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शिशु बाल समिति ने किया 51वें रामलीला कार्यक्रम का आयोजन, हुआ रावण का दहन

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लखनऊ। शिशु बाल रामलीला समिति फूल वाली गली चौक ने इस बार अपना 51वां रामलीला कार्यक्रम का आयोजन खुनखुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में किया गया। जहां आतिशबाजी के साथ रावण का दहन भी किया गया।

रामलीला आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिरूप है। साहस, सकारात्मक व नवीन आशाओं का यह पर्व सच्चाई और सदाचार के मार्ग पर चलने की ऊर्जा व प्रेरणा देता है। रामलीला मंचन के माध्यम से उत्साह, उमंग और अध्ययन की यह अनूठी परंपरा जीवन का अटूट हिस्सा रहीं है।

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समिति के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने बताया कि यह आयोजन हर साल होता है। बीते वर्ष हम लोगों ने 50 साल पूरा कर 50 रावण का दहन किया था। उन्होंने आगे कहा कि दशहरा पर्व बुराई को मिटाता है।

इस मौके पर महामंत्री राहुल गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रदीप टंडन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्याम रस्तोगी, हर्षित गर्ग, पियूष अग्रवाल, अरविंद गुप्ता, कोमल चौरसिया, पंकज कपूर, मनोज कपूर, श्यामजी कपूर आदि लोग उपस्थित रहे। http://www.satyodaya.com

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लखनऊ: श्मशान घाट कर्मचारियों के नहीं बने पास, पुलिस करती है परेशान

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लखनऊ। समाप्ति की ओर बढ़ता लाॅकडाउन और सख्त होता जा रहा है। सरकार और प्रशासन के आदेश पर उत्तर प्रदेश पुलिस लाॅकडाउन का पूर्णतः पालने कराने में जुट गयी है। प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने यह आदेश दिया है। लेकिन इस सख्ती से गुलाला और बैकुंठ धाम में काम करने वाले कर्मचारी भी परेशान हैं। जिसका असर अपने स्वजनों को लेकर घाट पहुंचने वाले गमगीन परिवारों पर भी पड़ रहा है। सख्ती के चलते लकड़ी की आमद भी कम हो गयी है। साथ ही किसी तरह का पास न होने के कारण हर रोज कर्मचारियों को पुलिस की सख्ती से भी दो-चार होना पड़ रहा है।

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मीडियाकर्मियों से बात करते हुए यहां शवों को जलाने वाले कर्मचारियों ने बताया कि न ही श्मशान घाट और न ही नगर निगम की तरफ से उन्हें कोई पास दिया गया है। इसलिए हर रोज आते और जाते समय पुलिस रोकती है। हर कहीं पुलिस लगी है, इसलिए आने में परेशानी होती है। घाट पर बाॅडी लेकर पहुंचने वाले लोगों को भी घण्टों इंतजार करना पड़ता है। कर्मचारियों ने महापौर संयुक्ता भाटिया से पास जारी करने की अपील की है। http://www.satyodaya.com

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ट्रॉमा सेंटर में अग्निकांड मामले की जांच करेगी 6 सदस्यीय कमेटी

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केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में आखिर कैसे बार-बार लग रही आग!

लखनऊ। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में हुए अग्निकांड मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। केजीएमयू प्रशासन ने छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। यह कमेटी जांच करेगी कि आखिर बार-बार अग्निकांड के पीछे क्या वजह है! बुधवार देर रात ट्रॉमा सेंटर के दूसरे तल पर आग लग गई थी। जिसके बाद फानन-फानन तीन तल से मरीजों को बाहर निकाला गया था। लिफ्ट से आग फॉल सीलिंग तक पहुंच गई थी। कड़ी मशक्कत के बाद फायर विभाग ने आग पर काबू पाया था। रात करीब तीन बजे तक मरीजों को दोबारा ट्रॉमा में शिफ्ट किया गया।

शुरूआती जांच में ही स्पष्ट हो गया था कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि जानबूझ आग लगायी गई थी। इससे पहले भी कई बार यहां आग लग चुकी है। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि अग्निकांड की जांच के लिए छह सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। चीफ प्राक्टर डॉ. आरएएस कुशवाहा के निर्देशन में जांच कमेटी गठित की गई है। इसमें ट्रॉमा सीएमएस डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अब्बास अली मेंहदी, ट्रॉमा सीएमओ, मुख्य शमन अधिकारी को नामित किया गया है। जांच कब पूरी होगी। इसका जिक्र नहीं किया गया है।

आखिर बार-बार आग लगने के पीछे क्या है साजिश!

