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पाॅलीथिन बैन अभियान के दौरान चौक में बवाल, कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर डटी…

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अभियान के दौरान पुलिस ने व्यापारी नेता को पीटा, भीड़ ने चौक थाने का किया घेराव

लखनऊ। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा राजधानी को पाॅलीथिन मुक्त बनाने के लिए चलाया गया। चौक इलाके में भी अभियान चलाया गया। लेकिन यहाँ पुलिस और प्रशासन की एक चूक से अभियान बवाल में बदल गया। शांति पूर्ण तरीके से चल रहे अभियान के बीच पुलिस और नगर निगम की टीम दुकानों में तोड़ फोड़ करते हुए व्यापारियों से मारपीट करने लगी। विरोध करने पर पुलिस ने व्यापारी नेता को जमकर पीटा। जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई। आरोप है कि इसके बाद चौक पुलिस व्यापारी को थाने में ले आई और वहां भी उन्हें पीटा गया।

व्यापारी नेता को पुलिस द्वारा पीटे जाने की खबर मिलते ही सैकड़ों व्यापारी और दुकानदार चौक थाने की ओर कूच कर गए। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भीड. ने थाने का घेराव कर दिया। घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को हुई तो उन्होंने मौके पर पहुंच कर लोगों को शांत किया।

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प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों की मांग थी कि मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। व्यापारियों ने दुकानें बंद कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। बवाल के चलते चौक चौराहा भी जाम हो गया। व्यापारियों के प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी गयी है। प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का कहना है कि अभद्रता करने वाले व्यापारियों के खिलाफ अगर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे लखनऊ में दुकानें बंद कर प्रदर्शन किया जाएगा। http://www.satyodaya.com

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प्रधानमंत्री की डिजिटल मुहिम को धार देने के लिए एसबीआई ने की कार्यशाला

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल योजनाओं का विकास तेजी के साथ बढ़ रहा है। देश की तमाम संस्थाओं और प्रतिष्ठानों में डिजिटल सेवाओं चलन तेजी से बढ़ा है। इसी क्रम में भारतीय स्टेट बैंक अब अपनी सेवाओं को अधिक से अधिक डिजिटल से जोड़ने का प्रयास कर रही है। उपभोक्ताओं को डिजिटल लेन-देन के प्रति जागरूक कर रही है। रविवार को एसबीआई की राज्यस्तरीय कार्यशाला में डिजिटल योजनाओं को आम जनमानस तक पहुंचाने पर चर्चा की गई।
भारतीय स्टेट बैंक के लखनऊ मंडल की मुख्य महाप्रबंधक सलोनी नारायण की उपस्थिति में दो दिवसीय यूपी बैंकर्स कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में प्रदेश के 39 क्षेत्रीय कार्यालयों की सभी शाखाओं को शामिल किया गया। इस बैठक में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में क्रेडिट सुविधा बढ़ाने, प्रौद्योगिकी का प्रयोग बढ़ाने व बैंकिंग को नागरिक-केंद्रित करने के साथ-साथ उसे वरिष्ठ नागरिकों, किसानों, लघु व्यवस्थाओं और महिलाओं के प्रति और अधिक जवाबदेह बनाने के उपायों व तरीकों पर विचार विमर्श किया गया।

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सलोनी नारायण ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सेक्टर की चुनौतियों और पफायदों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना है। इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन पूरे देश में किया गया। जिसमें एसबीआई के ब्रांच मैनेजरों के साथ सभी अधिकारियों ने भाग लिया। सलोनी ने बताया लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के सभी ब्रांच मैनेजरों को बुलाया गया है। कार्यशाला में उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सुविधाओं पर चर्चा की गई।

इसके साथ ही इस बात पर चर्चा हुई कि समाज के निचले पायदान के लोगों तक हम अपनी सेवाओं और योजनाओं को कैसे पहुंचाएं। सलोनी ने आगे बताया कि हालांकि इस कार्यशाला में सरकार की भूमिकाओं या योगदान पर चर्चा नहीं हुई। लेकिन कार्यशाला के निष्कर्ष को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। सरकार की डिजिटल मुहिम में बैंकों की भूमिकाओं पर विचार किया जाएगा।http://www.satyodaya.com

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आज देश में राष्ट्रप्रेम के अरमानों की हो रही लिंचिंग: संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार

