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कांग्रेस के बाद गठबंधन ने भी समर्थन के लिए मुस्लिम धर्मगुरुओं से लगायी आस…

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मौलाना कल्बे जव्वाद से मिलने पहुंची पूनम सिन्हा

लखनऊ। लखनऊ लोकसभा 2019 के तीसरे चरण के चुनाव के लिए पार्टियों ने कमर कस ली है।सपा-बसपा-रालोद ने संयुक्त तौर पर लखनऊ सीट से पूनम सिन्हा के नाम की घोषणा की है।ऐसे में अन्य पार्टियों की तरह पूनम सिन्हा भी अपनी पैठ मजबूत करने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद कृष्णम के बाद अब गठबंधन प्रत्याशी पूनम सिन्हा मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद से मिलने पहुंची। मौलाना कल्बे जव्वाद से मिलने उनके आवास पहुंची पूनम सिन्हा ने बताया कि वो सिर्फ और सिर्फ आशीष लेने आई हैं।साथ ही दुआ और आशीष लेकर ही वापस जाएंगी।

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वहीं मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा की हम सूफी मौलानाओं से बात करके ही किसी पार्टी का समर्थन करेंगे। इससे इतर बंद लब्जों में उन्होंने ये साफ़ कर दिया है कि वो उस पार्टी का ही समर्थन करेंगे जो मुसलमानों के हित और विकास के लिए काम करेगा।http://www.satyodaya.com

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फिक्की फ्लो का अंतरराज्यीय सम्मेलन शुरू, पहले दिन ‘मीना बाजार’ ने लूटी महफिल

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मालिनी अवस्थी ने किया मीना बाजार का शुभारंभ

लखनऊ। फिक्की फ्लो लखनऊ का तीन दिवसीय अंतरराज्यीय सम्मेलन शुक्रवार को शुरू हो गया। सम्मेलन का पहला दिन मीना बाजार के नाम रहा। मुगलकाल में शहर प्रमुख बाजारों में मीना बाजार काफी चर्चित थी। होटल हयात रीजेन्सी में आयोजित मीना बाजार प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी और फिक्की फ्लो की राष्ट्रीय अध्यक्ष हरविंदर कौर ने किया। इस प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए फिक्की फ्लो ने पूरे भारत वर्ष से फिक्की फ्लो के सभी चैप्टर से लगभग 300 सदस्यों और पदाधिकारियों को आमंत्रित किया है और इसे अपने वर्षिक अन्तराज्यीय बैठक का स्वरूप दिया है।

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बांसुरी के मधुर संगीत, जगमगाती रोशनी और आकर्षक स्टालों से सजी मीना बाजार में देश भर से आए फ्लो सदस्यों ने जमकर खरीददारी की। साडी, सूट, लहंगा, सरारा, गेरूआ, दुपट्टा और स्टोल के स्टाल विशेष रूप से महिलाओं को आकर्षित कर रहे थे। इस सभी स्टालों में उत्तर प्रदेश की सभी प्रकार की हस्तकला जैसे चिकनकारी, बनारसी साड़ियों से लेकर जरदोजी, टिल्ला और पिट्टा का काम विशेष रूप से इस प्रदर्शनी में देखने को मिला। इसके अलावा बाजार में स्थानीय कारीगरों के बनाए हुए नाजुक चप्पल और जूती, पोटली और अन्य आकर्षक घरेलू उत्पादों के स्टाॅल लगाए गए थे। इस दिन को यादगार बनाने के लिए देवा शरीफ से आए कव्वालों ने अपने सूफी संगीत और कव्वालियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। इस मीना बाजार में अवध के अल्पज्ञात दुर्लभ आभूषणों का भी प्रदर्शन किया गया।

फ्लोे की अध्यक्ष हरविन्दर कोैर तलवार ने कहा, अंतरराज्यीय बैठक हमारे गतिशील अखिल भारतीय सदस्यों के प्रदर्शन, परामर्श और नेटवर्किंग साझा करने के अनुभव के लिए एक सामान्य मंच है। हमारा उद्देश्य पूरे भारत में दिल्ली और 16 अध्यायों से महिला उद्यमियों और पेशेवरों को एक साथ लाना है, विचारों के आदान-प्रदान और मन की बैठक के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करना है। हमारा प्रयास नेतृत्व करने के लिए बुद्धि विकसित करना है साथ ही महिलाओं के लिए मजबूत आवाज के रूप में एक साथ आना।

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फिक्की फ्लो लखनऊ चैप्टर की अध्यक्षा माधुरी हलवासिया ने कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि लखनऊ इस बार फिक्की फ्लोे के वार्षिक अंतराज्यीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस प्रर्दशनी के माध्यम से हम स्थनीय कला और कारीगरों की प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। हमरा उद्ेश्य यह है कि देशभर से आए फिक्की फ्लोे के सदस्यों के माध्यम से हमारे प्रदेश की कला का देश में प्रचार हो। इस प्रदर्शनी में कुल 30 स्टाल लगाए गए थे।http://www.satyodaya.com

