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ख़ैरियत

बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर चला चाबुक

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लखनऊ। राजधानी के अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट नियमावली-2016 का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। इसमें न तो कूड़े का ठीक से कलेक्शन होता है और न ही गंदे पानी को शोधित करने के लिए ईटीपी व एसटीपी संचालन किया जा रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए उ.प्र. ठोस कूड़ा प्रबंधन अनुश्रवण समिति ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल सहित गोमतीनगर के चार अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन अस्पतालों पर तीन करोड़ 43 लाख 50 हजार का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है। इस तरह कुल 13.74 करोड़ रुपए वसूल करने की एनजीटी से सिफारिश की गई है।

बताते चलें कि, समिति के चेयरमैन न्यायमूर्ति डीपी सिंह व सचिव राजेन्द्र सिंह ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) व उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के वैज्ञानिकों के साथ 19 जून को अस्पतालों का निरीक्षण किया था। सभी में बायोमेडिकल वेस्ट नियमावली-2016 का पूरी तरह उल्लंघन पाया गया। यह अस्पताल न तो कूड़े का ठीक से कलेक्शन कर रहे हैं और न ही गंदे पानी को शोधित करने के लिए ईटीपी व एसटीपी संचालित किया जा रहा है। जिसके बाद समिति ने चारों अस्पतालों पर नियमावली लागू होने के दिन से 19 जून तक 30 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कुल 1145 दिन का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही जल्द से जल्द मानक के अनुरूप कूड़ा एकत्र करने, निस्तारण करने व एसटीपी व ईटीपी को स्थापित करने व उसका नियमित संचालन करने का निर्देश दिया है।

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बायोमेडिकल वेस्ट नियमावली-2016 का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, विभूतिखण्ड, गोमतीनगर, मेयो मेडिकल सेंटर, विकासखण्ड-दो, गोमतीनगर, सेंट जोसेफ हास्पिटल विकासखण्ड-पांच, गोमतीनगर, नोवा (फोर्ड) हास्पिटल, विकासखण्ड-एक, गोमतीनगर शामिल हैं।

सचिव राजेन्द्र सिंह ने के मुताबिक निरीक्षण के दौरान इन अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट अलग-अलग डस्टबिन में रखने की व्यवस्था नहीं मिली। कंटेनर में अलग-अलग कूड़े का स्लिप भी नहीं मिला। वहीं बायोमेडिकल वेस्ट के साथ अन्य कूड़ा भी एक साथ एकत्र होते मिला। साथ ही सचिव के मुताबिक विभिन्न वार्डों से निकलने वाले गंदे पानी को शोधित करने के लिए इफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थापना नहीं की गई थी। समस्त गंदा पानी बिना शोधित किए नाले में बहता मिला। जिन जगहों पर इंतजाम था वहां या तो संचालित नहीं था या फिर क्षमता से बहुत कम था। राजेन्द्र सिंह ने कहा कि कूड़े को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए ट्राली की व्यवस्था भी नहीं मिली। कूड़ा कलेक्शन या उसके स्थानांतरण की लॉग बुक भी दुरुस्त नहीं थी। इसके अलावा कई अन्य कमियां भी पाई गईं हैं।http://www.satyodaya.com

क्राइम-कांड

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के ना रहने से बच्चे की हुई मौत…

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लखनऊ। राजधानी के सरोजिनी नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला सामने आया है। जहां  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गई। यह घटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के ना होने से हुई है।

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बता दें कि सरोजिनी नगर सड़क दुर्घटना में घायल मां बेटे को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया था। जहां रात में डॉक्टर की मौजूदगी ना होने से 5 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। वही मां की हालत गंभीर बनी हुई है। बता दें कि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अस्पताल में रात में लाइट नहीं जल रही थी एकदम अंधेरा था। वहीं रात के वक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी डॉक्टर नहीं रहते है। डॉक्टर के ना होने के कारण मरीज की मौत हो गई।http://www.satyodaya.com

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ख़ैरियत

सभी जिलों में सामान्य सुविधा केन्द्र होगा स्थापित, एमएसएमई व एएसआईडीई के अधूरे कार्य भी होंगे पूरे

