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ख़ैरियत

अनियंत्रित खानपान और तनाव युवाओं को भी बना रहा है हाइपरटेंशन का शिकार…

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आज वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे है, जिसे उच्च रक्तचाप भी कहते हैं। लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए वर्ल्ड हाइपरटेंशन मनाया जाता है। बता दें कि हाइपरटेंशन लोगों के बीच एक आम समस्या की तरह बन चुका है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो मानव शरीर में धीरे- धीरे पनपती है। वहीं हाइपरटेंशन शारीरिक व मानसिक दोनों कारणों से हो सकता है। हाइपरटेंशन में धमनियों में रक्त का दवाब बढ़ जाता है, दवाब की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का संचार बनाए रखने के लिए दिल को सामान्य से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है।  रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक, जो इस बात पर निर्भर करती है कि हृदय की मांसपेशियों में संकुचन (सिस्टोल) हो रहा है या धड़कनों के बीच में तनाव मुक्तता (डायस्टोल) हो रही है।

आहार एवं जीवन शैली में परिवर्तन रक्तचाप नियंत्रण में सुधार और संबंधित स्वास्थ्य जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकते हैं। हालांकि, दवा के माध्यम से उपचार अक्सर उन लोगों के लिये जरूरी हो जाता है, जिनमें जीवन शैली में परिवर्तन अप्रभावी या अपर्याप्त हैं।


डॉक्टर अतिउल्ला

हाइपरटेंशन के बारे में डॉक्टर अतिउल्ला बताते है कि हाइपरटेंशन में रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव होने के कारण हार्ट की समस्याओं का कारण बन जाता है। हाइपरटेंशन किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है और इस बीमारी के कोई खास लक्षण या संकेत नहीं होते हैं। आजकल से यह एक आम बिमारी हो गई है । आजकल कल का गलत खानपान, ज्यादा तेल मसाले वाला खाना या फिर बाहर का खाना हाइपरटेंशन जैसी बिमारियों को जन्म देता है । डॉ. के मुताबिक तीन में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन से ग्रसित है, जिसमें शहरों में 30-40% और गांव में 15-17% लोग इसका शिकार हो रहें हैं। देखने वाली बात यह है कि ज़्यादातर लोग इस बिमारी को लेकर जागरूक नहीं है । इसके लिए लोगों में जागरूकता लानी चाहिए। वहीं कुछ परिस्थितियों में हाइपरटेंशन के कारण लोगों को सिरदर्द या उल्टी जैसी समस्या हो जाती हैं। अगर इन परेशानियों का समय पर इलाज करवाया जाए तो हाइपरटेंशन एक बड़ी बीमारी का रूप ले लेता है। हाइपरटेंशन के कारण स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

वहीं हाइपरटेंशन किसी एक समस्या के कारण नहीं होता है, बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे-लाइफस्टाइल, आयु, पारिवारिक बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, लेकिन इसमें कई कारण ऐसे भी होते हैं, जिन पर हमारा नियंत्रिण नहीं होता है जैसे कि पारिवारिक बीमारी। कई बार ऐसा देखा गया है कि परिवार के कारण भी बीमारी हो जाती है जैसे- शुगर, ब्लड प्रेशर आदि। इस तरह की बीमारी कई बार जेनेटिक भी होती है। इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए आपको अपने लाइफ स्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होगी, जिससे कई तरह की । अपने लाइफ बीमारियों से से बचा जा सकता है।

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इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए आपको हेल्थी डाइट लेनी चाहिए। कम मात्रा में नमक और हाई पोटेशियम वाले पदार्थों का कम से कम सेवन करना चाहिए। भोजन में कम मात्रा में नमक लेने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से बचा जा सकता हैं। DASH (डायटरी एप्रोच टू स्टॉप हाइपरटेंशन) आहार को इसी तरह के लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस आहार को खाने से आप हापरटेंशन की समस्या को दूर कर सकते हैं।

नियमित व्यायाम करने से भी कई तरह की बीमारियों के होने से बचा जा सकता  हैं। जो लोग शराब या धूम्रपान आदि का सेवन करते हैं, उन सभी लोगों को इस तरह के नशीले पदार्थों से बचना चाहिए क्योंकि इससे रक्तचाप को सामान्य करने में काफी मदद मिलती है। 