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लखनऊ। राजधानी में रविवार को परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल आर्देशीर बुर्जोर्जी तारापोर के 96वें जन्मोत्सव पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महापुरुष स्मृति समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय अधिकारी इंद्रेश कुमार मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शहीद किसी जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र का नहीं होता है। उसकी कोई सीमा नहीं होती है और उसे किसी परिधि में बांधा नहीं जा सकता है। आजादी के आंदोलन में गाय और सुअर की चर्बी लगी कारतूस का भारतीय सेना ने बहिष्कार किया। ब्रिटानिया हुकूमत के खिलाफ भारतीय सैनिक लड़े जबकि उनके पास कोई अत्याधुनिक हथियार भी नहीं थे। अंग्रेज आधी दुनिया पर राज करते थे, उनसे मुकाबला हमारे पूर्वजों ने किया। आप सोच सकते हैं कि पूर्वजों में किस तरह का राष्ट्रप्रेम था।

उन्होंने बताया कि आज देश में हमारे अरमानों की लिंचिंग हो रही है। हमारे अरमानों का अपमान रोजाना हो रहा है। हमने आजादी की कीमत नहीं चुकाई सिर्फ उसे एंज्वॉय कर रहे हैं। जो लोग देश के टुकड़े होंगे के नारे लगा रहे हैं वह कौन हैं। जम्मू-कश्मीर के विशेष प्रावधान को लेकर डॉ. भीमराव आंबेडकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पुरजोर विरोध किया था। यह स्पेशल स्टेटस भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने का काम करेगा। नेहरू की जिद के आगे उस समय के पांच मुस्लिम सांसदों ने इस्तीफा दे दिया था। यह सभी सांसद कांग्रेस के थे। उन्होंने यह कहा था कि हो सकता है एक दिन देश की सरकार को सद्बुद्धि आए और 370 अनुच्छेद को खत्म किया जाए। आज जम्मू-कश्मीर को इस अपमान से मुक्ति मिल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को पूर्णरूप से आजादी दिलाने का काम किया है।

इंद्रेश कुमार ने कहा कि माइनस 40 डिग्री में खड़ा जवान अगर यह सोच ले कि मेरा भी परिवार है तो कैसे देश सुरक्षित रहेगा। ब्रिटिश पीरियड में हमारे यहां लाखों लोगों की मौत हुई। सरकार ने उन्हें बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। बलिदान एक भावना है। मातृभूमि की खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती है। जिन्होंने इस भावना को जाना वह बलिदान के रास्ते पर गए। जिन्होंने नहीं समझा उन्होंने समझौते कर लिए। हम अगर यह तय कर लें कि सोशल मीडिया के जरिये लोगों को जाग्रत करेंगे। आज सकारात्मक ऊर्जा वालों को टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके लोगों को जाग्रत करने का मिशन हाथ में लेना चाहिए। भारत में जीवन मूल्यों के जन-जागरण का भी इतिहास लिखा जाएगा। इस आयोजन को देश के नव जागरण को मुहिम बना दीजिए। तीन तलाक के खत्म होने से आठ लाख चालीस हजार औरतों को जिल्लत की जिंदगी से मुक्ति मिली। इतने ही पुरुषों को महिलाओं पर अत्याचार करने से मुक्ति मिली।

अनुच्छेद 370 और धारा 35ए से होने वाला एक भी फायदा का कोई तर्क और तथ्य निकलकर नहीं आए। हम हिंदुस्तान के जनता और मीडिया का समय और सामर्थ्य बर्बाद करने में क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं। निष्पक्ष तो सिर्फ थर्ड जेंडर होते हैं। हम सत्य और तथ्य के साथ खड़े हैं। हिंदुस्तान के 130 करोड़ लोगों की संवेदना बनाएंगे। मेरा 25 लाख मुस्लिमों, 25 मुस्लिम देशों, 30 लाख बौद्ध और 10 लाख ईसाइयों से सीधा जुड़ाव है।

 जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र भी इसका विरोध नहीं करेगा। पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अब पाकिस्तान से कश्मीर नहीं PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) पर बात होगी। उन्होंने कहा कि यही कश्मीर में धारा 370 खत्म करने का उपयुक्त समय था। सरकार के इस निर्णय से पाकिस्तान को एकमुश्त सबक सिखाने वाला उत्तर मिल गया है।

