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ख़ैरियत

लखनऊ की हवा हो चुकी जहरीली, 24 घंटो में हुआ साबित, स्वास्थ्य आपातकाल के हालात

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प्रदेश में चार नवजात बच्चे प्रति घंटे वायु प्रदूषण के असर से मर रहे हैं

लखनऊ । राजधानी लखनऊ की हवा बहुत ही जहरीली हो चुकी है । सामाजिक संस्था 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान और डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर के संयुक्त तत्वावधान में किये गए एक प्रयोग से इसकी पुष्टि भी हो चुकी है । दोनों संस्थाओं ने पिछले सप्ताह लखनऊ के लालबाग इलाके में एक सफेद कृत्रिम फेफड़े को स्थापित किया गया था जो 24 घंटों के भीतर ही वायु प्रदूषण के प्रभाव से काला पड़ गया ।

यह जानकारी आज शनिवार को यूपी प्रेस क्लब में 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान और डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता में दोनों संस्थाओं के पदाधिकारियों ने दी । प्रेस वार्ता को एकता शेखर, वरिष्ठ कैम्पेनर 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान, डॉ सूर्य कान्त, संयोजक डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर और ताहिरा हसन, सामाजिक कार्यकर्ता ने संबोधित किया ।

सभी ने बताया कि पिछले सप्ताह 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान द्वारा लखनऊ शहर के लालबाग क्षेत्र में एक सफेद कृत्रिम फेफड़े को स्थापित किया गया था जो 24 घंटों के भीतर ही वायु प्रदूषण के प्रभाव से काला पड़ गया । प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एकता शेखर ने कहा ‘बिलकुल सफेद फेफड़ों का 24 घंटों में काला हो जाना इस बात का प्रमाण है कि यूपी में वायु प्रदूषण अब एक अहम सवाल बन चुका है ।

सात दिवसीय यह अभियान आम जनता से लेकर जन प्रतिनिधियों के बीच जागरूकता पैदा करने की दृष्टि से काफी सफल रहा । पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्य धारा के सभी राजनीतिक दलों ने इस अभियान को अपना समर्थन दिया है और सभी दलों ने 2019 के आम चुनावों में अपने घोषणा पत्र में इस विषय को शामिल करने का आश्वासन दिया है ।

विद्युत वाहन, सौर ऊर्जा और कचरा निस्तारण जैसे तीन प्राथमिक समाधान अपना कर हम पूरे उत्तर भारत से वायु प्रदूषण को समाप्त कर सकते हैं । साथ ही, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना की घोषणा स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसे और धारदार बनाए जाने और विधिक रूप से बाध्यकारी बना कर क्रियान्वित करने की जरूरत है ।

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ सूर्य कान्त ने कहा ‘काले हुए फेफड़ों ने महज 24 घंटों में ही स्वास्थ्य आपातकाल को साबित कर दिया । उन्होंने कहा कि लांसेट की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में 2 लाख 60 हजार मौतें केवल वायु प्रदूषण जनित बीमारियों से हुईं हैं । यूनिसेफ के अनुसार, प्रदेश में चार नवजात बच्चे प्रति घंटे वायु प्रदूषण के असर से मर जाते हैं ।

उत्तर भारत के सभी अस्पताल श्वसन सम्बंधित बीमारियों से जूझ रहे मरीजों से भरे पड़े हैं । केजीएमयू में पूरे प्रदेश से मरीजों का आना बताता है कि वायु प्रदूषण किसी शहर या क्षेत्र विशेष की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के समस्या है । यह स्थिति हर वर्ष बनती है । ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए आम जनता और सरकार मिलकर जरूरी और सख्त कदम उठाये ।’

