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सर्राफ़ा

लॉकडाउन के दौरान भी सोने का दाम बढ़ता रहा, आखिर खरीद कौन रहा है: #RAHULGUPTA

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लखनऊ। कोरोना महामारी को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन 17 मई तक है। यह आगे कब तक जारी रहेगा। अभी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। कोरोना संक्रमण के बीच अर्थव्यवस्था की हालत ख़स्ता है, फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं, और रोजगार का संकट है। इन तमाम चुनौतियों के बीच सोना लगातार चमक रहा है। पिछले महीने ही सोना ऑल टाइम के उच्च स्तर को भी छूता दिखा। आखिर क्यों लगातार सोने को चमक बनी हुई है। सोने की चमक के पीछे का राज आखिर क्या है। कौन खरीद रहा है इसे जो इसका दाम आसमान छुता जा रहा है।

इसके अलावा बीते दिन कुछ ड्राकरेज फंड्स में सोने के रेट को लेकर अविश्वशनिय अनुमान लगाया, बुधवार को सोने के चमकते दाम को लेकर सर्राफा कारोबारी राहुल गुप्ता ने सत्योदय से बातचीत के दौरान बताया कि सोने की कीमत में एक बार फिर तेजी आ गई है। 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 357 रुपए से बढ़कर 48500 रुपए तक पहुंच गई। चांदी की कीमत में भी 1120 रुपए प्रति किलोग्राम का उछाल आया है। इसके अलावा बीते कुछ दिनों में ब्रोकरेज फंड्स के एक्सपर्ट ने सोने के रेट को लेकर अविश्वशनिय अनुमान लगाया।

लखनऊ के प्रतिष्ठित #chowk sarrafa कारोबारी #rahul gupta ने सोने के चमकते दाम को लेकर सत्योदय से बातचीत की, सर्राफा कारोबारी #rahulgupta ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान के तमाम सर्राफा बाजार बंद है, वहां सवाल उठता है, कि इसे खरीद कौन रहा है, तथा सोने की कीमतें बढ़ क्यों रही हैं। #rahulgupta ने कहा कि इसको हम दो तरह से समझ सकते हैं। पहला ये कि हम सोना सर्राफा बाजार में जाकर खरीदते हैं। दूसरी जिसमें सोने का निवेश प्रत्यक्ष रूप से कर रहे है। दुनिया के सभी सेंट्रल बैंक जैसे भाररतीय रिजर्व बैंक या वर्ल्ड बैंक इन सभी बैंक द्वारा सोने का निवेश किया जाता है।

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इसके बाद कुछ लोग वायदा बाजार में लोग निवेश करते हैं। वायदा बाजार के बाद लोग एमसीएक्स में भी अपना निवेश करते हैं। दरअसल बाजार के खुलने और बंद होने से सोने की कीमत पर कोई असर नहीं पड़ता। इसकी खरीदार बंद बाजार में भी सक्रिय होकर की जा सकती है। जो कि सर्राफा बाजार में जोरो शोरो से हो रही है। यही वजह है कि लॉकडाउन में भी सोने का दाम लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले हाल फिलहाल में ही सोने की कीमत ने एक नई ऊंचाई को छुआ है। इन सबके बीच दो ब्रोकिंग फर्म ने सोने की कीमत को लेकर एक अद्भुत अनुमान लगाया। जिसने लोगों को चौका दिया है। इसी बीच स्टेट ऑफ अमेरिका ने की आई एक रिर्पोट के अनुसार सोने की कीमत में डबल बढ़ोतरी हो सकता है। स्टेट ऑफ अमेरिका ने कहा कि सोने की कीमत जो उच्चतम स्तर तक पहुंच रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव करीब $2000 डॉलर प्रति औंस के आसपास या उसके कीमत के दोगुना हो सकता है। उनका दूसरा अनुमान यह था, कि सोने की कीमत $3000 तक छू सकता है। सबसे बड़ी बात यह है, कि सोने की कीमत में 75000 का जो अनुमान आया है।वो इसलिए आया है, क्योंकि सेंट्रल रिजर्व बैंक समेत तमाम देश के सेंट्रल बैंकों ने करेंसी छापकर कोरोना संकट के समय अपने देश में राहत पैकेज पहुंचा रहे हैं। वह देश इस वक्त राहत पैकेज सिस्टम के पैसों को लिक्यूडिटी में डाल रहे हैं। आपको बता दें की जब भी किसी देश में चल निधि बहुत अधिक होता जाता है, तो उस देश में मनी इंफ्लेशन का खतरा बढ़ता लगता है। जिससे देश मे महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। इस सबके बीच सोना महंगाई के खिलाफ अच्छा हथियार भी माना जाता है। जब महंगाई बढ़ती है तो करेंसी की कीमत कम हो जाती है। उस समय लोग धन को सोने के रूप में रखते हैं। इस तरह महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने पर सोने का इस्तेमाल इसके असर को कम करने के लिए किया जाता है।

