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केजीएमयू में मरीजों को इलाज कराना पड़ रहा भारी

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लखनऊ। सरकार जहां स्वच्छ भारत अभियान चलाकर लोगों को निरोग रखने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे रही है। वहीं राजधानी का किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) इन बातों को दरकिनार करते हुए संक्रमण फैला रहा है। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग में बेड के गद्दे तक फटे हुए हैं। यहां तक कि हप्ते में सिर्फ दो ही बार मरीजों के बेड के चादर धुले जाते हैं। बताया गया कि केजीएमयू प्रशासन द्वारा जिस कम्पनी को लॉन्ड्री का टेंडर दिया गया है उसके द्वारा हप्ते मे सिर्फ दो ही बार चद्दर धुलकर मिलती है। मेडिसिन के इमरजेंसी विभाग मे विभागाध्यक्ष द्वारा मरीजों की सुविधा को नजरअंदाज करते हुए विभागाध्यक्ष का कक्ष का निर्माण बिना पूर्ण हुए कक्ष के लिए सोफे टीवी ए.सी. व अन्य स्मार्ट एकुमेंट मंगा लिए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ मेडिसिन विभाग में बेड के गद्दे तक फटे हुए हैं।

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साथ ही बताया जा रहा है कि जिस कम्पनी को लॉन्ड्री का टेंडर दिया गया है उसके द्वारा हप्ते मे सिर्फ दो ही बार चद्दर धुलकर मिलती है जिससे मरीजों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही गांधी वार्ड मे लगी एबीजी मशीन पर पचासों लोग लाइन लगाकर जांच करवाते हैं जो कि यह एक इमरजेंसी जांच होती है। जिसकी वजह से टाइम पर रिपोर्ट न मिलने से मरीजों को भारी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। जिसकी वजह से इलाज कराना मरीजों को महंगा साबित हो रहा है। साथ ही अधिकत्तर वार्डों में फ्रिज न होने की वजह से मरीजों को दवा और ब्लड स्टोर करने के लिए ट्रामा जाना पड़ता है। लेकिन अपने सुविधा में कोई कमी न हो इसलिए चेम्बर बनने से पहले ही लाखों रुपये की उपकरण महीनों से धूल खा रहा है और मरीज दर-दर भटक रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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विश्व पाइल्स दिवस पर केजीएमयू में किया गया जागरूकता कार्यक्रम

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लखनऊ। पाइल्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सर्जरी विभाग के द्वारा किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में आज अंतरराष्ट्रीय पाइल्स दिवस के अवसर पर जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए एसिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा कि इस मौके पर एक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। उसके माध्यम से पाइल्स के प्रति जानकारी देने का प्रयास किया गया। जिसमें मेडिकल व पैरामेडिकल व नर्सिंग के छात्रों ने भाग लिया। पोस्टरों प्रतियोगिता में उत्तम पोस्टरों को पुरस्कृत भी किया गया।

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वहीं डाक्टर अरशद ने कहा कि पाइल्स एक साधारण रोग है। लगभग 50 प्रतिशत लोगों को जीवनकाल में इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना होती है। जिसे स्वस्थ्य जीवनशैली अपना कर कम किया जा सकता है। सही समय पर सटीक इलाज कराने से इसका निवारण संभव है। इस जागरूकता अभियान से लोगों को पाइल्स से बचने व स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए प्रोत्साहित करना और भ्रामक जानकारी से दूर रहना है। पाइल्स शरीर का नार्मल अंग है। जो कॉटिनैंस की प्राकृतिक परिक्रिया में अपना योगदान देता है। यह गुदा जैसा वैस्कुलर कुशन के रूप में होता है। कभी-कभी इसमें खून का अधिक भराव या अपने स्थान से नीचे खिसकने के कारण मरीज में लक्षण आते हैं। पाइल्स के मुख्य लक्षण खून आना गुदा द्वारा सूजन होना दर्द होना है। आमतौर पर यह लक्षण स्वतः ही ठीक हो जाते हैं। या कभी-कभी इसके इलाज की जरूरत पड़ती है। 80 प्रतिशत तक मरीजों में बिना ऑपरेशन के सफल इलाज हो जाता है। डॉक्टर ने बताया कि आज पाईल्स दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक मेडिकल छात्र मरीजों के साथ-साथ आम जनता ने भी भाग लेकर इस बीमारी से कैसे बचाव किया जाए और बेहतर इलाज के बारे में जानकारी हासिल किया।http://www.satyodaya.com

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विश्व सीओपीडी दिवस पर मरीजों को प्रदूषित वातावरण से बचाव के लिए किया गया जागरुक

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लखनऊ। विश्व सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस) दिवस के अवसर पर डिपार्टमेंट ऑफ पल्मोनरी एण्ड किटिकल केयर मेडिसिन विभाग केजीएमयू द्वारा श्वांस रोगियो को जागरुक करने के लिये 20 नवम्बर को प्रेस कान्फ्रेंस का आयोजन किया गया। विश्व सीओपीडी दिवस हर वर्ष नवम्बर के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। प्रेस कान्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य सीओपीडी के मरीजो को बढते हुए प्रदूषित वातावरण से बचाव के बारे में बताना था।

पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग केजीएमयू, के विभागाध्यक्ष डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि  वायु प्रदूषण पूरे विश्व की भीषण समस्या बन गयी है। हर 10 में से 9 लोग प्रदूषित वायु में रह रहे हैं। हर साल लगभग 70 लाख लोगों की मृत्यु वायुप्रदूषण की वजह से होती है। इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व सीओपीडी दिवस पर “Al together to end COPD” को इस दिन का विषय वस्तु बनाया है। सीओपीडी कोई एक बीमारी नही है। सीओपीडी के अंदर कई बीमारियां होती है जैसे किएमफाईसीमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस। सीओपीडी मृत्यु का तीसरा मुख्य कारण है विश्व में लगभग 251 मिलियन सीओपीडी के मरीज हैं। जिसमें से लगभग हर साल 31 लाख लोगों की मृत्यु सीओपीडी से हो जाती है। भारत में विश्व की 18 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। भारत में 4.2 प्रतिशत लोग सीओपीडी से पीड़ित हैं। 1990 से 2016 के बीच 29 प्रतिशत सीओपीडी के मरीज बढ़ गए हैं।

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सीओपीडी के मुख्य लक्षण –

श्वांस फूलना, बलगम आना, खांसी आना, छाती में जकड़न सींटी बजना है।

सीओपीडी का मुख्य कारण –

धूम्रपान, तम्बाकू का सेवन, प्रदूषण, चूल्हे पर खाना बनाना है।

उन्होने कहा कि लम्बे समय से दमा की बीमारी भी सीओपीडी का कारण हो सकता है। सीओपीडी ठीक होने वाली बीमारी नही है। सीओपीडी के इलाज से लक्षणों में आराम मिल जाता है। सीओपीडी को मुख्यतः बुजर्गों की बीमारी माना जाता था। अब कम उम्र के लोगों में भी सीओपीडी की समस्या बन रही है। एक स्टडी के अनुसार लगभग 17 प्रतिशत मरीजों की उम्र 55 साल से भी कम थी। कम उम्र में सीओपीडी का मुख्य कारण दमा, वायु प्रदूषण एल्फा-1 एण्टीट्रिप्सिन की कमी इत्यादि है।

सीओपीडी के मरीजों का क्या करना चाहिए?

अपने चिकित्सक से COPD Action Plan लेना चाहिए आपका सीओपीडी एक्शन प्लान एक गाइडहै। जिसका पालन आपके लक्षण बदतर हो जाने पर किया जाता हैं। सामान्य अवधि के दौरान, जब कोई लक्षण बढ़ जाते है तब भी अपनी चिकित्सक द्वारा सलाह के अनुसार, दवा का उपयोग करना जारी रखें। अनुशंसित खुराक और दैनिक दवा की आवृत्तियों चिकित्सक की सलाह अनुसार लें। विषेश रुप से बडे हुए लक्षणों के जबाव के लिए घर पर दवाओं को समायोजित करने के लिए चिकित्सक से लिखित सलाह लें।यदि आपके लक्षण दिन-प्रतिदिन के सामान्य से बदत्तर हो जाते हैं। तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें या अपने नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा केंद्र पर जाए।

सावधानियाँ बर्ते-

श्वास के मरीजों को घर के बाहर व्यायाम करने कि बजाए घर के अन्दर करें। बुजुर्गों को घर के अन्दर रखें।घर के बाहर जाना जरूरी हो तो मुंह पे मास्क या रूमाल बाधें, आंखों पर चश्मा लगायें और खुलें में ज्यादा देर तक काम करने से बचे।दवाइयां समय से इस्तेमाल करें। ताजे फल सब्जियों का इस्तेमाल करें।स्वास्थ्य बिगडने पर अपने चिकित्सक से मदद लें।http://www.satyodaya.com

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2 महीने के बच्चे के पेट में पल रहा था भ्रूण, BHU के डॉक्टर भी हैरान

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लखनऊ। यूपी के वाराणसी से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के बाल सर्जरी विभाग में डॉक्टरों ने दो माह के बच्चे के पेट से ऑपरेशन के दौरान अविकसित भ्रूण निकाला है। डॉक्टरों के मुताबिक एक लाख बच्चे में दो-तीन में ही इस तरह की स्थिति देखने को मिलती है।

जानकारी के मुताबिक चंदौली निवासी अरविंद कुमार अपने बच्चे के पेट में ट्यूमर की शिकायत को लेकर अस्पताल में दिखाने पंद्रह दिन पहले आए थे। तब अस्पताल में रेजिडेंट की हड़ताल की वजह से डॉक्टर उसे किसी तरह देखे तो लेकिन उसका ऑपरेशन नहीं हो पाया था। अब जब स्थिति सामान्य हुई तो ऑपरेशन करने का फैसला लिया गया। सोमवार शाम विभाग के प्रो. एसपी शर्मा की अगुवाई वाली टीम ने ऑपरेशन किया तो टयूमर तो निकला ही साथ में दाहिनी ओर से भ्रूण भी निकला। यह देख डॉक्टर हैरान हो गए। बताया जा रहा है कि भ्रूण का वजन करीब 500 ग्राम है। बता दें कि सर सुंदरलाल अस्पताल में पिछले सात-आठ सालों में यह पांचवां केस सामने आया है।

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प्रो. शर्मा ने बताया कि चिकित्सा जगत में इसे फीटस इन फिटू के नाम से जाना जाता है। बच्चे के पेट में ट्यूमर तो बड़ा था। पेट खोला तो बड़ी आंत के पीछे ट्यूमर मिला। साथ ही अविकसित भ्रूण भी मिला। भ्रूण की रीढ़ की हड्डी, दिमाग, छाती, आंत और सिर बनना अभी शुरू हुआ था। छाती, आंत और सर बना था। हाथ-पैर नहीं बन पाया है।http://www.satyodaya.com

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November 20, 2019, 9:31 pm
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