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कर्मचारियों का जमकर उत्पीड़न कर रहीं हैं केंद्र व राज्य सरकारें: वीपी मिश्र

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इप्सेफ की राष्टीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शुरू

लखनऊ। कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर इंडियन पब्लिक सर्विस इम्पलाइज फेडरेशन (इप्सेफ) की राष्टीय कार्यकारिणी की शनिवार को शुरू हो गयी। दो दिवसीय कार्यकारिणी की बैठक नेहरू युवा केन्द्र में हो रही है जिसमें देश भर के पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यकारिणी बैठक की अध्यक्षता इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र ने की जबकि संचालन राष्ट्रीय महासचिव प्रेम चन्द्र किया। बैठक में शामिल होने आए सभी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए वीपी मिश्र ने कहा कि केन्द्र व राज्यों सरकारों द्वारा कर्मचारियों का उत्पीड़न और शोषण चरम पर पहुंच गया है। 7वें वेतन आयोग का पूरा लाभ राज्य कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है। भत्तों में कटौती की जा रही है और रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति के बजाय संविदा कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। श्री मिश्र ने कहा कि संविदाकर्मचारियों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है, उनका भविष्य भी अंधकारमय है। सरकार को संविदा कर्मचारियों के लिए भी सेवा सुरक्षा व न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना चाहिए।
वीपी मिश्र ने कहा कि इप्सेफ ने राष्ट्रीय वेतन आयोग का गठन, आयकर छूट में वृद्धि आदि मांगों पर केन्द्र सरकार के कैबिनेट सचिव, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रधान सचिव, प्रधानमंत्री एवं वित्त मत्री से कई बार वार्ता की, ज्ञापन दिया लेकिन आज तक कोई निर्णय नहीं हुआ। श्री मिश्र ने कहा कि सरकार की उदासीनता के चलते सभी राज्यों के कर्मचारियों के पास अब संघर्ष करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। सरकारें कर्मचारी संगठनों के साथ बात भी नहीं कर रही हैं इसलिए अब आन्दोलन की रणनीति तय करने के लिए यह बैठक बुलाई गयी है।


राष्ट्रीय महामंत्री प्रेम चन्द्र ने सदन में मांगों का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इप्सेफ को शक्तिसाली बनाने के लिए सभी राज्यों के पदाधिकारी विचार कर निर्णय लें अन्यथा भविष्य में इससे ज्यादा उत्पीड़न झेलना पड़ेगा। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केन्द्र एवं राज्यों की सरकारों ने वर्षों से मिलने वाले 6 भत्ते समाप्त कर दिए, जिससे कर्मचारियों में रोष है। आंगनबाड़ी, सहायिका, ठेका कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। केन्द्र एवं राज्य सरकारें निजीकरण की व्यवस्था लागू कर रही हैं। कई सार्वजनिक उपक्रम एवं सरकारी विभागों को एक में मर्ज करके कर्मचारियों की छटनी की योजना बन रही है। प्रेम चन्द्र ने सभी राज्यों के पदाधिकारियों से आन्दोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए सुझाव मांगे।

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उन्होंने उत्तर प्रदेश के कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा एवं राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिशद उप्र के अध्यक्ष सुरेश रावत, महामंत्री एवं राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्र, कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के महामंत्री शशि कुमार मिश्र, डा केके सचान, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील यादव, मोर्चा के महामंत्री शशि कुमार मिश्र, मनोज कुमार मिश्र, सतीश कुमार पांडे, गिरीश मिश्र आदि ने इप्सेफ के आन्दोलन के सभी कार्यक्रमों में पूरा सहयोग देने का वादा किया। इप्सेफ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (हरियाणा), शिव कुमार परासर, विष्नु भाई पटेल (गुजरात), सुभाश गांगुडे (महाराष्ट्र) एसबी सिंह (मध्य प्रदेश), ओपी शर्मा (छत्तीसगढ), अमरेन्द्र सिंह (बिहार) ने प्रस्ताव का समर्थन किया। अब रविवार को कार्यकारिणी बैठक को अन्य प्रदेशों के पदाधिकारी संबोधित करेंगे और आन्दोलन की रणनीति तय की जाएगी।http://www.satyodaya.com

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अयोध्या फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे मुस्लिम पक्षकार!