इसके साथ ही हाइपरटेंशन और शुगर के मरीजों को कभी भी अपनी दवाई लेनी बंद नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही हाई ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच भी कराते रहना चाहिए। खाने में कम तेल मसाले वाले खाने का सेवन करना चाहिए और प्रतिदिन योगासन भी करना चाहिए।  खाने में ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां, नारियल, शहद का सेवन करना चाहिए।   

वहीं अपने घेर से दूर रहने वाले लोग भी हाइपरटेंशन के शिकार हो रहें है । जी हां यह बात बिलकुल सच है कि अपने घर से दूर रह कर पढाई करना या नौकरी करना लोगों के लिए मुसीबत बन गया है, सबसे ज्यादा मात्रा में युवा हाइपरटेंशन के शिकार हो रहें हैं । सही तरह से खानपान का मिल पाना या स्ट्रेस आदि से ब्लडप्रेशर का ताल मेल बिगड़ जाता है और लोगों को यह हाइपरटेंशन नाम की बीमारी घेर लेती है । इसी कड़ी में सुप्रिया सिंह और नंदिनी कुंवर ने बताया कि वह दोनों किस तरह से अपने घर से दूर रह कर इस समस्या का सामना कर रही हैं –

सुप्रिया सिंह

सुप्रिया कहती है कि जब हम अपने घर से और मां से दूर रहते है, तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जॉब से लेकर रहने-खाने बहुत सारी दिक्कतें होती है। हम हर प्रोब्लम को मां से तो नहीं बता सकते न इसलिए दिमाग हमेशा टेंशन में रहता हैं। सब कुछ अकेले मैनेज करना पड़ता है। कभी-कभी तो समझ नहीं आता कि क्या करें या और न करें । जिससे दिमाग हमेशा डिप्प्रेशन में रहता है और काफी सारी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है ।

नंदिनी कहती है कि घर से दूर रहते हुए हम एक तरफ से अकेले रहने और अपनी समस्याओं को खुद ही टैकल करने के आदि हो जाते है, इससे काफी ज्यादा स्ट्रेस बढ़ता जाता है और ना चाहते हुए भी हाइपरटेंशन की समस्या हो जाती है। कभी- कभी  वर्कप्लेस, घर, करियर से जुड़ी बहुत सी प्रॉब्लम होती है, जिसे घरवालों से शेयर न करने और न ही परेशान करने के बजाय खुद तक ही सिमित रखते है। http://www.satyodaya.com

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हर खांसी-जुकाम, बुखार कोरोना नहीं, डाॅक्टर की सलाह से ही लें दवाः डाॅ. केपी त्रिपाठी

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लखनऊ। मौसम बदलने से साथ ही लोगों को सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार शुरू हो गया है। जिससे लोगों में कोरोना को लेकर आजकल तरह-तरह की भ्रांतियां और भय है। सामान्य खांसी और बुखार को भी लोग कोरोना वायरस का संक्रमण समझकर भयभीत हो जा रहे हैं। यह कहना है राष्ट्रीय वेक्टर जनित नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डाॅक्टर के. पी. त्रिपाठी का। उनका स्पष्ट कहना है कि हर खांसी, जुकाम या बुखार कोरोना नहीं होता है। लोग कोविड के लक्षण समझ धोखा खा जाते हैं। उन्होंने कोरोना के लक्षण बताते हुए कहा कि कोरोना पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है। नाक बहती है और बदन में थकान रहती है। सामान्य जुकाम में ऐसा नहीं होता है। इसमें व्यक्ति बिना दवा के अपनी प्रतिरोधक क्षमता से ही ठीक हो जाता है। डाॅक्टर त्रिपाठी का कहना है अगर खांसी जुकाम या बुखार आ रहा हो तो स्वयं इलाज न करें। तुरन्त प्रशिक्षित चिकित्सक को दिखाएं।

