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रंगों और रेखाओं के सुंदर संयोजन से धीरज यादव ने चित्रों में उकेरे स्त्री के विभिन्न भाव

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लखनऊ। प्रकृति अपने विविध आकारों और रंगों में हमारे सामने परिलक्षित (प्रदर्शित) होती है। प्रकृति के ये आकार कभी-कभी एक-दूसरे के इतने समान होते हैं कि उन्हें पहचानने के लिए हमें रंगों का सहारा लेना पड़ता है। सामान्यतः वस्तुओं को हम उनके आकार, रूप और रंग से ही पहचानते हैं। वस्तुओं में ये आकार और रंग न हों तो सर्वत्र नीरसता का आभास होगा। ठीक इसी तरह चित्रकार के लिए रंग ही उसकी अभिव्यक्ति का मूल माध्यम होता है। रंग से भाव और रस की उत्पत्ति होती है। चित्रकारी में कला के छह अंगों में वर्णिका भंग एक महत्वपूर्ण अंग है। रंग का जीवन और कला दोनों में बहुत महत्व है।
मनुष्य को यदि रंग का ज्ञान न हो तो चीजों को पहचानने में परेशानी होती है। जिस तरह से एक संगीतकार अपने गीत में स्वर का इस्तेमाल करता है, ठीक उसी प्रकार एक चित्रकार अपने चित्रों में रंगों का इस्तेमाल करता है।
शुक्रवार से राजधानी लखनऊ में शुरू हुई युवा चित्रकार धीरज यादव के चित्रों की प्रदर्शनी में रंगों के ऐसे ही सुंदर इस्तेमाल की झलक दिखी। धीरज ने अपने चित्रों में विभिन्न भाव भरने के लिए रंगों का भरपूर प्रयोग किया है। शीर्षक ‘मूडृस’ से शुरू हुई इस प्रदर्शनी का उद्घाटन लखनऊ आर्किटेक्ट काॅलेज की प्रिसिपल व डीन वंदन सहगल ने किया। गोमतीनगर के सिटी माॅल में लगी यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए 29 अगस्त तक खुली रहेगी।

प्रदर्शनी में लगाए गए चित्रों में रंगों और रेखाओं के साथ स्त्री के भिन्न भिन्न भाव प्रस्तुत करने का भरपूर प्रयास किया है। युवा चित्रकार ने अपने चित्रों में अद्धभुत भाव-भंगिमा प्रस्तुत करती व्यक्ति चित्र पर आधारित चित्रण करने का प्रयास किया है।
इस मौके पर अपने चित्रों के बारे में बात करते हुए चित्रकार धीरज यादव ने बताया कि चित्र-शक्ति, शक्ति एक ऐसा शब्द है जिस पर चित्रण करना अपने आप में एक दैवीय रूप को दर्शाता है। धीरज के इन चित्रों की एक विशेषता इसके अलंकरणों को कलात्मक रूप से प्रस्तुत करना भी है। चित्रों में रंगों का अदभुत संयोजन किया गया है। जो एक विशेष प्रकार की शैली का निर्माण करती है। उद्घाटन के मौके पर प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे कलाप्रेमी धीरज के चित्रों को निहारत ही रह गए। प्रदर्शनी में कुल 25 चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। जो जलरंग में बने पेपर और कैनवस माध्यम हैं।

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प्रदेशनी के बारे में जानकारी देते हुए क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि धीरज यादव वर्तमान में लखनऊ स्थित ललित कला अकादमी, क्षेत्रीय केंद्र अलीगंज के पेंटिंग कार्यशाला में सृजनरत हैं। धीरज को राष्टीय पुरस्कार के साथ कई राज्यों से भी सम्मान प्राप्त हो चुका है। धीरज वर्ष 2017 में भारत के राष्ट्रपति भवन में आर्टिस्ट इन रेजीडेंसी प्रोग्राम में भी भाग ले चुके हैं। इनके चित्रों की प्रदर्शनी उत्तर प्रदेश के अलावा भारत के प्रमुख राज्यों में भी लग चुकी है। http://www.satyodaya.com

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त्योहारों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लखनऊ के सभी थानों में पीस कमेटी की हुई बैठक

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लखनऊ। त्योहारों का सीजन आ गया है। एक के बाद एक त्योहार लोगों की जिंदगी में ढेर सारी खुशियां लेकर दरवाजे पर खड़े हैं। ऐसे में पुलिस के लिए भी काम बढ़ गया है। नवरात्रि, दशहरा व दुर्गा पूजा को राजधानी के लोग शांति और सुरक्षा के साथ मना सके इसलिए एसएसपी कलानिधि नैथानी के निर्देश पर जनपद लखनऊ के विभिन्न थानों में पीस कमेटी की मीटिंग की गई है। जिससे इन त्योहारों को सकुशल संपन्न कराया जा सके।

