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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने मनाया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

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लखनऊ। सीएम योगी लगातार उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को और भी बेहतर करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में बच्चों में कृमि संक्रमण से जुड़े जन स्वास्थ्य समस्या से बचाव के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आज राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत यूपी के 57 जनपदों के सभी स्कूल और आंगनवाड़ी में 1 से 19 साल तक के सभी बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवाई खिलाकर कृमि मुक्त किया जा रहा है। सीएम योगी के बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा सुविधा प्रदान कराने के वादे के साथ राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग और स्वच्छ भारत मिशन समेत कई विभाग संगठित प्रयास में लगातार कार्य कर रहे हैं।

लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। इस एक दिन में 1 से 19 वर्ष के तकरीबन 14 लाख बच्चों को अल्बेंडाजॉल की एक गोली खिलाकर इस संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को मनाने के साथ-साथ एनीमिया मुक्त भारत का मकसद भी शामिल है। सीएमओ ने बताया कि अल्बेंडाजॉल गोली 1 से 19 वर्ष के बच्चों को कृमि संक्रमण से सुरक्षित रखती है। लेकिन जिनके पेट में कीड़े होते हैं उनको थोड़ी दिक्कत हो सकती है। हालांकि दिक्कत होने पर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सीएमओ ने कहा कि इस बार राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर तमाम विभागों ने सहयोग दिया, जिससे बहुत जल्द इस पहल के सकारात्मक नतीजे सामने आने की उम्मीद है।

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वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में कार्यात स्वास्थ शिक्षाधिकारी मनोरमा बच्चों को राष्टीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर खुद दवा खिलाकर उन्हें कृमि संक्रमण के प्रति जागरूक करती दिखी। उन्होंने कहा कि सबसे अच्छी बात है कि दवाई का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। बस बच्चों का पेट भरा होना चाहिए। खाना खाने के बाद इस दवाई को खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। अगर कोई समस्या हो जाती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चे को अस्पताल ले जाएं और कुछ देर में समस्या ठीक हो जाएगी। स्वास्थ शिक्षाअधिकारी ने बताया कि कृमि बहुत ही गंभीर संक्रमण है इसलिए इससे बचने के लिए दवाई बेहद ही जरूरी है। कई समस्याएं सामने आती हैं जिन से बचाव के लिए 1 से 19 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजॉल की एक गोली खाना बेहद फायदेमंद होता है।

भारत में कृमि संक्रमण एक जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में 5 से 14 साल तक की उम्र के 22 करोड़ से भी अधिक बच्चों को कृमि संक्रमण का खतरा है। साथ ही डब्ल्यूएचओ की घोषणा के अनुसार विश्व में भारत उन देशों में से एक है जहां कृमि संक्रमण और इससे संबन्धि रोग सबसे अधिक पाए जाते हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि इस कार्यक्रम की पहुंच सभी बच्चों तक सुनिश्चित हो।http://www.satyodaya.com

अपना शहर

अस्पतालों में बने रैनबसेरों में तीमारदार ठिठुरने को मजबूर, ज़िम्मेदार लापरवाह

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लखनऊ। राजधानी में ठंड ने दस्तक दे दी है। सर्दी इस कदर है कि शाम होते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। शाम होते ही चौराहों पर सन्नाटा पसरने लगता है। लेकिन अस्पतालों के रैन बसेरे अपनी बदहाल व्यवस्था का रोना रो रहे है। अस्पतालों में मरीजों के तीमारदार ठंड से ठिठुर रहे हैं तो वहीं ज़िम्मेदार घर पर बैठे रजाई का मजा ले रहे है। लापरवाही का आलम ये है केजीएमयू बना रैन बसेरा करीब एक साल होने के बाद भी नहीं शुरू हो पाया है।

केजीएमयू….

