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ख़ैरियत

जानिए आंखों का कैंसर किस उम्र में बच्चों को होता है ज्यादा…

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दस हजार बच्चों में से किसी एक बच्चे को होता है रेटिनोब्लास्टोमा

लखनऊ। कैंसर कई प्रकार का होता है जिसमें से आंखों का कैंसर भी एक मुख्य समस्या है। आंखों का कैंसर दस हजार बच्चों में से किसी एक को होता है। अगर चिकित्सकों की मानें तो ये लगभग 5 साल की आयु तक होने का खतरा होता है और इस बीमारी कि जागरुकता को लेकर केजीएमयू में मनाया जा रहा है रेटीनोब्लास्टोमा जागरूकता सप्ताह। रेटिनो ब्लास्टोमा सप्ताह का आयोजन 13 मई से 20 मई किया जा रहा है।

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आई सर्जन प्रोफेसर संजीव गुप्ता ने बताया कि एक सप्ताह तक आंख के कैंसर का जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टर प्रोफेसर 1 सप्ताह तक लोगों को जागरूक करने का काम करेंगे। रेटिनोब्लास्टोमा मतलब आंख का कैंसर जो कि दस हजार बच्चों में से किसी एक में पाया जाता है या बहुत ही घातक कैंसर माना जाता है। इस पर विस्तृत चर्चा पूरे सप्ताह की जाएगी। आंख के कैंसर का लक्षण क्या होता है और यह किस तरीके से होता है इससे बचाव के क्या कारण होते हैं इस पर 7 दिन के जागरूकता अभियान के साथ संगोष्ठी का कार्यक्रम किया जा रहा है।

संगोष्ठी में डॉक्टर ने चर्चा करते हुए कहा कि छोटे बच्चों की आंख में चमक दिखने पर तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाना चाहिए जिससे आंख के कैंसर से बचा जा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि छोटे बच्चों में तीनों ब्लास्टोमा जैसी खतरनाक बीमारी ज्यादा होती है। डॉक्टर काफी संजीदगी के साथ इस पर चर्चा कर रहे हैं। रेटिनोब्लास्टोमा पर जागरूकता अभियान केजीएमयू के ओल्ड ओपीडी में चलाया जा रहा है। http://www.satyodaya.com

ख़ैरियत

अनियंत्रित खानपान और तनाव युवाओं को भी बना रहा है हाइपरटेंशन का शिकार…

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आज वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे है, जिसे उच्च रक्तचाप भी कहते हैं। लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए वर्ल्ड हाइपरटेंशन मनाया जाता है। बता दें कि हाइपरटेंशन लोगों के बीच एक आम समस्या की तरह बन चुका है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो मानव शरीर में धीरे- धीरे पनपती है। वहीं हाइपरटेंशन शारीरिक व मानसिक दोनों कारणों से हो सकता है। हाइपरटेंशन में धमनियों में रक्त का दवाब बढ़ जाता है, दवाब की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का संचार बनाए रखने के लिए दिल को सामान्य से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है।  रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक, जो इस बात पर निर्भर करती है कि हृदय की मांसपेशियों में संकुचन (सिस्टोल) हो रहा है या धड़कनों के बीच में तनाव मुक्तता (डायस्टोल) हो रही है।

आहार एवं जीवन शैली में परिवर्तन रक्तचाप नियंत्रण में सुधार और संबंधित स्वास्थ्य जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकते हैं। हालांकि, दवा के माध्यम से उपचार अक्सर उन लोगों के लिये जरूरी हो जाता है, जिनमें जीवन शैली में परिवर्तन अप्रभावी या अपर्याप्त हैं।


डॉक्टर अतिउल्ला

हाइपरटेंशन के बारे में डॉक्टर अतिउल्ला बताते है कि हाइपरटेंशन में रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव होने के कारण हार्ट की समस्याओं का कारण बन जाता है। हाइपरटेंशन किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है और इस बीमारी के कोई खास लक्षण या संकेत नहीं होते हैं। आजकल से यह एक आम बिमारी हो गई है । आजकल कल का गलत खानपान, ज्यादा तेल मसाले वाला खाना या फिर बाहर का खाना हाइपरटेंशन जैसी बिमारियों को जन्म देता है । डॉ. के मुताबिक तीन में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन से ग्रसित है, जिसमें शहरों में 30-40% और गांव में 15-17% लोग इसका शिकार हो रहें हैं। देखने वाली बात यह है कि ज़्यादातर लोग इस बिमारी को लेकर जागरूक नहीं है । इसके लिए लोगों में जागरूकता लानी चाहिए। वहीं कुछ परिस्थितियों में हाइपरटेंशन के कारण लोगों को सिरदर्द या उल्टी जैसी समस्या हो जाती हैं। अगर इन परेशानियों का समय पर इलाज करवाया जाए तो हाइपरटेंशन एक बड़ी बीमारी का रूप ले लेता है। हाइपरटेंशन के कारण स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

