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कोरोना वायरस: कनिका कपूर की तबीयत अभी तक स्थिर

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लखनऊ। लखनऊ पीजीआई में भर्ती सिंगर कनिका कपूर की तबीयत अभी तक स्थिर है। उनकी दूसरी जांच रिपोर्ट में वायरल लोड ज्यादा होने की पुष्टि हुई है। पीजीआई के सीएमएस डॉ. अमित अग्रवाल के मुताबिक कोरोना वार्ड में भर्ती कनिका का इलाज इमरजेंसी मेडिसिन, पलमोनरी मेडिसिन समेत अन्य कई विभागों के डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। इस वार्ड को चार जोन में बांटा गया है।

समूचे क्षेत्र को आइसोलेटेड किया गया है। ताकि कोरोना का सक्रमण संस्थान के अन्य किसी के डॉक्टर और अन्य स्टाफ को न हो। कनिका कपूर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में यूपी पुलिस ने कई बदलाव किए हैं। पुलिस ने कनिका के लखनऊ आने की तारीख पुलिस ने पहले ही संशोधित कर ली थी पर बाकी तथ्य विवेचना में सही कर लिए जाएंगे। इसके लिए सारे तथ्य सरोजनीनगर थाने में विवेचक को दे दिए गए। इसी कड़ी में गलत हुई जानकारियों को सही करते हुए एक पत्र सीएमओ ने पुलिस कमिश्नर को शनिवार को भेजा था।

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आपको बता दें कि, एफआईआर में पहले दिन ही यह तथ्य गलत हो गया था कि कनिका कपूर 14 मार्च को लखनऊ आई थीं। हालांकि यह बात एफआईआर दर्ज करने वाले दिन ही पकड़ में आ गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की तहरीर में लिखी इस बात ने तूल पकड़ लिया था कि कनिका कपूर को लखनऊ एयरपोर्ट पर ही जांच में कोरोना संक्रमित बता दिया गया था। जबकि वह 20 मार्च की सुबह हुई जांच में सक्रंमित पाई गईं। http://www.satyodaya.com

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ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल है कई बीमारियों की जड़, बरतें ये सावधानियां

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नई दिल्ली। आज कल युवाओं में ईयरफोन का चलन ज्‍यादा बढ़ने लगा है। फिर चाहें सड़क पर चलते युवा हों या किसी बस, मेट्रो ट्रेन में बैठे लोग, उनके कानों में ईयरफोन लगा जरूर दिख जाएगा। मगर क्या आप जानते हैं? कि ईयरफोन लगाना और तेज आवाज में गाना सुनना आपके कानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ईयरफोन का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करने से कानों में दर्द और सुनने में परेशानी जैसी समस्‍या हो सकती है। कई घंटों तक हेडफोन और ईयरफोन का इस्तेमाल करने से न सिर्फ कानों को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि इससे मस्तिष्क पर भी नकारात्मक असर पड़ता सकता है। इसकी वजह यह है कि ईयरफोन से निकलने वाली चुंबकीय तरंगे मस्तिष्क की कोशिकाओं पर बुरा असर डालती हैं। इसीलिए ईयरफोन का इस्तेमाल करने से सिर में दर्द, नींद न आने की समस्‍या, कानों में दर्द और गर्दन के किसी हिस्से में दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ईयरफोन में आने वाली सूक्ष्म ध्वनि भी स्‍पष्‍ट और तेज सुनाई देती है। अगर आप इसका इस्‍तेमाल करना ही चाहते हैं। तो इसे कम से कम आवाज पर रखें। बता दें ईयरफोन का इस्‍तेमाल करने वालों को इससे जुड़े इन प्रभावों की जानकारी जरूर होनी चाहिए। साथ ही आप इससे बचाव के कुछ तरीके अपना कर भी खुद को इसके दुष्‍प्रभाव से बचा सकते हैं।

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साफ-सफाई का रखें ध्‍यान
आप ईयरफोन चाहे जिस तरह का इस्तेमाल कर रहे होते हैं। फिर भी उस पर बैक्टीरिया पनपने का खतरा बना रहता है। जब आप अपने कान में इसे लगाते हैं, तो इन बैक्‍टीरिया की वजह से कान में संक्रमण होने की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में अपने ईयरफोन की साफ-सफाई का पूरा ध्‍यान रखें।

