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ख़ैरियत

मानसिक प्रताड़नाओं का सामना करते हैं टेढ़े-मेढ़े दांतों वाले व्यक्ति

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विश्व ऑर्थोडॉन्टिक स्वास्थ्य दिवस पर केजीएमयू में जागरूकता रैली

लखनऊ। चेहरे की विकृति एक ऐसे विकृति है जिसे छुपाया नहीं जा सकता। इनमें दातों का अहम रोल है। यदि किसी व्यक्ति के दांत टेढ़े-मेढ़े या बाहर की तरफ निकले हैं तो ऐसे व्यक्ति का चेहरा देखने में अच्छा नहीं लगता और ऐसे व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की मानसिक प्रताड़नाओं का सामना भी करना पड़ता है तथा वह खाना खाने पीने एवं बोलने में भी असहज महसूस करता है। ये बातें केजीएमयू के ऑर्थोडॉन्टिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रदीप टंडन ने बुधवार को विश्व ऑर्थोडॉन्टिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कही। इस दौरान ऑर्थोडोंटिक्स विभाग, दंत संकाय द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसके तहत जागरूकता रैली भी निकाली गई। रैली को केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भटट् ने रवाना किया।

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इस अवसर पर प्रो. डॉक्टर अमित नागर एवं डॉक्टर ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि टेढ़े-मेढ़े दांतो के कारण बहुत से मरीज भोजन ठीक से नहीं चबा पाते जिसके कारण उनके जबड़े के जोड़ व आंतो पर अधिक प्रभाव पड़ता है और इसकी वजह से उनके स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है। टेढ़े-मेढ़े दांतों की वजह से बोलने पर उच्चारण में भी अंतर आ जाता है। इन्होंने बताया कि ऑर्थोडॉन्टिक इलाज शुरू करने का सबसे उत्तम समय तब होता है जब बच्चा 7 से 8 वर्ष का होता है। इसी अवस्था में बच्चे को विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए तथा परामर्श लेना चाहिए। इस अवसर पर दंत संकाय विभाग के अधिष्ठाता प्रोफेसर शादाब मोहम्मद सहित ऑर्थोडॉक्स विभाग के संकाय सदस्य, विद्यार्थी, रेजिडेंट डॉक्टर्स, कर्मचारी एवं अन्य विभागों के व्यक्ति उपस्थित रहे।http://www.satyodaya.com

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किशोर मन के सच्चे साथी बने ‘साथिया केन्द्र’, नाजुक उम्र का रख रहे बेहतर ख्याल

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फाइल फोटो

यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य दिवस (12 फरवरी) पर विशेष

लखनऊ। मनुष्य के जीवन में किशोरावस्था (10-19 वर्ष) बहुत ही महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस अवस्था में शारीरिक एवं मानसिक बदलाव बहुत तीव्रता से होते हैं। किशोर-किशोरी यौन, मानसिक तथा व्यवहारिक रूप से परिपक्व होने लगते हैं। इस अवस्था में किशोर, किशोरियों की समस्याओं में विभिन्नता के साथ-साथ जोखिम भी अलग-अलग होते हैं। एक विवाहित अथवा अविवाहित, स्कूल जाने वाले तथा न जाने वाले, ग्रामीण या शहरी क्षेत्र के किशोर, किशोरियों की यौन विषय पर जानकारी भी अलग-अलग होती है। इन्हीं उलझनों को सुलझाने के लिए उन्हें एक सच्चे साथी की जरुरत महसूस होती है। हालांकि वह इन विषयों की गोपनीयता भंग होने के डर से किसी से चर्चा करने से भी कतराते हैं।

इसका परिणाम होता है कि वह ऐसी गतिविधियों अथवा आदतों के शिकार हो जाते हैं जो उनके जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। क्योंकि चाहे शारीरिक विकास की बात हो या शिक्षा का क्षेत्र यही वह समय होता है जो उनके आगे के सारे जीवन की बुनियाद रखते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल 12 फरवरी को किशोर-किशोरियों को इन मुद्दों पर जागरूक करने के लिए यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश में किशोर-किशोरियों को इन सारे मुद्दों पर सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के 57 जिलों में किशोर स्वास्थ्य क्लिनिक अब नए कलेवर में “साथिया केंद्र” के नाम से स्थापित किये गए हैं। जहां किशोर -किशोरियों को परामर्श और स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान की जा रही है।