प्रेस वार्ता में ताहिरा हसन ने कहा ‘देश भर में स्वच्छ भारत अभियान जोर शोर से चलाया जा रहा है । मगर स्वच्छ हवा के सवाल को स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा नहीं बनाया गया । केवल सड़को को चमकाने पर सारा ध्यान लगाने से ही वायु प्रदूषण का संकट और गंभीर बनता जाएगा । राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना के माध्यम से स्वच्छ हवा को मूलभूत अधिकार घोषित करना चाहिए ।

उन्होंने कहा कि सरकारों द्वारा अपनाई जा रही कोशिशों में आम जनता को भी सहयोग करना होगा । वायु प्रदूषण एक वैश्विक सवाल है, जो अकेले किसी संस्था, अभियान, जनता या सरकार की पहल से हल नहीं होगा । सभी को कंधे से कंधा मिला कर चलना होगा । सार्वजनिक परिवहन और सौर ऊर्जा के भरपूर उपयोग से हर व्यक्ति वायु प्रदूषण को कम करने में सहायता कर सकता है ।’

सभी राजनैतिक दलों ने किया समर्थन, 2019 के चुनावी घोषणा पत्रों में वायु प्रदूषण होगा अहम मुद्दा

बताते चलें कि सात दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अपना दल (एस) और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान को अपना समर्थन दिया है । अभियान दलों के द्वारा इन राजनीतिक के दफ्तर में की गयी मुलाकातों में नेताओं ने 2019 के आम चुनाव में अपने घोषणा पत्र में इस विषय को प्रमुख स्थान देने का वायदा किया ।

बताते चलें कि कृत्रिम फेफड़ों के साथ इस अभिनव प्रयोग को सबसे पहले ‘झटका’ नामक संस्था ने बंगलुरु में किया था, जहां इन्हें काले होने में 18 दिन लगे थे । इसके बाद हेल्प डेल्ही ब्रीद अभियान ने इसे दिल्ली में किया जहां इसे काले होने में 6 दिन लगे थे । आने वाले समय में, 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान से जुड़े सहयोगी संगठन व संस्थाएं इसे उत्तर भारत के अन्य शहरों में भी आयोजित करेंगे ।http://www.satyodaya.com

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महिला काउंसलर ने अपने ही सहयोगी पर लगाया उत्पीड़न का आरोप

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पीड़िता ने सीएमएस से लगाई मदद की गुहार

लखनऊ। राजधानी के अस्पतालों में महिलाओं का उत्पीड़न एवं छेड़छाड़ आम बात हो गई है। मामला बलरामपुर अस्पताल का है जहां तैनात महिला काउंसलर ने अपने ही सहयोगी पर उत्पीड़न का आरोप लगा दिया है। महिला का कहना है कि सहकर्मी उनसे जबरन बात करने का प्रयास करते हैं, उन पर असम्मानजनक तरीके से टिप्पणी करते हैं। इस मानसिक उत्पीड़न की शिकार महिला ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से मदद की गुहार लगायी है।

सीएमएस ने कहा कि जब लिखित शिकायत नहीं मिलती वह किसी पर कार्रवाई करना तो दूर सीधे तौर पर जवाब तलब भी नहीं कर सकते हैं। जिला चिकित्सालय बलरामपुर में मानसिक रोग विभाग में एक वर्ष पूर्व कुछ काउंसलर तैनात किए गए। करीब आधा दर्जन काउंसलर का काम है कि वह मानसिक रोगों से ग्रसित मरीजों से बात करें तथा काउंसलिंग कर उनकी मनोदशों को सामान्य करने की कोशिश करें। इन काउंसर में एक महिला भी है जिसने मंगलवार को अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सक्सेना के समक्ष अपने ही सहयोगी पर उत्पीड़न का आरोप लगा दिया है।

यह भी पढ़ें :- अवकाश के दिन अस्पताल पहुंचे मरीज, क्वीन मेरी में मरीज और सुरक्षा गार्डों में झड़प

