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यूपी सरकार के आदेश की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे है शहर के अस्पताल, 12 दिनों से इलाज के लिए दर-दर भटक रही है मासूम…

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मासूम के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं शहर के अस्पताल

लखनऊ। राजधानी में लगातार सरकारी अस्पतालों की मनमानी सामने आ रही है जिसके कारण ही आये दिन मरीजों की मौत के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसी ही एक घटना एक बार फिर देखने को मिली है जिसमें बताया जा रहा है कि कानपुर से एक पिता अपनी बच्ची को लेकर लगभग 12 दिन पहले सिविल अस्पताल पहुंचे थे जहां बच्ची को भर्ती तो कर लिया गया लेकिन उसका इलाज नहीं किया गया।

साथ ही बताया कि जब पांच दिनों के बाद एक डाक्टर पहुंचे जिन्होंने उसको देखते साथ ही ट्रामा रेफर करने की बात कही, लेकिन ट्रामा पहुंचते ही वहां के डॉक्टरों ने पीड़ित से कहा कि ट्रामा में बर्न यूनिट नहीं है जिसके बाद ही उसको बलरामपुर अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी। मगर जब बच्ची को लेकर उसके पिता बलरामपुर पहुंचे तो वहां भी उसको लेने से मना कर वापस सिविल भेज दिया गया।

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अब सोचने वाली बात यह है कि यूपी सरकार द्वारा बजट पास किया गया था जिसमें अस्पतालों को ध्यान में रखते हुए सबसे ज्यादा बजट अस्पताल के नाम पर ही आया था लेकिन फिर भी सरकारी अस्पतालों में सुविधा ना होने की बात कहकर मरीज को चलता कर दिया जाता है । कानपुर से लखनऊ इलाज के लिए पहुंची मासूम बच्ची को लेकर उसके पिता लगभग 12 दिनों से सरकारी अस्पतालों के चक्कर काट रहें है और डॉक्टर उसका इलाज करने के बजाये उससे मुंह मोड़ते नजर आ रहे है। जिसके कारण ही बच्ची की हालत गंभीर होती जा रही है।

वहीं मासूम बच्ची के पिता नरेन्द्र सिंह कुशवाहा का कहना है कि 2 फरवरी को कानपुर से लाकर लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उसको इलाज नहीं मिल रहा है बस उसको सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगवाये जा रहे हैं जिससे उसकी बच्ची की हालत गम्भीर होती जा रही है।http://www.satyodaya.com

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72 घंटे के सफाई अभियान के बाद भी राजधानी में जगह-जगह लगे हैं कूड़े के ढेर

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लखनऊ। राजधानी में चारों और फैली गंदगी को देखते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने पूरे शहर में 72 घंटे तक का सफाई अभियान चलाने का फैसला किया था। इस अभियान में शहर के सार्वजनिक स्थान, सड़कों और गलियों से कूड़ा-मलबा उठाने के लिए नगर निगम ने 72 घंटो का समय मांगा था। बता दें कि इस चलाये गए अभियान के लिए करीब 400 गाड़ियां और एक हजार से अधिक कर्मचारी भी काम पर लगाए गए थे । इसके बावजूद भी नगर निगम इस सफाई अभियान में फेल होता हुआ नजर आ रहा है और शहर में जगह-जगह कूड़े का ढ़ेर देखने को मिल रहा है और आवारा पशु भी कूड़े के पास नजर आ रहे हैं।

आइए आपको शहरों के कुछ ऐसे ही इलाकों के बारे बताते है, जहां कूड़े का अंबार लगा हुआ है और नगर निगम इस पर कोई विशेष ध्यान देता नजर नहीं आ रहा है।

यह नजारा नगर निगम ज़ोन 6 के निवाजगंज में नैपियर रोड कॉलोनी का है, जहां पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है । इस कूड़े के ढेर से लोगों को आए-दिन काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । वहीं इस कूड़े के ढेर के पास आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है । जिससे इलाके में कई तरह के संक्रामक रोग फ़ैल रहें है । देखने वाली बात यह है कि इलाके में लगे कूड़े के इस अंबार पर नगर-निगम की नजर नहीं जा रही है या फिर नगर-निगम इस मामले में लापरवाही बरत रहा हैं।

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यह नजारा इंदिरानगर के स्मृति बिहार के सामने बनी सरकारी आवासीय कालोनी के बाहर का है, जहां यह कूड़े का अंबार लगा हुआ है । इस कूड़े के ढेर में दिनभर आवारा पशु मंडराते रहते है। वहीं सड़क पर राहगीरों को अवागमन में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नगर-निगम इस सरकारी आवासीय कालोनी के बाहर लगे इस इस कूड़े के अंबार को हटाने में कोई सतर्कता नहीं दिखा रहा है । हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद भी नगर-निगम सफाई अभियान के प्रति जागरूक नहीं दिख रहा है, जिससे शहर की हालत जस की तस बनी हुई है।