25 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में जनपद स्तर के अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 344 किशोर स्वास्थ्य क्लीनिकों को अब साथिया केंद्र के नाम से विकसित किया जा रहा है। क्लिनिक पर प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य विषयों पर परामर्श की समुचित सेवाएं मिल रही हैं। इससे उनके जीवन में बड़े बदलाव भी देखने को साफ मिल रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश के चिकित्सालयों में कार्यरत चिकित्सकों, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य केन्द्रों पर तैनात ए.एन.एम. और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात कम्युनिटी हेल्थ आफिसर से भी संपर्क कर किशोर स्वास्थ्य से जुड़े हर मुद्दों को आसानी से सुलझाया जा सकता है। प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर भी किशोर किशोरियों के तमाम सवाल होते हैं, जिनके बारे में सही जानकारी वह चाहते हैं।

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प्रदेश में कुल 344 साथिया केंद्र क्रियाशील

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन- किशोर स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश के महा प्रबन्धक डॉ. मनोज कुमार शुकुल का कहना है कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 344 साथिया केंद्र क्रियाशील हैं। इन किशोर स्वास्थ्य क्लिनिक (ए.एफ.एच.एस.सी.) पर अप्रैल 2019 से दिसंबर 2019 तक 13.58 लाख किशोर-किशोरियों द्वारा अपना पंजीकरण कराकर परामर्श एवं क्लिनिकल सेवाएं प्राप्त की गयी हैं। करीब 81000 किशोरियों ने माहवारी से सम्बंधित समस्याओं के बारे में जानकारी ली है। दूसरी ओर 1.5 लाख से अधिक किशोरों ने यौन रोगों, परिवार नियोजन के संसाधनों और यौनाचार से पीड़ित किशोरों ने इन केन्द्रों पर संपर्क साधा है।

नजरंदाज न करें, समस्या को सुलझाएं

किशोरावस्था के दौरान माता-पिता को भी बच्चों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें और उचित सलाह दें न कि नजरंदाज करें। टालने और नजरदांज करने से माता-पिता एवं युवाओं की प्रतिक्रियाएं उनके आपसी स्नेहपूर्ण तथा जिम्मेदार संबंधों में स्वस्थ लैंगिक विकास के विषय में संवाद को मुश्किल बनाते हैं। इसी को ध्यान में रखकर स्कूलों द्वारा भी बच्चों को इस सम्बन्ध में उचित परामर्श प्रदान करने की व्यवस्था की गयी है ताकि बच्चे अपने स्वर्णिम पथ पर अग्रसर हो सकें।http://www.satyodaya.com

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अपना शहर

लेजर लाइट से 200 लोगों की आंखें प्रभावित, दर्द की शिकायत पर पहुंचे अस्पताल

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लखनऊ। अंबेडकरनगर जिले के मुस्कुराई गांव में मंगलवार रात शादी के दौरान आर्केस्ट्रा की लेजर लाइट से 200 से ज्यादा लोगों को आंखों में दिक्कत हो गई किसी को आंखों में दर्द के साथ जलन होने लगी तो किसी की आंखों से पानी आने लगा, आनन-फानन में सभी को एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया इलाज के बाद पीड़ितों को छुट्टी दे दी गई है ।

बुधवार सुबह मुस्कराई गांव में उस समय हड़कंप मच गया सुबह अचानक 200 से अधिक ग्रामीणों की आंखों में जलन व दर्द के साथ ही चेहरे पर सूजन होने से हड़कंप मच गया। आंख से कम दिखने की शिकायत भी सामने आने लगी। दरअसल, यह सब कुछ मंगलवार रात गांव में वैवाहिक आयोजन के दौरान लेजर लाइट फटने के बाद हुए गैस रिसाव के प्रभाव से हुआ। ग्रामीणों को मंगलवार रात ही आंख में दिक्कत महसूस हुई थी, लेकिन उस समय कोई खास असर देखने को नहीं मिला। बुधवार सुबह सोकर उठने के बाद से एक के बाद एक ग्रामीण इसकी चपेट में आने लगे जो बारात में गए थे। गांव में डेढ़ दर्जन एंबुलेंस लगाकर पीड़ितों को पहले नगपुर सीएचसी फिर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहलेनगपुर सीएचसी में समुचित इलाज न मिल पाने पर मरीजों व तीमारदारों ने हंगामा भी किया। पुलिस फोर्स ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराया।