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लखनऊ। एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत चिन्हित विशिष्ट उत्पादों की कमियों एवं गैप्स को दूर करने लिए सभी जिलों में कम से कम एक-एक सामान्य सुविधा केन्द्र (सीएफसी) स्थापित होगा। इसके साथ ही एमएसएमई व एएसआईडीई योजना के अधूरे सामान्य सुविधा केन्द्रों को भी ओडीओपी के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर जल्द से जल्द शुरू कराया जायेगा।
यह जानकारी प्रदेश के प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग डाॅक्टर नवनीत सहगल ने शुक्रवार को कैसरबाग स्थित निर्यात प्रोत्साहन केन्द्र में ओडीओपी कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान दी। उन्होंने कहा कि कारीगरों को उत्कृष्ट डिजाइन सुलभ कराने पर विशेष बल दिया गया है, इसके लिए जिलों में डिजाइन सेंटर भी स्थापित कराये जायेंगे। उन्होंने जिले के सभी अधिकारियों को इससे संबंधित सूचना शीघ्र उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

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उन्होंने कहा कि जनपदों के चिन्हित विशिष्ट उत्पादों के उत्पादन से लेकर विपणन तक के समस्त अवयवों यथा कच्चा माल, डिजाइन, उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता सुधार, अनुसंधान एवं विकास, पर्यावरण, उर्जा संरक्षण तथा पैकेजिंग आदि की सुविधा प्रदान करने के लिए सभी जिलों में सीएफसी स्थापित किये जायेंगे।
प्रमुख सचिव ने कहा कि 3पी के तहत स्थापित होने वाले सामान्य सुविधा केन्द्रों के लिए राज्य सरकार 90 प्रतिशत अनुदान देगी। सभी जिलों में सीएफसी की स्थापना के लिए एजेन्सी के माध्यम से बेसलाइन सर्वे कराया जा रहा है। उन्होने कहा कि सामान्य सुविधा केन्द्रों के माध्यम से टेस्टिंग लैब, डिजाइन डेवलपमेंट एण्ड ट्रेनिंग सेंटर, तकनीक अनुसंधान एवं विकास केन्द्र, उत्पादन प्रदर्शन सह विक्रय केन्द्र, राॅ-मैटिरियल बैंक, कामन रिसोर्स सेंटर, कामन प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग सेंटर, सामान्य लाजिस्टिक सेंटर सूचना संग्रह विशलेषण एवं प्रसारण केन्द्र तथा पैकेजिंग, लेबलिंग एवं बारकोडिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी।http://www.satyodaya.com

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क्राइम-कांड

लोहिया अस्पताल में आग लगने से टला बड़ा हादसा, अस्पताल प्रशासन ने घटना को बताया मामूली

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लखनऊ। गोमती नगर स्थित डाॅक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के प्राइवेट वार्ड के तीसरे फ्लोर के रूम नंबर 304 में शुक्रवार दोपहर को आग लग गई। इस दौरान पूरे अस्पताल परिसर के भीतर व बाहर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। आग का धुआं देख मरीज और तीमारदार घबरा गये। बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग का कारण शाॅट-सर्किट बताया जा रहा है।
लोहिया अस्पताल के जानकारों के मुताबिक, आग की घटना दोपहर करीब 11 बजे हुई। घटना के वक्त मौजूद लोगों का कहना था कि आग के चलते कोई बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन इस पर समय रहते ही नियत्रिंत कर लिया गया। वहीं अस्पताल प्रशासन ने इस घटना को मामूली बताया है।
इस दौरान एक्सरे जांच ढाई घंटे के लिए ठप रही। मरीजों को परेशानी का समाना करना पड़ा। लाइट की आवाजाही सुबह से ही हो रही थी। इस पर आग लगने से दिक्कतें और बढ़ गयी। वहीं लोहिया अस्पताल निदेशक डीएस नेगी का कहना है कि ये कोई बहुत बड़ी घटना नहीं थी। स्पार्क हुआ था, लेकिन जल्द ही दिक्कत को दूर कर लिया गया है। मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।

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इससे पहले भी लग चुकी है आग
लोहिया अस्पताल में इससे पहले भी आग की घटना हुई थी। पिछले वर्ष 22 जनवरी को यहां ओपीडी के गेट के सामने अचानक आग लग गई थी। जिससे हंगामा मच गया था। कई वाहन भी जलकर राख हो गए थे और एक व्यक्ति भी झुलस गया था।
यह घटना अस्पताल के ओपीडी के गेट के सामने गैस पाइप लाइन लीक होने से हुई थी। जानकारी पर बताया गया कि टेलीफोन वायर के लिए की जा रही खुदाई के दौरान गैस पाइप लाइन को नुकसान होने से ये लीक करने लगी, जिसमें आग पकड़ ली। आनन-फानन में फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, जिसके बाद आग पर काबू पाया जा सका था।

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August 19, 2019, 10:36 am
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