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डायबिटीज बीमारी से मुक्त होने के लिए जरुरी है, खान पान का विशेष ध्यान…

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लखनऊ। डायबिटीज बीमारी से मुक्त होने के लिए जरुरी नहीं है कि नियमता से दवाईयों का सेवन करें। इसके लिए जरुरी है कि आप समयानुसार सेहत का ध्यान रखें, साथ ही अपने खान पान में परिवर्तन लाए। तभी आप डायबिटीज जैसी बीमारी से मुक्त हो सकते हैं। यह जानकारी कल्चरल टुरिज्म विभाग केजीएमयू के प्रिंसपल सेक्रेटरी जितेन्द्र कुमार ने दी।

राजधानी स्थित केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल में डायबिटीज बीमारी पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में केजीएमयू के कई विभाग के शोध छात्र-छात्राएं, डॉक्टर्स व अन्य लोग मौजूद रहे। सेमीनार में जितेन्द्र कुमार ने सभी शोध छात्रों को डायबिटीज बीमारी से सम्बन्धित तमाम प्रकार की जानकारी दी। इसके साथ होने वाले कई तरह के रोगों से बचने के लिए उपाय भी बताए।

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जितेन्द्र कुमार ने डायबिटीज से सम्बंधित जानकारी देते हुए बताया कि ये एक खतरनाक बीमारी है। इसकी वजह से इंसान को हार्टअटैक भी आ जाता है। लेकिन ये कोई उम्र की बीमारी नहीं है, जो इसी अवस्था में आ सकती है, ये बीमारी किसी को भी हो सकती है। साथ ही कहा जब तक की वो इंसान अपने सेहत का ध्यान न रखे।

आगे कहा कि लोगों को ऐसा लगता है, डायबिटीज दवाईयों के सेवन करने से ठीक हो सकता है, लेकिन नहीं इसके लिए जरुरी है कि हम और शरीर को फुर्तीला रखें। जितेन्द्र कुमार ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले कई वर्ष पहले हमने डायबिटीज पर काम किया था। उसके बाद मालूम हुआ कि डायबिटीज को किसी दवाई से नहीं बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने से दूर होगा। वहीं कहा कि इसके लिए हम सभी को अपने वातावरण व खान-पान को सही करने की जरुरत है।  http://www.satyodaya.com

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अब 30 वर्ष से अधिक लोगों की होगी कैंसर व मधुमेह की जांच

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फाइल फोटो

एक हजार आबादी में आशाएं बनाएंगी इन सभी की सूची

लखनऊ। सीएमओ ने कहा है कि अब भारत सरकार गैर संचारी रोगों कैंसर, मधुमेह तथा हाई ब्लड प्रेशर के लिये 30 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों की जांच करवाएगी। यह जांच आशाओं की मदद से किया जाएगा। आशाऐं एक हजार की आबादी में 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों की सूची बनाएगी। यह संख्या लगभग 370 होती हैं।

सीएमओ डॉ. नरेन्द्र अग्रवाल एएनएन प्रशिक्षण केंद्र अलीगंज में लखनऊ की 37 एएनएम का गैर संचारी रोगों पर 3 दिवसीय प्रशिक्षण समापन पर संबोधित कर रहे थे। यह प्रशिक्षण 19 दिसम्बर से शुरू हुआ था। इस दौरान डॉ. एसके सक्सेना ने सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। डॉ. अगवाल ने आगे कहा कि इन सभी लोगों केसी बैक (कम्युनिटी बेस्ड एसेसमेंट चेकलिस्ट)फार्म आशाओं द्वारा भरे जायेंगें। इसके आधार पर जिन्हें अधिक नम्बर मिलेंगें, उनकी जांच पहले की जाएगी, लेकिन जांच सभी की होगी।

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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय राजा ने बताया कि आशाएं अपनी एक हजार की आबादी में 30 वर्ष से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों का सीबैक फॉर्म भरेंगी। इन सभी का कम्युनिटी बेस्ड एसेसमेंट चेक लिस्ट (समुदाय आधारित मूल्यांकन प्रपत्र ) भरा जाएगा। जिसके आधार पर उनमें रोग होने की संभावना का पता चलेगा। जो व्यक्ति ज्यादा संदेह के घेरे में होंगे उनकी पहले जांच की जाएगी। सभी लोगों की वर्ष में एक बार मधुमेह ,उच्च रक्तचाप तथा मोटापे के लिए जांच की जाएगी। कैंसर के लिए पांच वर्ष में एक बार जांच की जायेगी। यह प्रशिक्षण डॉ. एसके सक्सेना, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अजीत कुमार यादव तथा सुष्मिता द्वारा दिया गया।http://www.satyodaya.com

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सीएमओ ने अस्पतालों को अलर्ट रहने के दिए निर्देश…

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रात में जो भी डॉक्टर गायब मिला तो उसके खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में रात को अफसरों के निरीक्षण में जो भी डॉक्टर गायब मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अब रात में डॉक्टर, स्टाफ आदि ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे। सीएमओ ने सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य अस्पतालों को यह निर्देश भेजा है। इसके साथ ही सीएमओ ने अस्पतालों को अलर्ट रहने का भी निर्देश दिया है।

