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लखनऊ मेट्रो को मिला रॉयल सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ ऐक्सिडेंट्स अवार्ड

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यह उपलब्धि हासिल करने वाली देश की पहली मेट्रो रेल परियोजना बनी लखनऊ मेट्रो

लखनऊ। लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लि. (एलएमआरसीएल) को बीते 12 सितंबर (गुरुवार) को यूके के ग्लास्गो में गोल्ड कैटेगरी के अंतर्गत रॉयल सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ ऐक्सिडेंट्स (आरओएसपीए) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एलएमआरसीएल का प्रतिनिधित्व करते हुए कंपनी के जॉइंट जनरल मैनेजर (सेफ्टी) अंकुर शर्मा ने इस पुरस्कार को ग्रहण किया। आरओएसपीए (त्वैच्।)एक ब्रिटिश चैरिटी संगठन है, जिसका उद्देश्य है दुनियाभर की परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान दुर्घटनाओं से सुरक्षा और उनकी रोकथाम की अवधारणा का प्रचार करना। एलएमआरसीएल को साल 2018 में लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान उपयुक्त संरक्षा मानकों के अनुसरण और अपने स्टाफ/ग्राहकों/क्लाइंट्स/कॉन्ट्रैक्टर्स की संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसके साथ ही एलएमआरसी भारत का ऐसा पहला मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन है बन गया है जिसे गोल्ड कैटेगरी में आरओएसपीए पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने इस अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सुरक्षा एवं संरक्षा के लिए एलएमआरसी हमेशा से ही प्रतिबद्ध रहा है। आरओएसपीए एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है और एलएमआरसी की इस सफलता का श्रेय कंपनी के सभी कर्मचारियों, कॉन्ट्रैक्टिंग एजेंसियों, कन्सलटैन्ट्स को जाता है, जिन्होंने इतनी चुनौतीपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान सभी अंतरराष्ट्रीय संरक्षा मानकों का पूरी प्रतिबद्धता के साथ अनुसरण किया।

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इससे पूर्व 2018 में एलएमआरसी ने सिल्वर कैटेगरी में यह पुरस्कार प्राप्त किया था। पिछले वर्ष प्रोजेक्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर कैटेगरी के अंतर्गत एलएमआरसीएल को आरओएसपीए- सिल्वर पुरस्कार जीता था और लखनऊ मेट्रो परियोजना, यह उपलब्धि हासिल करने वाली देश की पहली परियोजना थी। आरओएसपीए की योग्यता, पुरस्कार और कार्यक्रमों की प्रमुख जूलिया स्मॉल ने कहा कि स्वास्थ्य और संरक्षा के क्षेत्र में आरओएसपीए पुरस्कार विश्वभर में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है। हर साल लगभग 2 हजार प्रवृष्टियां आती हैं और संगठनों को कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता और साथ ही, कर्मचारियों समेत सभी संबद्ध इकाईयों की सुरक्षा एवं संरक्षा हेतु प्रतिबद्धता प्रमाणित करने का अवसर प्रदान किया जाता है।http://www.satyodaya.com

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राजधानी के हाॅर्नर कॉलेज ने मनाया अपना स्वर्ण जयंती समारोह

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लखनऊ। राजधानी के महानगर विस्तार स्थित हाॅर्नर कॉलेज ने अपने स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। मंगलवार को काॅलेज ने अपना स्वर्ण जयंती समारोह मनाया। कोविड-19 के चलते समारोह फीका रहा। सीमित संख्या में शिक्षकों व अतिथियों के साथ छोटा सा कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का आयोजन काॅलेज के बहुउद्देशीय सभागार ‘दी एट्रिअम’ में हुआ। कार्यक्रम में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल गोमतीनगर कैंपस-2 की वरिष्ठ प्राचार्य मंजीत बत्रा, प्रिंसिपल वेरा हजेला स्टेशन रोड कैंपस और चैक कैंपस की अदिति शर्मा, स्प्रिंग डेल ग्रुप ऑफ स्कूल्स की निदेशक रीता खन्ना, बिड़ला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल दीया बैजल सहित कुछ अन्य लोग अतिथियों के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में हाॅर्नर कॉलेज के इतिहास पर एक मल्टी मीडिया प्रस्तुत किया गया, जिसका यू-ट्यूब पर सीधा प्रसारण किया गया। प्रधानाचार्या डॉ. माला मेहरा ने काॅलेज की स्थापना, उदेश्य आदि के बारे में जानकारी देते हुए सभी को उनके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

