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लखनऊ लाइव

अब किताबों पर ही नहीं ई-रिक्शों पर भी पढ़ने को मिलेंगे शायरों के शेर

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अब नायाब शेरों से सजेंगे ई-रिक्शे

अभी तक आपने ट्रकों के पीछे लिखी शेरो शायरी तो काफी पढ़ी होगी, लेकिन अब आपको लखनऊ के ई रिक्शों पर शेरों शायरी पढ़ने को मिलेगी । वो भी एक से बढ़कर एक । जैसे कशिश-ए-लखनऊ अरे तौबा फिर वही हम फिर वही ऐशबाग । ये अनूठी पहल लखनऊ के 1000 ई- रिक्शों पर 1857 राष्ट्रवादी फोरम और लखनऊ फिल्म क्लब की शुरूआत की है ।

 

 

क्लब के डॉ संदीप कुमार का विचार था कि लखनऊ के 1000 ई- रिश्कों पर शहर के ऊपर और शहर के शायरों द्वारा लिखे शेरों को चस्पा किया जाए । 1857 राष्ट्रवादी मंच के संयोजक, इतिहासकार और ‘बुलेट राजा’ फिल्म के लेखक, अमरेश मिश्र ने शोध करके नायाब शेर निकाले और इस मुश्किल काम का बीड़ा उठाया । लखनऊ फिल्म क्लब प्रगती शर्मा ने साथ दिया । 24 फरवरी 2018 को ‘तहरीक-ए-लखनऊ’ नामक समारोह का उदघाटन करते हुए, डा. संदीप कुमार ने कहा की “हम दिखाना चाहते हैं, लखनऊ सिर्फ ‘पहले आप मुस्कुराइए हम लखनऊ में हैं’ तक सीमित नहीं है ।

यहां पर शेरों का भण्डार है, जो जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डालते हैं । आज जब लखनऊ एक महानगर बनने की तरफ अग्रसर है, तो हमें और मजबूती से शहर की सांस्कृतिक धरोहर को यहां पर आ कर बस रहे नए बाशिन्दों तक पहुंचाने चाहिए हैं । साथ ही साथ, पुराने लखनऊ वासियों को यह याद दिलाना जरूरी है, कि लखनऊ की संस्कृति में किस तरह की विराट विविधता रही है । उर्दू के रूमानी शेर सिर्फ एक पहलू हैं । गंगा-जमुनी संस्कृति पर यहां बहुत काम हुआ । आप इन ई-रिक्शों पर लखनऊ की खूबसूरती बयां करने वाले शेर, जैसे यास यगाना चन्गेजी का लिखा ।

 

 

 

‘कशिश-ए-लखनऊ अरे तौबा, फिर वही हम वही अमीनाबाद’, पाएंगे । साथ ही साथ हसरत मोहानी का शेर: ‘हर हिन्दू का मजबूत है जी, गीता की यह बात है दिल पे लिखी’ भी देखेंगे । ‘मुनव्वर’ लखनवी ने लिखा: ‘लखनऊ का आलम-ए-खास देखिए, उर्दू में गीता का पाठ देखिए’ । बहुत कम लोग जानते हैं की, ‘मदर इंडिया’, ‘मुगले-आजम’, ‘गंगा-जमुना’  जैसी क्लासिक फिल्मों के संगीतकार नौशाद नफीस शायर भी थे । उनके कुछ शेर देखिये: ‘अभी साज़-ए-दिल में तराने बहुत हैं, अभी ज़िन्दगी के बहाने बहुत हैं । ‘नए गीत पैदा हुए हैं उन्हीं से, जो पुर-सोज़ नगमे पुराने बहुत हैं’। इन शेरों में नौशाद साहब मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में गुज़ारे कई सालों की कहानी कह गए।”

 

 

इस मौके पर इतिहासकार, ‘बुलेट राजा’ फिल्म के लेखक, अमरेश मिश्र ने कहा कि, “मैने जब लखनऊ के शेरों की शोध शुरू की तो मैं भौचक्का रह गया ! मैने देखा कि लखनऊ के पुराने उर्दू-दां कवि, किस क़दर, आज की भाषा में ‘बकैत-भौकाली’ तेवर रखते थे । ‘आरजू’ लखनवी  ने लिखा: ‘दो तुन्ड हवाओं पर बुनियाद है तूफान की; या तुम न हसीन होते, या मैं न जवान होता’ ! मजाज लखनवी में जो आग, जो कड़क थी, वो शायद ही किसी और शायर में होगी: ‘इलाहबाद के हरसू में है चर्चे की दिल्ली का शराबी आ गया है । ‘बसद आवारगी बसद तबाही, बसद खानाखराबी आ गया है’ !

 

 

मजरूह सुल्तानपुरी जैसे गीतकार ने ये राजनैतिक शेर लिखा: ‘किस ने कहा कि टूट गया खंजर-ए-फिरंग’, ‘सीने पे ज़ख्म-ए-नौ भी है दाग-ए-कुहन के साथ’! इसलिये मैने सांसकृतिक क्रान्ति का दस्तावेज़ भी तैय्यार किया ! बकौल यास यगाना चन्गेज़ी: ‘टकरा कर देखो हम क्या हैं तुम क्या; जीते तो जीते हारे तो हारे’ ! ‘जलाल’ लखनवी ने कहा, ‘इक शाम दिलजलों को ऐश-ए-विसाल दे; फिर चाहें आसमां जहन्नुम में डाल दे’ ! इस दस्तावेज में, जावेद अख्तर के बाबा ‘मुज्तर’ खैराबादी, ‘सकिब’ लखनवी, ‘जरीफ लखनवी’, ‘गुमनाम’ लखनवी, ‘शायर’ लखनवी, ‘रिन्द’ लखनवी, ‘अजीज’ लखनवी, सागर खैय्याम, ‘माचिस’ लखनवी, ‘रश्क’ लखनवी जैसे अनेक शायरों के दुर्लभ शेर कैद हैं” !