उद्योग के कुछ जानकारों के मुताबिक, सामान्य स्थितियों में सोने और ब्याज दरों के बीच उलटा संबंध है. ब्याज दरों का बढ़ना संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है. मजबूत अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ती है। महंगाई के खिलाफ सोने को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा जब दरें बढ़ती हैं तो निवेशक फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में पैसे लगाते हैं। सोने के उलट इनमें उन्हें ज्यादा अच्छा रिटर्न मिलता है। भारतीय सेंट्रल बैंक एक हिस्सा सोने का भी रखता है जो कि तमाम देश के सेंट्रल बैंक में गोल्ड में खरीदारी करते है इस दौरान पिछले महीने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 1100 टन सोने की खरीदारी की थी। इसके साथ साथ जापान चीन इटली बड़े बड़े देश अपने पैसे को लिक्विडिटी में डाल रहे हैं। राहत सिस्टम के लिए जो पैसे बहुत अधिक मात्रा में डाल रहे हैं। इससे पूरे देश में महंगाई का बादल मंडरा रहा है। भारत के खुदरा निवेशक इसकी डिमांड अधिक मात्रा में कर रहे हैं। अगर भारत के वित्त वर्ष की बात करें, तो इस पिछले साल 6 साल के बाद गोल्ड ईपीएस में इसका निवेश सकारात्मक रूप में देखने को मिला है। इससे पहले लगातार ईपीएस गोल्ड में लोग पैसे निकाल रहे थे।

इस साल ईपीएस का जो इनफ्लो है। वह सकारात्मक देखने को मिल रहा है। 2012 -13 में गोल्ड ईपीएस से लोग पैसे निकाले है। इस साल इसका सकारात्मक रूप देखने का अर्थ है, कि इनका बैलेंस शीट का आकार बढ़ना, बैलेंस शीट का आकार बढ़ने का मतलब है, कि उस पैसे को इकोनॉमी में लगाना और तीसरी सबसे अहम बात जो है वो यह कि तमाम देश के सेंट्रल बैंक सोने की खरीदारी करती है। यही सब कारण है की सोने की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है।

सत्योदय से बात करते हुए #rahulgupta ने कहा कि भारतीय सोने के मूल्य डॉलर के मुकाबले रुपये कीमत से प्रभावित होते हैं। हालांकि, सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर इसका कोर्इ असर नहीं पड़ता है। आमतौर पर सोने को आयात किया जाता है। इसलिए अमेरिकी मुद्रा की तुलना में रुपये के कमजोर होने से सोने की कीमतें भारतीय मुद्रा में बढ़ जाती हैं। इस तरह रुपये की कीमत घटने से सोने की मांग को चपत लगती है। सामान्य स्थिति में जब डॉलर कमजोर होता है तो सोना चढ़ता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में होती हैं, इसलिए डॉलर में कमजोरी आने पर पीली धातु के दाम मजबूत होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगर सोने की कीमत बढ़ती है तो भारत में सोने की कीमत को डॉलर से रुपए में उसकी कीमत की तुलना करके या ज्ञात कर सकते हैं कि सोने की कीमत कितनी बढ़ी है। http://www.satyodaya.com

