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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं की रंगप्रस्तुति ‘अटल पथ’ का हुआ मंचन

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  • रंगकर्म में योगदान के लिए 11 विभूतियों को नौशाद सम्मान से किया गया अलंकृत

लखनऊ। संस्कृति उन्नयन के क्षेत्र में कार्यरत नौशाद संगीत डेवलपमेंट सोसायटी की ओर से रंगकर्म व कलाओं में विशेष योगदान देने वाली 11 विभूतियों को आज नौशाद सम्मान-2019 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में भारत रत्न अटलबिहारी वाजपेयी की कविताओं की रंगप्रस्तुति ‘अटल पथ’ के मंचन के अवसर पर दिया गया। इस अलंकरण समारोह में प्रो. आसिफा जमानी, विलायत जाफरी, पुनीत अस्थाना, शबी जाफरी, जितेन्द्र मित्तल, चित्रा मोहन, विनय श्रीवास्तव, राजवीर रतन, एस.एन.लाल, आनन्द शर्मा व एस.रिजवान को ‘नौशाद सम्मान-2019’ से नवाजा गया।

इस अवसर पर राजनेता अम्मार रिजवी व पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अनीस अंसारी ने उपस्थित लोगों से अपने विचार साझा किये। उन्होंने कहा कि लखनवी तहजीब के पैरोकार संगीतकार व शायर नौशाद साहब का घराना नवाबी नहीं था पर वे नवाब शुजाउद्दौला की साझा लखनवी तहजीब की पूरी परंपरा को सामने रखने वाले थे। वह महज संगीतकार नहीं, उम्दा लेखक भी थे। मशहूर फिल्म ‘दीदार’ की कहानी उन्होंने ही लिखी थी।

आपको बता दें कि इससे पहले ‘नौशाद सम्मान’ संगीतकार खय्याम, कल्याणजी आनन्दजी, सरोदवादक अमजदअली खां, संतूरवादक शिवकुमार शर्मा, नृत्यागंना हेमामालिनी, गायिका रेखा भारद्वाज, रंगनिदेशक राज बिसारिया, सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, जुगुलकिशोर मिश्र को दिया जा चुका है।

समारोह में रंगनिर्देशक विलायत जाफरी ने बताया कि संगीतकार नौशाद एक खुद्दार और संघर्षशील व्यक्ति थे। उनके संघर्ष व अनुभव ने ही उनके फन को यादगार बनाया। नये कलाकारों को हौसला देने के लिए उन्हें याद कर उनकी परम्परा को आगे बढ़ाना हमारा दायित्व है। सोसायटी के सचिव संयोजक अतहर नबी ने संस्था के कार्यों का ब्यौरा और अपने संस्मरण रखते हुए बताया कि नौशाद साहब का बचपन यहीं बीता। यहां रॉयल सिनेमा हाल में संगीतकारों के साथ लड्डन मियां हारमोनियम बजाते थे। यहीं से नौशाद साहब का संगीत प्रेम परवान चढ़कर पहले जुनून की हद और अंततः एक अजीम मंजिल तक पहुंचा। एक उम्दा दर्जे के शायर के तौर पर भी उनका योगदान कम नहीं है।

भारतरत्न पं. अटलबिहारी वाजपेयी की काव्य रचनाओं पर आधारित सोसायटी रंगमण्डल की मल्टी मीडिया पेशकश ‘अटल पथ’ के मंचन के अवसर पर अतिथियों के तौर पर पद्मश्री राज बिसारिया व उर्दू फारसी विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो.माहरुख मिर्जा भी आमंत्रित थे। एसएन लाल के कविता संकलन, आनन्द शर्मा की परिकल्पना व निर्देशन, असद खान के मल्टीमीडिया संयोजन, आदित्य लिप्टन के संगीत संयोजन व संजय त्रिपाठी के प्रकाश संचालन में प्रस्तुत ‘अटल पथ’ में कई कलाओं का संगम दिखा।

अटल की भूमिका में डाॅ. मसूद अब्दुल्लाह व अन्य चरित्रों में अभिनेश मिश्र, दीपशिखा सिन्हा, पूर्णिमा शुक्ला, अस्मिता श्रीवास्तव, जुही, सुरेशचन्द्र, अजय सिंह, तुषार चौधरी, हृतिककुमार, अनिल सिंह, शिवम मिश्रा व सत्यम शुक्ला इत्यादि कलाकार मंच पर थे। जिन्होंने अटल के काव्य कर्म, उनके आदर्श, त्याग और कर्मठता से परिचित कराती पेशकश में अटल उद्गार, क्या खोया क्या पाया, संकल्प काल, शक्ति से शान्ति, न दैन्यम् न पलायनम् आदि काव्यसंग्रह से ली गईं कदम कभी रुके नहीं कभी डिगे नहीं, पन्द्रह अगस्त की पुकार, मैं न चुप हूं न गाता हूं, दूध में दरार पड़ गई, आओ फिर से दिया जलायें, मैं अखिल विश्व का गुरु महान व कालजयी कविता लौटकर आऊंगा सहित 15 कविताओं को अभिनय, सहज गतियों व संयोजनों में संजोया। वृत्तचित्र शैली की लगभग डेढ़ घण्टे की इस प्रस्तुति में अटल के जीवन के प्रसंग, परमाणु परीक्षण आदि की रिकार्डेड छवियां और वीडियो भी दर्शकों को पसंद आये। लेजर लाइट्स व सराउण्ड साउण्ड ने प्रस्तुति को दर्शनीय व श्रवणीय बनाया।   http://www.satyodaya.com

