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‘जफर-पैकर ए इंसानियत ओ मोहब्बत’- जंगे आजादी के सरपरस्त बहादुरशाह जफर के ज़िन्दगी का आईना होगा ये संगीतमय नाटक…

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नाटक के मंचन में शामिल होने के लिए राजधानी पहुंचे प्रिंस मिर्जा फैजुद्दीन बहादुरशाह जफर तृतीय

लखनऊ‘न किसी की आंख का नूर हूं….., लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में….’ और ‘बेकरारी तुझे ए दिल कभी……’ जैसी कई गजलें कहने वाले प्रथम स्वाधीनता संग्राम के सरपरस्त रहे मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर की जिन्दगी को पेश करते संगीतमय उर्दू ड्रामा- ‘जफर- पैकर ए इंसानियत ओ मोहब्बत’ का मंचन कल 28 दिसम्बर से 30 दिसम्बर तक शाम 5 बजे एसएनए के संत गाडगे प्रेक्षागृह में होगा। आसिफ रिजवी की परिकल्पना और प्रदीप श्रीवास्तव के लेखन-निर्देशन में अवध आर्ट गैलेक्सी और उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की इस पेशकश में मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक और विशिष्ट अतिथि के तौर पर बादशाह जफर के वंशज और कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में सक्रिय प्रिंस मिर्जा फैजुद्दीन बहादुरशाह जफर तृतीय व पूर्व मंत्री डा.अम्मार रिजवी उपस्थित रहेंगे।

मंचन के सिलसिले में राजधानी पहुंचे प्रिंस मिर्जा फैजुद्दीन बहादुरशाह जफर तृतीय ने अपने पूर्वज के देशहित में किये कार्यों व साहित्य में दिये योगदान की चर्चा करते हुए इस बात पर दुख जाहिर किया कि जिस कौमी यकजहती के लिए उनके पूर्वज ने नेतृत्व किया, लड़ाई लड़ी और कुर्बानी दी आज देश का माहौल उसके अनुकूल नहीं है, उनकी मेहनत और कुर्बानी जाया होती दिख रही है। उन्होंने यह इच्छा भी जाहिर की कि उनके पूर्वज की रंगून स्थित खाक ए पाक को भारत लाया जाए और उनका एक शानदार स्मारक यहां बनवाया जाए।

पूर्व मंत्री अम्मार रिज़वी ने महमूदाबाद के एक संस्थान में सरकारी मदद से जफर प्रेक्षागृह बनवाने की जानकारी देते हुए प्रिंस मिर्जा की ख्वाहिशें दोहराईं और कहा कि मरहूम बादशाह की शायरी, उनकी बहादुरी और कुर्बानी पर हो रहा ये ड्रामा प्रिंस मिर्जा की मौजूदगी में दर्शकों पर और ज्यादा असर छोड़ेगा। साथ ही नई पीढ़ी के लिए प्रेरक बनेगा। ऐसे आयोजन बराबर होने चाहिए और इसके लिए उर्दू अकादमी की अध्यक्ष प्रो.आसिफा जमानी बधाई की पात्र हैं। प्रो.आसिफा ने अतिथियों का स्वागत करने के साथ कहा कि अकादमी के ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को कई जानकारियां मिलेगी साथ ही मालूम होगा कि कितनी मुश्किलात से हमने आजादी पाई।

नाटक के परिकल्पनाकार आसिफ रिजवी ने बताया – जफर भारतीय इतिहास के अकेले ऐसे बादशाह रहे हैं जो जितना राजनीति में रहे वैसे ही साहित्य जगत में भी मुब्तिला रहे हैं। उन्होंने कौमी यकजहती की मिसाल पेश की। वे एक बादशाह ही नहीं, शायर, अजीम इंसान, कौमी एकता के अलम्बरदार और जंगे आजादी के सरपरस्त थे। संयोजक अतहर नबी ने कहा- ‘जब जफर के दर्द का दरिया रवां होता है तो उनकी हयात के तमाम जख्म मर्बूत होते हैं।’ ये पेशकश तीन हिस्सों में चलती है, एक तरफ रूहे पैकर, दूसरी तरफ ड्रामा और तीसरी तरफ मौसिकी। प्रस्तुति में जगजीत सिंह के शागिर्द जयदेव और उस्ताद हयात हुसैन खां ने अपने संगीत के साथ अपने सुरों के हुनर से महफ़िल में चार चांद लगा दिए।