केजीएमयू शताब्दी के पास 7.60 करोड़ की लागत से 210 बेड के रैन बसेरा बने एक साल से ज्यादा हो जाने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। तत्कालीन गृहमंत्री लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह द्वारा उद्घाटन किया था। लेकिन अभी भी तीमारदार खुले वाले रैन बसेरे पर रात गुजारने को मजबूर हैं। पीपीपी मॉडल पर संचालित किए जाने वाले रैन बसेरे के लिए केजीएमयू ने टेंडर जारी किया था। लेकिन अभी तक टेंडर नहीं हो पाया है। वहीं केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि टेंडर प्रकिर्या चल रही है पूरी होते ही तीमारदारों को इसका लाभ मिलने लगेगा।

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बलरामपुर अस्पताल

बलरामपुर अस्पताल में न्यू बिल्डिंग के सामने बने रैन बसेरे को तोड़ दिया गया है। अस्पताल की न्यू बिल्डिंग के नीचे एक कमरे को रैन बसेरा बना दिया गया है उस कमरे की हालत यह है कि संक्रमण को दावत दे रहा है। अस्पताल में आ रहे तीमारदार मजबूरन खुले में सोने पर मजबूर हैं। बलरामपुर अस्पताल के प्रवक्ता एसएन त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम द्वारा स्मार्ट सिटी के तहत दिन बसेरा बन रहा है और जल्दी से बनवा कर मरीजों को सेवा दी जाएगी।http://www.satyodaya.com

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नवजात को जन्म के तुरंत बाद नहलाएं नहीं

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लखनऊ। नवजात को जन्म के तुरंत बाद नहीं नहलाना चाहिए। माँ के दूध के अलावा उसे कुछ भी नहीं देना चाहिए। यहां तक कि 6 माह तक पानी भी नहीं देना चाहिए क्योंकि माँ के दूध में पर्याप्त मात्रा में पानी होता है। नवजात की नाल पर भी कुछ न लगाएं। उसे सूखने देना चाहिए।

रानी अवन्तीबाई जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान बताते हैं कि नाल जितनी सूखी रहेगी उतनी जल्दी गिरेगी। अगर नवजात का जन्म समय से हुआ हो तो नाल गिरने के बाद और यदि समय से पहले जन्म हुआ हो तो जब तक नवजात का वजन 2.5 किलो न हो जाये तब तक उसे नहीं नहलाना चाहिए। यदि नवजात का वजन 1800 किग्रा से कम है तो खतरे की संभावना अधिक होती है। ऐसे में नवजात को जिला अस्पताल के सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती करवाना चाहिए।

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आगे उन्होंने बताया कि नवजात को खीस या कोलोस्ट्रम अवश्य देना चाहिए क्योंकि इसमें नवजात के लिए आवश्यक पोषक तत्व व एंटीबोडीस होते हैं। जिनमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है। नवजात को 6 माह तक सिर्फ माँ का दूध ही देना चाहिये क्योंकि इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जिनकी बच्चे को आवश्यकता होती है। इससे डायरिया व निमोनिया का खतरा भी कम होता है।http://www.satyodaya.com

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प्रसव केन्द्रों पर प्रशिक्षित नर्स मेंटर की होगी तैनाती…

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लखनऊ। प्रदेश के सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर गुणवत्तापरक सामान्य प्रसव की सुविधा सरकार देगी। इसके साथ ही प्रसव के दौरान और उसके बाद किसी भी मातृ एवं नवजात संबंधी जटिलताओं के निदान, प्रबंधन और संदर्भन पर भी फोकस किया जा रहा है। इन सारी व्यवस्थाओं को सही मायने में व्यवस्थित करने के लिए प्रसव केन्द्रों पर विशेष रूप से प्रशिक्षित नर्स मेंटर को तैनात किया जा रहा है। इसके तहत नर्स मेंटर को छह दिवसीय दक्ष प्रशिक्षण नोएडा में टीएनएआई द्वारा, तीन दिवसीय मण्डल स्तरीय दक्षता प्रशिक्षण और पाँच दिवसीय प्रशिक्षण मेंटरिंग कौशल पर लखनऊ में उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपीटीएसयू) द्वारा प्रदान किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश के मिशन निदेशक की तरफ से अपर मिशन निदेशक जसजीत कौर ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी कर नर्स मेंटर के संबंध में दिये गए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है।

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प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद नव चयनित नर्स मेंटर ब्लाक मुख्यालय पर स्थित सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत स्टाफ नर्स और एएनएम की विधिवत मेंटरिंग और उनका आस्की आधारित योग्यता का मूल्यांकन करेंगे। प्रसव केन्द्रों पर गुणवत्तापरक सेवाएं प्रदान करने के लिए नर्स मेंटर द्वारा लक्ष्य चेक लिस्ट आधारित गैप-एनालिसिस और कार्य योजना तैयार करने में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी का सहयोग भी किया जाएगा।http://www.satyodaya.com

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