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ख़ैरियत

इस इत्र की कीमत है 50 लाख रुपए, जानना चाहेंगे यूपी में कहां बनता है ये….

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लखनऊ। इत्र नगरी कहलाने वाला उत्तर प्रदेश का कन्नौज, इत्र की खुशबू के लिए दुनियाभर में मशहूर है। कहा जाता है कि कन्नौज की हवाएं अपने साथ खुशबू लिए चलती हैं। इस शहर में इत्र का बड़े स्तर पर कारोबार होता है। कन्नौज के खुशबूदार सेंट की मांग सिर्फ देश में ही नहीं बल्की विदेशों में भी है।

कन्नौज को इत्र बनाने का तरीका और नुस्खा फारस के कारीगरों से मिला था। कन्नौज में तैयार इत्र पूरी तरह से प्राकृतिक गुणों से भरपूर और अल्कोहल मुक्त रखा जाता है। इसी कारण एक दवा के रूप में कुछ रोग जैसे एंग्जाइटी, नींद न आना और स्ट्रैस जैसे बीमारियों में इत्र की खुशबू रामबाण का काम करती है।

आज भी परंपरागत इत्र की खुशबू जिसमें गुलाब, केवड़ा, बेला,केसर, कस्तूरी, चमेली, मेंहंदी, कदम, गेंदा खुशबूएं तो पहले वाली शिद्दत से ही पसंद की जाती रही हैं। इसके अलावा कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिन्हें कोई शायद पहचानता भी नहीं है। इन नामों में शमामा, शमाम-तूल-अंबर और मास्क-अंबर जैसे इत्र प्रमुख हैं।

1990 तक कन्नौज में लगभग 770 से अधिक कारखाने थे जिनकी संख्या अब बहुत कम हो गई है। लेकिन इत्र की खुश्बू को पसंद करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। सबसे कीमती इत्र अदरऊद है, जिसे असम की विशेष लकड़ी आसामकीट से बनाया जाता है। बाजार में इसकी कीमत 50 लाख रुपये प्रति किलो है।

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कम लागत में लगेंगी नवीनतम् तकनीक की डायग्नोस्टिक मशीनें

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तीन माह में शुरू होगा मशीनों का संचालन

लखनऊ। देश में कम लागत में नवीनतम् तकनीक की डायग्नोस्टिक मशीनें लगायी जाएंगी। इन मशीनों का संचालन अगले तीन माह में शुरू हो जायेगा। भारत की प्रमुख डायग्नोस्टिक कम्पनी पीओसीटी सर्विसेज ने कोरिया की अन्तर्राष्ट्रीय मीकोबायोमेड कम्पनी लिमिटेड के साथ अपने संयुक्त ज्वाइन्ट वेंचर की घोषणा की है। कम्पनी के अध्यक्ष सौरभ गर्ग द्वारा इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया है। गर्ग के मुताबिक अगले तीन माह में पूरे भारत में मशीनों का संचालन शुरू हो जायेगा। वहीं इन मशीनों का संचालन होने से अधिक वित्तीय लाभ होगा। साथ ही मरीजों को रोगों से छुटकारा दिलाने में काफी सफलता मिलेगी।

यह भी पढ़ें :- सरकारी अस्पताल व डाट्स सेंटर में नहीं मिलती पूरी दवाएं

कम्पनी अध्यक्ष ने बताया कि भारत मे आईवीडी क्षेत्र में पीओसीटी सर्विसेज के साथ संयुक्त रूप से प्रवेश करने के लिए काफी उत्साहित हैं। डायग्नोस्टिक बाजार में मौलीकुलर डायग्नोस्टिक सेवाओं को कम से कम दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। पीओसीटी अध्यक्ष ने कहा कि मीकोबायोमेड कम्पनी द्वारा किये जाने वाले भारी वित्तीय निवेश से भारत में कम दर वाले डायग्नोस्टिक उपकरणों को संचालित कर मरीजों को उनके उपचार किये जाने में आने वाली आवश्यकताओं की भी पूर्ति करेगा।http://www.satyodaya.com

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सरकारी अस्पताल व डाट्स सेंटर में नहीं मिलती पूरी दवाएं

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लखनऊ। राजधानी के सरकारी अस्पताल व डाट्स सेंटर में मरीजों को टीबी की पूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं। आधी-अधूरी दवाएं देकर मरीजों को लौटा दिया जाता है। इस वजह से गरीब मरीज बाजार से दवाएं खरीदने को मजबूर होता है। शिकायत के बाद भी दवाओं की व्यवस्था को नहीं सुधारा गया।

यह भी पढ़ें :- राजधानी में लगातार बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, सरोजनी नगर ब्लॉक में मिले सबसे ज्यादा 26 मरीज

मरीजों को लिवोफ्लॉक्सासिन डॉट्स सेंटर से लेकर टीबी यूनिट तक नहीं मिल रही है। इसके अलावा साइक्लोसिरिन, इफयोनामाइट, क्लोफासिमिन समेत आदि दवाओं का कई सेंटरों पर संकट है। हालात यह है कि आठ से नौ दवाओं में चार से छह तरह की दवाएं ही मिल रही हैं।http://www.satyodaya.com

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राजधानी में लगातार बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, सरोजनी नगर ब्लॉक में मिले सबसे ज्यादा 26 मरीज

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लखनऊ। राजधानी में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध टीबी रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के बाद 164 व्यक्तियों में इसकी पुष्टि की गई। जबकि सीएमओ ने 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। सीएमओ कार्यालय में गुरूवार को जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि 10 से 22 जून तक चिन्हित क्षेत्रों में सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान संचालित किया गया। इसके लिए 750 सदस्यों द्वारा 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

यह भी पढ़ें :- उत्तर प्रदेश में 22 करोड़ होंगे पौधारोपड़, लक्ष्य प्राप्ति के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश…

उन्होंने बताया कि उक्त दिवस के दौरान पर्यवेक्षकों व टीम सदस्यों द्वारा 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध क्षय रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के उपरांत 164 व्यक्तियों में क्षय रोग की पुष्टि संबंधित क्षेत्र के चिकित्सकों द्वारा किया गया जिनको कार्यक्रम अंतर्गत निकटतम केंद्र पर उपचार की व्यवस्था प्रारंभ करा दी गई है। डीटीओ लखनऊ डॉक्टर बी.के. सिंह ने अवगत कराया कि 10 दिवसीय अभियान के दौरान सरोजनी नगर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 26 रोगी चिन्हित किए गए। सभी 16403 चयनित रोगियों को डीबीटी के माध्यम से निक्षय पोषण योजना का लाभ सीधे उनके खाते में स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। 500 प्रति माह की दर से मरीजों के खाते में उपचार अवधि तक निरंतर स्थानांतरित की जाती रहेगी।

सीएमओ ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से अब तक लखनऊ में 2 करोड़ 38 लाख 42 हजार का भुगतान मरीजों के खाते में किया जा चुका है। सक्रिय रोगी खोज अभियान में जनपद लखनऊ निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रथम चरण में फरवरी 2018 में 38 क्षयरोगी। द्वितीय चरण जून में 72 क्षयरोगी, तृतीय चरण सितंबर में 96 क्षयरोगी, चतुर्थ चरण जनवरी 2019 में 119 क्षयरोगी तथा जून के चरण में कुल 164 क्षय रोगी की खोजे गए हैं।http://www.satyodaya.com

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June 29, 2019, 12:11 pm
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