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नाटक के लेखक-निर्देशक प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो बहादुर शाह जफर आवाम ने तस्लीम हासिल करने वाले पहले ऐसे बाद्शाह पहले ऐसे मुगल थे, जो अहले सुखन रहे। उन्हें पहली जंगे आजादी के रहनुमा होने का रुतबा भी हासिल है। उनके किरदार की यही खूबियां, उनकी हयात के नशेबो फराज बहुत सारे सबक देते है। इसको ड्रामे की सूरत दी गई है, लेकिन क्राफ्टिंग के लिहाज से इसको म्यूजिकल कोलाज कहना बेहतर होगा। दास्तान ए जफर कहने में उनकी कई गजलों को पिरोया गया है। नाटक में जफर के चरित्र में आकाश पाण्डे व जीशान काजी और जीनत महल की भूमिका में नाज खान हैं। अन्य प्रमुख किरदारों गालिब, जौक, मोमिन, शेफ्ता, दाग व जहीर की भूमिका में अतहर नबी, गोपाल सिन्हा, हसन काजमी, अश्फाक, अमित, विशाल श्रीवास्तव शेष कलाकारों के साथ मंच पर उतरेंगे।http://www.satyodaya.com

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गंभीर चूक: कोरोना जांच के लिए भेजी गई गर्भवती का लाइन में खड़े-खड़े हो गया प्रसव

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लोहिया संस्थान में गंभीर लापरवाही, दर्द से कराहती महिला को डाक्टरों ने लाइन में लगवाया

लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान में एक बार फि‍र अव्‍यवस्‍था का मामला सामने आया है, सोमवार को संस्‍थान की जच्‍चा-बच्‍चा इमरजेंसी में पहुंची महिला को कोविड जांच के लिए परचा बनाने की लाइन में भेज दिया गया, जहां महिला को प्रसव हो गया। जानकारी के अनुसार गर्भवती महिला डिलीवरी के लिए संस्‍थान की जच्‍चा-बच्‍चा इमरजेंसी पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद डॉक्‍टर ने महिला को भर्ती न कर उससे पहले कोविड जांच करा कर आने को कहा।

महिला कोविड जांच के लिए परचा बनवाने की लाइन में लग गयी। इसी बीच उसकी प्रसव पीड़ा तीव्र हो गयी और उसने वहीं शिशु को जन्‍म दे दिया। ऐसी‍ स्थिति देख वहां हड़कम्‍प मच गया, आनन-फानन में महिला और शिशु को लेबर रूम ले जाकर आगे की प्रक्रिया पूरी की गयी।

संस्‍थान प्रशासन ने माना, लापरवाही हुई

इस बारे में संस्‍थान के प्रवक्‍ता डॉ श्रीकेश ने बताया कि हां यह मामला सामने आया है, इस मामले में संस्‍थान प्रशासन का मानना है कि यह लापरवाही हुई है, इमरजेंसी पहुंची महिला को तुरंत भर्ती करने के बाद कोविड की जांच करायी जानी चाहिये थी, इसके लिए जिम्‍मेदार लोगों की जानकारी जुटायी जा रही है, और इस लापरवाही के लिए जिम्‍मेदार व्‍यक्ति के खिलाफ संस्‍थान कार्रवाई करेगा।

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 बता दें कि राजधानी सहित प्रदेश भर के अस्पतालों में लागू कोरोना प्रोटोकाॅल सामान्य बीमारियों व गंभीर मरीजों पर भारी पड़ रहे हैं। अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज की थर्मल स्क्रीनिंग व ऑपरेशनल मरीजों की अनिवार्य कोरोना जांच के चलते कई मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है।

सामान्य व गंभीर मरीजों के लिए एक ही लाइन

बता दें कि लोहिया संस्थान में कोविड अस्पताल भी बनाया गया है। ओपीडी में आने वाले सामान्य मरीजों की थर्मल स्क्रीनिंग की जार रही है। जबकि गंभीर मरीजों व ऑपरेशन वाले मरीजों की कोरोना जांच अनिवार्य है। यहां सामान्य मरीजों व गंभीर मरीजों को एक ही लाइन में लगाकर कोविड टेस्ट किया जा रहा है। भीड़ अधिक होने के चलते इमरजेंसी वाले मरीजों को मुसीबत का सामना करना पड़ता है।http://www.satyodaya.com

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कॅरियर डेंटल काॅलेज के मालिक पिता-पुत्र पर लखनऊ पुलिस ने लगाया गैंगस्टर

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सपा नेता व पूर्व राज्यमंत्री है इकबाल, काफी समय से है फरार

लखनऊ। अवैध निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ लखनऊ जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में हाल ही में मड़ियांव स्थित आईआईएम रोड पर कॅरियर डेंटल काॅलेज का अवैध निर्माण ढहाया जा चुका है। शनिवार को लखनऊ पुलिस ने कॅरियर डेंटल काॅलेज के मालिक अजमत अली और उनके बेटे इकबाल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है। मड़ियांव में इंस्पेक्टर विपिन सिंह ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपी पिता-पुत्र के खिलाफ मड़ियांव थाने में नौ मुकदमे दर्ज हैं।