ऐसी हुई थी काॅलेज की स्थापना

प्रधानाचार्या ने बताया कि हाॅर्नर कॉलेज की स्थापना 1969 में हुई थी और अप्रैल, 1969 में मुख्यमंत्री सीबी गुप्ता ने इसका शिलान्यास किया था। स्कूल 5 जुलाई 1970 को 5 शिक्षकों और 32 छात्रों के साथ प्राथमिक कक्षाओं के लिए शुरू हुआ था। स्कूल का नाम मिस्टर डिक हाॅर्नर के नाम पर रखा गया, जो इसके संस्थापक डॉ सुरेन्द्र सिंह के मित्र थे। सुरेंद्र सिंह हरदोई के ग्राम मंजला के रहने वाले थे। जबकि उनकी पत्नी दिल्ली से थीं। वे कड़ी मेहनत और शिक्षा के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका पहुंचे, जहां उन्होंने अपने शैक्षिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाया और जल्द ही शादी कर ली। दोनों विद्धानों ने 1956 से 1968 तक अमेरिका में समय बिताया।

व्हाइट हाउस तक बढ़ाया भारत का मान

उन्होंने व्हाइट हाउस तक भारत को बढ़ावा देकर अपने राष्ट्र में प्रशंसा हासिल की। सुरेंद्र सिंह अमेरिका के तत्कालीन उपराष्ट्रपति, ह्यूबर्ट हम्फ्री के एक मित्र बन गए। इसी दौराव वह भारत के प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू से मिले। पीएम नेहरू, इंदिरा गांधी, बीके नेहरू, राजदूत टीएन कौल और कई गणमान्य भारतीय व्यक्तियों ने युवा जोड़े से भारत लौटने और अपनी मातृभूमि की सेवा करने का आग्रह किया। इसके बाद सुरेन्द्र सिंह 1968 में भारत लौटे और जिला हरदोई में और उसके आसपास सरकार के लिए कई स्कूलों के अलावा हाॅर्नर स्कूल की स्थापना की।

अवध विवि फैजाबाद के संस्थापक कुलपति भी बने डॉ. सुरेंद्र सिंह

प्रिंसिपल ने बताया कि तत्कालीन राज्यपाल अकबर अली ने डॉ. सुरेंद्र सिंह के पैतृक गाँव हरदोई में बैंक और स्कूल का उद्घाटन किया। बाद में, महामहिम चेन्ना रेड्डी और मुख्यमंत्री एच.एन. बहुगुणा ने डॉ. सिंह को अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के संस्थापक कुलपति के रूप में आमंत्रित किया। अपने स्वयं के प्रयासों के माध्यम से हाॅर्नर स्कूल की प्रगति हुई और वह निरंतर आगे बढ़ता गया। 1985 में हाई स्कूल शुरू करने के लिए सरकार से एक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

उसके बाद भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा, नई दिल्ली के लिए परिषद से संबद्ध हो गया। विद्यालय में छात्रों को समायोजित करने के लिए एक मंजिल की स्थापना हो चुकी थी।। 1990 के बाद कॉमर्स स्ट्रीम में इंटरमीडिएट सेक्शन (12वीं कक्षा) और फिर 2000 में साइंस स्ट्रीम से संबद्धता निश्चित हुई।

पिछले 50 वर्षों में काॅलेज से निकले हजारों छात्रों ने हासिल किया मुकाम

प्रिंसिपल ने बताया पिछले 50 गौरवशाली वर्षों ने हजारों पूर्व छात्र चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईएएस, वेंचर कैपिटलिज्म, लघु उद्योग उद्यमिता और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में अपने व्यक्तिगत विकास में सफलता के शिखर पर पहुंचे हैं। इस संस्था का संकल्प शिक्षण अधिगम परिणामों के लिए अत्याधुनिक शिक्षण पद्धतियों को प्रदान करने का है। क्योंकि हाॅर्नर काॅलेज आर्थिक, जातिगत एवं धर्मगत भावनाओं से ऊपर उठकर शिक्षा प्रदान करता हैं। क्योंकि शिक्षा सभी के लिए एक समान है।