महिला ने बताया कि सहकर्मी बेहजह उन्हें परेशान करते हैं उनसे बात करने का प्रयास करते हैं। आते जाते उन्हें टोकते हैं। महिला ने शिकायत की कई बार सहकर्मियों ने ऐसी बात करने की कोशिश की जो एक महिला से करना अनुचित माना जाता है। लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न से वह तंग आ चुकी है इसीलिए शिकायत कर रही है।

महिला ने सीएमएस डॉ. सक्सेना से अनुरोध किया कि वह अनौपचारिक तौर पर आरोपी काउंसलर से बात करे और सख्ती के साथ ऐसा न करने की हिदायत दें। सीएमएस डॉ. सक्सेना ने महिला से कहा कि उनके द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं वह गंभीर आरोपों की श्रेणी में आते हैं और बगैर किसी लिखित शिकायत के यूं ही किसी चिकित्सक से सवाल जवाब नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में उन्हें कोई परेशान कर रहा है या फिर उत्पीड़न का प्रयास कर रहा है तो वह उसका डटकर मुकाबला करें और लिखित शिकायत करें ताकि चिकित्सा प्रशासन को एक आधार मिले और आरोपी से पूछताछ की जा सके। उक्त मामले में डॉ. सक्सेना का कहना है कि यदि महिला काउंसलर लिखित शिकायत करती हैं तो प्रकरण की जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

बताते चलें कि कुछ माह पहले भी बलरामपुर अस्पताल के दो महिला कर्मचारियों ने अपने ही एक सहयोगी के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत निदेशक से की थी। बाद में निदेशक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी कर्मचारी को सख्त चेतावनी देते हुए उसे कहीं और तैनात कर दिया था।http://www.satyodaya.com

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क्राइम-कांड

अवकाश के दिन अस्पताल पहुंचे मरीज, क्वीन मेरी में मरीज और सुरक्षा गार्डों में झड़प

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लखनऊ। केजीएमयू में बड़े मंगल के अवसर पर मंगलवार को अवकाश रहा। वहीं इससे अंजान बहुत से मरीज ओपीडी में आ गए। यहां आने पर अवकाश की सूचना मिली तो मरीज मायूस होकर घर लौट गए। वहीं क्वीन मेरी में मरीज और सुरक्षा गार्डों में झड़प भी हुई। कर्मचारियों के अवकाश की सूचना देने के बाद ही मरीज शांत हुए। क्वीनमेरी ओपीडी में मरीज के दाखिल होने पर रोक थी। यहां ओपीडी में करीब 250 से ज्यादा मरीज आते हैं। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का संचालन 12 बजे तक हुआ। मरीजों को छुट्टी की जानकारी न होने से मुसीबतों का सामना भी करना पड़ा।

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झलकारीबाई अस्पताल में जांच करवाने आई गर्भवती महिलाओं में से कुछ फैजाबाद, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, संतकबीरनगर जैसे दूर-दराज इलाकों से आईं थीं। 12 बजते ही ओपीडी खाली होने लगी, उन्नाव से आई रेखा मिश्रा ने नर्स से ओपीडी के टाइमिंग पूछी तो पता चला कि आज ओपीडी आधे दिन तक ही चलेगी। मरीजों के मुताबिक वह दूर से आई हैं उनका दोबारा आना मुश्किल होगा पर छुट्टी के चलते उन्हें डॉक्टर नहीं मिल सके। 12 बजे पर्चा काउन्टर बंद हो गया जिसके बाद सीतापुर निवासी सुजाता अपना इलाज कराने लोहिया अस्पताल पहुंची। पर्चा न बन पाने के कारण अस्पताल कर्मियों से उनकी नोकझोंक भी हुई। बिना पर्चे के ही वो चिकित्सक के कमरे में पहुंची तो वहां ताला लटका देख उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। सुजाता का कहना हैं कि ट्रेन में होने के कारण उन्हें छुट्टी की जानकारी नहीं मिल सकी।http://www.satyodaya.com