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तहरीर में इंस्पेक्टर ने कहा है कि अजमत अली (65) अपने बेटे इकबाल (35) व अन्य साथियों के साथ मिलकर शहर की महंगी सरकारी जमीनों पर कब्जा करने का गिरोह चलाते हैं। इनका एक संगठित गिरोह है। गिरोह के आतंक के चलते जनता और अधिकारी इनका विरोध नहीं करते हैं। भय के चलते इनके खिलाफ कोई गवाही के लिए तैयार नहीं होता। इसीलिए इनके खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्यवाही की जाए। एफआईआर में अजमत का पता घैला, मड़ियांव और इकबाल का पता विकासनगर लिखाया गया है। कुछ तथ्य जुटाने के बाद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने की कवायद में जुटेगी। मौजूदा समय में इकबाल फरार हैं।

फरार है इकबाल

बता दें कि इकबाल पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार में राज्य मंत्री रह चुका है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज होने के बाद अब दोनों की गिरफ्तार शुरू होगी। पिछले काफी समय से सपा नेता इकबाल फरार है।

23 जून को ढहाया गया था अवैध निर्माण

अभी कुछ दिन पहले ही आईआईएम रोड पर घैला मोड़ पर बने कॅरियर डेंटल काॅलेज का अवैध निर्माण जिला प्रशासन ने ढहाया था। इस काॅलेज का काफी हिस्सा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर बनवाया गया था। फरवरी 2020 में नोटिस देने के बाद भी जब अजमत अली ने अवैध निर्माण नहीं हटवाया तो जिला प्रशासन की टीम ने 23 जून को बिल्डिंग का अवैध हिस्सा ढहा दिया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में अभी और सख्त कार्रवाई की जानी है।http://www.satyodaya.com

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लखनऊः युवक ने की आत्महत्या, दीवारों पर लिखा- मेरी मां को मेरा मुंह न दिखाना…

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लखनऊ। राजधानी की भोला खेड़ा पुलिस चौकी के पास एक युवक ने अपने परिवार को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए आत्महत्या कर ली। मृतक संजय पाल ने अपने कमरे की दीवारों पर लिखा है कि मेरे मरने के बाद मेरी मां को मेरा मुंह न दिखाया जाए। संजय पाल की शादी हो चुकी थी। लेकिन घटना के समय वह घर में मौजूद नहीं थी। संजय ने आत्महत्या से पहले दीवारों पर लिखा है कि उसकी मां, पिता और बहन उसकी ससुराल वालों पांच लाख रुपए मांग रहे थे।

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अपनी मांग पूरी कराने के लिए उसके परिजन संजय और उसकी पत्नी को परेशान कर रहे थे। मृतक संजय ने अपने पूरे परिवार को लालची बताया है। संजय ने लिखा है कि मेरे घर वाले मेरी ससुराल वालों से 5 लाख रुपए ले चुके हैं। अब और पैसे मांग रहे थे। मैं इज्जत से जीना चाहता था। मगर मेरे परिवार ने मुझे जीने नहीं दिया…मेरे मरने का कारण मेरा पूरा परिवार है। आत्महत्या की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ पूरे कमरे को सील कर संजय के आरोपों की जांच पड़ताल शुरू कर दी है।

पत्नी ने कहा, संजय को परेशान कर रहे थे उसके परिजन

पति की मौत की सूचना पाकर ससुराल पहुंची संजय पाल की पत्नी ने बताया कि ससुराल वाले हम दोनों को जीने नहीं दे रहे थे। हमें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा था। संजय की मां अपने बेटे और मुझे रोज गालियां देती थी और झगड़ा करती थी। आरोप है कि संजय के परिवार वाले कार खरीदने के लिए संजय के ससुर से 5 लाख रुपए की मांग कर रहे थे। संजय के मना करने पर उनकी मां और बहन ने उनके कमरे की बिजली तक काट दी थी।

संजय के ससुर ने लगाए गंभीर आरोप

संजय के ससुर ने बताया कुछ महीनों पहले तक संजय और मेरी बेटी भोपाल में मेरे साथ रह रहे थे। लेकिन संजय के परिजनों ने दोनों को लखनऊ बुला लिया। यहां संजय पर ससुराल से पांच लाख रुपए लाने का दबाव बनाया जा रहा था। मना करने पर पिछले तीन महीनों से मेरी बेटी और दामाद को घर से निकाल दिया गया था। दोनों बच्चे किराए पर रह रहे थे। संजय कोई काम नहीं करता था, इसलिए पिछले तीन महीने मैं ही पूरा खर्चा उठा रहा था। संजय के परिजनों से उसे एक भी पैसा नहीं दिया।

संजय की मांग और बहन ने कहा-

वहीं संजय की मां और बहन का आरो है कि बेटा दिमागी रूप से कमजोर था। वह अपनी पत्नी और ससुराल वालों के कहने पर चलता था। हमारा उससे कोई विवाद नहीं हुआ है। बहन ने कहा कि मेरी उससे कोई बात-चीत नहीं होती थी। मैं यहां 26 साल से अपने बच्चों के साथ रहती हूं।http://www.satyodaya.com

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