वहीं हाइपरटेंशन किसी एक समस्या के कारण नहीं होता है, बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे-लाइफस्टाइल, आयु, पारिवारिक बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, लेकिन इसमें कई कारण ऐसे भी होते हैं, जिन पर हमारा नियंत्रिण नहीं होता है जैसे कि पारिवारिक बीमारी। कई बार ऐसा देखा गया है कि परिवार के कारण भी बीमारी हो जाती है जैसे- शुगर, ब्लड प्रेशर आदि। इस तरह की बीमारी कई बार जेनेटिक भी होती है। इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए आपको अपने लाइफ स्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होगी, जिससे कई तरह की । अपने लाइफ बीमारियों से से बचा जा सकता है।

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इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए आपको हेल्थी डाइट लेनी चाहिए। कम मात्रा में नमक और हाई पोटेशियम वाले पदार्थों का कम से कम सेवन करना चाहिए। भोजन में कम मात्रा में नमक लेने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से बचा जा सकता हैं। DASH (डायटरी एप्रोच टू स्टॉप हाइपरटेंशन) आहार को इसी तरह के लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस आहार को खाने से आप हापरटेंशन की समस्या को दूर कर सकते हैं।

नियमित व्यायाम करने से भी कई तरह की बीमारियों के होने से बचा जा सकता  हैं। जो लोग शराब या धूम्रपान आदि का सेवन करते हैं, उन सभी लोगों को इस तरह के नशीले पदार्थों से बचना चाहिए क्योंकि इससे रक्तचाप को सामान्य करने में काफी मदद मिलती है। 

इसके साथ ही हाइपरटेंशन और शुगर के मरीजों को कभी भी अपनी दवाई लेनी बंद नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही हाई ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच भी कराते रहना चाहिए। खाने में कम तेल मसाले वाले खाने का सेवन करना चाहिए और प्रतिदिन योगासन भी करना चाहिए।  खाने में ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां, नारियल, शहद का सेवन करना चाहिए।   

वहीं अपने घेर से दूर रहने वाले लोग भी हाइपरटेंशन के शिकार हो रहें है । जी हां यह बात बिलकुल सच है कि अपने घर से दूर रह कर पढाई करना या नौकरी करना लोगों के लिए मुसीबत बन गया है, सबसे ज्यादा मात्रा में युवा हाइपरटेंशन के शिकार हो रहें हैं । सही तरह से खानपान का मिल पाना या स्ट्रेस आदि से ब्लडप्रेशर का ताल मेल बिगड़ जाता है और लोगों को यह हाइपरटेंशन नाम की बीमारी घेर लेती है । इसी कड़ी में सुप्रिया सिंह और नंदिनी कुंवर ने बताया कि वह दोनों किस तरह से अपने घर से दूर रह कर इस समस्या का सामना कर रही हैं –

सुप्रिया सिंह

सुप्रिया कहती है कि जब हम अपने घर से और मां से दूर रहते है, तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जॉब से लेकर रहने-खाने बहुत सारी दिक्कतें होती है। हम हर प्रोब्लम को मां से तो नहीं बता सकते न इसलिए दिमाग हमेशा टेंशन में रहता हैं। सब कुछ अकेले मैनेज करना पड़ता है। कभी-कभी तो समझ नहीं आता कि क्या करें या और न करें । जिससे दिमाग हमेशा डिप्प्रेशन में रहता है और काफी सारी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है ।

नंदिनी कहती है कि घर से दूर रहते हुए हम एक तरफ से अकेले रहने और अपनी समस्याओं को खुद ही टैकल करने के आदि हो जाते है, इससे काफी ज्यादा स्ट्रेस बढ़ता जाता है और ना चाहते हुए भी हाइपरटेंशन की समस्या हो जाती है। कभी- कभी  वर्कप्लेस, घर, करियर से जुड़ी बहुत सी प्रॉब्लम होती है, जिसे घरवालों से शेयर न करने और न ही परेशान करने के बजाय खुद तक ही सिमित रखते है। http://www.satyodaya.com

