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16 अप्रैल को देश भर के ज्वेलरी व्यापारी मनाएंगे ज्वेलरी दिवस

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ज्वेलरी व्यापार को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान

लखनऊ। देश भर में फैले 4 लाख से अधिक ज्वेलरी व्यापारी और उनसे जुड़े लगभग 20 लाख कारीगर आगामी 16 अप्रैल को देश भर में ज्वेलरी दिवस के रूप में मनाएंगे। यह घोषणा ज्वेलरी एवं उससे जुड़े कारीगरों के शीर्ष संगठन आल इंडिया ज्वेलर्स एन्ड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने आज की। यह संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा ज्वेलरी व्यापार के लिए गठित प्रमुख संगठन हैं, जो मूलरूप से देश के छोटे ज्वेलर्स एवं ज्वेलरी कारीगरों का प्रतिनिधित्व करता है।

देश में लगभग 4 लाख से अधिक ज्वेलर्स हैं जिनमें लगभग 95% छोटे ज्वेलर्स हैं। केवल मात्र 30 हजार जेवेलर्स बीआइएस हॉलमार्क से पंजीकृत हैं। ज्वेलरी व्यवसाय में देश भर में लगभग 20 लाख कारीगर हैं जो आभूषण बनाते हैं। देश में प्रतिवर्ष लगभग 900 टन सोने की सालाना खपत है। लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का सोना आयात होता है। लगभग 12.5 % इम्पोर्ट ड्यूटी और 3% जीएसटी के हिसाब से ये व्यापार सरकार को लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्रदान करता है। वहीं चांदी का व्यापार भी देश भर में बड़े पैमाने पर अलग से होता है।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की कैट ने देश के समस्त रिटेल व्यापार को आधुनिक एवं उच्च स्तरीय बनाने का निर्णय लिया हुआ है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक महत्वपूर्ण व्यापार को बेहतर तकनीक से जोड़ा जाएगा, ताकि भारत के हर क्षेत्र के व्यापारी आत्मनिर्भर बन कर किसी बी देसी अथवा वैश्विक व्यापारिक चुनौती का मुकाबला कर सकें।

इस योजना के तहत देश के ज्वेलरी व्यापार को बेहतर, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए देश भर के छोटे ज्वेलर व्यापारियों एवं ज्वेलरी कारीगरों को साथ जोड़कर कैंट ने हाल ही में आल इण्डिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीऍफ़) का गठन किया है। जिसमें देश के सभी राज्यों के छोटे ज्वेलर्स के व्यापारी संगठनों के व्यापारी नेता एवं ज्वेलरी कारीगर शामिल हैं।

बता दें कि, आल इंडिया ज्वेलर्स एन्ड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय संयोजक पंकज अरोरा, फाउन्डर मेंबर विनोद माहेश्वरी ने बताया की आगामी 16 अप्रैल को देश भर में ज्वेलरी दिवस मनाते हुए दिल्ली में एक ज्वेलरी व्यापारी महासम्मेलन आयोजित होगा। जिसमें देश के सभी राज्यों के प्रमुख ज्वेलरी व्यापारी बड़ी संख्यां में भाग लेंगे। सम्मेलन में ज्वेलरी व्यापार की वर्तमान ज्वलंत समस्याओं एवं उनका समाधान तथा किस प्रकार से व्यापारी सरकार के साथ सहयोग करते हुए देश के ज्वेलरी व्यापार में वृद्धि कर सकते हैं। भारत से किस प्रकार ज्वेलरी का ज्यादा से ज्यादा निर्यात किया जा सकता है, इस पर चर्चा करते हुए अपनी आगामी रणनीति तय करेंगे। उन्होंने ने बताया की ज्वेलरी व्यापार के प्रमुख ज्वलंत मुद्दों को लेकर संगठन का प्रतिनिधिमंडल शीघ्र केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान से शीघ्र मिलेगा।