प्रेस कॉन्फरेंस को लखनऊ फिल्म क्लब की संस्थापक, प्रगती शर्मा, छात्र नेता पूजा शुक्ला, बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन के नेता, सुधांशू वाजपेयी, और एनालिस्ट राजिक वदूद ने संबोधित किया । सभा का संचालन 1857 राष्ट्रवादी मंच के मुहम्मद फहीम ने किया ।http://www.satyodaya.com

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मां काली सेवा समिति अलीगंज ने गरीबों व जरूरतमंदों को बांटे लंच पैकेट

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लखनऊ। कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए पूरा देश लाॅकडाउन है। रोजगार, काम-धंधा सब ठप है। लोग अपने घरों में कैद हैं। लेकिन कुछ लोग सड़कों पर हैं, कि लाॅकडाउन से प्रभावित गरीबों, मजदूरों और निर्धनों को दो वक्त की रोटी नसीब हो सके। सरकार के साथ तमाम गैरसरकारी संगठन, एनजीओ और समाजसेवी लगातार लोगों को भोजन और राशन उपलब्ध करा रहे हैं। मानव सेवा के इस कार्य में मां काली जी सेवा समिति अलीगंज, लखनऊ भी लगी हुई है। बुधवार को समिति के सदस्य चक्रधर तिवारी, पद्मधर तिवारी और अज्जू पांडे (दादा) ने अपने साथियों के साथ लोहिया हाँस्पिटल व पीजीआई में मरीजों, तीमारदारों और जरूरतमंदों को भोजन उपलब कराया।

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उनके साथ शैलेन्द्र प्रकाश दीक्षित (मिन्टू), आशुतोष पान्डे, संतोष शर्मा, अश्वनी मिश्रा, श्रवण गुप्ता, अंजनी सिंह, मुन्ना तिवारी, सत्यभान सिंह, गुड्डू यादव और रोहित ने लोगों को लंच पैकेट वितरित किए। इससे पहले समिति ने मंगलवार को फैजाबाद रोड, शहीद पथ, गोमती नगर, अलीगंज और सीतापुर रोड़ पर जरूरतमंदों को लंच पैकेट बांटे।http://www.satyodaya.com

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राशन दुकानों पर धीमे सर्वर ने रुलाया, कई लोग बिना राशन लिए ही लौटे

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लखनऊ। लखनऊ में राशन की दुकानों में सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिल रही है। घनी आवादी वाले हुसैनगंज स्थित सरोजिनी नायडू मार्ग पर राशन लेने के लिए राशन की दुकान पर लंबी लाइन लग गई है। यही हालत शहर के अन्य इलाकों में भी है। सुबह चार बजे से लोग दुकानों के सामने जुट गए हैं। नेटवर्क की धीमी स्पीड से व्यवधान भी सामने आ रहा है, लेकिन नियमों का पालन किया जा रहा है। बिना बायोमेट्रिक के राशन नहीं मिल रहा है। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए बायोमेट्रिक न करने के आदेश दिए गए थे।

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डालीबाग, उदयगंज में भी दुकानों पर भीड़ रही। वहीं नरही सब्जी मंडी में 12 बजे तक दुकान नहीं खुली। लोगों को निराश लौटना पड़ा। राशन लेने आए एक युवक ने बताया कि हुसैनगंज में राशन की दुकान पर उनकी मां सुबह से ही लाइन में लग गई थी लेकिन 10 बजे के बाद भी सर्वर खराब होने की वजह से नंबर नहीं आया। ऐसे ही कई लोग बिना राशन लिए वापस लौटे। लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि 1 बजे तक 30 हजार से अधिक पात्रों को निःशुल्क राशन वितरण किया गया।http://www.satyodaya.com

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गरीबों, मजदूरों की मदद के लिए सिपेट ने लखनऊ नगर निगम को दिए 5 लाख रुपए

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लखनऊ। कोरोना महामारी के इस दौर में गरीबों व जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार सहयोग मिल रहा है। तमाम सामाजिक संस्थाओं और संगठनों की ओर से सरकार व प्रशासन को गरीबों की मदद के लिए सहयोग मिल रहा है। मंगलवार को सिपेट इंस्टिट्यूट ऑफ प्लास्टिक टेक्नोलॉजी की ओर से लखनऊ नगर निगम को 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद की गयी। सिपेट इंस्टिट्यूट के प्रतिनिधियों ने महापौर संयुक्ता भाटिया के आवास पर पहंुच कर आरटीजीएस के माध्यम से यह धनराशि नगर निगम के अन्नदा ग्रेन बैंक नगर निगम लखनऊ के खाते में ट्रांसफर कराई।

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बता दें कि महापौर ने लखनऊ नगर निगम की ओर से प्रकल्प अन्नदा मुहिम चलायी जा रही है। इस मुहिम का उद्देश्य है कि शहर में कोई भी गरीब, मजदूर, बेघर भूखा न सोये। महापौर ने राजधानी के सभी समर्थ लोगों से इसमें सहयोग करने की अपील की है। सिपेट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर डॉ० संदेश कुमार जैन ने महापौर से वार्ता कर मदद की इच्छा जताई थी। मंगलवार को डॉ जैन के प्रतिनिधि के रूप में मुख्य प्रबंधक सिपेट डॉ यूपी सिंह, प्रशासनिक अधिकारी नितेश जैन एवं जसराम सिंह ने महापौर को 5 लाख रु० रुपए की सहयोग राशि प्रदान की।http://www.satyodaya.com

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