यह नजारा इंदिरा नगर के डी ब्लाक के कलेवा इलाके के का है, जहां पर नालियां चोक पड़ी हुई है । नालियां चोक होने से गंदा पानी आए दिन सड़कों पर खुलेआम बहता रहता है, जिससे कि मोहल्ले के लोगों और आम जनता दोनों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इससे इलाके में कई तरह की गंभीर बीमारियां भी फ़ैल रही है । सबसे बड़ी बात है कि नगर-निगम इस पर अपनी चुप्पी साधे हुए बैठा है और वह शहर में फ़ैल रही गंदगी को लेकर या फिर चोक पड़ी नालियों को लेकर कोई भी कड़ा कदम उठाते हुए नजर नहीं आ रहा है।

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दहेज लोभी पति ने पत्नी को जलाने का किया प्रयास…

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लखनऊ। राजधानी में सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किये गए बड़े- बड़े दावे केवल दावे ही बन कर रह गए हैं। शहर में आए-दिन महिलाओं को दहेज के लिए प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला अलीगंज थाना क्षेत्र का सामने आया है, जहां पर दहेज के लिए एक पति ने अपनी ही पत्नी को जलाने का प्रयास किया है।

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इस पूरे मामले में पत्नी का यह आरोप है कि दहेज की डिमांड पूरी ना होने पर उसके पति ने उस पर केरोसिन डाल कर उसको जलने का प्रयास किया है। साथ ही पीड़िता का कहना है कि पति मुझसे 2 लाख रुपये और कार की डिमांड कर रहा था और इसी डिमांड के ना पर होने पर वह आए दिन मुझे मारता पीटता रहता था। जिसके बाद पति ने अपनी पत्नी पर केरोसिन डाल कर जलाने का भी प्रयास किया। इस पूरी घटना की सूचना पीड़ित महिला ने अलीगंज पुलिस को पहुंचाई। जिसके बाद पुलिस ने पीड़ित महिला की तहरीर पर मुकदमे को दर्ज कर  आरोपित पति को गिरफ्तार कर लिया है । वहीं पुलिस आरोपी से मामले की पूछताछ में जुटी हुई है। http://www.satyodaya.com

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बड़े मंगल को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिये महापौर संयुक्ता भाटिया ने लांच किया मंगलमान पोर्टल

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‘जो करेगा मंगल का मान हम करेंगे उसका सम्मान’

लखनऊ। हिन्दू धर्म मे जेष्ठ महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। जेष्ठ महीना खासकर भगवान हनुमान का माना जाता है और जेष्ठ महीने में प्रत्येक मंगलवार को जगह -जगह भंडारों का आयोजन किया जाता और भगवान हनुमान जी की पूजा की जाती है। वही इसी क्रम में आज राजधानी लखनऊ स्थित नगर निगम मुख्यालय पर लखनऊ मेयर संयुक्ता भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मंगलमान समिति की वेबसाइट को लॉन्च किया।

साथ ही बताया कि मंगलमान आयोजन समिति की यह वेबसाइट बड़े मंगल के अवसर पर भंडारा प्याऊ लगाने वाले लोगों के लिए एक साथ जुड़ने का एक उचित प्लेटफार्म है। जेठ के महीने में बड़े मंगल की पवित्र परंपरा लखनऊ वासियों के लिए विशेष महत्व का है। इस अवसर पर भंडारा एवं प्याऊ लगाने की परंपरा लखनऊ की अनूठी परंपरा है। गर्मी जब अपने चरम पर होती है भक्तजन गर्मी की परवाह न करते हुए शहर में जगह-जगह भंडारे, लंगर, प्याऊ लगाकर सभी को प्रसाद और जल वितरित करते हैं। भक्तों को ऐसा लगता है कि भूखे को भोजन और प्यासे को पानी पिलाने से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। अतः यह परंपरा प्राणी मात्र की सेवा का सर्वोत्तम साधन है। यही कारण है कि सभी मत- पंथ- संप्रदाय, जाति- बिरादरी और आयु वर्ग के लोग इसमें बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। जिस प्रकार यह कार्यक्रम लोकप्रिय हो रहा है और धीरे-धीरे लखनऊ की सीमाओं से बाहर निकल कर आसपास के जिलों में भी लोकप्रिय हो रहा है, निश्चित ही यह लखनऊ वासियों के लिए बहुत गर्व का विषय है।

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वहीं आगे बोलते हुए मेयर ने कहा कि मंगलमान आयोजन समिति ऐसे सभी जननायकों का अभिनन्दन एवं सम्मान करना चाहती है, जो मंगल का मानवर्धन कर रहे हैं। सभी भंडारा आयोजकों को एकसूत्र में पिरोना और धार्मिक आयोजनों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ कर परंपरा को सुदृढ़, सशक्त, प्रभावी बनाना है। मंगलमान पोर्टल इस आयोजन से जुड़े सभी पहलुओं के लिए एक सुलभ प्लेटफॉर्म की तरह है। कोई भी आयोजक इस पर आकर अपने आयोजन की जानकारी दे सकता है और इस अभियान से जुड़ सकता है। जिन आयोजनों की जानकारी समय से उपलब्ध होगी उन स्थलों की स्वच्छता व्यवस्था के लिए भी समिति नगर निगम से समन्यवय स्थापित कर बेहतर व्यवस्था हेतु आग्रह करेगी ताकि आयोजनकर्ता स्वच्छ वातावरण में अपना आयोजन पूर्ण कर सकें। http://www.satyodaya.com

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