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लखनऊ शहर में आठ और ग्रामीण क्षेत्र में 11 सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) हैं। जबकि शहर में 52 और ग्रामीण क्षेत्र में 28 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) हैं। इन सभी जगह पर डॉक्टरों और स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया है। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने सभी प्रभारियों या अधीक्षकों को निर्देश जारी किया है कि कोई भी डॉक्टर रात की ड्यूटी से गायब नहीं रहेगा। घर कतई नहीं जाएगा। इमरजेंसी में ही मौजूदगी रहेगी। यही निर्देश संबंधित पैरामेडिकल एवं अन्य कर्मचारियों के लिए भी हैं। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी अस्पतालों में निर्देश जारी किया गया है। सभी डॉक्टर, स्टाफ इमरजेंसी में 24 घंटे तैनात रहें।

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तनावपूर्ण स्थिति से सरकारी अस्पताल भी प्रभावित,50 फीसदी से भी कम मरीज…

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लखनऊ। नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में चल रहे तनावपूर्ण माहौल से राजधानी के सरकारी अस्पताल भी पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इस दौरान कई जगहों पर मरीजों को सर्वर ने भी रूलाया। 50 फीसदी से भी कम मरीज इन अस्पतालों में पहुंचे। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी में डॉक्टर और स्टाफ बैठे रहे। कम जांच भी हुई।

प्रदेश के हालात को देखते हुए मरीजों की संख्या अस्पतालों में कम पहुंची। अस्पतालों में आमतौर पर लोगों को लाइन में लगना पड़ता है। अस्पतालों में पहुंचे मरीजों को लाइन भी नहीं लगना पड़ा। पर्चा बनवाने से लेकर ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने में महज 15 मिनट लगा। जबकि अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, खून की जांच कराने वाले मरीजों को भी कम समय ही लगा। अन्य दिनों में मरीज को सरकारी अस्पताल में इलाज कराने में डेढ़ से दो घंटा तक लग जाता है।

सामान्य दिनों में बलरामपुर और सिविल अस्पताल में 2500 से 2800 मरीजों के पर्चे बनाकर इलाज किया जाता है। ऐसे ही महिला और बाल रोग के अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में भी पांच सौ से 1000 मरीजों का इलाज होता है। लेकिन इन सरकारी अस्पतालों में 40 से 50 फीसदी मरीज पहुंचे। सामान्य दिनों में केजीएमयू में करीब आठ हजार नए पुराने मरीज आते हैं। आंकड़े के मुताबिक बलरामपुर अस्पताल में 1005 सिविल में 1170 वहीं लोकबंधु में 932 जबकि लोहिया में 734, केजीएमयू में 4300 व डफरिन 282 में मरीजों को इलाज मिला।

इंटरनेट सेवाएं बंद होने से कई अस्पतालों की रही मुसीबत

गुरूवार को इंटरनेट सेवाएं आधी रात के बाद बंद कर दी गईं। जिससे शुक्रवार को कई अस्पतालों में मरीजों का पंजीकरण नहीं हो सका। मैन्युअल पर्चे देकर मरीजों का इलाज किया गया। हजरतगंज स्थित झलकारीबाई अस्पताल के ओपीडी में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश मरीज दूर-दराज के जिलों से इलाज कराने पहुंचे थे। ओपीडी में केवल 150 मरीजों ने इलाज करवाया। वहीं डफरिन अस्पताल में इंटरनेट बधित होने के कारण मैन्युअल पर्चे बनाए गए। डफरिन में कुल 282 तो वहीं प्रसूता विभाग क्वीनमेरी में 201 पर्चे बने।

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जन औषधि केंद्र भी बंद रहे

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी बंद रहे। बलरामपुर, सिविल, लोहिया समेत अन्य सरकारी अस्पतालों के परिसर में ही जन औषधि केंद्र अलग से बने हुए हैं। अस्पतालों में निशुल्क दवा न मिलने पर कई मरीज इन केंद्र पर सस्ती दवा लेने पहुंचे, लेकिन उन्हें बिना दवा के ही लौटना पड़ा।

अस्पतालों की इमरजेंसी में बेड आरक्षित

सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में बेड आरक्षित किए गए हैं। प्रमुख सरकारी अस्पताल बलरामपुर, सिविल, लोकबंधु समेत अन्य बड़े अस्पताल की इमरजेंसी में 10-10 बेड आरक्षित हैं। सिविल के निदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि इन बेड को आपात स्थिति के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि सरकारी अस्पतालों के अलावा सीएचसी, पीएचसी में भी बेड आरक्षित किए गए हैं। साथ ही डॉक्टरों और कर्मचारियों को अलर्ट रखा गया है।

क्वीनमैरी में हिपेटाइटिस जांच वाली किट खत्म

क्वीनमैरी में पिछले कई दिनों से हिपेटाइटिस की जांच करने वाली किट खत्म हो गई है। अब तक अस्पताल प्रशासन ने किटें खरीदने की प्रक्रिया शुरू तक नहीं की है। मामले को लेकर मुलाजिम कन्नी काट रहे हैं। जांच के लिए मरीजों को निजी लैब में टेस्ट करवाकर अपनी जेब कटवानी पड़ रही है जबकि सरकार की ओर से अस्पताल में सभी टेस्ट मुफ्त हैं। क्वीनमैरी की प्रवक्ता डॉ स्मृति अग्रवाल का कहना है कि हमें अभी तक किट खत्म होने की सूचना नहीं मिली है, मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए टेस्ट किट मंगवाई जाएंगी।http://www.satyodaya.com

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