आरएसएस नेता ने कहा कि अनुच्छेद 35A और 370 को खत्म कर मोदी सरकार ने एक बड़ा साहसिक फैसला किया है। यह देश की एकता के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। तत्कालीन नेहरू सरकार कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले गई थी। यह कांग्रेस और पंडित नेहरू की सबसे बड़ी गलती थी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के फैसले पर केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को मुहर लगा दी है। इसके साथ ही राज्य में लागू 35ए (विशेष नागरिकता अधिकार) भी स्वतः समाप्त हो गया है। अनुच्छेद-370 व 35ए खत्म होते ही राजनीतिक गलियारों में हंगामा मचा हुआ है। कुछ इसे एक देश-एक संविधान बता रहे हैं तो विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले एक दशक में दुनिया हिंदुस्तान को सल्यूट करेगी। एक बार ठीक से हिंदुस्तान को हिलोरे लेने तो दीजिए, फिर देखिएगा कि दुनिया किस तरह आपके अस्तित्व को स्वीकार करेगा। अब अगला नारा लगेगा कि पीओके-पाकिस्तान खाली करो-खाली करो। एक्साइ चीन-चीन खाली करो-एक्साइ चीन-चीन खाली करो। अब पीओके और एक्साइ चीन में तिरंगा ध्वज लहराने का वक्त आने वाला है। जिंदगी में संकल्प लीजिए कि जनभावनाओं के आंदोलन का ज्वार इस बार लखनऊ से उठेगा।

इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने कहा कि इतिहास लिखने और लिखाने का समीकरण मैं अच्छी तरह से जनता हूं। विजेताओं द्वारा इतिहास लिखाया जाता रहा है। जैसे हम अब्दुल हमीद के बारे में अधिक जानते हैं तारापोर के बारे में नहीं जानते हैं। भारतीय अध्येताओं को सिर्फ मध्य इतिहास पढ़ाया गया। हमारी मजबूरी है कि हम सिर्फ वही इतिहास जानते हैं। पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाने वाली हमारे पूर्वज पुस्तक गायब हो गई। यह अचानक नहीं गायब हुई बल्कि साजिशन कराई गई। अब्दुल हमीद को इसीलिए वोटबैंक से जोड़ दिया गया। सुभद्रा सिंह चौहान की एक कविता हम पढ़ते थे, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी। तारापोर का आधे से अधिक जीवन उन्होंने देशसेवा में लगाया। आक्रांता सिकन्दर और अकबर को महान बताने वाला इतिहास लिखवाया गया। पुरु को छोड़ने में सिकन्दर महान हो गया और पृथ्वीराज चौहान ने आक्रांता को 13 बार छोड़ा पर वह महान न बन पाए। इतिहास लिखने और लिखवाने का बड़ा पुराना खेल है। यूपीए सरकार में बम विस्फोट के मामले में स्वामी असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल पुरोहित को हिंदू आतंकवादी बताया गया। समय और परिस्थितियां बदलते ही आज सभी बाहर हैं। सरकार न बदलती तो उन तीनों को फांसी होती। तब इतिहास लिखा गया होता कि बम विस्फोट करने पर तीन हिन्दू आतंकवादियों को फांसी दी गई। सावरकर, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस को महान नहीं कहेंगे। अब इतिहास सीधी दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश का नैरेटिव बदल रहा है। इतिहास को उसके सही परिप्रेक्ष्य में लिखा जाना चाहिए। सत्ता, शक्ति और धर्मान्तरण की बदौलत लिखा गया इतिहास कूड़ेदान में डाल दिया जाना चाहिए।

संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्वामी मुरारीदास ने कहा कि महापुरुष स्मृति समिति प्रत्येक महीने कार्यक्रम आयोजित करे, इसकी खुशी मुझे मिलती रहे। विस्मृत कर दिए गए महापुरुषों को पुनःस्मरण और चर्चा में लाया जाए यह एक बड़ा काम होगा। महापुरुषों के जन्मदिन और पुण्यतिथियां हिंदी तिथि और भारतीय परंपरा के हिसाब से आयोजित कराई जाएं।

वहीं, इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भूतपूर्व सैनिक परिषद के संरक्षक दिवाकर सिंह ने कहा कि तारापोर को उत्तर प्रदेश में दो फीसदी लोग भी नहीं जानते होंगे। कर्नल तारापोर को परमवीर चक्र दिया गया था। यह सेना की ओर से दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है। पंचशील, गुटनिरपेक्षता और हिंदी-चीनी भाई-भाई के नाम पर देश को जहन्नुम में झोंक दिया गया। पूरी तैयारी न होने से 1962 का युद्ध हम हार गए। पाकिस्तान के पास 1965 में हमसे अधिक हथियार थे। सैनिकों में भावना होती है कि हमारी पलटन जीतेगी। अभिनंदन ने जिस वीरता और शौर्य का परिचय दिया वह भारतीय सैनिक की वीरता की कहानी है।

