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सावधान! इस फेस्टिवल आप भी करने जा रहे है ऑनलाइन शौपिंग तो जान लें ये जरुरी बातें

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नई दिल्ली। कल यानी 16 अक्टूबर से फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डे सेल शुरू हो रही है वहीं इसके अगले दिन यानी 17 अक्टूबर को अमेजन भी अपनी ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल से शुरू हो रही है ऐसे में लोगों को भारी डिस्काउंट और नो कोस्ट EMI जैसे कई दावे किए जा रहे हैं अगर आप भी इस सेल में शॉपिंग करने का सोच रहे हैं तो पहले इन शब्दों का सही सही मतलब जान लें, वरना बाद में आप ठगा हुआ महसूस करेंगे

कैशबैक
ये खरीदारों को आकर्षित करने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक हैजैसा कि नाम से पता चलता है, कैशबैक के तहत, खरीदार को उत्पाद की कीमत का कुछ फीसदी हिस्सा या एक तय रकम वापस मिल जाती हैउदाहरण के लिए, यदि आप 5 हजार रुपए का उत्पाद खरीदते हैं, तो कैशबैक के रूप में आपको 10 फीसदी या 500 रुपए तक वापस किए जाएंगे

कितना मिलेगा कैशबैक?
कोई भी चीज खरीदने से पहले कैशबैक के नियमों और शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए ऑनलाइन पोर्टलों द्वारा पेश किए जाने वाले कैशबैक आमतौर पर नियमों और शर्तों के साथ आते हैं कैशबैक कितना है इसकी जांच होनी चाहिए क्योंकि वे आमतौर पर ऊपरी सीमा के साथ आते हैं इसके अलावा इसमें न्यूनतम खरीद राशि की शर्त होती है उदाहरण के लिए, यह ऑफर 20 फीसदी तक का कैशबैक दिखा सकता है लेकिन इसमें अधिकतम 1,000 रुपए तक के कैशबैक मिलने की सीमा हो सकती है यानी आपको 1000 रुपए से ज्यादा का कैशबैक नहीं मिलेगा

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कब मिलेगा कैशबैक?
कैशबैक कब मिलेगा, इसके बारे में भी आपको पता करना चाहिए कभी-कभी इसे 3-4 महीनों में वापस किया जाता है इसके अलावा इस बात पर भी ध्यान दें कि कैशबैक को कहां जमा किया जाएगा, क्या आप उन्हें अपने बैंक खाते या वॉलेट में ले सकेंगे? क्योंकि ज्यादातर कंपनियां अपने ऑनलाइन वॉलेट में कैशबैक देती हैं इसके चलते आप उस कैशबैक का इस्तेमाल उसी साइट से शॉपिंग के दौरान कर सकेंगे

नो कोस्ट EMI
फ्लिपकार्ट और अमेजन सेल से सामान लेने पर आपको नो-कॉस्ट ईएमआई की सुविधा दी जाएगी लेकिन बिना सोचे समझे नो-कॉस्ट ईएमआई से शॉपिंग करने पर आपको सामान की कीमत से ज्यादा दाम चुकाना पड़ सकता है नो-कॉस्ट ईएमआई के तहत शॉपिंग करते समय सावधानी जरूरी हैनाम न बताने की शर्त पर एक NBFC के एग्जीक्यूटिव ने बताया कि नो कॉस्ट EMI पर आपको प्रोडक्ट पूरी कीमत पर खरीदना होता है इस पर भी 15 फीसदी तक ब्याज वसूला जाता है

