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ख़ैरियत

फैजुल्लागंज पीएचसी में मरीजों की खून जांच बंद, निजी पैथोलॉजी में जाने को हुए मजबूर…

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लखनऊ। फैजुल्लागंज में संक्रामक रोगों के मामले आने के बाद भी यहां के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यहां बने पीएचसी में मरीजों की खून की जांच बंद है। जांच के लिए लोगों को मजबूरन निजी पैथोलॉजी एवं डायग्नोस्टिक सेंटर का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं किसान की पत्नी सहित कई बुखार पीड़ितों के खून की जांच पीएचसी में नहीं हुई। किसान की पत्नी ने पायल बेचकर मिले रुपयों से निजी सेंटर पर टाइफाइड की जांच कराई। स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब दो लाख आबादी होने के बाद भी खून की जांच एवं अन्य व्यवस्थाएं पीएचसी में स्वास्थ्य विभाग ने नहीं की है। 

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फैजुल्लागंज की लक्ष्मी (54) ने सोमवार को श्याम विहार कॉलोनी में सीएमओ की ओर से लगे स्वास्थ्य शिविर में दिखाया तो उन्हें टाइफाइड की जांच के लिए कहा गया। लक्ष्मी के मुताबिक जब वह पीएचसी पहुंची तो उन्हें जांच नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया गया। लक्ष्मी को तीन माह से बुखार चढ़-उतर रहा है। लक्ष्मी के मुताबिक उनके इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह ज्यादा देर तक खड़ी हो सकें। इसलिए वह किसी सरकारी अस्पताल में नहीं गईं। उन्होंने रुपए न होने पर अपनी पायल बेची। उससे मिले रुपए से 450 रुपए निजी सेंटर में देकर जांच कराई। वहीं फैजुल्लागंज के कृष्णलोक नगर निवासी आशीष शुक्ला, रामादेवी, बबली, नरेश, शत्रोहन, बिट्टू को बिना जांच के पीएचसी से वापस भेज दिया गया।http://www.satyodaya.com

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जीआरपी ऑफिस में तैनात जवान व गर्भवती में कोरोना संक्रमण की पुष्टि

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जीआरपी लाइन के कुछ हिस्से सील व सिल्वर जुबली अस्पताल 24 घंटे के लिए बंद

लखनऊ। राजधानी में कोरोना वायरस ने रफ्तार पकड़ लिया है। जीआरपी ऑफिस में तैनात एक जवान व एक गर्भवती महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। जीआरपी जवान में कोरोना संक्रमण की पुष्टि जैसे ही उसके ऑफिस में मिली हड़कंप मच गया। अब तक अब तक 28 जवान कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। जबकि सिल्वर जुबली अस्पताल में एक गर्भवती महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। उसके बाद अस्पताल बंद कर दिया गया। कर्मचारियों को क्वॉरंटीन किया गया। लखनऊ में कोरोना मरीजों की संख्या 323 तक पहुंच गई है।

सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल के मुताबिक जीआरपी लाइन के कुछ हिस्से को सील करने के लिए कहा गया है। जिन इलाकों में संक्रमण फैला है उस इलाके को सील करने को कहा गया है। जीआरपी के अफसरों को पत्र लिखकर जवानों के संपर्क में आने वालों की सूची मांगी गई है। जगत नारायण रोड स्थित सिल्वर जुबली बीएमसी में बांसमंडी निवासी गर्भवती (23) को परिवारीजनों ने सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया था। गर्भवती का नमूना लेकर कोरोना जांच कराई गई थी। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को पॉजिटिव आई तो सीएमओ को मामले की जानकारी देते हुए उनके निर्देश पर गर्भवती को तुरंत ही कानपुर रोड स्थित लोकबंधु राजनारायण संयुक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब उसका प्रसव लोकबंधु अस्पताल में ही कराया जाएगा।