दरअसल, एसएसपी लखनऊ कलानिधि नैथानी ने आगामी त्योहारों नवरात्रि, दशहरा व दुर्गा पूजा को ध्यान रखते हुए निर्देश दिये थे। उनके आदेश के अनुपालन में रविवार को जनपद लखनऊ के विभिन्न थानों पर पुलिस अधिकारीगणों ने थाना क्षेत्र के सम्मानित व सभ्रांत व्यक्तियों के साथ पीस कमेटी की मीटिंग की है।

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इस मीटिंग में त्योहारों को सकुशल संपन्न कराने व सदभावपूर्वक मनाने के लिए लोगों से अपील की गई। इसके साथ ही त्योहारों के दौरान यातायात और सुरक्षा-व्यवस्था आदि के सम्बंध में होने वाली समस्याओं के समाधान से सम्बंधित चर्चा भी की गई।http://www.satyodaya.com

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चकबंदी विभाग के विलय का विरोध, उत्तर प्रदेश राजस्व महासंघ ने आंदोलन की दी चेतावनी

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लखनऊ। चकबंदी विभाग का राजस्व विभाग में विलय को लेकर राजस्व विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों में घमासान मचा गया है। इस विलय के खिलाफ राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों ने रविवार को एक महासंघ का गठन कर विलय की सम्भावना के मद्देनजर आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। रविवार को डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग के प्रेक्षागृह में एक पत्रकार वार्ता आयोजित हुई। इसमें तहसील/नायब तहसीलदार संघ के प्रदेश अध्यक्ष निखिल शुक्ला, महामंत्री अनुराग सिंह, लेखपाल संघ के प्रदेश महामंत्री ब्रजेश श्रीवास्तव, राजस्व निरीक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द शर्मा, महामंत्री जितेन्द्र सिंह, अमीन संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष समर बहादुर सिंह ने कहा कि अपर मुख्य सचिव राजस्व विभाग द्वारा अध्यक्ष राजस्व परिषद को प्रेषित एक पत्र में चकबंदी विभाग के राजस्व विभाग में विलय/प्रतिनियुक्ति सम्बंधी मागें गए प्रस्ताव का जोरदार विरोध प्रदेश के लगभग 40 हजार अधिकारी कर्मचारी कर रहे है। उन्होंने कहा कि अगर यह विलय किया गया तो राजस्व विभाग का उक्त समूह अक्टूबर माह में सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होगा।

उन्होंने बताया कि पूर्व में तत्कालीन राजस्व मंत्री अम्बिका चौधरी के कार्यकाल में चकबंदी विभाग का विलय राजस्व विभाग में कराने का काफी प्रयास किया जा चुका है। लेकिन कर्मचारी संगठनों के विरोध तथा राजस्व अधिकारियों की पदोन्नति एवं जेष्ठता सम्बंधी खतरे के चलते उक्त प्रयास असफल रहे। कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने कहा कि दोनों विभागों का अपना अपना महत्व है। निस्तारण में और भी जटिलताएं उत्पन्न होंगी। वहीं कर्मचारियों की जेष्ठता एवं पदोन्नति के मार्ग अवरूद्ध होगें। उन्होंने यह भी बताया कि शासन स्वंय मान रहा है कि चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है, इसे दूर किये जाने की आवश्यकता है लेकिन इसका हल किसी विभाग का विलय या समायोजन, आमेलन या प्रतिनियुक्ति से नही हो सकता। वैसे भी उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ा कृषि क्षेत्र है। जहां छोटी छोटी जोते, मिनजुमला जोतें विद्यमान हैं जिन्हें चकबंदी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक 20 वर्षों में चकबंदी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश में 1100 ग्रामों में अभी भी प्रथम चक्र की चकबंदी प्रक्रिया प्रारम्भ नही हो सकी है। इन ग्रामों में लगभग 100 वर्ष (1925) का बन्दोबस्त (अभिलेख) मौजूद है। इन अभिलेखों के नवीनीकरण न होने से भूमि विवाद होते रहते है।

उन्होंने कहा कि चकबंदी प्रक्रिया से निवासियों को, विद्यालय, चकमार्ग,बंजर नाली, ऊसर, चरागाह,खलिहान, खेल मैदान आदि सार्वजनिक उपयोग की भूमियां उपलब्ध कराई जाती है। चकबंदी प्रक्रिया एक तकनीकी/विशेषीकृत प्रक्रिया है, जिस की प्रदेश में बहुत आवश्यकता है। राजस्व विभाग में पहले ही नायब तहसीलदारों के 1234 पदों के सापेक्ष 1000 पद, राजस्व निरीक्षकों के 4281 पदों के सापेक्ष 1000 पद रिक्त है।

