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मलिहाबाद: दबंगों से पिटे मूक-बधिर भाइयों पर टूटा पुलिस का कहर

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24 घण्टे में हवालात में बंद रखकर जमकर पीटा, अगले दिन मुचलके पर छोड़ा

लखनऊ। अपनी कारगुजारियों से सुर्खियों में रहने वाली मलिहाबाद पुलिस एक बार फिर चर्चा में है। अपराधियों को संरक्षण देने वाली मलिहाबाद पुलिस ने इस बार दो मूक-बधिर भाइयों को बिना किसी सबूत या आधार पर गुण्डा घोषित कर दिया है। मूक-बधिर भाइयों का गुनाह यह है कि दबंगों से पिटने के बाद उन्होंने थाने पहुंचने में देर कर दी। पीड़ितों को पीटने के बाद दबंग थाने भी पहुंच गए और फिर दिव्यांग भाइयों को थाने ले जाकर पुलिस ने भी जमकर पीटा। यह सारे आरोप दिव्यांग भाइयों के बेबस पिता के हैं।

पीड़ित लालता प्रसाद

मलिहाबाद थाना क्षेत्र में लालता प्रसाद अपने दो दिव्यांग बेटों, 12 वर्ष की एक बेटी और पत्नी के साथ रहते हैं। लालता प्रसाद ने बताया कि 27 मई को उनकी बेटी का जन्मदिन था। शाम को दोनों दिव्यांग बेटे अपनी मां के साथ पड़ोसियों को दावत देने जा रहे थे। इसी बीच रास्ते में गांव के टिंकू ने मोटरसाइकिल से बच्चों को टक्कर मार दी। लालता प्रसाद ने बताया कि जब पत्नी ने टिंकू को टोका तो उसने गाड़ी से उतरकर दो बेटों और मेरी पत्नी को पीटने लगा। शोर सुनकर टिंकू का बड़ा भाई रिंकू भी पहुंच गया और उसने भी बच्चों व उनकी मां के साथ मारपीट की। आरोप है कि टिंकू व रिंकू सहित दर्जन भर से ज्यादा दबंगों ने मिलकर दोनों मूक बधिर भाइयों व उनकी मां को जमकर पीटा। किसी तरह गांव वालों ने बेटों व उनकी मां को दबंगों के चंगुल से छुड़ाया।

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इसके बाद शाम को एक बार फिर दबंगों ने घर पर धावा बोला। लालता प्रसाद का आरोप है कि दबंगों ने लात मारकर घर का दरवाजा तोड़ दिया। आरोपियों ने एक बार फिर मेरे बच्चों व पत्नी को पीटा। घर पर मेरी सास, साला सहित कुछ रिश्तेदार आए हुए थे। लालता प्रसाद ने बताया कि मामला शांत होने के बाद हम लोग बच्चे का जन्मदिन मनाने में व्यस्त हो गए।

इसी बीच आरोपियों ने थाने जाकर हमारे बच्चों के खिलाफ ही शिकायत कर दी। जिसके बाद रात करीब 11 बजे मलिहाबाद थाने से 7-8 पुलिसकर्मियों ने हमारे घर आए। बिना कोई बातचीत किए पुलिसकर्मी दोनों बच्चों को पीटते और घसीटते हुए थाने लेकर चले गए। आरोप है कि जब परिजनों ने पुलिस का विरोध किया तो मेरी सास, पत्नी, साले को भी पुलिस ने पीटा।

पुलिस ने 24 घण्टे थाने में रखकर जमकर पीटा

मूक बधिर बच्चों की पिटाई से दुखी लालता प्रसाद का आरोप है कि पुलिस ने हमारे बेटों को 24 घण्टे हवालात में रखा। 28 तारीख को मुचलका भरने के बाद दोनों को छोड़ा गया। थाने में दोनों बच्चों को थर्ड डिग्री टार्चर किया गया। पुलिसकर्मियों ने दोनों बच्चों को इतना पीटा है कि दोनों चल नहीं पा रहे हैं। दो दिन से दोनों मूक बधिर बच्चे बिस्तर पर पड़े हैं। कुछ खाया भी नहीं है।