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अपना शहर

इसोफेगास्टमी एड्रोशिया बीमारी में ग्रसित बच्चे को डाक्टर ने दिया नया जीवनदान

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लखनऊ। मानव शरीर समय-समय पर कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आता रहता है कुछ बीमारियों में तो इलाज के बाद स्वस्थ हो जाता है मगर बहुत सी बीमारी होती है जो मानव के लिए जानलेवा साबित होती है मगर कुछ ऐसी भी बीमारियां होती हैं जो पैदा होते ही बच्चे को जकड़ लेती हैं। इसी प्रकार की एक बीमारी है इसोफेगास्टमी एड्रोशिया कहते हैं, इस बीमारी में जो खाने की नली होती है गले से लेकर पेट तक विकसित नहीं होती है।

इसोफेगास्टमी एड्रोशिया बीमारी में ग्रसित 22-3-2017 केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में प्रोफेसर जेडी रावत की निगरानी में भर्ती हुआ जिसका प्रोफेसर जे.डी. रावत और उनकी टीम के द्वारा तत्काल उपचार शुरू किया गया। जिसमें यह पाया गया कि बच्चा ऐसी बीमारी में मुब्तिला है जिसके कारण बच्चा दूध नहीं पी पा रहा है जब उसे दूध पिलाया जाता तो दूध खांसी एवं दुग्ध मुंह से बाहर आ जाता है, जब बच्चे को भर्ती कराया गया उस समय वह मात्र 1 दिन का था भर्ती के दूसरे दिन ही इमरजेंसी में बच्चे का ऑपरेशन किया गया।

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इस ऑपरेशन में अविकसित आहार नली को गले से बाहर किया गया और पेट में खाने की थैली में एक नली डाली गई और गैस्ट्रास्टमी से बच्चे को दूध पिलाना शुरू किया गया और दो बार फिर बच्चे का आपरेशन किया गया। प्रोफेसर जे.डी.रावत ने बताया की कुल तीन चरणों में बच्चे का आपरेशन किया गया जो की पूरी तरह सफल रहा और अब बच्चा सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ है और खा-पी रहा है। बच्चा जो की सिद्धार्थनगर का रहने वाला है उसके अभिभावकों ने प्रोफेसर जे.डी.रावत और उनकी टीम का धन्यवाद देते हुए कहा की इन सभी लोगों के कारण बच्चे को नया जीवन मिला है।http://www.satyodaya.com

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राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर निकाली जागरूकता रैली

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केजीएमयू

प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने किया रवाना

लखनऊ। राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरूवार को एक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सुरेश चंद्र ने 1090 चैराहे पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य वी. हेकाली झिमोमी, निदेशक संचारी रोग डॉक्टर मिथिलेश चतुर्वेदी, सीएमओ लखनऊ डॉक्टर नरेंद्र अग्रवाल, बलरामपुर चिकित्सालय निदेशक डॉक्टर राजीव लोचन व सीएमएस डॉक्टर एसके सक्सेना, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखनऊ डॉक्टर डीके वाजपेई, डॉक्टर अजय राजा, डॉक्टर आरके चैधरी, जिला कुष्ठ अधिकारी पीके अग्रवाल, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर बीके सिंह, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर उमाशंकर लाल भी उपस्थित थे। रैली में स्वास्थ विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा आशा, एएनएम के अतिरिक्त निजी पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के लगभग 5000 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

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रैली को निदेशक संचारी रोग व सीएमओ ने किया संबोधित

रैली को संबोधित निदेशक संचारी रोग डॉक्टर मिथिलेश चतुर्वेदी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नरेंद्र अग्रवाल ने संबोधित किया। बताया कि डेंगू का कोई उपचार नहीं है और इससे बचाव ही सर्वोत्तम उपचार है। कहीं आपके घर में या आस-पास पानी तो जमा नहीं है जैसे कि कूलर, पानी की टंकी ,पक्षियों के पीने के पानी का बर्तन, फ्रिज की ट्रे, फूलदान, नारियल का खोल, टूटे हुए बर्तन व टायर इत्यादि। उन्होंने कहा कि पानी से भरे हुए बर्तन को ढ़ककर रखें, कूलर को खाली करके सुखा दें। बताया कि डेंगू रोगी के इलाज की व्यवस्था समस्त राजकीय स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क उपलब्ध है। बुखार आने पर अपने निकट के राजकीय चिकित्सालय में संपर्क करें।http://www.satyodaya.com

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