 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध क्षय रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के उपरांत 164 व्यक्तियों में क्षय रोग की पुष्टि संबंधित क्षेत्र के चिकित्सकों द्वारा किया गया जिनको कार्यक्रम अंतर्गत निकटतम केंद्र पर उपचार की व्यवस्था प्रारंभ करा दी गई है। डीटीओ लखनऊ डॉक्टर बी.के. सिंह ने अवगत कराया कि 10 दिवसीय अभियान के दौरान सरोजनी नगर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 26 रोगी चिन्हित किए गए। सभी 16403 चयनित रोगियों को डीबीटी के माध्यम से निक्षय पोषण योजना का लाभ सीधे उनके खाते में स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। 500 प्रति माह की दर से मरीजों के खाते में उपचार अवधि तक निरंतर स्थानांतरित की जाती रहेगी।

सीएमओ ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से अब तक लखनऊ में 2 करोड़ 38 लाख 42 हजार का भुगतान मरीजों के खाते में किया जा चुका है। सक्रिय रोगी खोज अभियान में जनपद लखनऊ निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रथम चरण में फरवरी 2018 में 38 क्षयरोगी। द्वितीय चरण जून में 72 क्षयरोगी, तृतीय चरण सितंबर में 96 क्षयरोगी, चतुर्थ चरण जनवरी 2019 में 119 क्षयरोगी तथा जून के चरण में कुल 164 क्षय रोगी की खोजे गए हैं।http://www.satyodaya.com

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सैम मानेकशां : एक ऐसा भारतीय योद्धा जिसने पाकिस्तान को चीर डाला, इंदिरा भी मानती थीं बहादुरी का लोहा

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लखनऊ। पाकिस्तान को चीर कर उसे दो भागों में बांटने वाले भारतीय सेना के जांबाज हीरो पफील्ड मार्शल सैम मानेकशां की आज (गुरुवार) को पुण्यतिथि है। 27 जून 2008 का ही वो दिन था जब सैम मानेकशॉ ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। मानेकशां बहादुरी और सैन्य कारनामों के साथ अपने स्टाइल, हाजिर जवाबी के लिए भी जाने जाते थे। उन्हीं के नेतृत्व में भारत ने साल 1971 की जंग में पाकिस्तान को घुटनों पर छुका दिया था। जिसके बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ था। सैम मानेकशॉ का पूरा नाम होरमुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ था। उनका जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ था। बचपन से ही निडर और बहादुरी की वजह से उनके चाहने वाले इन्हें सैम बहादुर कहते थे। सैम भारतीय सेना के पहले ऐसे जनरल बने जिन्हें उनकी बहादुरी के लिए प्रमोट कर फील्ड मार्शल की रैंक दे दी गई थी। पिता के विरोध के बावजूद वह सेना में आए। इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा दी। वह 1932 में पहले 40 कैडेट्स वाले बैच में शामिल हुए।#SamManekshaw

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मानेकशां जब सेन्य अधिकारी बने तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने सख्त मिजाज के लिए जानी थीं। अधिकारी और नेता उनसे डरते थे। लेकिन फील्ड मार्शल मानेकशां अपने मिजाज के अनुरूप ही इंदिरा के साथ भी पेश आते थे। जिसका एक किस्सा काफी मशहूर है। भारत-पाकिस्तान के बीच जब 1971 की लड़ाई शुरू होने वाली थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम मानेकशॉ से पूछा था, क्या लड़ाई की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं? इस पर मानेकशॉ ने तपाक से कहा- ‘I Am Always Ready Sweety’ । माना जाता है कि वह पारसी कनेक्शन होने की वजह से भी ऐसे बोलते थे, क्योंकि इंदिरा के पति फिरोज गांधी पारसी थे। मेजर जनरल वीके सिंह कहते हैं, एक बार इंदिरा गांधी जब विदेश यात्रा से लौटीं तो मानेकशॉ उन्हें रिसीव करने पालम हवाई अड्डे गए। इंदिरा गांधी को देखते ही उन्होंने कहा कि आपका हेयर स्टाइल जबरदस्त लग रहा है। इस पर इंदिरा गांधी मुस्कराईं और बोलीं, और किसी ने तो इसे नोटिस ही नहीं किया।

सैम को सबसे पहले शोहरत मिली साल 1942 में। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बर्मा के मोर्चे पर एक जापानी सैनिक ने अपनी मशीनगन की सात गोलियां उनकी आंतों, जिगर और गुर्दों में उतार दीं। उनका बचना लगभग नामुमकिन हो गया था। उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया। इस दौरान एक सर्जन ने उनका ऑपरेशन करने से पहले उनसे पूछा- आपके साथ क्या हुआ था? तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, मुझे एक खच्चर ने लात मार दी है।
ऐसा ही एक और दिलचस्प किस्सा है। 1962 में जब मिजोरम की एक बटालियन ने भारत-चीन युद्ध से दूरी बनाने की कोशिश की तो मानेकशॉ ने उस बटालियन को पार्सल में चूड़ी के डिब्बे के साथ एक नोट भेजा। जिस पर लिखा था कि अगर लड़ाई से पीछे हट रहे हो तो अपने आदमियों को ये पहनने को बोल दो। फिर उस बटालियन ने लड़ाई में हिस्सा लिया और भरपूर वीरता दिखाई।
अपनी शरारतों और मजाक के लिए प्रसिद्ध सैम अनुशासन या सैनिक नेतृत्व और नौकरशाही के बीच संबंधों के मामले में कोई समझौता नहीं करते थे।

उनके मिलिट्री असिस्टेंट रहे लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंदर सिंह ने बताया था कि एक बार सेना मुख्यालय में एक बैठक हो रही थी। रक्षा सचिव हरीश सरीन भी वहां मौजूद थे। उन्होंने वहां बैठे एक कर्नल से कहा, यू देयर, ओपन द विंडो। वह कर्नल उठने लगा। तभी सैम ने कमरे में प्रवेश किया। रक्षा सचिव की तरफ मुड़े और बोले, सचिव महोदय, आइंदा से आप मेरे किसी अफसर से इस टोन में बात नहीं करेंगे। यह अफसर कर्नल है, यू देयर नहीं। उस जमाने के बहुत शक्तिशाली आईसीएस अफसर हरीश सरीन को उनसे माफी मांगनी पड़ी।
सैम की बेटी माया दारूवाला कहती हैं कि सैम अक्सर कहा करते थे कि लोग सोचते हैं कि जब हम देश को जिताते हैं तो यह बहुत गर्व की बात है लेकिन इसमें कहीं न कहीं उदासी का पुट भी छिपा रहता है क्योंकि लोगों की मौतें भी हुई होती हैं।
उनकी बेटी माया दारूवाला ने एक मीडिया हाउस को बताया था कि लोग सोचते हैं कि सैम बहुत बड़े जनरल हैं, उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ी हैं, उनकी बड़ी-बड़ी मूंछें हैं तो घर में भी उतना ही रौब जमाते होंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था। वह बहुत खिलंदड़ थे, बच्चे की तरह। हमारे साथ शरारत करते थे। हमें बहुत परेशान करते थे। कई बार तो हमें कहना पड़ता था कि डैड स्टॉप इट। जब वो कमरे में घुसते थे तो हमें यह सोचना पड़ता था कि अब यह क्या करने जा रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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