विनोद माहेश्वरी ने संगठन के विषय में जानकारी देते हुए कहा की वर्तमान में देश का ज्वेलरी व्यापार बेहद निराशा के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में जहाँ आभूषणों की बिक्री में कमी आ रही है तो वहीं दूसरी ओर सरकार की नीतियां भी ज्वेलरी व्यापार को ढेर करने में लगी हुई हैं। उन्होंने कहा की देश के छोटे ज्वेलर्स एवं उनसे जुड़े कारीगर इस व्यापार को बेहतर बनाने के लिए सरकार के दृष्टिकोण का स्वागत करते हैं और सरकार को समर्थन का भरोसा देते हैं किन्तु सरकार को छोटे ज्वेलर्स से चर्चा कर उनकी समस्याओं को समझना जरूरी है और उसके अनुसार इस व्यापार के लिए नीति बनाई जाए।

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उन्होंने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गठित डोमेस्टिक गोल्ड कॉउन्सिल में अभी तक उन छोटे ज्वेलरी व्यापारियों का प्रतिनिधित्व नहीं है, जो देश में प्रतिवर्ष हो रहे गोल्ड व्यापार का 85 प्रतिशत हिस्सा है। लिहाजा एआइजीजेएफ को भी डोमेस्टिक गोल्ड कॉउन्सिल में शामिल किया जाना चाहिए। देश के ज्वेलरी व्यापारी आभूषणों पर हॉलमार्किंग करने के सरकार के आदेश का स्वागत करते हैं और सरकार के साथ सहयोग करते हुए देश के सभी ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग के साथ जोड़ना चाहते हैं।

किन्तु देश भर में ज्वेलरी आभूषणों की बिक्री के पैटर्न को देखते हुए हॉलमार्किंग नियमों में 20 कैरट ज्वेलरी को भी मान्यता दी जाए। यह आवश्यक है वहीं हॉलमार्किंग के वर्तमान नियम के अनुसार ज्वेलर को हॉलमार्क का रिकॉर्ड रखने के लिए बाध्य किया गया है, जबकि हॉलमार्क के स्टॉक का रिकॉर्ड हॉलमार्किंग सेंटर को रखना चाहिए। 2 लाख रुपये तक के आभूषणों की नकद बिक्री के स्थान पर 100 ग्राम आभूषणों की नकद बिक्री को अनुमति देनी चाहिए। प्रत्येक जिला मुख्यालय पर सरकार स्वयं के हॉलमार्किंग सेंटर खोले तभी आभूषणों को सही तरीके से हॉलमार्क किया जा सकता है।

श्री अरोरा ने कहा की किसी भी व्यापारी द्वारा हॉलमार्किंग सेंटर खोलने पर सरकार को उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। हॉलमार्किंग मशीनों के आयात शुल्क में सरकार को छूट देनी चाहिए। गोल्ड मेटल लोन एवं बैंकों से क़र्ज़ ज्वेलरी व्यापारियों को बैंकों से आसानी से दिलवाया जाए। सर्राफा व्यवसाइयों को प्राथमिकता पर आर्म लाइसेंस ऑनलाइन एवं सरल प्रक्रिया से दिया जाए। ज्वेलरी कारीगरों को आसान तरीके से मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋण दिया जाए। ज्वेलरी व्यापारियों द्वारा पुराने गहने खरीदने पर सरकार दिशा निर्देश भी जारी करे जिससे आये दिन पुलिस द्वारा सराफा व्यापारियों का उत्पीड़न रोका जाए। ज्वेलरी व्यापारियों को सीटीटी के रिफंड का समुचित प्रावधान किया जाए।http://www.satyodaya.com

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मां काली सेवा समिति अलीगंज ने गरीबों व जरूरतमंदों को बांटे लंच पैकेट

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लखनऊ। कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए पूरा देश लाॅकडाउन है। रोजगार, काम-धंधा सब ठप है। लोग अपने घरों में कैद हैं। लेकिन कुछ लोग सड़कों पर हैं, कि लाॅकडाउन से प्रभावित गरीबों, मजदूरों और निर्धनों को दो वक्त की रोटी नसीब हो सके। सरकार के साथ तमाम गैरसरकारी संगठन, एनजीओ और समाजसेवी लगातार लोगों को भोजन और राशन उपलब्ध करा रहे हैं। मानव सेवा के इस कार्य में मां काली जी सेवा समिति अलीगंज, लखनऊ भी लगी हुई है। बुधवार को समिति के सदस्य चक्रधर तिवारी, पद्मधर तिवारी और अज्जू पांडे (दादा) ने अपने साथियों के साथ लोहिया हाँस्पिटल व पीजीआई में मरीजों, तीमारदारों और जरूरतमंदों को भोजन उपलब कराया।