बात दें कि ट्रॉमा के दूसरे तल पर दोबारा आग लगना किसी साजिश की ओर इशारा कर रही है। इस तल पर दवा स्टोर है। अहम दस्तावेज भी यहीं रखे रहते हैं। पिछली बार आग लगने से करीब 56 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। बुधवार की देर रात आग लगने पर फायर अलार्म फिर से नहीं बजा। भीषण धुंआ भरने के बावजूद फायर अलार्म खामोश रहे। ऐसा तब है जब केजीएमयू प्रशासन फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित करने पर करीब 15 करोड़ रुपये फूंक चुका है। इसके बावजूद आग लगने की दशा में आग बुझाने की बात तो दूर सूचना तक नहीं मिल पाई।

ट्रॉमा सेंटर में आग से बचाव के नहीं पर्याप्त उपाय

ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं। यहां गंभीर मरीजों का इलाज होता है। इसके बावजूद ट्रॉमा सेंटर में आग से बचाव के इंतजाम पुख्ता नहीं है। अफसरों की लापरवाही से आग से बचाव के इंतजाम की पुख्ता व्यवस्था नहीं हो पा रही है। बीती रात दूसरे तल पर लगी आग के बाद इंतजामों के दावों की पोल खुल गई।

तब अग्निकांड में चली गई थी 5 मरीजों की जान

15 जुलाई 2017 को ट्रॉमा के दूसरे तल पर आग लगी थी। बड़ी संख्या में मरीजों को दूसरे विभागों में शिफट किया गया था। इस दौरान पांच मरीजों की जान चली गई थी। तब मंडलायुक्त ने मामले की जांच की थी। जांच में पांच इंजीनियर व फार्मासिस्ट की लापरवाही उजागर हुई थी। इन्हें निलंबित कर दिया गया था। जबकि 15 जुलाई 2017 को ट्रॉमा सेंटर के दूसरे तल पर लगी आग के बाद बड़े पैमाने पर मरम्मत का काम कराया गया था।

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मंडलायुक्त ने अपनी जांच रिपोर्ट में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर सवाल उठाए थे। रैंप व फायर फाइटिंग सिस्टम न होने पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही 21 बिन्दुओं पर सुझाव दिए थे। ढाई साल बाद सुझाव पर अमल नहीं हुआ। हालात यह है कि अब ट्रॉमा सेंटर में रैंप का निर्माण कराया जा रहा है।

15 करोड़ खर्च करने के बाद भी व्यवस्थाएं नदारत

इसी दौरान तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार के कमरे में आग लग गई थी। उसके बाद आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम करने के दावे किए गए। हालात यह हैं कि 15 करोड़ रुपये खर्च के बावजूद स्थिति जस की तस है। लंबी जद्दोजहद के बाद फायर हाइड्रेंट तो बन गया लेकिन उससे आने वाला पानी के पाइप लाइन सभी भवनों तक नहीं जोड़े गए।http://www.satyodaya.com

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लाॅकडाउन: अंतिम समय में बेटे की राह देखते-देखते थम गईं पिता की सांसें

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मुंबई में फंसा लखनऊ का युवक लाॅकडाउन के चलते नहीं पहुंच पाया घर

लखनऊ। देश में कोरोना का कहर जारी है। पूरे भारत में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू है। जिसकी वजह से लोग बाहर फंसे हुए है और अपने घर नहीं पहुंच पा रहे है। यूपी की राजधानी लखनऊ का युवक भी मुंबई में लॉकडाउन के चलते फंसा हुआ है। जिसके कारण वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। दरअसल, वह कमाने के लिए मुंबई गया था और वहीं फंस गया। इधर उनके पिता की मौत हो गई। वह अपने पिता को न कंधा दे पाया और न ही अंतिम यात्रा में शामिल हो सका। मुंबई कमाने गया युवक लॉकडाउन की वजह पिता की मौत पर घर नहीं आ पाया। उसने वीडियो कॉल पर पिता के अंतिम दर्शन कर विदाई दी। 

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लखनऊ के ग्राम सभा जिंदौर निवासी जमाल (65) का बड़ा बेटा नेहाल मुंबई में एक कारखाने में काम करता है। करीब 6 माह पूर्व वह मुंबई गया था तब से वापस नहीं लौटा। पिता की बीमारी की खबर पाकर घर आने की तैयारी कर ही रहा था। तब तक लॉकडाउन की घोषणा हो गई और वह मुंबई में ही फंस गया। पिता की ज्यादा हालत खराब हुई तो वह बेटे को काफी याद करने लगे। बेटे के इंतजार में पिता कई दिनों से बेचैन थे। बेटे की राह देखते देखते ही गुरुवार को पिता की सांसें थम गई। घर में जमाल की पत्नी और उनके दो छोटे बेटे सवाब और साहब हैं। नेहाल अपने पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सका। http://www.satyodaya.com

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