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कोरोना काल में ‘GOLD की चांदी’, इस बार तीन गुना ज्यादा निवेश

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चालू वित्त वर्ष के पांच महीनों में ई-गोल्ड में 14 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ

लखनऊ। शेयर बाजार या वैश्विक मार्केट पर जब कभी भी अनिश्चितता के बादल मंडराते हैं तो निवेशक GOLD पर भरोसा करते हैं। साल 2020 के शुरूआती महीनों में कोविड-19 की दस्तक और फिर लाॅकडाउन के बाद भी यही हुआ। रोजगार और अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच सोने में लोगों ने सोने में जमकर निवेश किया। इसी के परिणाम स्वरूप पिछले पांच महीने में सोने में और खासकर ई-गोल्ड में निवेश तीन गुना बढ़ गया है। रिजर्व बैंक और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इंडिया के ताजा आंकड़ों में इसका खुलासा हुआ है।

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आरबीआई के छह सीरीज में साॅवरेन गोल्ड बांड में निवेशकों ने 10130 करोड़ रुपए का निवेश किया है। वित्त वर्ष 2020-21 के शुरूआती पांच महीनों में गोल्ड ईटीएफ में 3900 करोड़ का निवेश हुआ है। कुल मिलाकर इस अवधि में ई-गोल्ड में 14 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए निवेश से यह तीन गुना ज्यादा है। पिछले वर्ष अपै्रल से अगस्त के बीच गोल्ड ईटीएफ में मात्र 75 करोड़ और साॅवरेन गोल्ड बाॅन्ड में 5741 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था।

संकट के समय भरोसेमंद होता है सोने में निवेश

वैश्विक महामारी के इस दौर में सोने के प्रति निवेशकों का यह रुझान कोई आश्चर्य की बात नहीं। अर्थव्यवस्था में सुस्ती या वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है। इतिहास गवाह है कि जब भी शेयर बाजार में नुकसान की आशंका, आर्थिक महाशक्तियों के बीच टकराव या डाॅलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के कमजोर पड़ने की नौबत आने पर सोने का भाव उछल जाता है। संकट के समय निवेशक गोल्ड पर पैसा लगाते हैं और जरूरत के समय इसे बेंचकर नकदी हासिल कर लेते हैं। 3 से 5 साल कि अवधि के लिए सोने में निवेश अप्रत्याशित लाभ दे सकता है।

इसलिए बढ़ा गोल्ड में निवेश

विशेषज्ञों का कहना है कि 2020 की शुरूआत में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, फरवरी-मार्च आते-आते कोरोना संक्रमण का प्रसार और अब भारत-चीन-पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव से बाजार पर से अनिश्चितता के बादल अभी छंटे नहीं हैं। कोविड प्रसार पर अभी अभी प्रभावी काबू नहीं पाया जा सका है। पिछले एक साल के दौरान सोने में दामों में 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। हाल ही में सोने और चांदी के दामों ने रिकार्ड स्तर को भी छुआ है।http://www.satyodaya.com

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जल्द सस्ता हो सकता है Gold-Silver, पांच दिनों में चौथी बार गिरा वायदा भाव

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लखनऊ। कोरोना काल में महंगाई का शिखर छूने वाली कीमती धातुओं सोना और चांदी की कीमतों में अब मामूली नरमी देखने को मिल रही है। पिछले पांच दिनों में चौथी बार बुधवार को सोना-चांदी के वायदा भाव में गिरावट दर्ज की गई। आज सुबह 10 बजे अक्टूबर 2020 के लिए सोने के वायदा भाव में 0.4 फीसदी गिरावट के साथ 51140 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है। पिछले सत्र में यह 51353 रुपए के भाव पर पहुंचकर बंद हुआ था। इसी तरह दिसंबर में डिलीवर होने वाला सोना आज 51315 रुपए पर ट्रेड कर रहा था। पिछले सत्र के मुकाबले में इसमें 278 रुपए की गिरावट देखने को मिली।