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उनके साथ शैलेन्द्र प्रकाश दीक्षित (मिन्टू), आशुतोष पान्डे, संतोष शर्मा, अश्वनी मिश्रा, श्रवण गुप्ता, अंजनी सिंह, मुन्ना तिवारी, सत्यभान सिंह, गुड्डू यादव और रोहित ने लोगों को लंच पैकेट वितरित किए। इससे पहले समिति ने मंगलवार को फैजाबाद रोड, शहीद पथ, गोमती नगर, अलीगंज और सीतापुर रोड़ पर जरूरतमंदों को लंच पैकेट बांटे।http://www.satyodaya.com

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राशन दुकानों पर धीमे सर्वर ने रुलाया, कई लोग बिना राशन लिए ही लौटे

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लखनऊ। लखनऊ में राशन की दुकानों में सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिल रही है। घनी आवादी वाले हुसैनगंज स्थित सरोजिनी नायडू मार्ग पर राशन लेने के लिए राशन की दुकान पर लंबी लाइन लग गई है। यही हालत शहर के अन्य इलाकों में भी है। सुबह चार बजे से लोग दुकानों के सामने जुट गए हैं। नेटवर्क की धीमी स्पीड से व्यवधान भी सामने आ रहा है, लेकिन नियमों का पालन किया जा रहा है। बिना बायोमेट्रिक के राशन नहीं मिल रहा है। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए बायोमेट्रिक न करने के आदेश दिए गए थे।

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डालीबाग, उदयगंज में भी दुकानों पर भीड़ रही। वहीं नरही सब्जी मंडी में 12 बजे तक दुकान नहीं खुली। लोगों को निराश लौटना पड़ा। राशन लेने आए एक युवक ने बताया कि हुसैनगंज में राशन की दुकान पर उनकी मां सुबह से ही लाइन में लग गई थी लेकिन 10 बजे के बाद भी सर्वर खराब होने की वजह से नंबर नहीं आया। ऐसे ही कई लोग बिना राशन लिए वापस लौटे। लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि 1 बजे तक 30 हजार से अधिक पात्रों को निःशुल्क राशन वितरण किया गया।http://www.satyodaya.com

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गरीबों, मजदूरों की मदद के लिए सिपेट ने लखनऊ नगर निगम को दिए 5 लाख रुपए

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लखनऊ। कोरोना महामारी के इस दौर में गरीबों व जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार सहयोग मिल रहा है। तमाम सामाजिक संस्थाओं और संगठनों की ओर से सरकार व प्रशासन को गरीबों की मदद के लिए सहयोग मिल रहा है। मंगलवार को सिपेट इंस्टिट्यूट ऑफ प्लास्टिक टेक्नोलॉजी की ओर से लखनऊ नगर निगम को 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद की गयी। सिपेट इंस्टिट्यूट के प्रतिनिधियों ने महापौर संयुक्ता भाटिया के आवास पर पहंुच कर आरटीजीएस के माध्यम से यह धनराशि नगर निगम के अन्नदा ग्रेन बैंक नगर निगम लखनऊ के खाते में ट्रांसफर कराई।

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बता दें कि महापौर ने लखनऊ नगर निगम की ओर से प्रकल्प अन्नदा मुहिम चलायी जा रही है। इस मुहिम का उद्देश्य है कि शहर में कोई भी गरीब, मजदूर, बेघर भूखा न सोये। महापौर ने राजधानी के सभी समर्थ लोगों से इसमें सहयोग करने की अपील की है। सिपेट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर डॉ० संदेश कुमार जैन ने महापौर से वार्ता कर मदद की इच्छा जताई थी। मंगलवार को डॉ जैन के प्रतिनिधि के रूप में मुख्य प्रबंधक सिपेट डॉ यूपी सिंह, प्रशासनिक अधिकारी नितेश जैन एवं जसराम सिंह ने महापौर को 5 लाख रु० रुपए की सहयोग राशि प्रदान की।http://www.satyodaya.com

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April 1, 2020, 8:02 pm
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