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हत्या से जुड़े 20 साल पुराने मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ बरी

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रयागराज की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंगलवार को बड़ी राहत दी है। 20 साल पहले पुलिस कांस्टेबल सत्य प्रकाश यादव की हत्या के मामले में कोर्ट ने सीएम योगी को बरी कर दिया है। इस केस में योगी आदित्यनाथ को भी आरोपी बनाया गया था। सीबीसीआईडी इस मामले में अपनी फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। जिसे पिछले साल सीजेएम कोर्ट ने भी सही माना था। लेकिन सीजेएम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गयी थी। मामले की सुनवाई करते हुए प्रयागराज की स्पेशल कोर्ट ने सीजेएम के आदेश को सही माना और याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही इस हत्या के मामले से सीएम योगी बरी हो गए। इस मामले में महाराजगंज की सपा नेता तलत अजीज ने हत्या का मामला दर्ज कराया था। जिसके बाद तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने भी तलत अजीज व अन्य के खिलाफ क्रास एफआईआर दर्ज कराई थी। स्पेशल कोर्ट ने दोनों ही मामलों में दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।

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बता दें कि यह हत्या 10 फरवरी 1999 की है। जो थाना कोतवाली महाराजगंज में सपा नेता तलत अजीज के गनर सत्य प्रकाश यादव की हत्या से जुड़ा है। 11 फरवरी 1999 को थाना कोतवाली महाराज गंज में एक एफआईआर योगी आदित्यनाथ की ओर से लिखाई गई कि उन्हें मार्ग में रोका गया। ईंट-पत्थर से समुदाय विशेष के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। जिसमें धारा 147, 148, 149, 307, 336, 504, 506, 427 में मुकद्दमा दर्ज हुआ। इससे एक दिन पहले सपा नेता तलत अजीज ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 10 फरवरी को एक सभा के लिए लोग इकट्ठा थे। इसी बीच तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ अपने समर्थकों के साथ आ गये। योगी के साथ आए लोगों ने उन लोगों पर फायर कर दिया जिसमें हमारे गनर सत्य प्रकाश यादव के सिर में चोट लगी और उसकी मौत हो गई। जिसकी एफआईआर धारा 147, 148, 149, 302, 307, 504, 506, 427 में दर्ज हुई। दोनों मामलों की विवेचना सीबीसीआईडी से कराई गई और दोनों ही मामलों में क्लीन चिट देते हुए एफआर लगा दी गई। जिसे प्रोटेस्ट द्वारा चुनौती दी गई। जिसके बाद सीजेएम ने परिवाद दर्ज कर बयान कराए और दोनों मामलों में तलबी न कर परिवाद 13 मार्च 2018 को खारिज कर दिया। जिसके खिलाफ निगरानी याचिका दाखिल की गई। दोनों ही निगरानी में सीजेएम के आदेश को सही ठहराते हुए कोर्ट ने निगरानी कर्ता के वकीलों और अपर जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश गुप्ता, वीरेंद्र सिंह, जय गोविंद, हरि ओंकार सिंह, राधा कृष्ण मिश्र, लाल चंदन को सुनकर निगरानी खारिज कर दिया तथा पत्रावली वापस संबंधित न्यायालय को भेजने का आदेश किया।http://www.satyodaya.com

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पीएफ घोटाला: बिजली कर्मचारियों का 48 घंटे का कार्य बहिष्कार दूसरे दिन भी रहा जारी

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लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर बिजली कर्मचारियों व अभियंताओं का 48 घंटे का कार्य बहिष्कार मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप करें। कर्मचारियों की मांग है कि वह प्राविडेन्ट फण्ड के भुगतान की जिम्मेदारी लेकर प्रदेश सरकार गजट में नोटिफिकेशन जारी करें ताकि बिजली कर्मचारी व अभियंता निश्चिंत होकर अपने कार्य में पूर्ण मनोयोग से जुटे रह सकें।

बिजली कार्मकों द्वारा 48 घंटे के कार्य बहिष्कार के बाद संघर्ष समिति की कोर कमेटी की बैठक 20 नवंबर को बुलाई गयी है। ध्यानाकर्षण कार्यक्रम के बाद कल की बैठक में न्याय पाने के लिए संघर्ष के अगले कार्यक्रमों की घोषणा की जायेगी। संघर्ष समिति ने पीएफ घोटाले के विरोध में जूनियर इंजीनियर्स संगठन द्वारा 20 नवंबर से किये जाने वाले कार्य बहिष्कार कार्यक्रम का पुरजोर समर्थन किया।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि वे 2600 करोड़ रुपये की धनराशि के भुगतान की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि उनकी मांग है कि इस धनराशि के भुगतान की गारंटी सरकार ले और नोटिफिकेशन जारी करे। संघर्ष समिति ने यह भी मांग की है कि मुख्यमंत्री के 02 नवंबर की घोषणा के अनुपालन में प्राविडेन्ट फण्ड घोटाले की सीबीआई जांच तत्काल प्रारंभ हो, जिससे शीघ्रातिशीघ्र घोटाले की जड़ तक पहुंचा जा सके। संघर्ष समिति की मांग है कि घोटाले के मुख्य आरोपी पावर कारपोरेशन के पूर्व चेयरमैन जो ट्रस्ट के भी चेयरमैन थे को तत्काल बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाये।

आज प्रदेश भर में समस्त जनपदों एवं परियोजना मुख्यालयों पर विरोध सभाओं का दौर जारी रहा। अनपरा, ओबरा, पारीक्षा, हरदुआगंज, पनकी, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, नोएडा, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, बांदा, झांसी, कानपुर, मुरादाबाद, बरेली, फैजाबाद, अयोध्या, गोण्डा, प्रयागराज में बिजली कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं ने बड़ी सभायें करके रोष व्यक्त किया।