ईयरफोन कभी शेयर न करें
कई बार दोस्‍तों में ईयरफोन को भी शेयर कर लिया जाता है। मगर आपको इससे बचना चाहिए। क्‍योंकि इससे किसी अन्‍य का संक्रमण आपके कानों तक पहुंच कर आपको भी नुकसान पहुंचा सकता है।

कानों से कम सुनाई देना
आप अगर ईयरफोन का ज्‍यादा इस्तेमाल करते हैं, तो इससे आपके कानों की सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। सामान्य तौर पर कानों की सुनने की क्षमता 90 डेसिबल होती है, जो लगातार सुनने से धीरे-धीरे 40 से 50 डेसिबल तक कम हो जाती है। वहीं कुछ मामलों में यह बहरेपन का कारण भी बन सकता है।

ईयरफोन ज्‍यादा देर न करें इस्‍तेमाल
अगर आप संगीत सुनने का शौक रखते हैं। और रोजाना संगीत सुनने के लिए ईयरफोन का इस्‍तेमाल करते हैं। तो 2 घंटे से अधि‍क समय तक अपने कानों में ईयरफोन न लगाएं। बीच-बीच में कानों को आराम दें। वरना लगातार ईयरफोन लगाने की वजह से आपके कानों को क्षति पहुंच सकती है।

बचाव का तरीका
अगर आप सड़क पर चल रहे हैं या वाहन चला रहे हैं। तो ईयरफोन का इस्‍तेमाल बिल्कुल न करें। इससे आप और अन्‍य लोग भी प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही दुर्घटना होने का खतरा बढ़ जाता है।और आपको अगर अपने काम की वजह से लगातार कई घंटों तक ईयरफोन का इस्तेमाल करना पड़ता है, तो एक घंटे के दौरान कई बार 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें। इससे कानों को आराम मिलेगा।
बता दें ईयर फोन लगाने से मल्टीपल फ्रिक्वैंसेस की टोन कान के पर्दे से टकराती है और टकराने के बाद वापस भी आ जाती हैं। ऐसे में कई सारी आवाजें कान के अंदर घूमती रहती हैं। इससे कानों की नसें कमजोर हो सकती हैं।http://satyodaya.com

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कोरोना वायरस

बॉडी की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा है फायदेमंद, तो कुछ है इसके भी साइड-इफेक्ट

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नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से बचाव के लिए हेल्थ एक्सपर्ट लोगों को इम्यूनिटी स्ट्रांग करने की सलाह दे रहे हैं। इम्यूनिटी को स्ट्रांग करने के लिए लोगों ने अपनी दिनचर्या में काफी बदलाव भी किया है। वही काढ़ा पीना उन्हीं बदलावों में से एक है। कुछ लोगों ने अपने वर्तमान में रेगुलर बेसिस पर काढ़े को अपनी डायट में भी शामिल कर लिया है। हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि काढ़ा इम्यूनिटी को बूस्ट कर फ्लू या इंफेक्शन से लड़ने वाली टी-सेल्स जेनरेट करता है। काढ़ा शरीर के लिए जितना फायदेमंद माना जाता है। उतने ही इसके नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए सेहत का ख्याल रखते हुए काढ़ा पीते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी है।
डॉक्टर्स का कहना है कि काढ़ा पीने वाले अगर कुछ खास बातों पर ध्यान ना दें तो ये आपकी सेहत खराब भी कर सकता है इसीलिए काढ़ा पीने वालों को अपनी उम्र, सेहत और मौसम को ध्यान में रखते हुए इसका सेवन करना चाहिए।

