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कूड़े के ढ़ेर पर राजधानी लखनऊ, नगर निगम बजा रहा चैन की बंसी…

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लखनऊ। राजधानी में जिस तरह से कई क्षेत्रों में कूड़े का अंबार लगा रहा रहता है, उससे कई तरह के संक्रामक रोग फैलते है कारणवश लोगों में अनेकों बीमारियां भी जन्म लेने लगती है । जैसे-जैसे शहर दिन पर दिन गर्मी का कहर बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे सड़कों या खाली प्लाटों में पड़े हुए कूड़े के ढेर से कई प्रकार की बीमारियां भी उत्पन्न हो रहीं है, जिससे कि लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नगर-निगम भी सफाई अभियान को लेकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह से अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहा है। आइये हम लोगों से जानते है कि वह अपने क्षेत्रों में लगे कूड़े के ढेर से किस तरह से दिक्कतों का सामना कर रहें है और नगर-निगम इसके लिए कितना और प्रकार से जिम्मेदार है।

लखनऊ में गढ़ी पीर खां इलाके के रहने वाले वहाब उद्दीन सिद्दीक़ी का कहना है कि उनके मोहल्ले में घर-घर कूड़ा कलेक्ट करने वाली कंपनी ईको ग्रीन के कर्मचारी महीने में सिर्फ 8 से 9 दिन ही आते हैं। वहीं वहाब ने बताया कि क्षेत्रीय सुपरवाइजर का साफ कहना है कि कूड़ा कलेक्ट करने के लिए हमारा कर्मचारी तीन दिन गैप करके ही आएगा इसकी शिकायत जब ईको ग्रीन के जोनल अधिकारी से की गई तो उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया फिर इसकी शिकायत ईको ग्रीन के जर्नल मैनेजर से की गई किन्तु समस्या जस की तस ही रही। थक हार के लोगों ने इस मसले पर जब नगर निगम का रुख किया तो वहां सीधे कहा गया कि ईको ग्रीन के कर्मचारी घर चले गए हैं। इस कारण यह समस्या है। घर में कूड़ा पड़े रहने से लोग आसपास के खाली प्लाटों में कूड़ा फेक देते है, जिससे कि प्लाट में कूड़े का अंबार बढ़ता जा रहा है और काफी तरह की बीमारियां भी उत्पन हो रही है।

किन्तु दूसरी ओर आम जनता की समस्या यह है कि अगर कूड़े की उठाने शिकायत करें तो किससे करें। जब कूड़ा तीन-तीन दिन तक घरों में ही पड़ा सड़ता रहेगा तो फिर भारत स्वच्छ कैसे बन सकता है, क्योंकि बीमारी की जड़ तो हम लोगों के घरों में ही मौजूद है। नगर निगम केवल स्वच्छ भारत की बात सिर्फ पेपरों में ही करता है, लेकिन असल में हकीकत कुछ और ही देखने को मिलती है।

इसी कड़ी में डालीगंज इलाके के निवासी दिलशाद अहमद (कैफी) का कहना है कि यहां पर रेलवे ट्रैक के पास बहुत ही बड़ा कूड़े का अंबार लगा हुआ है । जिससे इलाके में तमाम तरह के संक्रामक रोग फैल रहें है और इन रोगों से काफी लोगों की मौत भी हो चुकी है । वहीं इस इलाके में कई तरह के जानवर जैसे सुअर आदि का भी जमावाड़ा लगा रहता है और इस तरह से मोहल्ले में जानवरों के खुले में घूमने से काफी तरह की गन्दगी और बीमारी इलाके में फैलती है । इसके साथ ही रेलवे ट्रैक के पास एक नाला भी है, जो नगर-निगम के कर्मचारियों की लापरवाही से आधा टूट गया है और इस नाले से निकलने वाले गंदे पानी खुलेआम रोजाना सड़को पर बहता रहता है। जिससे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


आगे बताते हुए कैफी ने कहा कि नगर-निगम की गाड़ियां यहां घरों में रोजाना कूड़ा उठाने आती तो है लेकिन इसके बावजूद भी लोग मोहल्ले में कूड़े का ढेर लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं और दूसरी तरफ नगर-निगम के कर्मचारी कई इलाको का कूड़ा लाकर इसी इलाके में डंप करते है, जिससे कि कई तरह भयावह रोग बढ़ने की संभावना बढ़ रही है ।