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लखनऊ में आयोजित सभा को संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरूद्दीन राना, सुहैल आबिद, राजपाल सिंह, राजेन्द्र घिल्डियाल, विनय शुक्ला, शशिकान्त श्रीवास्तव, महेन्द्र राय, वी सी उपाध्याय, डी के मिश्र, करतार प्रसाद, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, मो इलियास, पी एन तिवारी, परशुराम, ए के श्रीवास्तव, पी एन राय, भगवान मिश्र, के एस रावत, आर एन यादव, आर एस वर्मा, के के वर्मा, पी एस बाजपेई, अमिताभ सिन्हा ने मुख्यतया संबोधित किया।http://www.satyodaya.com

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मंत्री मोहसिन रजा ने किया ऐतिहासिक इमारतों का निरीक्षण, अफसरों को दिए ये निर्देश

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लखनऊ। नवाबों का शहर लखनऊ खूबसूरत इमारतों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। राजधानी लखनऊ में नवाबों के जरिए तामीर कराए गए बहुत ही खूबसूरत इमारतें हैं।  जिसमें छोटा इमामबाड़ा , बड़ा इमामबाड़ा, रूमी गेट विश्व प्रसिद्ध है। इसके साथ ही सतखंडा, पिक्चर गैलरी और हेरिटेज जोन समेत लखनऊ में ऐसी बहुत सी खूबसूरत ऐतिहासिक इमारते हैं। जो लखनऊ की शान में चार चांद लगाते हैं। मगर प्रशासन की लापरवाही से धीरे-धीरे इन खूबसूरत इमारतों में जैसे ग्रहण लगता जा रहा हैं और यह बदहाली का शिकार होते जा रहे हैं। विश्व धरोहर सप्ताह मौके पर प्रदेश सरकार के मंत्री मोहसिन रजा पुरानी इमारतों के औचक निरीक्षण पर निकल पड़े।

अखिलेश सरकार में करोड़ों की लागत से तैयार किया गया क्लॉक टावर, पिक्चर गैलरी सतखंडा जैसे तमाम इमारतों में सुंदरीकरण और नव निर्माण कराया गया था। मगर विगत काफी समय से ये इमारतें बदहाली का शिकार हो रही है। घंटा घर के आस-पास गंदगी और अधूरे कामों को देखकर मंत्री मोहसिन रजा ने अफसरो को जमकर फटकार लगाई और दिशा निर्देश देते हुए कहा कि 2 माह के अंदर सभी अधूरे कामों को पूरा किया जाए। मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि योगी सरकार के द्वारा लगातार लखनऊ समेत प्रदेश के अन्य शहरों के तमाम ऐतिहासिक इमारतों को सजाने और संवारने का काम किया जा रहा है उन्होंने कहा कि इमारतों को स्वच्छ और खूबसूरत बनाए रखने में प्रदेश सरकार हर मुमकिन प्रयास कर रही है।

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मोहसिन रजा ने कहा कि जब इन ऐतिहासिक इमारतों पर साफ-सफाई रहेगी यहां पर पर्यटक भी बड़ी संख्या में आएंगे आपको बता दें कि सरकार के द्वारा इन ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव और सौंदर्यीकरण के लिए लाखों का बजट तो दिया जाता है मगर सालों बाद भी इन इमारतों की हालत ज्यों की त्यों बनी रहती है। इस समय घंटाघर और उसके बीच में बने तालाब में कूड़े के ढेर औऱ गंदगी नज़र आ रही है़। अब देखना यह होगा कि मंत्री मोहसिन रजा की फटकार का अधिकारियों पर कितना असर होता है और इन इमारतों की खूबसूरती और यहां पर साफ सफाई पर कब तक और कितना ध्यान दिया जाएगा

सरकार राष्ट्रीय धरोहर सप्ताह मना रही है। ऐसे में योगी सरकार के मंत्री मोहसीन रजा को भी नवाबों की धरोहरों की आज याद आ गयी है। पिछली सरकार के करोड़ो रुपया खर्च कर इसे सजाया था। मगर योगी सरकार ने इस पर से अपनी नजरें फेर रखी है।http://www.satyodaya.com

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राजधानी में धूमधाम से मनाया गया अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस

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लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की तरह हर साल 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है। हालांकि, जिस उत्साह और सपोर्ट के साथ महिला दिवस मनाया जाता है, उस तरह का एक्‍साइटमेंट व क्रेज पुरुष दिवस के लिए देखने को नहीं मिलता। पति कल्याण समिति की ओर से आज राजधानी में पुरुष दिवस मनाया गया। इस मौके पर सभी पुरुषों ने मिलकर केक काटा और एक दूसरे को बधाई दी।

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यह दिन मुख्य रूप से पुरुषों को भेदभाव, शोषण, उत्पीड़न, हिंसा और असमानता से बचाने और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए मनाया जाता है। आपको बता दें कि 80 देशों में 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है और इसे युनेस्को का भी सहयोग प्राप्त है। इस बार अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस की थीम है, “मेकिंग अ डिफरेंस फॉर मेन एंड बॉयज।”

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भारत की पहली पुरुष हेल्पलाइन की शुरुआत करने वाली डॉ० इंदु सुभाष का कहना हैं की महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश-भर में बहुत सारे कानून बने हैं,जबकि पुरुषों को भी सुरक्षा की जरुरत है ये किसी को पता भी नहीं हैं| देश में महिला आयोग,महिला कल्याण समितियों के नाम पर 1,84,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं जबकि पुरुषों के कल्याण उनके अधिकारों के लिए अभी तक कोई हेल्प डेस्क नहीं खोली गई है और न ही कोई विभाग सरकार की तरफ से बनाया गया है|http://www.satyodaya.com

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