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ख़ैरियत

समय से पहले ही बाजार में आ गए पके आम, लेकिन सेहत के लिए हैं हानिकारक…

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गर्मी का मौसम आते ही फलों के राजा याद आ जाते हैं। जी हां हम बात कर रहे आम के जिनके नाम पर ही मुहं में पानी आ जाता है। क्योंकि ये कच्चे हो या पक्के दोनों ही तरह से ये बहुत स्पेशल होते हैं। आम एक ऐसा फल है जो कई प्रकार के होता हैं। पर हम आपकों बता दें पहले आम पेड़ के पक्के होते थे पर अब केमिकल द्वारा पकाया जाता है जो कि सेहत के लिए काफी हानिकारक होता है। बाजार में जो आम मिल रहे है वो सेहत के लिए काफी नुकशान दायक है। बगीचों में अभी आम पके नहीं हैं लेकिन बाजार कई किस्म के आम से पट गए हैं। सिंदूरी, लंगड़ा, मालदा समेत अन्य किस्म के आम बाजार में दिखने लगे हैं। मंडी में आंध्रप्रदेश, ओडिशा, बंगाल से बड़े पैमाने पर आम मंगाए जा रहे हैं। इन्हें कार्बाइड से पकाकर बाजार में सजाया जा रहा है। समय से पहले बाजार में उतारे गए आम एक तो खाने में कम मीठे हैं दूसरा ये स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। व्यवसायी वर्ग को सिर्फ अपनी आमदनी नजर आ रही है। लोगों की सेहत से उनका कोई लेना देना नहीं है।

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रसायन से पकाए गए आम को खाने से मुंह में थोड़ी जलन, गले में जकड़न, पेट में दर्द व दस्त जैसी समस्याएं आम हैं। ऐसे आम के रंग व स्वाद में भी फर्क रहता है। रसायन से पकाए आम में या तो पीले भाग में धब्बे से पड़ जाते हैं या फिर एक रंग का नजर नहीं आता है। ऐसे आम बहुत जल्दी खराब होने लगते हैं, वहीं प्राकृतिक ढंग से पके आम का रंग एक जैसी होती है। यह चमकीला होता है। रसायन से पके आम का बाहरी भाग पीला होता है लेकिन अंदर गुदे में कुछ कमी रह जाती है।

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

कार्बाइड व रसायन लगाकर पकाया गया आम सेहत के लिए हानिकारक है। इसका सेवन करने से पेट में दर्द, गेस्ट्रोटाइटिस, एलर्जी, पेट में अल्सर तथा कैंसर तक हो सकता है। आक्साइड देकर फल को पकाने से यह जहरीला हो जाता है। इसका सेवन करने वालों के स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता हैं।

पौधे को जल्दी बड़ा करने तथा अधिक फल फूल के लिए भी रसायन का इस्तेमाल हो रहा है। यह आम जैसे फलदार पौधे की जाति भी प्रभावित हो रही है।  इसके साथ यह कैंसर जैसी बीमारी का भी कारण बन सकता है। इसे हाथ से बार-बार छूने से हाथों में खुजली, आंखों में जलन आदि हो सकती है। इससे निकलने वाली गैस में अधिक देर तक सम्पर्क में रहने वाले के फेफड़े को नुकसान पहुंचता है। यानी यह आम फायदे की बजाय जानलेवा हो सकता है।

अगर आप आम के शौकीन हैं तो आप इसे घर में भी आसानी से पकाकर खा सकते हैं इसके लिए कच्‍चा आम लाकर उसे पुराने न्यूज पेपर से ढक कर बंद कमरे में रख दीजिए, लगभग एक सप्ताह या 10 दिन में आम प्राकृतिक तरीके से पक जायेगा। फिर आप इसे खा सकते हैं इससे आपके स्वास्थ्य भी खराब नहीं होगा।http://www.satyodaya.com

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May 22, 2019, 6:31 am
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