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अब फुटपाथ पर सो रहे लोगों को रैन बसेरों तक पहुंचाएंगी क्यूआरटी टीमें

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लखनऊ। ठण्ड के मौसम में सैकड़ों लोग लखनऊ के फुटपाथों पर ठिठुरते हुए सर्द रातें गुजारते हैं। इनमें से कई लोगों की हर वर्ष ठण्ड लगने से मौत भी हो जाती है। हालांकि नगर निगम व सामाजिक संस्थाओं की ओर शहर भर में रैन बसेरा बनाए जाते हैं। लेकिन जानकारी और जागरूकता के अभाव में दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक आदि सड़कों पर ही पड़े रहते हैं। लखनऊ में इस बार ऐसे लोगों को रैन बसेरों तक पहुँचाने के लिए नगर निगम की क्विक रिस्पांस (क्यूआरटी) टीमें तैनात रहेंगी। जो सार्वजनिक स्थलों, सड़कों के किनारे व फुटपाथ आदि पर सोने वाले लोगों को रैन बसेरों तक पहुंचाएंगी। गुरुवार को जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने हजरतगंज चौराहे से दो क्विक रिस्पांस टीमों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। यह टीमें पूरे शहर में भ्रमणशील रहेंगी।

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डीएम ने बताया कि यह एक नया प्रयोग है। लखनऊ के लिए चार क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों का गठन डायल 112 की तर्ज पर हुआ है। यह टीमें लोगों को रैन बसेरा तक पहंुचाने के साथ ही अतिक्रमण, साफ-सफाई, नागरिकों की अन्य समस्याओं पर भी काम करेंगी। इन टीमों का कंटाल रूम नगर निगम में होगा। इन टीमों में होमगार्ड और नगर निगम के कर्मचारी तैनात रहेंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि हम प्रयास कर रहे हैं कि शहर में एक मल्टी स्टोरी रैन बसेरा बनाया जाए। ताकि रिक्शा चालकों, वाहन चालकों को सोने के साथ वाहन पार्किंग की भी सुविधा मिल सके। इस मौके पर नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी भी मौजूद रहे।

रैन बसेरों में ही दान करें गर्म कपड़े

डीएम ने कि हर वर्ष लोग रेलवे स्टेशनों, धार्मिक स्थलों पर गरीबों के लिए गर्म कपड़े आदि दान करते है। जिलाधिकारी ने कहा कि हमारी अपील है कि कोई भी इन स्थलों पर कपड़े दान करने के बजाय रैन बसेरों में पात्रों को दान करें। प्रशासन ने रैन बसेरों की सूची सार्वजनिक कर दी है। जल्द ही शहर के प्रमुख चैराहों पर रैन बसेरों की सूची फ्लैश की जाएगी।

अवैध डेयरियों के खिलाफ 9 दिनों का विशेष अभियान

शहर में चल रहीं अवैध डेयरियों को लेकर डीएम ने बताया कि यह अभियान उच्च न्यायालय के आदेश पर चलाया जा रहा है। सूचनाएं मिल रही हैं कि अभियान खत्म होने के बाद फिर से लोगों ने अवैध डेयरियों का संचालन शुरू कर दिया है। जिसके बाद अब फिर से अभियान चलाया जा रहा है। डीएम ने बताया कि यह विशेष अभियान 9 दिनों का है। जो चरण में 21 नवंबर से 25 नवंबर तक चलेगा। इसके बाद 29 से 3 दिसंबर तक चलाया जाएगा। डीएम ने बताया कि जीरो टाॅलरेंस के साथ इस अभियान को चलाया जा रहा है।http://www.satyodaya.com

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सिविल अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं मिलने पर मरीज को अपनी गोद में ले जा रहे तीमारदार

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लखनऊ।  सिविल अस्पताल में मंगलवार को मरीज को लेकर आए एक तीमारदार को स्ट्रेचर के लिए अस्पताल परिसर में इधर से उधर भटकना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि स्ट्रेचर न मिलने पर एक मां अपने बच्चे को नाक में नली और यूरिन थैली के साथ गोद में लेकर सिटी स्कैन कराने अस्पताल पहुंची।

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देखने वाली यह है कि सिविल अस्पताल में क्रिटिकल कंडीशन के मरीजों को भी स्ट्रेचर की सुविधा नहीं मिल पा रही है। तीमारदार अपनी गोद में मरीजों को इलाज के लिए ले जा रहें है, जिससे कि सिविल अस्पताल में अव्यस्थाओं के चलते मरीजों व उनके तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह सब देख ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिविल अस्पताल के डॉक्टरों व अस्कीपताल प्रशासन की मरीज़ों के प्रति संवेदना खत्म होती नजर आ रही है। http://www.satyodaya.com

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November 22, 2019, 9:11 pm
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