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मौलाना कल्बे जवाद को मिली जान से मारने की धमकी

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लखनऊ। शिया धर्मगुरु और इमामे जुमा मौलाना कल्बे जवाद को फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। यह धमकी उन्हें रविवार को फोन पर दी गई है। खुद मौलाना कल्बे जवाद ने इसकी जानकारी दी। मौलाना कल्बे जवाद जल्द ही इस धमकी की शिकायत को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे और सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। मौलाना कल्बे जवाद ने मीडिया को बताया है कि रविवार दोपहर वह आराम कर रहे थे।

यह भी पढ़ें-2019 लोकसभा चुनाव संपन्न, एग्जिट पोल्स में एनडीए को फिर से पूर्ण बहुमत

इसी बीच उनके मोबाइल पर एक फोन आया। काॅल करने वाले ने कहा कि चुनाव में तुम्हारी वजह से काफी नुकसान हुआ है। जिसके लिए तुम्हे जान से मार देंगे। मौलाना कल्बे जवाद का कहना है कि भाजपा की हिमायत का ऐलान करने के चलते उन्हें यह धमकी दी गयी है। लेकिन मैं इन धमकियों से डरने वाला नहीं हूं। क्योंकि जिंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि इससे पहले भी उनको फोन पर जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है। जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब इस धमकी की भी शिकायत वह पुलिस में दर्ज कराएंगे और इस पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।http://www.satyodaya.com

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क्वीन ऑफ अवध सीजन-2 के लिए ऑडिशन आयोजित

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लखनऊ। ’इसी का नाम जिन्दगी’ संस्था द्वारा क्वीन ऑफ अवध सीजन-2 के लिए रविवार को राजधानी स्थित मेलोज बैंक्वेट में ऑडिशन का आयोजन किया गया। ऑडिशन का संचालन संस्था कि अध्यक्ष कविता शुक्ला ने किया। ऑडिशन 45 वर्ष से 70 वर्ष की महिलाओं के लिए किया गया। जिसमें 40 महिलाओं ने भाग लिया।

समीना वार्शी, कपिल तिलहरी, डॉ मधु अग्रवाल निर्णायक मंडल में शामिल रहे। ऑडिशन में अनीता शर्मा, विभा चंद्रा, भावना, सुजाता, विभा शुक्ला, सुधा, निवेदिता, किरण, आभा, रेनू, पुष्पा मिश्रा, सोमिता गुप्ता, निरुपमा, रूपाली गुप्ता, कंचन रस्तोगी, नीता शुक्ला, माधवी शामिल रही।http://www.satyodaya.com

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आदि शंकराचार्य व बुद्ध जयन्ती पर संस्कृत संस्थान में कार्यक्रम आयोजित

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान परिसर में आदि शंकराचार्य जयंती एवं बुद्ध जयन्ती समारोह के दूसरे दिन शनिवार को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। संस्थान के अध्यक्ष डाॅ. वाचस्पति मिश्र, उपाध्यक्ष शोभन लाल उकिल तथा मंचासीन अतिथियों ने दो दिवसीय समारोह का शुभारम्भ सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। भगवान बुद्ध के उपदेशों पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार जैन ने कहा कि सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को पूरी दुनिया में फैलाया। आज 2600 वर्ष बाद भी भगवान बुद्ध की शिक्षा प्रासंगिक है। सभी पापों को छोड.कर कुशल कर्मों का करना तथा चित्त की परिशुद्धि यही बुद्ध का शासन है। मध्याह्न में राष्टीय संस्कृत संस्थान परिसर के छात्रों ने धम्मपद का पाठ किया।

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शंकराचार्य के स्तोत्रों पर आधारित गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 37 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। शंकराचार्य एवं बुद्ध के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कुल 265 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार विजेता छात्र-छात्राओं को क्रमशः रू0 5000, 3000, 2000 तथा 1000 की नगद धनराशि तथा स्मृति चिन्ह से पुरस्कृत किया गया।

सायंकाल में निनाद संस्था की अध्यक्ष आरती नातू के निर्देशन में 11 कलाकारों ने भगवान बुद्ध के जीवन ‘‘बैशाली की नगर वधू आम्रपाली‘‘ पर आधारित नृत्य नाटिका को प्रस्तुत किया। समारोह का संचालन जगदानन्द झा ने किया। संस्थान में आये हुए अतिथियों एवं निर्णायकों को अंगवस्त्र, माल्यार्पण दिनेश कुमार मिश्र, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, द्वारा किया गया। http://www.satyodaya.com

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