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विद्यालय में 40 प्रतिशत छात्रों को विभिन्न छात्रवृत्तियां और रियायतें दी जाती हैं। ताकि सभी को शिक्षा का लाभ मिल सके। राष्ट्र निर्माण की दिशा में सेवा प्रदान करने के लिए संस्थापक अपनी मातृभूमि में लौट आए थे और यह संकल्प उनके जीवन का मुख्य आधार बन गया। इस प्रकार गौरवशाली 50 वर्ष उनके ‘मानव सेवा हीभगवान की सेवा’ (सर्विस टू मैन इज सर्विस टू गोड) के मिशन का एक प्रमाण है। उनका आदर्श लेट द लैम्प ऑफ विजडम लाइट द वे’ है। यहाँ एक उज्जवल भविष्य के लिए अपने संस्थापकों की इस विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

समय के साथ बदलती तकनीक से बिठाया तालमेल

प्रिसिपल ने बताया कि पिछले दशक में कॉलेज की उन्नति में तेजी से वृद्धि हुई। जिसमें शहर के 1100 स्कूलों के बीच स्वच्छ भारत सर्वेक्षण में 6वाँ सबसे स्वच्छ विद्यालय होने के साथ-साथ सेनेटरी टॉवल वेंडिंग मशीनों और इंक्रीब्यूटर्स के साथ आदर्श स्कूल बन गया। तकनीकी प्रगति के विषय में पहले 1980 में कंप्यूटर शिक्षा के साथ पहला स्कूल होने के साथ 2000 में अपनी स्वतंत्र वेबसाइट होस्ट करने के लिए अपने स्वतंत्र ऐप के साथ पहला स्कूल और डेबिट और क्रेडिट कार्ड मशीनों के साथ पहला पूरी तरह से नगदी रहित (कैशलैस) स्कूल बना।

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ऑनलाइन भुगतान और पेटीएम सुविधाएं विद्यालय मैं शुरू हो गई। हाॅर्नर कॉलेज को 2013 से ऑनलाइन परीक्षा की शुरुआत करने वाले एकमात्र स्कूल होने का गौरव प्राप्त है। अब कोरोना महामारी के दौरान कक्षा 9 से 12 के लिए ऑनलाइन परीक्षाओं का संचालन किया है।http://www.satyodaya.com

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गंभीर चूक: कोरोना जांच के लिए भेजी गई गर्भवती का लाइन में खड़े-खड़े हो गया प्रसव

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लोहिया संस्थान में गंभीर लापरवाही, दर्द से कराहती महिला को डाक्टरों ने लाइन में लगवाया

लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान में एक बार फि‍र अव्‍यवस्‍था का मामला सामने आया है, सोमवार को संस्‍थान की जच्‍चा-बच्‍चा इमरजेंसी में पहुंची महिला को कोविड जांच के लिए परचा बनाने की लाइन में भेज दिया गया, जहां महिला को प्रसव हो गया। जानकारी के अनुसार गर्भवती महिला डिलीवरी के लिए संस्‍थान की जच्‍चा-बच्‍चा इमरजेंसी पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद डॉक्‍टर ने महिला को भर्ती न कर उससे पहले कोविड जांच करा कर आने को कहा।

महिला कोविड जांच के लिए परचा बनवाने की लाइन में लग गयी। इसी बीच उसकी प्रसव पीड़ा तीव्र हो गयी और उसने वहीं शिशु को जन्‍म दे दिया। ऐसी‍ स्थिति देख वहां हड़कम्‍प मच गया, आनन-फानन में महिला और शिशु को लेबर रूम ले जाकर आगे की प्रक्रिया पूरी की गयी।