बेबस पिता ने कहा, मैं आत्महत्या करने जा रहा था

आंखों में आंसू लिए लालता प्रसाद ने कहा, दबंगों और पुलिस से परेशान होकर मैं आत्महत्या करने जा रहा था। लेकिन न जाने कैसे मेरा निर्णय बदल गया। मेरे निर्दोष बच्चों को इतना पीटा गया कि वह मरणासन्न हो चुके हैं।

पुलिस कह रही दोनों को जेल भेजेंगे

पत्रकारों के पूछने पर कि पुलिस ने किस जुर्म में बच्चों को थाने में बंद किया था? इस पर लालता प्रसाद ने बताया कि पुलिस कह रही है कि यह दोनों गुण्डे और बदमाश हैं। इन्हें जेल भेजेंगे। जबकि दोनों बच्चों ने न कोई जुर्म किया है और न ही उनके खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज है।

एसपी ग्रामीण आदित्य लांग्हे ने कहा-

इस मामले में जब एसपी ग्रामीण आदित्य लांग्हे से बात की गयी तो उन्होंने कहा, घटना संज्ञान में आई है। आज सुबह ही लालता प्रसाद मुझे एक प्रार्थना पत्र दिया है। आरोप लगाने वाले लालता प्रसाद घुसौली गांव के रहने वाले हैं। जिन लोगों पर उन्होंने मारपीट करने का आरोप लगाया है, वह उनके परिवार के ही लोग हैं। मामले की जांच सीओ को सौपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

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एसपी ने बताया कि जानकारी में आया है कि इन दोनों परिवारों ने पहले भी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाया है। कुछ दिन पहले लालता प्रसाद के खिलाफ एनसीआर भी दर्ज हुई थी। मूध-बधिर भाइयों को थाने में थर्ड डिग्री देने के सवाल पर एसपी ने कहा, पुलिस पर लगे आरोपों की भी जांच कराई जा रही है। यदि मलिहाबाद पुलिस ऐसा कुछ किया है तो दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। http://www.satyodaya.com

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लखनऊ : स्मार्ट सिटी के तहत अमीरूदौला पुस्तकालय का होगा कायाकल्प

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अमीरूदौला पब्लिक लाइब्रेरी की बोर्ड बैठक सम्पन्न, मण्डलायुक्त ने दिए निर्देश

लखनऊ। गुमनामी में खो रही राजधानी कीे ऐतिहासिक व समृद्ध अमीरूदौला पब्लिक लाइब्रेरी को फिर से लोकप्रिय व जनउपयोगी बनाने की कवायद जोर-शोर से चल पड़ी है। सोमवार को मण्डलायुक्त मुकेश कुमार मेश्राम की अध्यक्षता में अमीरूदौला पब्लिक लाइब्रेरी की बोर्ड बैठक संपन्न हुई। जिसमें मण्डलायुक्त ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के आय-व्यय सहित तमाम कार्यों की समीक्षा की। साथ ही इस पुस्तकालय को लोकप्रिय बनाने के लिए तमाम निर्देश दिए। मण्डलायुक्त ने कहा कि यह एक बहुत ऐतिहासिक व समृद्ध पुस्तकालय है। यहां लगभग एक लाख 65 हजार पुस्तकों का संग्रह व ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां मौजूद हैं। ज्ञान के इस भण्डार के समुचित उपयोग के लिए आधुनिक युवाओं को इससे रूबरू कराने की जरूरत है।

मण्डलायुक्त ने बताया कि स्मार्ट सिटी के तहत पुस्तकालय का जीर्णोद्वार व डिजिटालाइजेशन कराया जा रहा है। ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके। जरूरत के हिसाब से पुस्तकालय को री-डिजाइन कर एक स्मार्ट लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जाएगा। बच्चों, दिव्यांगों, वृद्धजनों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विधार्थियों के लिए वातानुकूलित हाल तैयार कराए जाएंगे। छोटे-छोटे कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए भी हाल, कैन्टीन व सामुदायिक शौचालय विकसित किए जाएंगे।