इलाज की समुचित व्यवस्था न होने पर मरीजों व उनके तीमारदारों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। लगातार बढ़ते हंगामे को देखते हुए सीचएसी प्रभारी डॉ. जावेद आलम की सूचना पर कोतवाली प्रभारी प्रद्युम्र सिंह पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने समझा बुझाकर मामला शांत कराया। इस बीच डेढ़ दर्जन से अधिक एंबुलेंस न सिर्फ अस्पताल, बल्कि प्रभावित गावों में पहुंच गई। एक एक कर 200 से अधिक मरीजों को किसी प्रकार इलाज के लिए जिला अस्पतला पहुंचाया गया। यहां भी एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से अफरातफरी मच गई। हालांकि इलाज के बाद जैसे जैसे पीड़ितों को राहत मिलती गई तो उन्हें वापस घर भेजा जाता रहा। पीड़ित मरीजों का शाम तक जिला अस्पताल आने का सिलसिला जारी रहा।

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मुस्कराई गांव में चिंतामणि की पुत्री का विवाह था। मंगलवार देर शाम बगल के गांव सवरगाह से बारात आई हुई थी। वैवाहिक आयोजन होने के बाद आर्केस्ट्रा शुरू हो गया। इसमें न सिर्फ मुस्कराई, बल्कि आसपास के कई गावों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे हुए थे। इसमें युवाओं की संख्या अधिक थी। बताया जाता है कि इसी बीच अचानक लेजर लाइट फट गई, जिससे उसमें गैस का रिसाव शुरू हो गया।

इसकी चपेट में न सिर्फ आर्केस्ट्रा कार्यक्रम में भाग ले रहे कलाकार बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण भी आ गए। उनकी आंखों में उस समय हल्की जलन हुई, लेकिन उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। देर रात कार्यक्रम के बाद लोग अपने अपने घर चले गए। बुधवार सुबह सोकर उठे और सूर्य की रोशनी उनकी आखों पर पड़ी, तो समस्या बढ़ गई। जैसे जैसे सूर्य की रोशनी बढ़ती गई, वैसे वैसे गैस से पीड़ित ग्रामीणों की संख्या में भी वृद्धि होती रही।http://www.satyodaya.com

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कोरोना वायरस को लेकर सिविल अस्पताल सक्रिय, 30 बेड का अलग से बनाया वार्ड

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लखनऊ। चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस को लेकर राज्य सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी होने के बाद अब सिविल अस्पताल भी अलर्ट हो गया है। अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित संभावित मरीजों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। कोरोना वायरस को लेकर सिविल अस्पताल में मरीजों के लिए टीम गठित की गई है। सिविल अस्पताल में 30 बेड का अलग से वार्ड बनाया गया है। महिलाओं पुरुष बच्चों के लिए अलग अलग वार्ड बनाया गया है। वहीं सभी अधिकारी कर्मचारियों को ऐसे मरीज़ों के इलाज के लिए सजग किया गया है और अस्पताल में सभी जरूरी दवाओं की व्यवस्था की गई है।

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संक्रमित मरीज मिलने पर इलाज के लिए राज्य के निर्देशानुसार पीएमसीएच भेजा जाएगा। हालांकि अभी तक जिले में कोरोना वायरस संक्रमित कोई मरीज नहीं मिला है। सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस को लेकर विशेष हिदायत बरती जा रही है। वहीं जरुरत पड़ने पर सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस के मरीजों को रखने के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की गई है। कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के जांच की कोई सफल व्यवस्था अभी तक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सभी संस्थानों में मॉनिटरिंग की जा रही है। अभी तक कोई ठोस लक्षण नहीं मिलने के कारण कोरोना को लेकर संभावना व्यक्त किया जा सकता है। विभाग से मिली जानकारी की मानें तो कोरोना की ठोस जांच के लिए पूणे में व्यवस्था है। http://www.satyodaya.com

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February 23, 2020, 7:03 pm
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