ज्यादा सामान बेचने का नुस्खा है नो कोस्ट EMI
नो कोस्ट EMI ज्यादा सामान बेचने के लिए अपनाया जाने वाला नुस्खा है नो कॉस्ट ईएमआई देखकर किसी भी सामान को खरीदने की जल्दबाजी न करें उसके बारे में अच्छे से पढ़ें. बैंक दिए गए डिस्काउंट को ब्याज के रूप में वापस ले लेता है नो-कॉस्ट ईएमआई स्कीम आम तौर पर 3 तरीके से काम करती है पहला तरीका यह कि नो कॉस्ट EMI पर आपको प्रोडक्ट पूरी कीमत पर खरीदना होता है इसमें कंपनियां ग्राहकों को दिए जाने वाला डिस्काउंट को बैंक को ब्याज के तौर पर देती है दूसरा तरीका यह कि कंपनी ब्याज की राशि को पहले ही उत्पाद की कीमत में शामिल कर देती है वहीं तीसरा तरीका होता है कि कंपनी का जब कोई सामान नहीं बिक रहा होता है तो उसे निकालने के लिए भी नो-कॉस्ट ईएमआई का सहारा लेती है

नो-कॉस्ट ईएमआई पर सामान खरीदते समय बरतें सावधानी
‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ पर कोई भी सामान लेने से पहले उस सामान की कीमत के बारे में अच्छे से अन्य ई कॉमर्स साइट या ऑफलाइन पता करें इसके अलावा ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ ईमेल पर सेवा एवं शर्तों को ध्यान से पढ़ें क्योंकि कई बार EMI चूकने या प्रोसेस फीस के नाम पर नहीं पैसे वसूले जाते हैं

डिस्काउंट
फेस्टिवल सेल में ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स में कंपनियां 80 फीसदी तक डिस्काउंट देने का दावा कर रही हैं लेकिन ये डिस्काउंट केवल कुछ ही प्रोडक्ट पर रहता है बाकी उत्पादों पर छूट उतनी अधिक नहीं हो सकती है आम तौर पर, 70-80 फीसदी की छूट फैशन उत्पादों पर दी जाती है इसके अलावा कंपनी अपने पुराने स्टॉक को खत्म करने के लिए भी उस पर ज्यादा डिस्काउंट देती है ऐसे में ज्यादा डिस्काउंट वाली कोई भी चीज खरीदने से पहले उसकी ठीक से जांच करनी चाहिए भारी छूट के लालच में फंसने से पहले, जांच लें कि क्या ये सही उत्पाद है या नहीं यदि आप कुछ खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप इसकी कीमत पर नजर बनाए रखें इसके अलावा, उत्पाद खरीदने से पहले कई वेबसाइटों पर कीमतों की तुलना करेंhttp://satyodaya.com

क्राइम-कांड

6 साल की मासूम को जिंदा जलाया, फिर बोरी से ढक दी अधजली लाश, फैली सनसनी

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चंडीगढ़। पंजाब के होशियारपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जिले के गांव टांडा के जलालपुर में देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई। जब एक 6 साल की मासूम बच्ची को जिंदा जला देने का मामला सामने आया। उसकी अधजली लाश को बोरी से ढक दिया गया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही टांडा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्‍ची के शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस के मुताबिक, इसका पता लगाया जा रहा है। कि मासूम की हत्या से पहले उसके साथ रेप तो नहीं किया गया। फिलहाल बच्ची के अधजले शव को पोस्मार्टम के लिए अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया है। बता दें किं इस घटना के बारे में उस समय पता चला जब गांव जलालपुर में बड़ी संख्या में इकठ्ठे हुए लोगों ने टांडा पुलिस को घटना के बारे में सूचित किया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लड़की के बारे में छानबीन करनी शुरू की।

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दोपहर से लापता थी बच्ची
जानकारी के मुताबिक 6 साल की बच्ची के पिता का नाम राहुल है जो सुजीत सिंह नाम के एक व्यक्ति का ड्राइवर है। बच्ची की मां के मुताबिक, उसकी लड़की दोपहर से ही गायब थी। लड़की की तलाश करने पर पता चला कि सुरजीत सिंह का बेटा उनकी बच्ची को अपने साथ ले गया है। इसके बाद जब सुरजीत सिंह की हवेली में जाकर देखा गया तो बोरी के साथ लड़की की अधजली लाश पड़ी हुई थी।
बता दें कि टांडा पुलिस ने बच्ची के शव को कब्जे मै ले लिया  है और पुलिस जांच में जुट गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच की बात कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। पुलिस की मानें तो जल्द ही आरोपी उनकी गिरफ्त में होगा।http://satyodaya.com