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सीएमओ ने बताया कि गर्भवती के कोरोना संक्रमित निकलने पर सिल्वर जुबली बीएमसी को 24 घंटे के लिए बंद रखते हुए सैनिटाइज कराया जा रहा है। सभी संबंधित डॉक्टर व कर्मचारियों को क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं। गर्भवती कोरोना संक्रमित निकलने पर परिवारीजनों की भी जांच की जाएगी। गर्भवती को कोरोना संक्रमण कैसे हुआ? परिवारीजनों और आस-पास के लोगों के बारे में पता किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सर्विलांस एवं कांटेक्ट ट्रेसिंग के आधार पर 243 लोगों के नमूने एकत्र करे केजीएमयू जांच के लिए भेजे गए हैं। सीएमओ प्रवक्ता योगेश रघुवंशी के मुताबिक चिकमंडी, खटीकाना, मौलवीगंज, तकिया, बारूदखाना, मकबरा गोलागंज, पीर जलील खटकाना समेत अन्य इलाकों में जागरुकता अभियान चलाया गया। सर्वे कर कोरोना लक्षण वालो लोगों को चिन्हित किया गया। उनके नमूने लिए गए। इस काम में 46 टीमें लगाई गई थी।

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प्रवक्ता योगेश रघुवंशी के मुताबिक कोरोना संक्रमित छह स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किए गए हैं। चार मरीज लोकबंधु अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए हैं। जिनमें से एक मरीज सीआरपीएफ बिजनौर व एक मरीज निगोहां निवासी है। वहीं दो अन्य मरीज राजधानी निवासी हैं। इनमें से एक महिला भी है। दो मरीज दूसरे मेडिकल संस्थान से डिस्चार्ज हुए हैं। 14 दिन सभी को घर में क्वॉरंटीन रहने की सलाह दी गई है।http://www.satyodaya.com

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क्राइम-कांड

केजीएमयू में इलाज नहीं मिलने से मासूम की मौत

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परिजनों के हाथ जोड़ने के बाद भी नहीं सुने डॉक्टर, मौत के बाद परिजनों को वार्ड से भगाया बाहर

लखनऊ। सीएम से लेकर स्वास्थ्य मंत्रियों व अधिकारियों के अस्पतालों में निरीक्षण भी बेअसर साबित हो रहे हैं। लोहिया संस्थान के बाद केजीएमयू में भी इनके निर्देशों की अवहेलना हो रही है। केजीएमयू में परिजनों के हाथ जोड़ने के बाद भी डॉक्टर नहीं सुने। यहां तक कि मासूम की मौत के बाद यह कहकर परिजनों को बाहर कर दिया गया कि आपके बच्चे की मौत हो गई है। अब हम कुछ नहीं कर सकते। इसके बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

अलीगंज निवासी चार माह के मासूम मोहम्मद जैन जन्म से सिर में ब्लड जमा हुआ था। बीती देर रात उसकी हालत गंभीर होने पर उसे परिजन उसको किसी निजी अस्पताल ले गए लेकिन वहां उसको भर्ती करने से मना कर दिया गया। मासूम मोहम्मद जैन के मामा इरफान ने बताया कि हम करीब देर रात करीब 1.30 बजे बच्चे को लेकर केजीएमयू पहुंचे। बच्चे को तो ट्रॉमा के पीडियाट्रिक विभाग में भर्ती कर लिया गया लेकिन पांच घंटे तक उसको कोई डॉक्टर ही नहीं देखने आया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर बगल के कमरे में सो रहे थे। बच्चे की हालत पहले से और गंभीर होने लगी।

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मामा इरफान के मुताबिक, उसने इस दौरान डॉक्टरों के हाथ जोड़े लेकिन उनपर इसका कोई असर नहीं हुआ हांलाकि एक कर्मचारी ने बच्चे को दो इंजेक्शन लगा दिए जिसके बाद बच्चे के स्कीन से खून निकलने लगा। इसके बाद कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। इरफान का कहना है कि बच्चे की मौत के बाद हम लोगों को विभाग से यह कहकर बाहर कर दिया गया कि आपका बच्चा मर चुका है। अब हम कुछ नहीं कर सकते।