संस्‍थान प्रशासन ने माना, लापरवाही हुई

इस बारे में संस्‍थान के प्रवक्‍ता डॉ श्रीकेश ने बताया कि हां यह मामला सामने आया है, इस मामले में संस्‍थान प्रशासन का मानना है कि यह लापरवाही हुई है, इमरजेंसी पहुंची महिला को तुरंत भर्ती करने के बाद कोविड की जांच करायी जानी चाहिये थी, इसके लिए जिम्‍मेदार लोगों की जानकारी जुटायी जा रही है, और इस लापरवाही के लिए जिम्‍मेदार व्‍यक्ति के खिलाफ संस्‍थान कार्रवाई करेगा।

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 बता दें कि राजधानी सहित प्रदेश भर के अस्पतालों में लागू कोरोना प्रोटोकाॅल सामान्य बीमारियों व गंभीर मरीजों पर भारी पड़ रहे हैं। अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज की थर्मल स्क्रीनिंग व ऑपरेशनल मरीजों की अनिवार्य कोरोना जांच के चलते कई मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है।

सामान्य व गंभीर मरीजों के लिए एक ही लाइन

बता दें कि लोहिया संस्थान में कोविड अस्पताल भी बनाया गया है। ओपीडी में आने वाले सामान्य मरीजों की थर्मल स्क्रीनिंग की जार रही है। जबकि गंभीर मरीजों व ऑपरेशन वाले मरीजों की कोरोना जांच अनिवार्य है। यहां सामान्य मरीजों व गंभीर मरीजों को एक ही लाइन में लगाकर कोविड टेस्ट किया जा रहा है। भीड़ अधिक होने के चलते इमरजेंसी वाले मरीजों को मुसीबत का सामना करना पड़ता है।http://www.satyodaya.com

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कॅरियर डेंटल काॅलेज के मालिक पिता-पुत्र पर लखनऊ पुलिस ने लगाया गैंगस्टर

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सपा नेता व पूर्व राज्यमंत्री है इकबाल, काफी समय से है फरार

लखनऊ। अवैध निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ लखनऊ जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में हाल ही में मड़ियांव स्थित आईआईएम रोड पर कॅरियर डेंटल काॅलेज का अवैध निर्माण ढहाया जा चुका है। शनिवार को लखनऊ पुलिस ने कॅरियर डेंटल काॅलेज के मालिक अजमत अली और उनके बेटे इकबाल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है। मड़ियांव में इंस्पेक्टर विपिन सिंह ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपी पिता-पुत्र के खिलाफ मड़ियांव थाने में नौ मुकदमे दर्ज हैं।

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तहरीर में इंस्पेक्टर ने कहा है कि अजमत अली (65) अपने बेटे इकबाल (35) व अन्य साथियों के साथ मिलकर शहर की महंगी सरकारी जमीनों पर कब्जा करने का गिरोह चलाते हैं। इनका एक संगठित गिरोह है। गिरोह के आतंक के चलते जनता और अधिकारी इनका विरोध नहीं करते हैं। भय के चलते इनके खिलाफ कोई गवाही के लिए तैयार नहीं होता। इसीलिए इनके खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्यवाही की जाए। एफआईआर में अजमत का पता घैला, मड़ियांव और इकबाल का पता विकासनगर लिखाया गया है। कुछ तथ्य जुटाने के बाद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने की कवायद में जुटेगी। मौजूदा समय में इकबाल फरार हैं।

फरार है इकबाल

बता दें कि इकबाल पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार में राज्य मंत्री रह चुका है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज होने के बाद अब दोनों की गिरफ्तार शुरू होगी। पिछले काफी समय से सपा नेता इकबाल फरार है।

23 जून को ढहाया गया था अवैध निर्माण

अभी कुछ दिन पहले ही आईआईएम रोड पर घैला मोड़ पर बने कॅरियर डेंटल काॅलेज का अवैध निर्माण जिला प्रशासन ने ढहाया था। इस काॅलेज का काफी हिस्सा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर बनवाया गया था। फरवरी 2020 में नोटिस देने के बाद भी जब अजमत अली ने अवैध निर्माण नहीं हटवाया तो जिला प्रशासन की टीम ने 23 जून को बिल्डिंग का अवैध हिस्सा ढहा दिया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में अभी और सख्त कार्रवाई की जानी है।http://www.satyodaya.com

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