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जिन लोगों का पाचन कमजोर होता है। उन्हें रेगुलर बेसिस पर काढ़ा पीने से मुंह में छाले, यूरिन में परेशानी, गैस, पेट में जलन जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए पहले अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखें। तभी किसी भी प्रकार के काढ़े का सेवन करें।
काढ़ा बनाने के लिए लोग गिलोय, दालचीनी, अश्वगंधा, सोंठ का इस्तेमाल करते हैं। जो कि ये सब काफी गर्म होते हैं। अगर नियमित रूप से इन गर्म चीजों का सेवन किया जाए तो पेट में एसिडिटी और नाक से खून आने की समस्या हो सकती है। आपको इनमे से किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या है। तो इन पदार्थों की मात्रा काढ़े में कम रखें।
बता दें जहां एक तरफ कोरोना वायरस है। तो वहीं दूसरी तरफ बदलते मौसम की वजह से सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी बीमारियां लोगों के लिए एक नई समस्या बन गई हैं। सर्दी या जुकाम से परेशान लोगों के लिए काढ़ा बड़ा फायदेमंद माना जाता है। हालांकि कुछ लोगों को इसमें बड़ी सतर्कता बरतनी चाहिए। खासतौर से उन लोगों को जिन्हें पित्त की शिकायत है। इन लोगों को काढ़े में काली मिर्च, सोंठ और दालचीनी का इस्तेमाल करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। यदि आप काढ़े का रेगुलर इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। तो उसे कम मात्रा में लेना ही सही होगा। काढ़ा बनाते वक्त बर्तन में सिर्फ 100 मिलीलीटर पानी डालें। फिर जरूरी चीजों को मिलाने के बाद उसे तब तक उबालें जब तक काढ़ा 50 मिलीलीटर यानी आधा ना हो जाए। उसके बाद ही इसका सेवन करें।://satyodaya.com

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कोरोना वायरस

कोरोना से बचने व बॉडी की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए करें काबासुरा कुदिनेर औषधि का सेवन

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नई दिल्ली। पूरी दुनिया में कोरोना का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। हर दिन हजारों लोग इस महामारी की चपेट में आ रहे हैं। इसलिए लोगों की बॉडी इम्यूनिटी सिस्टम का स्ट्रांग होना बहुत जरुरी है। यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत मजबूत होगी। तभी लोग कोरोना का सामना करने में सक्षम होंगे। वैज्ञानिकों का भी मानना है। कि कोरोना संक्रमण इतनी जल्दी थमने वाला नहीं है। इसलिए ऐसी स्थिति में सभी लोगों को अपनी इम्यूनिटी मजबूत करना बेहद जरूरी है।

आयुर्वेदिक उपचार से भी बढ़ती है इम्युनिटी
डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार को कई लोग प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में काबासुरा कुदिनेर एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है। ये बॉडी इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए रामबाण औषधि मानी जा सकती है। इस औषधि से कफ और सांस से संबंधी समस्याएं दूर की जा सकती हैं। यह एक प्रकार का चूर्ण है। जो बुखार, खांसी और ठंड को नियंत्रित करने में सहायता करता है। साथ ही जो शरीर को बीमार करते हैं। बॉडी से ऐसे टॉक्सिन को बाहर निकाल देता है।

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काबासुरा कुदिनेर चूर्ण में सामग्री और सेवन का तरीका
अदरक, लौंग, दुशाला, कोकिलाक्ष, हरितकी, मालाबार नट, अजवाइन, कुस्टा, गुदुची, भारंगी, कालमेघ, राजा पात, मस्ता. उपरोक्त सभी जड़ी बूटियों को सुखाने के बाद अच्छी तरह से पीसकर मोटा पाउडर तैयार किया जाता है। बता दें इस चूर्ण का काढ़ा बनाकर पिया जाता है। इसके लिए 200 मिलीलीटर पानी में 5 से 10 ग्राम काबासुरा कुदिनेर का चूर्ण डालें। फिर धीमी आंच पर तब तक उबालें, जब तक कि यह पानी 50 मिलीलीटर ना हो जाए। उसके बाद इसे छानकर पी लें. डॉक्टरों के निर्देशानुसार यह काढ़ा 25 से 50 मिलीलीटर रोजाना दो समय लेना चाहिए। इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एनाल्जेसिक, एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटी-ऑक्सीडेंट, हैपेटॉप्रोटेक्टिव, एंटी-पायरेटिक, एंटी-अस्थमेटिक और साथ ही इम्यूनोमोड्यूलेटरी आदि सभी गुण पाए जाते हैं। जो किसी भी प्रकार की बीमारी को दूर करने में सहायक होते हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहे है। तो जल्द ही डॉक्टर से इसके बारे में संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में स्वयं जिम्मेदार होंगे।http://satyodaya.com

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