सुबह करीब 10 बजे ट्रॉमा के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। रोने की आवाज सुनकर आस-पास के लोग भी जुट गए। हांलाकि परिजन मासूम के शव को लेकर वापस चले गए। इस संबन्ध में केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं है।http://www.satyodaya.com

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ख़ैरियत

हॉटस्पॉट इलाकों, कोविड अस्पतालों व क्वांरटीन सेंटरों के लिए नोडल अफसर नामित

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अफसर निरीक्षण कर कन्ट्रोल रूम को उपलब्ध कराएंगे जानकारी

लखनऊ। राजधानी में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। शहर के बनाए गए नौ हॉटस्पॉट इलाकों में कोविड-19 से रोकथाम एवं इस पर प्रभावी कदम उठाने के लिए डीएम ने पांच अधिकारियों को नोडल अफसर नियुक्त किया है। इसके अलावा उन्होंने राजधानी में बनाए गए कोविड-19 अस्पतालों व क्ववारंटीन सेंटरों की देखरेख व व्यवस्था संचालन के लिए नोडल अफसर बनाए हैं। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने इस संबन्ध में निर्देश जारी किया है।

डीएम ने कहा कि ये नामित नोडल अफसर हॉटस्पॉट इलाकों, कोविड-19 अस्पतालों व क्वांरटीन सेंटरों का निरीक्षण कर कन्ट्रोल रूम को जानकारी उपलब्ध कराएंगे। डीएम के मुताबिक हॉटस्पॉट चंद्रशेखर आजाद कालोनी, दरोगा खेड़ा, सरोजनी नगर के लिए अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमर पाल सिंह को नोडल नियुक्त किया है। श्री सिंह को परसादी खेड़ा, नकिट तिरूपति विहार, दुर्गा मन्दिर की भी जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा अमर पाल सिंह कोविड अस्पताल डॉ राम मनोहर लोहिया संस्थान व पीजीआई की आवश्यक व्यवस्थाओं को भी देखेंगे।

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शहर के पूर्वी अपर जिलाधिकारी केपी सिंह को कैंट के बाल्मिकी विहार की इलाके का नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा श्री सिंह को लोकबंधु कोविड अस्पताल व नॉन कोविड सिविल अस्पताल के संचालन व व्यवस्थाओं को देखने के लिए नोडल नियुक्त किया गया है। जबकि महानगर निशातंगज गली नं.5 इलाके की जिम्मेदारी शहर के टीजी अपर जिलाधिकारी विश्व मोहन मिश्रा को दी गई है। इसके अलावा विश्व मोहन साढामऊ बीकेटी अस्पताल व इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं के लिए नोडल अफसर बनाए गए हैं। वहीं श्री मिश्रा जीसीआरसी बीकेटी की देखरेख के लिए भी नोडल अफसर नियुक्त किए गए हैं।

वहीं कैसरबाग के नया पश्चिम गांव (नजीराबाद रोड), सब्जी मंडी, करीम शाह की मस्जिद, चकमंडी व मौलवीगंज के लिए वित्त एवं राजस्व अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा को नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। जबकि केजीएमयू, ऐरा मेडिकल कॉलेज व बलरामपुर अस्पताल के लिए भी वैभव मिश्र को नोडल अफसर बनाया गया है। इसके अलावा श्री मिश्रा बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय के नोडल अफसर बनाए गए हैं।

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वहीं दुबग्गा स्थित चरक हास्पिटल तकिया, आजमबेग बारूदखाना व गोलागंज हॉटस्पॉट इलाकों के लिए नगर मजिस्ट्रेट सुशील प्रताप सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साथ ही डीएम ने बताया कि अपर जिला अधिकारी मनीष कुमार नाहर (भू.अ.) को रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय में बनाए गए क्वांरटीन सेंटर के देखरेख व संचालन के लिए नोडल अफसर बनाया गया है।http://www.satyodaya.com

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June 5, 2020, 8:52 am
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