डाॅ. त्रिपाठी ने बताया की बुधवार एक जुलाई से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू हो रहा है। इसके तहत सभी प्रथम पंक्ति कार्यकर्ता को यह निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी घर के दरवाजे और कुण्डी को छुए बगैर लोगों को संचारी रोगों से बचाव के उपाय, लक्षण, उपचार तथा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र के विषय में जागरूक करेंगी। इस बार आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्लाइड नहीं बनायेंगी बल्कि संबंधित व्यक्ति को स्वास्थ्य केंद्र भेजकर स्लाइड बनवाई जायेगी। आशा कार्यकर्ताओं को यह निर्देश दिए गए हैं कि बुखार या कोरोना के समान लक्षणों वाले मरीजों के बारे में तुरंत स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करें। साथ ही बाहर से आये लोगों को प्राथमिकता से देखें।

वायरल बुखार के मुख्य लक्षण

उन्होंने बताया वायरल बुखार मुख्यतः बदलते मौसम के कारण होता है। अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर हम इससे बच सकते हैं। वायरल बुखार के मुख्य लक्षण हैं- खांसी, जुकाम, गले में दर्द, बुखार, जोड़ों में दर्द, उलटी और दस्त। जबकि मलेरिया में सर्दी और कंपकपी के साथ में एक दिन छोड़कर बुखार आता है। तेज बुखार और सिर दर्द होता है। बुखार उतरने पर पसीना आता है। कमजोरी महसूस होने के साथ उलटी आती है। वहीं डेंगू में तेज बुखार के साथ सिर, पीठ और जोड़ों में दर्द होता है। आंखें लाल हो जाती हैं। हथेली और पैर लाल होने लगते हैं। गंभीर स्थिति में नाक और मसूड़ों से खून भी आने लगता है।

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मच्छररोधी लगाए क्रीम

डाॅ. के. पी. त्रिपाठी ने कहा कि बरसात के मौसम में पानी के भराव के कारण मच्छर अधिक होते हैं। इसलिए घर व आस-पास साफ-सफाई रखें, पानी न इकठ्ठा होने दें। पूरी बांह के कपड़े पहने। मच्छररोधी क्रीम लगायें। घर का ताजा व अच्छे से पका हुआ खाना खाएं। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले फल व सब्जियों का सेवन करें। उन्होंने कहा कि इन सबके साथ इस बात का अवश्य ध्यान रखें। यदि आवश्यक न हो तो घर से न निकले। अगर घर से निकलते हैं तो मास्क अवश्य लगायें। सार्वजनिक स्थानों पर 2 गज की दूरी बनाकर रखें और बार-बार चेहरे को न छुएं।http://www.satyodaya.com

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कोरोना वायरस

नगर निगम के बाबू समेत 32 में कोरोना संक्रमण की पुष्टि

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जोन-8 निगम कार्यालय को सेनेटाइज करते हुए 48 घंटे के लिए बंद

लखनऊ। राजधानी में कोरोना वायरस ने पूरी तरह से पांव फैला लिया है। कोरोना के चपेट में नगर निगम का बाबू भी आ गया है। माना जा रहा है कि जोन-8 में हाउसटैक्स जमा करने आए हुए लोगों से यह संक्रमित हुआ है। बाबू की तैनाती हाउसटैक्स वसूलने के लिए की गई थी। हांलाकि बाबू तबीयत खराब होने पर खुद छुट्टी लेकर घर में ही क्वारंटीन हो गया था। उसे केजीएमयू में भर्ती कराया गया है। इसके साथ ही जोन-8 कार्यालय को सेनेटाइज करते हुए 48 घंटे के लिए बंद करा दिया गया है। वहीं उसके निवास स्थान सआदतगंज को भी सील कर दिया गया है। उसके संपर्क में आए लोगों के नमूने भेजे गए हैं।

सीएमओ प्रवक्ता योगेश रघुवंशी के मुताबिक नगर निगम के बाबू समेत 32 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि की गई है। बाबू के अलावे सआदतगंज में तीन और मरीज कोरोना की चपेट में आए हैं। वहीं विजयनगर में चार व गोमतीनगर एवं इन्दिरानगर के तीन-तीन मरीज कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। इसके अलावा आलमबाग, माल एवेन्यू, आईआईएम रोड के दो-दो मरीज शामिल हैं। जबकि त्रिवेणीनगर, चिनहट, अलीगंज, महानगर, विकासनगर, चैक, वृन्दावन योजना, राजाजीपुरम, कृष्णा नगर, तुलसीदास मार्ग, जफर खेड़ा, गोमती नगर विस्तार के एक-एक मरीज में कोरोना संक्रमण की पुष्टि की गई है। इन सभी को शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