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चकबंदी विभाग के विलय के बाद राजस्व विभाग के कामकाज में गैर अनुभवी कर्मचारी अधिकारियों का विलय हो जाएगा। जिसकी वजह से प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और ऐसे में भूमि विवाद कम से कम दो गुना बढ़ जाएगे। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग के विशिष्ठ दायित्वों/महत्व के दृष्टिगत लेखपाल, संग्रह अमीन का प्रारम्भिक ग्रेड 2800 रूपये (लेविल-5), राजस्व निरीक्षक ग्रेड पे 4200 ( लेविल-6) व नायब तहसील ग्रेड पे 4800 (लेविल-8) किया जाए। इसके अलावा महासंघ के पदाधिकारियों ने यह भी मांग रखी है कि राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार, तहसीलदार व डिप्टी कलेक्टर के पदों पर तत्काल डीपीसी कराई जाई। http://www.satyodaya.com

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World river day : यूथ हॉस्टल ने राइड फाॅर नेचर का किया आयोजन

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साइकिल चलाकर लोगों को प्रकृति से लगाव बढ़ाने का दिया संदेश

लखनऊ। वर्ल्ड रिवर डे के अवसर पर नदियों की स्वछता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए साइक्लोपीडिया ग्रुप एवं यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, शान-ए-अवध इकाई ने राइड फार नेचर साइकिलिंग कार्यक्रम का आयोजन गोमती नगर से गोसाईगंज के बीच किया गया। इस अवसर पर साइकिलिस्टों ने साइकिल चलाकर प्रकृति के प्रति लगाव बढने के साथ-साथ नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने में सहयोग के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया गया। सभी साइकिलिस्ट गोमती ब्रिज के पास स्थित जटा गांव पहुंच नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के संकल्प के साथ गोमती समेत अन्य नदियों के कल-कल बहने की कामना की। सचिव पंकज श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों को नदियों को स्वछ रखने में अपना योगदान देने की शपथ दिलायी। नदियों की रक्षा-देश की सुरक्षा…. नारों का उद्घोष करते हुए साइकिलिस्ट शहर से दूर प्राकृतिक वातावरण से सराबोर जटा गांव गोसाईगंज पहुंचे।

कार्यक्रम केे मुुख्य अतिथि आइकॉन इस्टेट सर्विसेस प्रा. लि. के डायरेक्टर अश्वनी मेहता थेे। मुख्य अतिथि ने कहा कि नदियों से करोड़ों लोग पानी पीते हैं। इन्हें स्वच्छ रखना हम सब की जिम्मेदारी है। वह लोग भाग्यशाली हैं जो नदियों के किनारे बसे हैं। इसलिए इसके किनारे बसे लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका हो जाती है कि इसे साफ व स्वच्छ रखें। सभी साइकिलिस्ट गोमती नदी के किनारे स्थित जटा गांव की प्राकृतिक सुंदरता देखकर मोहित हो गए और उन्होंने उसको और नजदीक से जानने के लिए उस जगह पर ट्रैकिंग की।

प्रकृति के नजदीक पहुंच कर सभी सुंदर वातावरण में खो गए। कार्यक्रम के दौरान कुछ सदस्यों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए। जिसमें प्रमुख रुप से प्रदीप कुमार सिंह ने गीत सुगना चला गगन की ओर…, नीतिन मिश्रा ने ओहरे ताल मिले नदी के जल में… सुनाया। कृष्णानन्द राय ने कविता नदी हमारी माँ है…, बिमल भटाचार्य ने गजल एवं दुनिया भर के ट्रैकिंग-साइकिलिंग के अपने अनुभव शेयर किये। जिससे सबकी थकान काफूर हो गई।

साइक्लोपीडिया के प्रमुख विशाल मिश्रा मिश्रा ने एवं यूथ हॉस्टल शान-ए-अवध इकाई के पीआरओ चंद्रभूषण अग्रवाल ने सभी का उत्साह वर्धन किया और भविष्य में रोज की गतिविधियों में अधिक से अधिक साइकिल का प्रयोग लाने पर जोर दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जया शाह, विशाल शमाँ, प्रदीप कुमार, नृमता, विमलेश, शालिनी, अल्पना, सुदीप्तो, अखिलेश शुक्ला, आशुतोष, दिनेश, अनुज धवन, श्रवन कुमार सहित सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। http://www.satyodaya.com

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September 23, 2019, 7:33 am
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