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थाने में पिटता रहा प्रेमी-जोड़ा, तमाशबीन बनी रही पुलिस…

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प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ। राजधानी के चिनहट थाना का एक मामला सामने आया है, जहां कोतवाली में एक प्रेमी जोड़े की उनके परिजनों ने जमकर पिटाई की है। बता दें कि कुछ दिन पहले यह प्रेमी जोड़ा अपने-अपने घर से भाग गया था। घर से भागने पर प्रेमिका के घर वालों ने गुमशुदगी की तहरीर थाने में दर्ज कराई थी।

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पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेकर प्रेमिका की तलाश शुरू कर दी। जिसके बाद पुलिस ने प्रेमी जोड़े को बरामद किया और दोनों के परिजनों को इस बात की सूचना पहुंचाई। सूचना मिलते ही प्रेमी जोड़े के परिवार के सदस्यों ने थाने में पहुंच कर प्रेमी और प्रेमिका को थाने के अंदर ही जमकर पीटा। परिजनों ने प्रेमी जोड़े की इतनी ज्यादा पिटाई की कि दोनों बुरी तरह से लहूलुहान हो गए। लेकिन देखने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना कोतवाली के अन्दर होती रही और चिनहट पुलिस तमाशबीन बनकर देखती रही और किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की।http://www.satyodaya.com

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इंटीग्रल यूनिवर्सिटी ने मनाया 11वां दीक्षांत समारोह, मेधावियों को मिलीं डिग्रियां व मेडल

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लखनऊ। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी ने सोमवार को अपना 11वां दीक्षांत समारोह मनाया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर केन्द्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गयूरूल हसन रिजवी उपस्थित रहे। जबकि मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नरायन दीक्षित मौजूद रहे।

दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों से करीब 2500 छात्र-छात्राओं ने गाउन पहनकर गोल्ड, सिल्वर और कांस्य मेडल के साथ डिग्रियां ग्रहण कीं। सभी उपाधियां स्नातक, स्नातकोत्तर, पी.एच.डी. तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों से सम्बन्धित रहीं। यूनिवर्सिटी के वॉइस चांसलर ने मेधावियों को डिग्रियां देकर सम्मानित किया।

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दीक्षांत समोराह में एन.ई. रेलवे हाॅस्पिटल के यूरोलाॅजिस्ट डा. सलिल टंडन को मानद उपाधि भी प्रदान की गयी। इस मौके पर इंटीग्रल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अकील अहमद, प्रोफेसर एसडब्लू अख्तार, कुलसचिव डाॅ. आईए खान के अलावां विश्वविद्यालय के तमाम शिक्षक, कर्मचारी छात्र-छात्राएं और उनके परिजन उपस्थित रहे। http://www.satyodaya.com

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ट्रैफिक पुलिस ने लौटाया युवक का खोया फोन

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लखनऊ। इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर तैनात ट्रैफिक कांस्टेबल सतीश कुमार वर्मा ने युवक का खोया फोन लौटा कर ईमानदारी की मिसाल पेश की। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी हजरतगंज कार्यालय में आईटी सेल में कार्यरत गिरीश कुमार अपनी माता की मेडिकल रिपोर्ट दिखाने सेवा अस्पताल जा रहे थे कि तभी इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे के पास उनका मोटो जी फोन गिर गया। जिसमें कोई सिम नहीं था किंतु मोबाइल के पीछे गिरीश का मोबाइल नंबर लिखा हुआ था। जो फोन कांस्टेबल सतीश कुमार वर्मा को मिला सतीश ने फोन के पीछे लिखें मोबाइल नंबर पर सम्पर्क कर गिरीश को बताया कि आपका फोन इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर मुझे मिला है।

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खोए हुए फोन की सूचना पाकर गिरीश खुश हो गए और जल्दी से इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर आकर अपना मोबाइल कांस्टेबल सतीश वर्मा से प्राप्त कर लिया और ट्रैफिक कांस्टेबल सतीश वर्मा की एवं लखनऊ पुलिस की बहुत सराहना की बताया कि आप लोगों की वजह से ईमानदारी व इंसानियत अभी जिंदा है।http://www.satyodaya.com

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डाॅक्टर कल्बे सादिक ने कहा, हिन्दू-मुसलमान तय करें कि इबादतगाहें बनाना है या मुल्क

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लखनऊ। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने के एक दिन बाद रविवार को यूपी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा ने वरिष्ठ शिया धर्म गुरू डाॅक्टर कल्बे सादिक से उनके आवास पर मुलाकात की। मंत्री ने अयोध्या फैसले को लेकर प्रदेश में शांति व सौहाद स्थापित करने में सरकार का सहयोग करने के लिए धर्मगुरू को धन्यवाद दिया। इस मौके पर डाॅक्टर कल्बे सादिक ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट इस देश की परंपरा को पुख्ता किया है। धर्मगुरू ने कहा, सबसे खुशी की बात है कि ईंटें गिर गईं, दीवारे बन गईं लेकिन इंसान का खून नहीं बहा। जो होना था वह हो गया। मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई प्रतिक्रिया न देकर समझदारी का परिचय दिया है।

धर्मगुरू ने कहा, अब हिन्दू-मुसलमान तय करें कि उन्हें इबादतगाहें बनाना है या मुल्क को बनाना है। यह देश राम चन्द्र का है, रावण का नहीं। सुप्रीम कोर्ट में जो जज बैठे हैं वह बहुत विद्वान और समझदार हैं। उन्होंने जो फैसला दिया है वह देश हित में है। हमें उनका फैसला स्वीकार है। लेकिन हिन्दू और मुसलमानों से हमारी अपील है कि मंदिर-मस्जिद बन चुके, मूर्तियां लग चुकीं, अब देश को बनाएं। देश में दिनों हालात अच्छे नहीं है। भ्रष्टाचार फैला हुआ है। लोगों के पैसा नहीं है। गांवों में गरीबों के पास इलाज के लिए पैसा नहीं है, खाने की व्यवस्था के लिए पैसा नहीं है। धर्मगुरू ने कहा कि यह देश हमने इबादतगाहों के लिए नहीं बनाया था। बल्कि लोगों के बेहतर जीवन के लिए बनाया था। सभी लोग इसे आगे बढ़ाएं।

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डाॅक्टर कल्बे सादिक ने कहा कि इस मामले को अब यहीं पर खत्म कर देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अब कोई याचिका दाखिल नहीं की जानी चाहिए। मुसलमानों को अगर मस्जिद बनानी है तो कहीं और बना लें। मुसलमानों को अयोध्या में अब मस्जिद नहीं बनानी चाहिए। अयोध्या हिन्दुओं का एक पवित्र स्थान है। इसलिए वहां झगड़े की जड़ को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए। हिन्दू-मुस्लिम समाज से मेरी गुजारिश है कि खुदा-भगवान का झगड़ा छोड़कर अब देश की समस्याओं पर ध्यान दें। देश को आगे बढ़ाएं।http://www.satyodaya.com

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