कई बार पार्षद से शिकायत करने पर भी इस मामले में किसी भी तरह की कोई सुनवाई नहीं होती है । इस लिहाजे से देखा जाए तो स्थानीय निवासी और नगर-नगम दोनों ही इलाके में लगने वाले कूड़े के अंबार के लिए जिम्मेदार है ।

इसी कड़ी में मोहल्ला हटा मिर्जा अली खां हुसैनाबाद के निवासी हसन इमाम बताते हैं कि उनके इलाके में कूड़ा निस्तारण का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। क्षेत्र में फैलती गंदगी ने पर्यावरण का भी नाश कर दिया है। लाख कोशिशों के बाद भी प्लास्टिक के कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इलाके में दूर-दूर से लोग आते हैं और यहां पर कूड़े का ढेर लगा जाते हैं, जिसमें तमाम तरह के जानवर कूड़े के पास आकर उसको और बुरी तरह से सड़कों पर फैला देते हैं।

कारणवश इलाके में कई तरह की बीमारियाँ फैलती हैं। हसन इमाम बताते हैं कि नगर निगम में कई बार शिकायत करने पर भी वहां के कर्मचारी कूड़ा लेने नहीं आते हैं और लोग सड़कों पर खुले में कूड़ा डालने पर मजबूर हो रहे हैं। http://www.satyodaya.com

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इसोफेगास्टमी एड्रोशिया बीमारी में ग्रसित बच्चे को डाक्टर ने दिया नया जीवनदान

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लखनऊ। मानव शरीर समय-समय पर कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आता रहता है कुछ बीमारियों में तो इलाज के बाद स्वस्थ हो जाता है मगर बहुत सी बीमारी होती है जो मानव के लिए जानलेवा साबित होती है मगर कुछ ऐसी भी बीमारियां होती हैं जो पैदा होते ही बच्चे को जकड़ लेती हैं। इसी प्रकार की एक बीमारी है इसोफेगास्टमी एड्रोशिया कहते हैं, इस बीमारी में जो खाने की नली होती है गले से लेकर पेट तक विकसित नहीं होती है।

इसोफेगास्टमी एड्रोशिया बीमारी में ग्रसित 22-3-2017 केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में प्रोफेसर जेडी रावत की निगरानी में भर्ती हुआ जिसका प्रोफेसर जे.डी. रावत और उनकी टीम के द्वारा तत्काल उपचार शुरू किया गया। जिसमें यह पाया गया कि बच्चा ऐसी बीमारी में मुब्तिला है जिसके कारण बच्चा दूध नहीं पी पा रहा है जब उसे दूध पिलाया जाता तो दूध खांसी एवं दुग्ध मुंह से बाहर आ जाता है, जब बच्चे को भर्ती कराया गया उस समय वह मात्र 1 दिन का था भर्ती के दूसरे दिन ही इमरजेंसी में बच्चे का ऑपरेशन किया गया।

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इस ऑपरेशन में अविकसित आहार नली को गले से बाहर किया गया और पेट में खाने की थैली में एक नली डाली गई और गैस्ट्रास्टमी से बच्चे को दूध पिलाना शुरू किया गया और दो बार फिर बच्चे का आपरेशन किया गया। प्रोफेसर जे.डी.रावत ने बताया की कुल तीन चरणों में बच्चे का आपरेशन किया गया जो की पूरी तरह सफल रहा और अब बच्चा सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ है और खा-पी रहा है। बच्चा जो की सिद्धार्थनगर का रहने वाला है उसके अभिभावकों ने प्रोफेसर जे.डी.रावत और उनकी टीम का धन्यवाद देते हुए कहा की इन सभी लोगों के कारण बच्चे को नया जीवन मिला है।http://www.satyodaya.com

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यूपी-100 कर्मियों ने ब्लड डोनेट कर बचाई सूचनाकर्ता की बुजुर्ग मां की जान

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लखनऊ। राजधानी की #पुलिस ने एक बार फिर मानवता की मिशाल पेश की है जिसमें बताया जा रहा है कि इंदिरा नगर स्थित एक अस्पताल से एक युवक ने 100 नंबर पर फोन कर पुलिस से मदद मांगी जिसपर मौके पर पहुंची पीआरवी 4569 और इवेंट सूचना पर 4614 ने देखा की पीड़ित की बुजुर्ग मां को खून की जरूरत है जिसपर तत्काल पुलिस ने ब्लड डोनेट कर उस युवक के मां की जान बचाई।