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मण्डलायुक्त ने कहा कि पुस्तकालय को प्रासंगिक बनाने के लिए उन्हीं पुस्तकों का डिजिटाइजेशन कराया जाए, जो महत्वपूर्ण हों। अधिक से अधिक बच्चों, युवाओं व विद्धानों को पुस्तकालय से जोड.ने के लिए यहां विभिन्न गतिविधियां प्रारम्भ की जाए। स्कूलों के बच्चों को पुस्तकालय का निरीक्षण कराएं। उन्हें पढ़ने के लिये पुस्तके उपलब्ध कराएं। इससे बच्चों का पुस्तकों की तरफ रूझान बढ़ेगा। बच्चों के बीच छोटे-छोटे कम्पटीशन (जैसेः-निबन्ध, कविता लेखन, वाद विवाद, कहानी लेखन, शायरी इत्यादि) कराएं।

पुस्तकालय के लिए दान लेने का करें प्रयास

मण्डलायुक्त ने कहा कि केन्द्र, राज्य व अन्य संस्थाओं से पुस्तकालय के लिए दान प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए। यदि कोई व्यक्ति या संस्था पुस्तकालय में दान करती है तो उसे संरक्षक सदस्य बनाया जाए। उन लोगों के नाम बोर्ड पर अंकित किए जाएं। ऐसे लोगों को निःशुल्क पांच मेम्बरसिप कार्ड दिये जाएं। उन्हें पुस्तक के चयन व एलाटमेट में प्राथमिकता दी जाए।

लेखकों, साहित्यकारों संगठनों को पुस्तकालय से जोड़े।

मण्डलायुक्त ने कहा, लेखकों, साहित्यकारों संगठनों को पुस्तकालय से जोड़े। ऐसे लोग अपना योगदान व सुझाव प्रदान करें। पुस्तकालय का एक एडवाइजरी बोर्ड तैयार कराएं। जिसमें शहर के अच्छे इतिहासकार, साहित्यकार, संस्कृतिविद को रखा जाए। शहर के लोग यदि काव्य गोष्ठिया, साहित्य चर्चाएं किस्सा गोयी, पुस्तक वाचन करना चाहें तो उनकों पुस्तकालय में स्थान उपलब्ध कराया जाए।

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यूपी के प्रसिद्ध व स्थापित साहित्यकारों की जयन्ती पर छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उसमें उन साहित्यकारों के बारे में जानकारी प्रदान की जाए। इसकी शुरूवात लखनऊ के प्रसिद्व साहित्यकारों से की जाए। पुस्तकालय में त्रैमासिक डिजिटल मैगजीन प्रकाशित करायी जाये। इसके लिये लाइब्रेरी विज्ञान के स्वयं सेवी विधार्थियों का सहयोग लिया जाए।

पुस्तकालय की डाक्यूमेन्ट्री तैयार होगी

मण्डलायुक्त ने कहा कि पुस्तकालय की डाक्यूमेन्ट्री तैयार कराई जाए। जिसमें पुस्तकालय का इतिहास, संग्रह, उपयोगिता उपलब्ध हो। डाक्यूमेन्ट्री वेबसाइट पर अपलोड की जाए। सोशल मीडिया में प्रचार-प्रसार के लिए फेसबुक व ट्वीटर एकाउन्ट बनाया जाएं। यदि कोई नयी या उपयोगी पुस्तक पुस्तकालय में आए या कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाये तो आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाए। पुस्तकों के चयन के लिये एक समिति गठित की जायेगी जिससे उपयोगी पुस्तकों का ही चयन किया जायें।

बैठक के उपरांत मण्डलायुक्त ने पुस्तकालय का निरीक्षण किया। कहा कि पुस्तकालय में पड़ी अनुपयोगी सामग्री को एक समिति बनाकर उसका डिस्पोजल कराया जाये। बैठक में अपर नगर आयुक्त अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट सुशील प्रताप सिंह, उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) विभा श्रीवास्तव, पुस्तकालयाध्यक्ष हरिशचन्द्र सहित सभी सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थें।http://www.satyodaya.com

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कर्मचारियों को सप्ताह में चार दिन कार्यालय बुलाये UP सरकार: अखिलेश यादव

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हल्के लक्षण के मरीजों को घर पर ही क्वारंटीन की मिले अनुमति