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सीएमओ प्रवक्ता ने बताया कि सर्विलान्स एवं कान्टेक्ट ट्रेसिंग के आधार पर 439 लोगों के सैम्पल टीम द्वारा लेकर जांच के लिए केजीएमयू भेजे गये। इसके अलावा नैपियर रोड, नगरिया ठाकुरगंज, शीशमहल, वजीरबाग, हुसैनाबाद, बालागंज, चैैपटिया आदि क्षेत्रों में संक्रमण से मुक्ति के लिए टीमों द्वारा कार्य किया गया। टीम ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया। टीम द्वारा कुल 2985 घर का भ्रमण किया गया तथा 13395 जनसंख्या को आच्छादित भी किया।

कोरोना से जीती जंग

कोरोना से मचे दहशत के बीच इससे मरीज भी पूरी तरह से स्वस्थ हो रहे हैं। 16 मरीजों ने कोरोना से जंग जीत लिया है। यह मरीज राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती थे। जिन्हें छुट्टी दे दी गई है। इनमें केजीएमयूू के 5, एलबीआरएन-9, ईएसआई हास्पिटल-2 के स्वस्थ मरीज शामिल हैं।

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कोरोना वायरस

केजीएमयू में कोरोना जांच का आंकड़ा एक लाख के पार

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पूरे प्रदेश में जांच मामले में प्रथम स्थान पर पहुंचा केजीएमयू

लखनऊ। केजीएमयू में कोरोना जांच का आंकड़ा एक लाख के पार हो गया है। इसके साथ ही केजीएमयू पूरे प्रदेश में कोविड जांच के मामले में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। देश में भी बहुत कम ही ऐसी लैब हैं जिन्होंने लाख का आकड़ा पार किया हो। हांलाकि उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग सात लाख लोगों के कोरोना संक्रमण की जांच की जा चुकी है, जिसमें से एक लाख चैदह हजार सात सौ छियासी केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब में की गई है।

यह जानकारी केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भटट् एवं माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अमिता जैन ने ऑनलाइन ऐप के माध्यम से आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। इस उपलब्धि पर प्रो. भटट ने बताया कि केजीएमयू में एक लाख चैदह हजार सात सौ छियासी जांच में सेे तीन हजार उन्सठ रिपोर्ट ही पॉजिटिव आई हैं। प्रदेश में वर्तमान समय तक लगभग 23 हजार पॉजिटिव पाए गए मरीजों में से तीन हजार से ज्यादा लोगों की जांच केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा की गई है।

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कुलपति ने कहा कि संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी में स्थापित कोरोना जांच टेस्ट क्षमता लगभग 2 हजार करने की है बावजूद लगातार दो हजार पांच सौ से ज्यादा टेस्ट प्रतिदिन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार भी लैब में 2668 टेस्ट किए गए है। कुलपति ने इसके लिए माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्षा प्रो. अमिता जैन और उनकी टीम की सराहना की।

प्रदेश समेत देशभर में कोविड-19 की धीमी जांच के सवाल पर केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भटट् ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आवश्यकता से कहीं ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 7 लाख कोरोना जांच किए गए हैं। जिसमें से 23 हजार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह के मुताबिक 30 गुना होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अपर लिमिट पर टेस्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब संक्रमण तेजी से फैल रहा है टेस्ट की भी क्षमता को बढ़ाया जाएगा।

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माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्षा प्रो. अमिता जैन ने बताया कि केजीएमयू को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नामित किया जाने के साथ ही कुछ अतिरिक्त जिम्मदारियां भी मिली थी। इस दौरान प्रतिकुलपति प्रो. जीपी सिंह एवं सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार उपस्थित रहे।http://www.satyodaya.com

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July 5, 2020, 10:17 pm
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