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गोल्ड की तरह सिल्वर के वायदा भाव में गिरावट दर्ज की गयी। बुधवार को एमसीएक्स पर दिसंबर में डिलीवर होने चांदी के भाव में 605 रुपए प्रति किलो की गिरावट देखी गई। दिसंबर के लिए आज चांदी का वायदा भाव 67889 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रहा था। पिछले सत्र में यह 68494 रुपए पर बंद हुआ था। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोना-चांदी की हाजिर मांग घटना से कारोबारियों ने सौदा भी घटा दी है, जिससे वायदा भाव में गिरावट देखी जा रही है।

सोने का हाजिर भाव

सोना चांदी के वायदा भाव में जहां गिरावट देखी जा रही है, वहीं दिल्ली और लखनऊ में बुधवार को सोने का हाजिर भाव करीब 53000 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा। आज अपरान्ह करीब 3 बजे राष्टीय राजधानी दिल्ली में सोने का हाजिर भाव 53095 रुपए जबकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 52940 रुपए प्रति 10 ग्राम पर रहा। वहीं चांदी की बात करें तो चांदी के हाजिर भाव में आज 100 रुपए की गिरावट आई। बुधवार को चांदी का हाजिर भाव 67,900 रुपए प्रति किलो रहा।http://www.satyodaya.com

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कीमतों के नए आसमान पर सोना-चांदी, 58,000 हुई 10 ग्राम Gold की कीमत

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लखनऊ। कोरोना काल में सोना (Gold) काफी ‘सोणा’ हो गया है और चांदी की तो चांदी हो गयी है। वर्ष 2020 की शुरूआत से ही लगातार कीमतों के नए आसमान छू रहीं यह दोनों धातुएं अब आम आदमी की पहुंच से दूर हो चलीं हैं। शुक्रवार को देश में सोने की कीमत 58,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी 77,000 रुपए प्रति किलो के भाव पर पहुंच गयी। इस सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन में भी सोने और चांदी में तेजी गयी। शुक्रवार को दिल्ली में सोने का हाजिर भाव 57,970 रुपए और लखनऊ में 57,965 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा।

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सोने के वायदा भाव में आज सुबह करीब 11 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 75 रुपए तेजी गयी। अक्टूबर में डिलिवरी होने वाले सोने का भाव 55,920 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर चल रहा था। इसी तरह चांदी के वायदा भाव में भी आज काफी उछाल देखी गयी। सितंबर में डिलिवरी होने वाली चांदी 1269 रुपए की तेजी के साथ 77,321 रुपए पर कारोबार कर रही थी।

75000 तक पहुंचेगा सोना, लखटकिया होगी चांदी!

बता दें कि वैश्विक महामारी कोरोना के चलते इस वर्ष की शुरूआत से सोना और चांदी की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्ष 2020 के अंत तक सोने की कीमत 75000 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 1 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है। शेयर मार्केट में गिरावट, वैश्विक मार्केट में अनिश्चिता और मंदी और लाॅकडाउन समेत तमाम कारक सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करते है। इन सभी में अगले कुछ महीनों तक सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि अगले 10 से 15 दिन के अंदर सोना 60000 का आंकड़ा पार कर जाएगा। जबकि वर्ष के अंत तक चांदी का भाव 1 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।

चांदी ने ध्वस्त 9 साल पुराना रिकार्ड

चांदी ने आज अपना 9 साल पुराना रिकार्ड भी तोड़ दिया। इससे पहले 2011 में चांदी का भाव 70,000 रुपए प्रति किलो पहुंचा था। 25 अप्रैल 2011 को MCX पर चांदी का भाव 73,600 रुपये प्रति किलो तक उछला था। जबकि हाजिर भाव 70,000 रुपये प्रति किलो तक उछला था। बाजार के जानकारों का कहना है कि चांदी की कीमतों में अभी और उछाल आना बाकी है। http://www.satyodaya.com

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