राष्ट्रीय एकता मिशन के अध्यक्ष और सी-मैप के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. हरमेश चौहान ने कहा कि समाज के अंदर काम करने वाले व्यक्ति का नाम तभी होता है जब उसके पीछे समाज खड़ा होता है। तारापोर की स्मृति में भी सब समाज खड़ा हो रहा है। इसलिए उनका नाम भी लोगों की स्मृतिपटल पर अंकित होगा।

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सेवा भारती के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. विजय कर्ण ने कहा कि जिस समाज में बुजुर्गों का पद प्रच्छालन किया जाता है, वहां दैवीय आपदा कम आती है। जब कोई व्यक्ति अपने कर्तव्यों के कारण महापुरुष श्रेणी में पहुंच जाता है, तो हम सब उनके जन्मोत्सव को मनाते हैं। यदि शस्त्र न हों तो शास्त्र भी अपनी भूमिका खोने लगते हैं। दोनों मिलकर ही समाज को श्रेष्ठ और समृद्ध बनाते हैं। परमवीर चक्र विजेता तारापोर जैसे महानायक ने पाकिस्तान को 1965 के युद्ध में धूल चटाई। सात पैटन टैंक को उड़ाने वाले तारापोर जी को हम सब याद करके गौरवान्वित हो रहे हैं। उनके इस योगदान से हमें राष्ट्ररक्षा और समाजहित के व्रत का संकल्प ग्रहण करना चाहिए। सबसे पहले देश फिर राज्य और तब परिवार का स्थान आना चाहिए। शक्ति से विहीन केवल तो सिर्फ शव होता है। इसलिए शक्ति के साथ ज्ञान का सामंजस्य होगा तभी भारत देश दुनिया में अग्रणी बन सकेगा।

इस कार्यक्रम के संयोजक भारत सिंह ने कहा कि महापुरुष स्मृति समिति को सात साल पहले स्थापित किया गया था। तब से समिति की ओर से ऐसे अनगिनत महापुरुषों के जन्मोत्सव आयोजित होते रहते हैं। जो महापुरुष राजनीतिक और तुष्टिकरण के चलते भुला दिए गए उनको पुनः याद किया जाएगा। इस दौरान केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट, कार्यक्रम सह संयोजिका अर्पिता सिन्हा, सुरेंद्र कुमार, रणविजय, अवधेश, अनुराग, शैलेश, ममता सिंह समेत सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता, शिक्षक और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।http://www.satyodaya.com

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प्रदेश

बहुजन छात्र-छात्राओं के साथ हो रहा भेदभाव और यौन उत्पीड़न: चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’

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लखनऊ। शिक्षण संस्थाओं में बहुजन छात्र-छात्राओं को कथित जातिवादी मानसिकता और उत्पीड़न से बचाने के लिए भीम आर्मी ने संगठन की छात्र शाखा को ‘भीम आर्मी स्टूडेंट फेडरेशन’ की शुरुआत की थी। इसका मकसद देश भर के दलित युवाओं को संगठन से जोड़ना था। इसके लिए बाकायदा ऑनलाइन सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को इसी शाखा का प्रथम राज्यस्तरीय सम्मलेन आयोजित हुआ, जिसमे बतौर मुख्या अतिथि संगठन के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ शामिल हुए।

ऐशबाग रामनगर के संत सुदर्शन पुरी कालोनी में आयोजित कार्यक्रम में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि भीम आर्मी एक सामाजिक संगठन है। युवाओं को इससे जोड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्टूडेंट फेडरेशन का गठन किया गया है। संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि आज देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने और निजीकरण करने की कोशिश हो रही है। वहीं सार्वजनिक कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में आरक्षण खत्म करने का प्रयास भी हो रहा है।

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चंद्रशेखर ने कहा कि कई जगह देखने में आया है कि बहुजन छात्र-छात्राओं को जातिवादी मानसिकता और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। खास तौर पर छात्राओं को भेदभाव और यौन उत्पीड़न का सामना भी करना पड़ रहा है। बहुजन छात्र-छात्राओं को न्याय दिलाने की लड़ाई भीम आर्मी लड़ रही है। ऐसे में इन सभी मुद्दों पर भीम आर्मी ने संघर्ष के लिए स्टूडेंट विंग का गठन किया है। उन्होंने बताया कि स्टूडेंट विंग से जुड़ने के लिए गूगल पर जारी फार्म में नाम, फोन नंबर और यूनिवर्सिटी का नाम भरना होता है। स्टूडेंट विंग का अभियान फिलहाल यूपी में बड़े पैमाने पर चल रहा है। महाराष्ट्र अगला पड़ाव है। हालांकि सदस्यता अभियान दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा सहित देश के अन्य हिस्सों में भी चल रहा है।http://www.satyodaya.com

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