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राजस्थान: जयपुर में ऑटोमोबाइल कंपनी के गोदाम में लगी भीषण आग

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जयपुर। राजस्‍थान की राजधानी जयपुर के आमेर में कूकस स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी के गोदाम में बुधवार को आग लग गई आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की करीब 20 गाड़ियां ने अपना पूरा दमखम लगा दिया लेकिन घटना के कई घंटे बाद भी आग को पूरी तरह से नहीं बुझाया जा सका है हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है और पुलिस ने आसपास के इलाकों को अलर्ट कर दिया है बता दें कि पहले इस फैक्ट्री में एस्सार कंपनी के ट्रैक्टर बना करते थेलेकिन अब इसमें रॉयल इन्फील्ड समेत कुछ कंपनियों के वेयरहाउस बने हुए हैं

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फायर अफसर घनश्याम के अनुसार, जयपुर-दिल्ली हाईवे पर कूकस इंडस्ट्रीयल एरिया में आयशर कंपनी का यार्ड (गोदाम) है जबकि यहां आयशर कंपनी के चारपहिया वाहनों के अलावा सैकड़ों की संख्या में रॉयल इन्फील्ड कंपनी की बाइक काफी बड़े हिस्से में खड़ी रहती हैं वहीं, एक बड़े परिसर में पेंट हाउस बना हुआ था जहां गाड़ियां तैयार की जाती हैं इसके अलावा गाड़ियों के पुर्जे भी बनाए जाते हैं इसके अलावा जब आग की सूचना पर मीडिया पहुंची तो उसे अंदर नहीं जाने दिया गया ऐसे में सवाल उठता है कि फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन आखिर क्या छुपाने की कोशिश कर रहा है

पेट्रोल पंप बचा
सूचना मिलने पर एडिशनल डीसीपी सुमित गुप्ता और आमेर के एसीपी सौरभ तिवाड़ी पुलिस दल के  मौके पर पहुंचे जबकि सहायक फायर अफसर देवेंद्र व फायर अफसर घनश्याम की अगुआई में करीब 20 से ज्यादा दमकलकर्मियों और सिविल डिफेंस की टीम ने आग पर काबू पाने के लिए बचाव कार्य शुरू किया जबकि आसपास के लोगों का कहना था कि इस गोदाम के समीप ही एक पेट्रोल पंप भी था गनीमत रही कि पेट्रोल पंप तक आग की लपटें नहीं पहुंची, वरना बड़ा हादसा हो सकता थाhttp://satyodaya.com

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उपचुनाव से ठीक पहले सिंधिया खेमे के दो मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, CM ने दी मंजूरी

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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा की 28 सीटों के लिए उपचुनाव में मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ कई क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।  ऐसे में यहां से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां बिना विधायक बने छह महीने होने पर मध्य प्रदेश के दो मंत्री तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने दोनों नेताओं के इस्तीफे स्वीकारते हुए राजभवन भेज दिए। बता दें कि दोनों ही नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुये थे। साथ ही इस बार के उपचुनाव भी लड़ रहे हैं।

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दरअसल, संवैधानिक प्रावधान है कि कोई भी मंत्री सदन का सदस्‍य बने बिना 6 महीने से ज्‍यादा समय तक मंत्रीपद पर बने नहीं रह सकता है। ऐसे में इसी प्रक्रिया के चलते दोनों नेताओं को इस्तीफ़ा देना पड़ा।

उपचुनाव की बात करें तो सांवेर विधानसभा उपचुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी के तुलसीराम सिलावट और कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्‌डू के बीच है। हाल ही में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने नामांकन भरा तो वहीं, अगले दिन गुरुवार को प्रेमचंद गुड्‌डू ने नामांकन दाखिल किया। दोनों ने ही नामांकन के साथ अपनी आय का शपथ पत्र भी दिया है। सांवेर से चार बार विधायक रहे मध्यप्रदेश सरकार के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने अबकी बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया।http://satyodaya.com

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