पूरी घटना कुछ इस प्रकार है कि एक ’कालर-विनोद कुमार सिंह ने यूपी-100 को सूचना दिया कि, उसकी मां इंद्रावती सिंह बीमार हैं अस्पताल वाले ब्लड नहीं दे रहे हैं, तत्काल पुलिस की आवश्यकता है। घटनास्थल,-शेखर अस्पताल इंदिरानगर पर, इस सूचना पर पीआरवी 4569 कॉलर के द्वारा बताए हुए स्थान पर अल्प समय में मौके पर पहुंचे तो कॉलर ने बताया कि उनका नाम विनोद कुमार सिंह है जो कि भूतपूर्व आर्मी है, सुल्तानपुर का रहने वाला है, उनकी माँ इंद्रावती जिनकी उम्र लगभग 80 वर्ष है, जो 12 मई को घर के आंगन में गिर गयी थी जिसके कारण उनका पैर टूट गया था, जिसके बाद उनको लखनऊ के आर्मी कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां के डॉक्टरों द्वारा 16 मई को ऑपरेशन करने के लिए शेखर अस्पताल भेजा गया।

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उसके बाद ही उसने बताया कि उसको ऑपरेशन से पहले डॉक्टर द्वारा बताया गया कि उसकी माँ का लिवर और किडनी डैमेज है, उनको तत्काल 2 यूनिट खून की आवश्यकता है, मैं ब्लड बैंक गया था खून लेने पर उन लोगों ने कहा ही हम आपको तभी खून दे पाएंगे जब आप हमें 2 यूनिट खून कहीं से उपलब्ध कराओगे क्योंकि ऐसा नियम है और हम नियम के विपरीत कार्य नही कर सकते हैं, मैने ब्लड बैंक वालों से कहा कि मुझे खून की आवश्यकता तुरंत है और मेरा लखनऊ में कोई जानने वाला नहीं है और मैंने सुल्तानपुर में अपने परिवार वालों को सूचित कर दिया है वो लोग निकल चुके हैं, आते ही आपको खून मिल जाएगा पर वो लोग देने को तैयार नहीं हैं इसीलिए मैंने यूपी 100 को सूचना दी थी।

इस सूचना पर मौके पर पहुंचे पीआरवी 4569 के कमांडर दिगम्बर सिंह द्वारा खुद का खून देकर कालर की मदद करने का निर्णय लिया, चूंकी कॉलर को 2 यूनिट खून की आवश्यकता थी, इसलिए पीआरवी कमांडर दिगम्बर सिंह द्वारा उपरोक्त घटना के संबंध में आरोआईपी पर ड्यूटी पर मौजूद पर्यवेक्षक अधिकारी चंद्रशेखर को उपरोक्त घटना की सम्पूर्ण जानकारी दी गयी जिसके बाद उनके द्वारा उपरोक्त सूचना को सभी ग्रुप में प्रसारित कर पीआरवी स्टाफ से मदद मांगी गई जिसपे पीआरवी 4542 पर नियुक्त कमांडर रवि कुमार द्वारा खून देने की इच्छा जाहिर की गयी, और दोनों पीआरवी वाहनों पर नियुक्त कॉमण्डर द्वारा कॉलर को खून देकर उसकी सहायता की गयी। http://www.satyodaya.com

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तेज रफ्तार कार डिवाइडर से जा टकराई, युवक घायल…

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लखनऊ। राजधानी में तेज रफ्तार वाहनों से आए दिन एक्सीडेंट्स की घटनाएं हो रही हैं और यह थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसा ही एक मामला थाना चौक के रूमी गेट चौराहे पर देखने को मिला है, जहां एक तेज रफ्तार कार डिवाइडर से जा टकराई है। बताया जा रहा है कि डिवाइडर से टकराने पर कार सवार युवक को गंभीर चोट आई हैं।

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वहीं इस घटना की सूचना मौके पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को पहुंचाई। जिसके बाद घटनास्थल पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल युवक को ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया। वहीं पुलिस ने घायल युवक की कार में शराब की बोतल भी बरामद की है और साथ ही पुलिस के मुताबिक कार सवार युवक नशे में धुत था, जिसके कारणवश कार पर नियन्त्रण न रख पाने की वजह से वह डिवाइडर से जा टकराई। http://www.satyodaya.com

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