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लखनऊ। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है। लेकिन अभी यह मामला यहीं थमने वाला नहीं है। मुस्लिम पक्षकार अब 9 नवंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) डालने की तैयारी में है। इस संबंध में शनिवार को लखनऊ स्थित नदवा काॅलेज में तमाम मुस्लिम पक्षकारों व प्रतिनिधियों ने एक बैठक की। जिसमें सर्वसम्मति से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर सहमति बनी। सूत्रों के मुताबिक बैठक में ही सभी प्रतिनिधियों ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर किए। इस बैठक में अयोध्या केस में मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के वकील रहे जफरयाब जिलानी भी मौजूद रहे।

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अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अगली रणनीति को लेकर 17 नवंबर को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इसी बैठक में मस्जिद के लिए 5 एकड. जमीन को लेकर भी फैसला होना है। नदवा काॅलेज में हुई बैठक में अयोध्या मामले के 4 पक्षकार भी शामिल रहे। हालांकि इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बैठक में मौजूद रहने से इनकार कर दिया है। http://www.satyodaya.com

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उद्योग व्यापार मंडल ने ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनियों के खिलाफ निकाला पैदल मार्च

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लखनऊ।  अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने विदेशी ऑनलाइन कंपनियों के विरोध में अमीनाबाद के नजीराबाद से मौलवीगंज तक पैदल मार्च निकाला। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने कहा कि आज देश में आवश्यकता युवाओं को इन ऑनलाइन कंपनियों की सच्चाई से अवगत कराने की है। जिसके लिए संगठन पूरे देश के सभी स्कूलों व विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को पर्चे वितरित करेंगे। जिस बाजार में जो विद्यालय व स्कूल होगा उस बाजार के व्यापारियों की जिम्मेदारी होगी कि वह हर दूसरे दिन छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन ट्रेडिंग के दुष्प्रभाव वाले पत्रक वितरित करें।

उन्होंने कहा कि बाजारों के आसपास के मोहल्लों व कालोनियों में भी ऑनलाइन कंपनियों के बहिष्कार के पत्रक वितरित किए जाएंगे। देश के हर नागरिक से अपील की जाएगी कि वह राष्ट्रहित में ऑनलाइन कंपनियों का इस्तेमाल बंद करें। नजीराबाद बाजार से सैकड़ों व्यापारियों ने हाथों में 15 दिसंबर व्यापार बंद भारत बंद और ऑनलाइन ट्रेडिंग का बहिष्कार करो कृतियों के साथ ऑनलाइन कंपनियों के खिलाफ विरोध जता रहे थे।

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इस मौके पर संगठन के राष्ट्रीय मंत्री रिपन कंसल, प्रदेश मंत्री हाफिज जलील अहमद सिद्दीकी, अनिल उपाध्यक्ष, प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश छबलानी, युवा प्रदेश मंत्री आकाश गौतम, रितेश गुप्ता, उद्योग व्यापार मंडल लखनऊ के अध्यक्ष आसिम मार्शल, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के कार्यवाहक अध्यक्ष जावेद वेग, उपाध्यक्ष पदम जैन, मुकेश यादव, जितेन कन्नौजिया, संजय सोनकर, महामंत्री कन्हैयालाल मौर्या, पतंजलि सिंह, महिला प्रभारी एकता अग्रवाल, बीनू मिश्रा, अनुज गौतम, साबिर हुसैन, उमेश अग्रवाल, अनूप गुप्ता, फराज खान, शिवम पांडे, रंजन, परवेज आमद, मनीष त्रिवेदी, मनीष अग्रवाल, आर. के मिश्रा, वकील अहमद आदि लोग मौजूद रहे।http://www.satyodaya.com

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मीडिया के सामने आई मंत्री स्वाति सिंह मामले में पीड़िता दीप्ति कनोडिया

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लखनऊ। अंसल प्रकरण में कैंट सीओ को धमकाने के मामले में स्वाति सिंह चौतरफा घिरी नजर आ रही हैं। ये पूरा प्रकरण जिस एफआईआर को लेकर हुआ है अब उसकी मुख्य किरदार सामने आ गया है। जी हां, एफआईआर लिखवाने वाली पीड़िता दीप्ती कनोडिया ने बताया कि उन्होंने अंसल वालों से दो प्लॉट बुक करवाये थे। एक अपने पति के नाम और दूसरा खुद के नाम पर लिया था। उनका आठ साल से रुपया फंसा है, जिसे लेकर वो काफी परेशान चल रही हैं।

पीड़िता ने बताया कि कई बार उनसे मिलने की कोशिश की गई लेकिन कभी सुनवाई नहीं हुई, हर बार बहानेबाजी कर वापस भेज दिया जाता था। इस मामले को लेकर ही हम लोग सीओ कैंट के पास गए थे और अंसल एपीआई सुशांत गोल्फ सिटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

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जब दीप्ति कनोडिया से मंत्री स्वाति सिंह के वायरल ऑडियो के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस पर वो कुछ नहीं कहना चाहेंगी। उन्होंने कहा कि ‘मेरे पास कोई फोन नहीं आया, हम लोग सीधे-सादे लोग हैं। मैं एक हाउस वाइफ हूं। हमें राजनीति की जानकारी नहीं है। सीओ के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती हूं। मैं सिर्फ अपने बारे में कह सकती हूं। मैं बस यही चाहती हूं कि मुझे न्याय मिले।’http://www.satyodaya.com

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