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है सरकार को अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सप्ताह में चार दिन ही उन्हें कार्यालय में बुलाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना के हल्के लक्षण के मरीजों को घर पर ही क्वारंटीन होने देने की अनुमति देनी चाहिए जिससे अस्पतालों में गम्भीर मरीजों के लिए बेड कम न पड़े और इलाज में भी दिक्कत न हो।

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अखिलेश ने कहा कि अस्पतालों में कोरोना के नाम पर इन दिनों गम्भीर मरीजों को भी काफी परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि बाराबंकी के जिला महिला अस्पताल के मैटर्निटी वार्ड में कोविड ओटी, कोविड वार्ड, कोविड प्रसवकक्ष सब में सीलन और दूसरी निर्माण सम्बंधी खामियां मिली जबकि 100 बेड के इस अस्पताल के निर्माण पर 20 करोड़ रूपए खर्च हुए हैं।

उन्होंने कहा कि लखनऊ के नामी किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में भी मरीजों को व्यर्थ घंटों इंतजार कराने और इलाज में लापरवाही की शिकायतें आम है। सीतापुर के अयोध्या के पैर में फ्रैक्चर था पर कोरोना जांच के नाम पर उसका घंटो इलाज नहीं हुआ। रायबरेली के सुमित को 19 घंटे इलाज के लिए तड़पना पड़ा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना संकट तो है ही पर अस्पतालों में इसकी वजह से अन्य गम्भीर मरीजों का इलाज न हो यह उचित नहीं। स्वास्थ्य विभाग को इस सम्बंध में मरीजों के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएं करनी चाहिए। गम्भीर मरीजों के प्रति भी सरकार की संवेदना रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जो स्वास्थ्य सेवाएं हैं वे समाजवादी सरकार की ही व्यवस्था है। भाजपाराज में एक नया मेडिकल कॉलेज नहीं बना। अस्पतालों में डाक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी है। समाजवादी सरकार में मुफ्त इलाज की व्यवस्था गम्भीर रोगों किडनी, दिल, लीवर और कैंसर की भी थी लखनऊ में कैंसर अस्पताल भी तभी बना। प्रदेश में एमबीबीएस की सीटें दुगनी की गईं।http://www.satyodaya.com

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कोरोना संक्रमण के चलते लखनऊ का चौक सर्राफा बाजार 20 जुलाई तक बंद

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लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन ने एक सप्ताह तक बंदी का किया ऐलान

लखनऊ। राजधानी में कोरोना संक्रमण को देखते हुए चौक सर्राफा बाजार फिलहाल 20 जुलाई तक बंद रहेगा। चौक सर्राफा एसोसिएशन ने रविवार को बाजार के सभी कारोबारियों के साथ ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीटिंग की। जिसमें सभी ने मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल दुकानें व प्रतिष्ठान बंद रखने की बात कही। चौक सर्राफा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष राहुल गुप्ता ने बताया कि मीटिंग में सभी ने एकमत होकर कहा कि यह समय लोगों से मिलने-मिलाने का नहीं है, बल्कि अपनों और अपनी जान बचाने का है। जिसके बाद एसोसिएशन ने आगामी 20 जुलाई तक चौक सर्राफा बाजार बंद रखने का निर्णय लिया।

लखनऊ महानगर सर्राफा एसो. ने भी बंदी का किया ऐलान

वहीं लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन ने भी उससे संबद्ध सभी सर्राफा बाजारों में एक सप्ताह की बंदी का ऐलान किया है। लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन ने एक सर्कुलर जारी कर कहा, पिछले कुछ दिनों में कई सर्राफा कारोबारी भी कोरोना की गिरफ्त में आ चुके हैं। अपने सर्राफा परिवार को इस महामारी से बचाने के लिए लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन ने एक हफ्ते की बंदी का निर्णय लिया है। जिसके अनुसार 13 जुलाई से 20 जुलाई तक सभी सर्राफा दुकाने बंद रहेंगी।

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लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने कहा, आज सवाल पैसे कमाने का नहीं है, बल्कि खुद को अपने परिवार को और अपने सहयोगियों को इस संक्रमण से बचाने का है।http://www.satyodaya.com

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